ईमानदार मोची

एक चमड़े का व्यापारी था वह बहुत ही कंजूस था। लोगों को लूट लूट कर अपना जीवन यापन कर रहा था। वह लोगों को बेवकूफ बनाकर उनका पैसा वस्तुएं हड़प कर लेता था उसको अगर कोई उसके साथ बहस करता तो वह उसको बहुत ही नीचा दिखाता था। कोई भी व्यक्ति उसके आगे अपनी जुबान नहीं खोलता  था किसी को अगर वह रुपया उधार देता तो उसके बदले में लोगों से दुगनी कीमत वसूल करता था। किसी ने अगर उस से सौ रुपए मांगे तो वह ₹200 वापस लेता था।

 

एक बार वह एक मोची की दुकान पर गया  मोची के बनाए हुए जूते लोगों को इतने पसंद आते थे कि हर जूते खरीदने वाला ग्राहक मोची की प्रशंसा किए बिना नंदी रहता था।

वाह क्या डिजाइन है। वह चाहता था कि वह ऐसे लोगों को इतने शानदार जूते बनाएं कि सब देखने वाले वाह-वाह करे। चमड़े के व्यापारी नें  जब-उस मोची की प्रशंसा सुनी तो वह मोची कीदुकान पर गया उसने देखा मोची बहुत ही ईमानदारी से अपने जूते बनाने में लगा रहा था उसे पता  ही नहीं चला कि कब चमड़े का व्यापारी उस की दुकान पर आया। साहूकार  न जाने कितनी देर से मोची के इस हुनर को देख रहा था। वह मोची को इतनी लग्न से काम करता देख कर बहुत  ही खुश हुआ। वह भी मोची के बनाए हुए जूतों का कायल हो गया।

 

मोची की पत्नी ने उसे एक मुड़े पर बिठाया। मेरे पति बहुत ही मेहनत से अपने जूते बनाते हैं लोग दूर-दूर से उनके जूते खरीदने आते हैं लेकिन हमारे पास जूते बनाने के लिए इतना अधिक चमड़ा नहीं है। व्यापारी बोला मैं अपनी दुकान पर बाहर से मंगवा कर चमड़ा लाता हूं तुम मेरी दुकान से जितना चमड़ा खरीदना चाहते हो। वह खरीद लेना तुम्हारे बनाए हुए जूतों के डिजाइन मुझे बहुत ही पसंद आए। इसके लिए  मैं तुम  से ही  जूते बनवाना चाहता हूं। तुम बारह जोड़ी जूते बनाकर मुझे दे देना। मोची बोला मेरे पास तो केवल छः जोड़ी जूतों का चमड़ा है। उसकी पत्नी बोली मेरे पति की ईमानदारी से खुश होकर परियां मेरे पति की सहायता करती हैं। मेरे पति अगर एक जोड़ी जूता बनाते हैं तो परियां  उन्हें एक जोड़ी जूते बना कर देती हैं। वह परियां मेरे पति की ईमानदारी से प्रसन्न होकर हमारी मदद करती है।  व्यापारी बोला तब तो मुझे तुम्हें चमड़ा देने की जरूरत नहीं है। तुम छःजोड़ी जूते बनाओगे तो छः जोड़ी जूते परियां बना देगी। इससे तो मुझे फायदा ही है । मैं तुम्हें छः जोड़ी जूतों की ही कीमत दूंगा। मोची की पत्नी बोली क्यों छःजोड़ी जूतों की क्यों।? जूते तो हम आपको 12 देंगे आप 6 जोड़ी जूतों की कीमत क्यों देंगे?  

साहूकार बोला छःजोड़ी जूते  तो मुफ्त के होंगें वह तुम्हारे पति की मेहनत नहीं होगी। वह तो मुफ्त के होंगे। मोची की पत्नी चमड़े के व्यापारी के साथ ज्यादा बहस नहीं कर सकी क्योंकि वह जानती थी अगर किसी दिन उसे जरूरत पड़ी तो उसे मांगने तो व्यापारी के पास ही जाना पड़ेगा। इसलिए वह चुप हो गई। मोची बोला अरे भगवान क्यों बहस करती हो?  यह हमें जो किमत  देंगें वह हमें मंजूर है। यह सुनकर चमड़े का व्यापारी बहुत खुश हुआ।

 

दूसरे दिन मोची ने छःजोड़ी जोड़ी जूते बनाए बेचारा सारी रात मेहनत करके बनाता रहा उसकी इमानदारी को देखकर परियों को उस पर बहुत दया आई उन्होंने सोचा कि हम इस मोची की मदद अवश्य करेंगे। यह लालची व्यापारी तो इस को छःजोड़ी जूतों की कीमत  ही देगा। छः जोड़ी जूते तो मुफ्त में मार कर ले जाएगा। इसके लिए इन्होंने योजना भी तैयार कर ली किस तरह चमड़े के व्यापारी को सबक सिखाया  चमड़े के व्यापारी ने मोची को छः जोड़ी जूते के 15 सौरुपए दिए और ₹1500 के जूते मुफ्त में मार कर के ले गया। परियों को चमड़े के व्यापारी की यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई ।बेचारा सारी रात बैठकर दीपक की रोशनी में जूता बनाता है। उस पर भी उन जूतों के ठीक दाम नहीं दिए।

 

एक दिन जब चमड़े का व्यापारी बाहर चला खरीदने गया हुआ था तो वह जाते-जाते अपनी पत्नी से बोला अगर कोई चमड़ा खरीदने आए तो उसे एक जूते का चमड़ा ₹500 का देना नहीं तो तुम इस चमड़े को मत बेचना। व्यापारी की पत्नी  नें हां  में हामी भर दी। अपना काम करने चली गई।

 

व्यापारी की पत्नी पढ़ी-लिखी नहीं थी। वह अनपढ़ थी। तीनों परियां उस मोची की पत्नी को लेकर उस व्यापारी की पत्नी के पास पहुंची और बोली हमारी सहेली को जूता बनाने के लिए चमड़े की बहुत आवश्यकता है। व्यापारी की पत्नी बोली मैं एक जोड़ी जूते के चमड़े को ₹500 मेंबेचूंगी। मेरे पति कह गए हैं।  तीनों परियां बोली हमें चमड़ा दिखाओ। चमड़े के व्यापारी की पत्नी चमड़ा ले  कर आ गई।  काफी देर तक उलट-पुलट कर देखने के बाद उन्होंने कहा कि यह लो 2000 रुपए और हमें 4 जोड़ी जूतों का चमड़ा दे दो। परियों ने उसे ₹1000 दिए। हजार रुपए का नोट दिखाकर व्यापारी की पत्नी को कहा यह लो ₹2000 चमड़े के व्यापारी की पत्नी ने ₹2000 का नोट तो कभी देखा नहीं हुआ था। उसने ₹1000 का नोट रख लिया। तीनों परियों ने चमड़े के व्यापारी की पत्नी से कहा कहीं तुम्हारे पति ने इस मोची की पत्नी से कह दिया कि इसने झूठ-मूठ में ही मेरी पत्नी से रुपए हड़प कर लिए है क्योंकि तुम्हारे पति बहुत ही कंजूस है। हमें उन पर भरोसा नहीं इसलिए तुम्हें इस कागज पर अपने हस्ताक्षर करने होंगे कि मैंने चमड़े के जूतों के ₹2000 व्यापारी की पत्नी से प्राप्त किए।

 

तीनों परियों ने उससे एक कागज पर चमड़े के व्यापारी की पत्नी से हस्ताक्षर करवा लिए। व्यापारी की पत्नी ने अपना अंगूठा लगा दिया उसने चार जोड़ी जूतों का चमड़ा मोची की पत्नी को दे दिया था। वह भी केवल हजार रुपए में।  मोची की पत्नी को जूतों की  असली कीमत वसूल हो चुकी थी। जो व्यापारी ने मुझ से ही से चुरा लिए थे। जब चमड़े का व्यापारी खूब सारा चमड़ा लेकर घर आया तो वह अपनी पत्नी से बोला कि आज क्या कोई ग्राहक चमड़ा खरीदने आया?

 

चमड़े के व्यापारी को उसकी पत्नी ने बताया कि आज मुझ से मोची की पत्नी चार जोड़ी जूतों के चमड़े को खरीदने मेरी दुकान पर आई थी। उन्होंने मुझे इस जूते इन जूतों के ₹2000 दिए। उस चमड़े के व्यापारी ने अपनी पत्नी को कहा कि दिखाओ। वह हजार  का नोट लेकर आई अपने पति को देती हुए बोली कि उसने उसे इसके बदले 2000 भी दिए है। चमड़े का व्यापारी अपनी पत्नी पर आग बबूला होते हुए बोला यह ₹2000 थोड़े हैं यह तो हजार रुपए हैं। उसने तुम्हें बेवकूफ बनाया मैं उसे नहीं छोड़ूंगा। वह सीधे मोची की दुकान पर गया और और मोची की पत्नी को बुरा भला कहने लगा। उसी की पत्नी ने सोचा चुप रहने से काम नहीं चलेगा यह भी तो मेरे पति को यूंही जूतों की कम कीमत देता है। अब मैं भी चुप नहीं रहूंगी।

मोची की पत्नी ने चमड़े के व्यापारी को कहा कि मैंने तो तुम्हारी पत्नी को ₹2000 दिए थे। मुझे नहीं पता चमड़े का व्यापारी बोला। अब तो तुम्हें पंचायत में चलना ही पड़ेगा। पंचायत में ही इसका फैसला होगा। प्रधान के पास जाकर जब व्यापारी ने गांव के प्रधान जी से कहा मेरी पत्नी ने इस मोची को चार जोड़ी जूता बनाने के लिए चमड़ा दिया मगर इसकी पत्नी ने केवल मेरी पत्नी को इसके लिए हजार हजार कम दिए। मोची की पत्नी ने कहा नहीं पंचायत प्रधान जी यह झूठ बोल रहे हैं। जब मैंने चार जोड़ी जूतों का चमड़ा खरीदा तब चमड़े के व्यापारी तो दुकान पर नहीं थे। मेरे साथ मेरी तीन सहेलियां भी व्यापारी की दुकान पर मेरे साथ आई थी। विश्वास ना हो तो इन तीनों से पूछ लो। मैंने इनकी पत्नी को ₹2000 ही दिए थे। पंचायत के प्रधान जी ने उन तीनों को बुलाया और उनसे पूछा क्या इस मोची की पत्नी ने इस व्यापारी की पत्नी को ₹2000 दिए थे? वे तीनों बोली कि हां महाराज। चमड़े का व्यापारी बोला पंच जी यह झूठ बोल रही है। मैं आपको नोट दिखा सकता हूं। वह तीनों बोली कि तुमने भी तो इस मोची को छःजोड़ी जूतों की कीमत ही दी थी छः जोड़ी जूते तो मुफ्त में ले लिए थे। चमड़े का व्यापारी बोला कि तुम मुझे सबूत बताओ। मैंने तो तुम्हें बारह जोड़ी जूतों की कीमत दी थी। मोचीकी पत्नी ने व्यापारी की सारी कहानी सुनाई। उसने कैसे मेरे पति से 12 जोड़ी जूते लिए और केवल 6 जोड़ी जूतों की कीमत दी। मेरे पास तो सबूत भी है। उसने व्यापारी की पत्नी के हस्ताक्षर दिखा दिए उसने कबूल किया था कि मैंने इन चरणों के ₹2000 प्राप्त किए अब तो चमड़े के व्यापारी अपने किए पर बड़ा शर्मिंदा हुआ। पंचों ने व्यापारी को कहा कि न्याय मोची के पक्ष में है। व्यापारी ने अपनी भूल को स्वीकार किया और अपना सा मुंह लेकर वहां से चला गया।

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