एक भूल का पश्चाताप

पहाड़ की तलहटी पर एक छोटा सा गांव था वहां पर एक औरत रहती थी उसका नाम था पारो। उसका छोटा सा बेटा था किशन। पारो और उसका पति अपने बच्चे किशन के साथ एक छोटे से गांव में रहते थे। उनके पास एक छोटा सा खेत था जिसमें दिन रात मेहनत करके वह अपने बच्चे का पेट भर रहे थे। एक दिन किशन अपनी मां के साथ मेला देख कर वापस आ रहा था उसे बड़ी जोर की प्यास लगी रास्ते में एक घर था वहां पर उन्होंने दरवाजा खटखटाया और कहा कृपया मेरे बेटे को पानी पिला दो। गांव की गृहणि ने एक महिला को देखा। जो अपने बच्चे को साथ लिए आई और पानी के लिए गुहार लगाई। घर की मालकिन बोली ठहरो अभी मैं अपने बच्चे को दूध पिला रही हूं। वह अपने बच्चे को दूध पिला रही थी। उसने दूध का गिलास अपने बच्चे को दे दिया और कहा बेटा तुम बैठ कर दूध पिओ। उसका बेटा चारपाई पर बैठ गया और दूध पीने लगा। गांव की औरत एक छोटे से गिलास में दूध लेकर आई और बोली तुम इसे अपने बच्चे को दे दो। उसने वह दूध का गिलास उस बच्चे को दे दिया। किशन एक ही घूंट में वह दूध पी गया उसे दूध बहुत ही स्वाद लगा। किशन की मां ने कहा भगवान तुम्हारा भला करे।
अपने बेटे को लेकर घर आ गई लेकिन किशन ने अपनी मां को कहा मां हमारे घर में दूध क्यों नहीं है? मुझे दूध बहुत अच्छा लगता है। वह बोली बेटा दूध पीने के लिए गाय होनी चाहिए। किशन बोला गाय ले आओ। बेटा हम गरीब आदमी हैं हम गाय नहीं ले सकते। गाय के लिए तो ईश्वर की पूजा करनी पड़ती है। ईश्वर के पैर पकड़ने पड़ते हैं। तब कहीं जाकर गाय मिलती है। इस बात को बहुत दिन व्यतीत हो गये। किशन छोटा सा नन्ना सा मासूम तीन साल का था। उसे क्या पता ईश्वर क्या होता है?
5 साल का हो चुका था स्कूल जाने लग गया था। वह सच में ईश्वर को ढूंढ कर ही छोड़ेगा। मेरे साथ स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के घर में गौवें हुए हैं। सब कुछ उनके घर में ही दे दिया हमारे घर में तो कुछ भी नहीं है। मैं दूध पीने के लिए भी तरस गया। मेरी मां मुझे दूध तो क्या सूखी रोटी खिला खिला कर स्कूल भेजती है। कभी-कभी तो नमक के साथ गुजारा करना पड़ता है। किशन नें स्कूल से आकर घर जाकर ईश्वर को ढूंढना शुरू कर दिया। एक साल बीत चुका था उसे ईश्वर नहीं मिला। वह सोचनें लगा अब तो वह छुट्टी वाले दिन ईश्वर को खोजने जाएगा।

एक दिन इतवार की छुट्टी थी वह घर से चला गया मां ने पूछा तुम कहां जा रहे हो।? वह बोला मैं ईश्वर को ढूंढने जा रहा हूं ताकि वह जल्दी से मुझे गाय दे दे। मैं भी गाय का ताजा दूध पी सकूंगा। वह उसे ना करने जा ही रही थी परंतु किशन तो भाग चुका था। चलते-चलते उसे शाम हो चुकी थी। उसे ईश्वर का घर नहीं मिला। वह काफी चल चुका था। अचानक किसी व्यक्ति ने पूछा क्या यह ईश्वर जी का घर है? उस व्यक्ति ने कहा हमें उनके घर कुछ संदेश देना है। यह बात किशन नें भी सुनी उसने सोचा जब वह आदमी अपनी बात करके आएगा तभी मैं अंदर जाऊंगा। जैसे ही वह अंदर गया तब किशन मन ही मन बड़ा खुश हुआ। आज ईश्वर के पैर पकड़कर मैं उनसे अपने लिए गाय मांग लूंगा। जैसे ही वह व्यक्ति बाहर आया किशन जल्दी से दौड़ करअंदर चला गया। अंदर जाकर उसने घर के नौकर से कहा। मैं ईश्वर जी से मिलना चाहता हूं। आज मुझे ढूंढते-ढूंढते एक साल हो चुका है। आज कहीं जा कर मुझे ईश्वर मिले। तभी ईश्वर आकर बोले बेटा मुझे बताओ क्या काम है? ईश्वर जी जैसे ही आए किशन नें उनके पैर पकड़ लिए। आपको पता नहीं कहां कहां ढूंढा? कृपया आप अब मत जाना। पहले मेरी बात सुन लो आपने तो किसी को पांच पांच गायें दी हैं। किसी के पास एक गाय भी नहीं है। मेरी मां ने मुझे कहा था कि अगर तुमने दूध पीना है तो ईश्वर के पैर पकड़ लेना। उनकी पूजा करना मेरे पास पूजा करने के लिए धूप नहीं है। मेरी जेब में एक टॉफी है। यह खाइए भगवान जी। आपको मेरे हाथ से टॉफी तो खानी ही पड़ेगी। उनकी समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि यह बच्चा क्या कह रहा है? तभी उसकी पत्नी ने समझाया कि इसकी मां ने इसी विश्वास दिलाया होगा कि ईश्वर यानी भगवान की पूजा करनी पड़ती है। आप को यह बच्चा भगवान समझ रहा है। इस बच्चे को क्या पता ईश्वर क्या होता है।? वह तो आपको ही ईश्वर समझता है।

आज तो आपने अपने बेटे का जन्मदिन मनाया है। आपके घर में तो दस दस गौंवें हैं। हम ग्वाला जाति के हैं अगर तुम इस बच्चे को एक गाय दे दोगे तब हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। उस नन्हें बच्चे की बात सुनकर उस नन्हे से बालक को कहा बेटा हम तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी करेंगे। तुम हर रोज गाय का दूध पीना। मैं तुम्हें आज ही एक गाय देता हूं। उसने अपने नौकर के हाथ किशन के घर गाय भिजवा दी। किशन की मां ने रो-रो कर अपना हाल बुरा कर लिया था। मेरा बेटा कहां चला गया। तभी किशन को वापिस आया देखकर किशन की मां बहुत ही खुश हुई किशन के गले लिपट कर बोली बेटा तुम कंहा चले गए थे? तुम क्यों चले गए थे? वह बोला मुझे आज ईश्वर मिले। उसने कहा ईश्वर के आदमी यहां गाय को छोड़कर चले गये किशन की मां भी हैरान थी यह चमत्कार किसी भगवान से कम नहीं था। वह अपने बेटे को गाय का दूध हर रोज पीनें को देने लगी।वह हर रोज दूध पीता और स्कूल जाता। किशन जो कुछ खाता वह गाय को पहले देता गाय को बहुत ही प्यार करता था। गाय को घास खिलाना चारा खिलाना यह काम किशन की मां करती थी। वह गाय का दूध भी घरों में बेचने लगी थी। एक बार उसकी गाय ने दूध कम देना शुरु कर दिया।

किशन की मां ने सोचा वह अपने बेटे को दूध नहीं देगी। अपने बेटे को कह देगी की गाय ने दूध नहीं दिया। उस तरह से उसने किशन को कह दिया कि गाय अब दूध नहीं देती है। वह चुपके-चुपके जो दूध मिलता उसे वह बाजार में बेच देती थी। स्कूल में किशन पढ़ने जाने लगा था। स्कूल में जो कुछ भी सीखता वह अपने मन में उतार लेता था। उसकी मैडम ने उसे समझाया बेटा जो झूठ बोलते हैं उन्हें ईश्वर माफ नहीं करते। उसने कसम खाई कि वह कभी झूठ नहीं बोलेगा। क्योंकि ईश्वर ने ही तो उसे गाय दी है। जिसका दूध पीकर वह रोज स्कूल जाता है। बेचारी गाय आजकल दूध भी नहीं देती।
जब वह घर आया तो उसने देखा एक आदमी उसके घर पर दूध लेने आए थे। उन्होंने रुपए मां के हाथ में पकड़ाए और कहा आज ₹50 का आपका दूध बिका। किशन देख रहा था जब अंकल चले गए तो उसने अपनी मां को पूछा मां क्या आज भी गाय ने दूध नहीं दिया? उसकी मां बोली बेटा आजकल यह गाय दूध ही नहीं देती है। छोटे से बच्चे ने सुना वह हैरान रह गया उसकी मां झूठ बोल रही है पर पता नहीं क्यों मेरी मां झूठ क्यों बोल रही है?
उसने अपनी आंखों से दूसरे दिन भी दूध ले जाते देखा उसने अपनी मां से पूछा। अंकल क्यों आए थे।? वह बोली तुम्हारे पिता से मिलने आए थे। किशन को यह बात बहुत ही बुरी लगी। मेरी मां गाय का दूध बाजार में बेच दी है। ईश्वर से मैंने गाय इसलिए मांगी थी ताकि मुझे दूध पीने के लिए मिले परंतु मेरी मां को दूध प्राप्त कर लालच आ गया है। मैं इस गाय को ईश्वर को वापस लौटा दूंगा। इतवार का दिन था। उसने गाय को लिया और अपने एक अंकल की सहायता से उस गाय को लेकर ईश्वर के घर पहुंचा। वह तो वही बच्चा है जो मुझसे गाय लेकर गया था। उसने पूछा बेटा तुम क्यों आए हो।? वह बोला ईश्वर जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इतने दिनों तक आपने मुझे गाय का दूध पीने को दिया। मैं आपका हृदय से अभिनंदन करता हूं। और मुझे इस गाय की आवश्यकता नहीं है मेरी मां को अब लालच आ गया है। मैंने यह अपनी आंखों से देखा है। वह गाय का दूध मुझे पीने को नहीं देती। गाय का दूध बाजार में बेच देती है। इसलिए अगर मैं आपको वापस करना चाहता हूं ताकि मेरी मां लालच ना करें। जब उनके पास गाय नहीं होगी तो वह मेहनत से कमाकर खाएगी इसलिए आपसे मेरी विनती है कि आप हमारी गाय वापस ले लो।

बच्चे की इमानदारी सुनकर ईश्वर हैरान हो गए वह सोचनें लगे ऐसा बेटा सबको दे। यह बच्चा बहुत ही होनहार है। कुछ दिनों बाद ईश्वर किशन के घर आकर उनसे मिलने आए। आपके बेटे ने मुझे आपकी सारी बात बताई कि आप गाय का दूध बाहर बेचती हो और अपने बेटे को कहते हो कि गाय ने दूध नहीं दिया। किशन की मां को अपनी गलती का पछतावा हुआ। मेरे बेटे ने मुझ पर विश्वास कर ईश्वर को ढूंढा मगर मैंने तो उसके विश्वास को ठेस पहुंचाई। मुझे सारी सच्चाई का पता चल चुका है वह बोली मेरा बेटा बहुत ही खुद्दार है अब मैं भी समझ चुकी हूं मैं खूब मेहनत करके अपने बच्चे के लिए गाय लेकर आऊंगी। ईश्वर ने कहा कि तुम एक शर्त पर गाय रख सकती हो आगे से तुम कभी भी झूठ नहीं बोलोगी। किशन की मां नें अपनी भूल के लिए ईश्वर जी से क्षमा मांगी। वह बोली वह तो आपको भगवान समझता है। किशन आकर बोला यदि आपको ईश्वर जी माफ कर दे तो ठीक है मैं भी आपको माफ कर दूंगा। उसने अपने बेटे को बुलाकर कहा बेटा मुझे अपनी भूल के लिए क्षमा कर दो। ईश्वर जी ने कहा चलो आज मैं तुम्हारी मां को माफ करता हूं। उन्होंने गाय किशन की मां को वापस कर दी।

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