काली और भूरी बिल्ली

एक छोटी सी बस्ती थी। उस बस्ती के बाहर काले और भूरे रंग की दो बिल्लियां रहती थी। जब भी मिलती आपस में लड़ती। जब काली बिल्ली रोटी प्राप्त करती तो भूरी बिल्ली को उससे इर्ष्या होती। जिस दिन काली बिल्ली को रोटी मिलती उस दिन भूरी को ईर्ष्या होती। दोनों एक दूसरे से रोटी छुड़ाने की कोशिश करती। इस कम ज्यादा के चक्कर में दोनों लड पड़ती। कुछ दिनों बाद एक हो जाती
यही सिलसिला काफी दिनों तक चल रहा था। वह एक दूसरे को काफी दिनों तक दिखाई नहीं दी। कुछ दिनों बाद काली बिल्ली और भूरी बिल्ली दोनों एक जगह मिली। किसी सेठ के यहां से उन्हें पूरी खाने को मिली थी। दोनों एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कुरा दी। दोनों साथ-साथ चल रही थी। सामने से उन्हें एक गाड़ी आती दिखाई।

काली बिल्ली एक और हो गई। भूरी बिल्ली को देख कर एक छोटा सा बच्चा चिल्लाया। मां मां इसे अपने घर ले चलो। उस गाड़ी के मालिक ने उस भूरी बिल्ली को उठाया और गाड़ी में डाल दिया। भूरी बिल्ली म्याऊं म्याऊं करती रही। काली बिल्ली उस गाड़ी के पीछे दौड़ती रही। वह भी उनके साथ गाड़ी की छत पर बैठकर काफी दूर तक आ गई। एक जगह जाकर उन लोगों ने गाड़ी को रोका।

वे लोग होटल में चाय पीने के लिए रूके। अपनी सखी को गाड़ी में देख कर पुकारती रही। अंदर से भूरी बिल्ली बोली मेरी बहन मुझे बाहर निकालो। वे लोग मुझे अपने साथ ले जा रहे हैं। मैं अब तुम्हें कभी नहीं मिलूंगी। मैं तुमसे लड़ती थी झगड़ा करती थी। मेरे साथ अब लड़ाई कौन करेगा।? काली बिल्ली बोली खिड़की बंद है। मैं तुझे कैसे बाहर निकालूं।? भूरी बिल्ली बोली तू भी मेरे साथ चल। तू मेरे साथ वहीं पर मेरे आस-पास रहना जिससे मुझे तुम्हारी कमी महसूस ना हो।

गाड़ी के मालिक आकर गाड़ी में बैठ गए।वह जल्दी से उतर कर भाग गई। काली बिल्ली उन्हें जाते हुए देखती रही। सहेली के साथ आज सदा सदा के लिए उसका साथ छूट गया था। आज उसने जाना कि अपनों के बिछड़ने का गम क्या होता है? वह रोटी लेकर आती तो भी उसका रोटी खाने को मन नहीं करता था।

एक दिन उसने देखा कि एक गाड़ी में एक दम्पति बैठे थे। वह बिना आवाज किए ही उनकी छत पर जा बैठी। जैसे ही वह लोग अपने घर पहुंचे काली बिल्ली चुपके से छत से कूद कर भाग गई। वह तो अपनी सहेली को खोजने दूसरे शहर आई थी। एक दिन उसने उस औरत और उस बच्चे को पहचान लिया जिसकी कार में वह भूरी बिल्ली शहर की ओर आई थी। वह गेराज में गाड़ी ठीक करवा रहे थे। गाड़ी जब ठीक हुई तो वह बिल्ली उनकी गाड़ी की छत पर बैठ गई। काली बिल्ली ने वह घर देख लिया था। घर की मालकिन भी काम पर जाती थी। बच्चा भी स्कूल जाता था।

वह एक दिन घर की बाल्कनी में आ कर म्यांयू म्यांयू करने लगी।गैलरी का दरवाजा खुला देख कर वह बाल्कनी के पिछे छिप कर के भूरी बिल्ली के पास गई और उससे लिफ्ट लिफ्ट कर रोने लगी।

मानों वर्षों बाद उसकी सहेली उससे मिली हो उसने अपनी सहेली को स्टोर रूम में घुसा दिया। उस स्टोर रुम में कोई नहीं जाता था। जब शाम हुई तो वह बिल्ली स्टोर रुम में अपनी सहेली के पास आकर बोली। बहन मैं तो यहां आकर बड़ी दुःखी हूं।

यह इंसान इतना भी नहीं समझते हम इंसानों के घरों में बंद नहीं रह सकते। जिस प्रकार इंसान का अपना परिवार होता है उसके सभी रिश्तेदार भाई बहन मित्र होते हैं। हमारी जाति में हमारा भी परिवार होता है। यह इंसान अपनी खुशी के लिए हम को पकड़कर अपने घर में भांति भांति के तरह तरह के पकवान मांस आदि देखकर हमें खुश करने की कोशिश करते हैं। इंसान यह क्यूं नहीं समझते कि हमें भी अपनी जाति अपनी परिवार वाले लोगों के साथ रहकर ही खुशी मिलती है। इन लोगों ने मुझे पकड़ कर अपने घर में रख लिया। ऐसे तो यह सारे घर के लोग अच्छे हैं। परंतु इन्हें हमारे दर्द का क्या पता है ? इंसान का जब कोई परिवार वाला दुर्घटना ग्रस्त हो जाता है या अपने परिवार से बिछड़ जाता है तब इस इंसान को कितना दुख होता है? यह लोग नहीं जानते। हमें भी तो अपने परिवार वालों से बिछुड़ कर चाहें कितनी भी बढ़िया-बढ़िया चीजें खाने को दीं जाती हैं वह सब तुच्छ है।आज बहन तुम लौटी हो तो मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा परिवार मुझे मिल गया है। थोड़े दिन तो मुझे यहां अच्छा लगा। तुम मुझे जल्दी यहां से बाहर निकालो। मेरा दम इस घर में रह कर घुटता है। मुझे जल्दी से यहां से बाहर निकालो। भूरी बिल्ली बस्ती में रहने लगी। उसके आसपास ही रह कर कभी कभार वह उनसे मिलने चली जाती थी।

एक दिन घर के सब लोग बाहर घूमने गए हुए।थे। भूरी बिल्ली को पता लग गया था। जैसे ही सब के सब बाहर निकले वह चुपके से स्टोर रूम में घुस गई और अपनी सहेली भूरी बिल्ली के पास जाकर बोली। आज तो हम दोनों यहां से बाहर निकले का प्रयत्न करेंगे। वह स्टोर रूम में घुस गई। घर के मालिक लोग जैसे ही ताला लगा कर चले गये। काली बिल्ली और भूरी बिल्ली दोनो गले लगकर मिली।

काफी समय हो गया था। बाहर तो ताला लगा था। । वह बाहर निकलनें की योजना ही बना रही थी कि उन्हें घर में आहट सुनाई दी। चोर उनके घर में घुस गए थे। वे ताला तोड़कर जैसे ही चोरी करने के लिए सेफ खोलनें लगे गोरी और काली बिल्ली दोनों ने मिल कर उन चोरों को काट काट कर बेहोश कर दिया। शोर सुनकर साथवाले लोग आ गए थे। उन्होंने देखा कमरे का सामान बिखरा हुआ था। उन्हें देखकर काली बिल्ली छिप गई थी। उन्होंने भूरी बिल्ली की प्रशंसा की। साथ वाले घर की मालकिन बोली इस चोर को पुलिस के हवाले कर देंगे। वह चोर वही बेहोश पड़ा था। साथ वाले घर वाली आंटी ताला लगाने और फोन करने बाहर जाने लगी।

वह दोनों बिल्लियां मौका देख कर भाग गई। आज भी अपने आप को आजाद महसूस कर रही थी। दोनों बिल्लियाँ अपनी बस्ती में लौट आई थी। वह समझ गई थी चाहे हम कितना भी लड़ाई झगड़ा करें मगर हम प्यार तो एक दूसरे के साथ ही करती हैं। हम एक दूसरे के बिना नहीं रह सकती। आज बाहर निकल कर महसूस हुआ कि आजादी का अपना ही महत्व होता है।

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