कोई अपना सा

गाजियाबाद जाने वाली ट्रेन 2 घंटे लेट थी प्लेटफार्म पर लोगों की बहुत ही भीड़ थी। यात्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक इधर उधर ट्रेन पकड़ने के लिए दौड़ रहे थे। एक बच्चा दौड़ता दौड़ता आया बोला आंटी अंकल मुझे बचा लो। उस बच्चे की दर्द भरी पुकार सुनकर आकाश की पत्नी ने उनकी तरफ देख कर कहा यह बच्चा मुश्किल में लगता है। हमें इसकी मदद करनी चाहिए। वह बोले तुम इतनी दयावान हो तुम से दूसरों का दर्द नहीं देखा जाता। इस बच्चे को बिलखता देख कर तुम से रहा नहीं गया। चलो अंकिता और साहिल को संभालो। मैं देखता हूं। वह दौड़ा दौड़ा उस बच्चे के पास जाकर बोला। वह लोग तुम्हारा पीछा क्यों कर रहे हैं? वह बोला मैं गाजियाबाद का रहने वाला हूं। मेरी मां का देहांत 2 महीने पहले हो गया। सौतेली मां मुझे इन दरिंदों के हवाले करना चाहती है। मैं बड़ी मुश्किल से जान बचा कर आया हूं। आंटी मैं आपके घर पर रह जाऊं। मेरी मां मुझे बहुत प्यार करती थी। उनके मर जाने के बाद मेरे पिता नें दूसरी शादी कर ली। मेरे सौतेली मां ने एक दिन मुझे इन गुंडों को बेचने का फैसला कर लिया। मैं वहां से जान बचा कर भाग आया।
अंकिता की मां अपराजिता ने अपने पति आकाश को कहा हम भी गाजियाबाद जा रहे हैं। वहां चल कर पता करते हैं कि यह बच्चा ठीक कह रहा है या गलत । गाजियाबाद जाने वाली ट्रेन प्लेटफार्म पर आ चुकी थी। अपराजिता बोली हम इस बच्चे को साथ ले चलते हैं। इन दरिंदे लोगों के हाथ में हम इस मासूम को नहीं छोड़ सकते। हो सकता है यह बच्चा जो कह रहा होगा वह ठीक हो।

उसने उस बच्चे को भी ट्रेन में बिठा दिया। गाजियाबाद स्टेशन आने ही वाला था। गाजियाबाद के पास इस बच्चे का घर था। आकाश उस बच्चे के घर बताए हुए पते पर पहुंचा। उसने उसके घर जाकर पता किया आसपास के लोगों से पता चला कि वह बच्चा ठीक ही कहता है। इस बच्चे का नाम छोटू है। इसकी मां को मरे हुए 2 महीने भी नहीं हुए इसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। हमने इस बच्चे को बेचनें की बातें करते हुए लोगों को सुना था। आकाश जब वापस आए तो बोला यह बच्चा ठीक ही कहता है। यह गुंडों से जान बचाकर भाग रहा था। अपराजिता बोली ठीक है हम इस बच्चे को अपने साथ ले चलते हैं। यह हमारे घर में ही रहेगा। कोई बात नहीं यह बच्चा हमारे घर में सुरक्षित रहेगा। हम इसको अपने घर पर ही रखेंगे। यह घर के छोटे-मोटे काम कर दिया करेगा। पास के स्कूल में इसे भेज देंगे। कहीं इस बच्चे को फिर से कहीं गुंडे पकड़ कर ना ले जाए। उन्होंने पास के स्कूल में उसे भी डाल दिया। वह छोटा सा छोटू उनके घर पर ही रहने लग गया। छोटे-मोटे काम अपराजिता ने उसे सिखा दिए थे। अपराजिता जब घर का सारा काम कर चुकती तो छोटू भी अपराजिता के पास आ जाता। वह उसे बहुत प्यार करती उसके सिर पर हाथ फेरती तो उसे मालूम होता कि जैसे उसकी मां उसके सिर को सहला रही हो। वह भीअंकिता और साहिल को बहुत ही प्यार करता था।
उस को उनके घर में रहते-रहते छः साल हो चुके थे। वह अठारह वर्ष का हो चुका था। उसनें दोनों बच्चों के टिफिन पैक कर लिए थे। वह घर के सारे काम करने में व्यस्त हो गया था।आकाश भी उतना ही प्यार करते जितना कि वह अपने दोनों बच्चों को प्यार करते थे। जब कभी भी बिमार पड़ता तो उसकी इस तरह ही देखभाल करते जैसे कि वह उनका अपना ही बच्चा हो।

गर्मियों की छुट्टियां आने वाली थी। इस बार अपराजिता के देवर देवरानी उसके बच्चे उनके घर आए थे। वह काफी दिन की छुट्टी में उनके पास छुट्टियां बिताने उनके घर आए थे। उनके साथ उनका छोटा बच्चा भी था।
सविता ने कहा कि मैं अपने मायके जाना चाहती हूं। उसके मायका का रास्ता केवल वहां से दो घंटे का ही था। अपराजिता अपनी मां से मिलने चली गई। अंकिताऔर साहिल को वहीं छोड़ गई। वह दो दिनों के लिए गई थी। उसके भाई की शादी थी। बच्चों को स्कूल से छुट्टी नहीं थी इसलिए वह दोनों आ नहीं सके। छोटू उन्हें छोड़ने चला गया था। अपराजिता के जानें के बाद घर सूना सूना लग रहा था।
छोटू अपनी अपनी मालकिन के बिना उदास था। घर के सारे काम करने के बाद उसे भी बड़े जोर की भूख लग रही थी। घर के सारे सदस्य एक मेज पर बैठकर खाना खाने की तैयारी कर रहे थे। जल्दी से खाना बना कर उनके पास खाना खाने बैठ ग्ए थे। देवरानी ने छोटू को डांटते हुए कहा कि तुम हमारे साथ नहीं बैठ सकते। उठो,! जब सारे लोग खाना खा लेंगे तभी तुम्हें खाना मिलेगा। घर के सारे सदस्य खाना खाने लग गए थे। अंकिता और साहिल को भी बहुत ही बुरा महसूस हो रहा था। छोटू उठा और खाना बनाने लग गया। वह बहुत ही उदास था वह फूट फूट कर रोना चाहता था। उसको कोई प्यार करने वाला नहीं था। उसके सामने उसकी मां का चेहरा आ गया। सबसे पहले उसके मुंह में उसके मुंह में रोटी का टुकड़ा डालती थी तभी वह खाना खाती थी। इस घर में कभी उसे अपनी मां की कमी महसूस नहीं हुई। आकाश अपनी पत्नी को लेने उनके मायके गये। छोटू अपने मन कडा करके काम करने में जुट गया।
रात के 12:30 हो चुके थे। घर के सारे काम निपटा कर वह अपना खाना खाने लगा। अपराजिता की देवरानी कहनें लगी खाना गर्म करने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसे ही खा ले। यह घर नहीं है। सारा खाना ठंडा था। उसकी मां भी तो उसे गर्म-गर्म खाना परोसती थी। अपराजिता खाती थी और छोटू को भी खाना डालती थी। आज तो उसे खाने को ठंडा ही खाना मिला था। आकाश ने अपने भाई को फोन करके कहा कि रात बहुत हो चुकी है हमें जल्दी गाड़ी भिजवा दे। उसके भाई ने उनके लिए दूसरी गाड़ी का इंतजाम करवा दिया था। गाड़ी पहुंच चुकी थी।

आकाश और अपराजिता गाड़ी में बैठ कर अपनें घर की ओर रवाना हुए। उनका भाई अपने भाई के साथ नफरत करता था। उसने जो गाड़ी भिजवाई उसके ब्रेक फेल करवा दिए थे।गाड़ी लूडकते लूडकते एक गहरी खाई में गिर चुकी थी। आकाश और अपराजिता दोनों की हालत गंभीर थी। जब आधी से ज्यादा रात हो गई जब वे दोंनों घर नहीं पहुंचे छोटू को चिंता हुई की मालिक मालकिन अभी तक घर नहीं पहुंचे। वह सोचनें लगा आज से पहले तो कभी ऐसा नहीं हुआ। दोनों ठीक टाइम पर घर पहुंच जाते थे। उसकी आंखों से नींद कोसों दूर थी। वह सोचनें लगा मेरी मालिक मालकिन कहां फंस गए। रात को एक बजे के करीब वह बाहर बालकनी में पानी पीने आया तो उसने आवाज सुनी। आवाज दूसरे कमरे से आ रही थी। अंदर से हंसने की आवाज़ आ रही थी। आकाश के मुंहबोले भाई कह रहे थे कि हमारा मकसद कामयाब हो गया। दोनों मारे गए होंगे उन दोनों को कोई नहीं बचा सकता। अच्छा है हम सारी जमीन जायदाद के मालिक बन जाएंगे। हमारे पास घर के सारे दस्तावेज हैं। हमने सारे घर के कागज अपने नाम पहले ही करवा दिए थे। आकाश के भाई कह रहे थे कि मैंने घर के कागजात मेज पर रखे हैं सुबह उन कागजों की फोटोकॉपी बना लेना। जिससे हमें डर था वह तो मर चुका है। एक नौकर है उसका क्या?। वह तो हमारे पांव की जूती है। उसे तो हम इतना तंग करेंगे कि वह खुद ही घर छोड़कर चला जाएगा। बच्चे हैं, उनको थोड़े दिन प्यार से रखेंगे फिर उनसे नौकरों वाले काम करवाएंगे। मैं कब से इनकी जमीन ज्यादाद पर नजरें गाए था। आज कहीं जा कर मेरी इच्छा पूरी हुई।

छोटू नें जब सुना हैरान हो गया। उसे सारी बातें समझ में आ गई थी। उसके मालिक ने उसे इतना ट्रेंड कर रखा था कि उसे सारा माजरा समझ में आ गया। चुपके से उठा और पिछले दरवाजे से बाहर जाने को मुडा उसनें जल्दी से वह घर के दस्तावेज ढूंढने का प्रयत्न किया। जल्दी से उसे सारे जमीन के दस्तावेज मिल गए। जल्दी से एक पुलिस इंस्पेक्टर के घर जा कर उन्हें सारी बातें बताई। पुलिस इन्स्पेक्टर आकाश के दोस्त थे। उसने सारी की सारी कहानी उन्हें सुनाई। उसने बताया कि मुझे लगता है कि आकाश के मुंहबोले भाई ने शायद अपने भाई का एक्सीडेंट करवा दिया है। प्लीज बताइए। मैं क्या करुं? पुलिस इन्सपैक्टर नें उसे वैसे ही नकली वसीयत बनाकर छोटू को दे दी। उसने उस दस्तावेज में लिखवा दिया कि अगर हमें कुछ हो जाता है तो सारी ज्यादा वसीहत के मालिक हमारे भैया भाभी होंगे। जब तक बच्चे 20 साल के नहीं होंगें उनकी देखभाल उनके चाचा चाची करेंगे। अगर बच्चों को 20 साल से पहले कुछ हो जाता है तो सारी की सारी सम्पति किसी सरकारी ट्रस्ट को दे दी जाएगी। रात को आकर छोटू ने वह दस्तावेज अलमारी पर रख दिए। उसनें उन्हें भनक भी नहीं लगने दी।

अपने मालिक मालकिन को ढूंढने पहुंच गया पुलिस स्पेक्टर को उसने कार्यवाही करने को कह दिया था। उसने उन्हें बता दिया था कि अगर वह जिंदा हो तो उनके भैया भाभी को मत बताना कि वह जिंदा है। वह उन्हें फिर से मारनें की कोशिश कर सकतें हैं। इन्सपैक्टर को एक खाई में दोनों पड़े मिले। इतनी गंभीर अवस्था में दोनों को पहचानना भी असंभव था। पुलिस ने उन के भैया भाभी को किसी और की लाश थमा दी थी। लाश से पहचानना मुश्किल हो रहा था। उसके भैया भाभी समझे कि वे दोनों मर चुके हैं। उन्हें तो खुशी हो रही थी कि वे दोंनो मर चुके हैं। बच्चों का रो रो कर बुरा हाल था। अंकिता तो पत्थर की मुर्ति की तरह चुपचाप शून्य में दरवाजे कि ओर निहार रही थी मानों उसके ममी पापा अभी घर वापिस आ जाएंगे।
छोटू बोला तुम दोनों को डरने की जरुरत नहीं है जब तक तुम्हारा भाई जिन्दा है तुम्हे कभी किसी चीज की तंगी नहीं होनें दूंगा। खून की एक एक बूंद दे कर अपने मालिक मालकिन का कर्जा चुकाऊंगा।
मैंनें दिल से उन्हें अपनें माता-पिता समझा था। आकाश और अपराजिता को बचानें के लिए छोटू ने उन्हें सिटी अस्पताल में दाखिल करवा दिया। दोनों कौमा में चले गए थे। उनको अस्पताल में पड़े पड़े छः महीने हो चुके थे। बच्चों के चाची ने कभी भी बच्चों को प्यार नहीं किया। केवल छोटू ही उन्हें प्यार करता था। वह बच्चों का और भी ज्यादा देखभाल करने लगा। बच्चे रो रो कर अपनी मां-पापा को पुकार रहे थे। छोटू ने कहा कि मैं तुम्हारा भाई हूं। क्या हुआ मैं तुम्हारा सगा भाई नहीं हूं? मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊंगा। डरो मत! एक दिन उसके चाची नें अंकिता की पढ़ाई बीच में ही छुडवा दी और सारा काम साहिल और अंकिता को करने को कहते। छोटू से इतना कठोर व्यवहार करते मगर वह उनके तीक्ष्ण प्रहारों को सहता रहा। दोनों बच्चों की खातिर उनसे कुछ नहीं कहता था।

एक दिन वह एक और जगह नौकरी की तलाश में चला गया। उसे एक डॉक्टर के घर नौकरी मिल गई। वह डॉक्टर बहुत ही अच्छे थे। वह विदेश से आ कर भारत में सेटल हो गए थे। वह उनके घर में काम करता। शाम को वापिस घर आ जाता। एक दिन छोटू नें कहा कि मैं यहां से जाना चाहता हूं। मेरे मालिक मालकिन तो हमें छोड़ कर चलें गए। यहां पर मैं नहीं रहना चाहता।

आकाश के भाई साकेत बोले ठीक है। अंकल मैं अकेला नहीं जाऊंगा। मेरे साथ बच्चे भी जाएंगे। मेरे मालिक नें मुझे तब पनाह दी थी जब मैं छोटा सा बच्चा था उन्होंनें मेरी परवरिश में कोई कमी नहीं रखी। मैं उन्हें अपनें भाई बहन समझता हूं। साकेत बोले नहीं तुम बच्चों को अपने साथ नहीं ले जा सकते। दोनों बच्चे रोनें लगे। छोटू नें उन दोनों बच्चों को समझाया। बेटा मैं तुम्हारे ऊपर नजर रखूंगा।उसनें कहा आपने नें बच्चों से काम करवाया या इनकी पढाई बीच में पढाई छुड़ाई इन्हें नुकसान पहुंचाने की जरा भी कोशिश की तो मैं तुम पर कार्यवाही करूंगा। वहां से अपना समान लेकर चला गया। साकेत नें पुलिस में जा कर जायदाद के कागज दिखाए। पुलिस वालों नें कहा कि जब तक दोनों बच्चे बालिग नहीं हो जाते तब तक आप लोग उन की देखभाल करोगे। बच्चों को कुछ भी नहीं होना चाहिए। इन बच्चों नें जरा भी शिकायत की तो कार्यवाही की जाएगी। इसलिए वे बच्चों को कुछ भी नहीं कहते थे। अंकिता को फिर से स्कूल में डाल दिया था। छोटू अस्पताल में हर रोज आ जाता। डाक्टर बहुत ही अच्छे थे उसने डाक्टर साहब से कहा मैं सारी उम्र भर आपकी सेवा करुंगा। मेरे मालिक मालकिन को आप बचा लो। मेरा इनके सिवा कोई नहीं है। आपने इन को बचा लिया तो मैं समझूंगा कि आपने मेरे ऊपर बड़ा ही एहसान किया है।

डॉ रस्तोगी को उस पर दया आ गई उसने आकाश और अंकिता का केस अपने हाथ में ले लिया छोटू डॉक्टर साहब के बच्चे को देखता था डॉक्टर की पत्नी भी डॉक्टर थी वह डॉक्टर के बेटे की अच्छे ढंग से देख भाल करता था। उसे इतना प्यार करता था कि डॉक्टर की पत्नी उसके इस व्यवहार से बहुत ही खुश होती थी।

साकेत को छोटू ने बताया ही नहीं था कि उसके मालिक मालकिन जिंदा है। वह तो उसकी जमीन जायदाद को हड़पने के बाद चैन से जी रहे थे। छोटू ने पुलिस वालों के साथ मिलकर नकली दस्तावेज बनाकर उसमें लिखवा दिया था कि जब तक अंकिता और साहिल बालिग नहीं हो जाते तब तक उनकी जिम्मेवारी और देखरेख उनके चाचा चाची कर सकतें हैं। वे जब बालिग होंगे वैसे ही सारी जमीन जायदाद के मालिक बन जाएंगे इन बच्चों को अगर कुछ होता है तो सारी जमीन ज्यादाद सरकारी ट्रस्ट में चली जाएगी इसलिए ही वे अंकित और साहिल को कुछ नहीं कहते थे।

एक दिन जब वे दस्तावेज लेकर पुलिस इंस्पेक्टर के पास गए थे तो उन्हें यह जानकारी हासिल हुई थी उन बच्चों को वे कभी नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे। छोटू हर रोज बच्चों से मिलने उनके स्कूल जाता था। इस बात को काफी समय व्यतीत हो चुका था। बच्चों से इतना प्यार करते थे कि वह कभी-कभी छोटू से मिलने उसके घर आ जाते थे। एक दिन डाक्टर नें छोटू को बताया कि तुम्हारे मालिक मालकिन ठीक हो जाएंगे। वह खुशी के मारे उछल पड़ा। इतना खुश तो डॉक्टर और उसकी पत्नी ने उसे कभी भी नहीं देखा था। वह दोनों के पैरों पर गिर पड़ा बोला आपका यह एहसान में कभी नहीं भूलूंगा। मेरे मालिक मालकिन को जब होश आएगा तब मैं अपनी सारी कहानी सुनाऊंगा कैसे उनके मुंहबोले भाई ने आप की जमीन जायदाद पर कब्जा कर लिया है। आपका सब कुछ अपने नाम कर लिया है। एक दिन जब वह अपने मालिक मालकिन से मिलने आ गया तो उसका चेहरा खिल उठा। धीरे धीरे सब कुछ याद आने लगा। उनका एक्सीडेंट हुआ था।। छोटू ने सारी कहानी उन्हें सुनाई। वे अपने बच्चों से मिलने के लिए तड़पने लगे। छोटू नें उन्हें बताया कि आपके बच्चे ठीक हैं। आप जल्दी ही उनसे मिलेंगे। आप को कौमा में गए हुए दस साल हो चुके हैं। आपके बच्चे भी दोनों कॉलेज में पढ़ते हैं।

छोटू ने अपने मालिक मालकिन को सारी कहानी सुनाई कैसे उनके भाई ने धोखे में आप को मरवाने के लिए षड्यंत्र रचा था। उनको जमीन का मालिक बनना था। सब कुछ आपका उन्होंने अपने नाम करवा लिया है। मैंने आपके बच्चों को एक बड़े भाई की तरह प्यार दिया। उनकी जरूरतों को पूरा किया।

एक डॉक्टर के यहां नौकरी कर ली। आपके भाई ने मुझे घर से निकाल दिया। मैंने डॉक्टर को आपको बचानें के लिए मजबूर कर दिया उन की कोशिशों से आप दोनों आज जीवित हों। मैंने बचपन से ही आपको अपने माता-पिता के रूप में देखा था। मैंने आपके भाई साहब को कभी नहीं बताया कि आप जिंदा हो। मैंने बचपन से ही आपको अपने माता-पिता के रूप में देखा था। अगर उन लोंगों को पता चलता कि तुम जीवित हो तो वे कभी भी आपको जिंदा नहीं रहने देते। वे आप को मारने का षड़यंत्र करते रहते। मैंने बच्चों को भी कभी नहीं बताया कि आप दोनों जीवित हो। वे आप दोनों से मिलने को बेकरार हो जाते अपनी पढाई में ध्यान ही नहीं देते। मैंने अपने मन पर भारी पत्थर रखकर उन्हें यह सच कभी नहीं बताया था कि आप दोनों जीवित हो आपको कोमा में देखकर ना जाने क्या कर डालते। अंकिता और साहिल दोनों बालिग हो गए थे।

साकेत ने चुपके से अंकिता और साहिल को कहा कि इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दो। तुम्हारे माता-पिता सारी जमीन के कागज आप दोंनों के नाम कर गए। हम तुम्हें पहले कुछ नहीं कह सकते थे क्योंकि तुम दोनों बालिग नहीं थे। तुम दोनों बालिग हो गए हो। तुम इन जमीन के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दो। तुम अगर इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं करोगे तो हम तुम दोनों को भी अलग कर देंगें। दोनों बच्चे डर गए। उनके चाचा चाची ने उन दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया।
बच्चों नें छोटू को फोन किया गया चाचा चाची ने उन्हें कैद कर लिया है। वह कहते हैं कि जल्दी से कागजात पर हस्ताक्षर नहीं करोगे तो हम तुम दोनों के साथ ना जाने क्या-क्या करेंगे? तुम जल्दी आ जाओ। हमें डर लग रहा है। छोटू ने उन दोनों से कहा कि तुम डरो मत। तुम्हेंं कुछ नहीं होगा। मैं पुलिस को लेकर पहुंच रहा हूं तब तक तुम उन कागजों पर हस्ताक्षर मत करना।

साकेत नें पुलिस वालों से कहा हमनें जमीन जायदाद के कागज बच्चों से अपने नाम करवा लिए हैं। इस जमीन पर हमारा हक है। पुलिस इन्सपैक्टर बोले यह तो झूठे दस्तावेज थे। जिस पर तुमने बच्चों से हस्ताक्षर करवाए। असली वसीहत तो तो बनाई ही नहीं थी। छोटू नें कहा कि मेरे मालिक मालकिन जिंदा है। मैंने इसलिए यह बात छुपाई क्योंकि मैंने चाचा चाची की पहली ही रात सारी बातें सुन ली थी। उन्होंने मेरे मालिक मालकिन को मारने की साजिश रची थी। मैंने उन्हें कहते सुन लिया था कि हमने गाड़ी के ब्रेक फेल कर के भेज दिया है। हमारी साजिश सफल हो गई है। गाड़ी खाई में गिर गई है। भैया भाभी तो अब कभी भी वापस नहीं आ सकते। हम सारी जमीन जायदाद के मालिक बन जाएंगे। मैंनें उस रात पुलिस इन्सपैक्टर से मिल कर नकली वसीहत तो यहां रख दी थी और पुलिस इन्सपैक्टर को सारी बात बताई। आप लोगों ने समझा कि भैया भाभी मर चुके हैं मैंने आप लोगों को कभी नहीं बताया कि मेरे मालिक मालकिन जिंदा है। आज शाम को वे भी यहां आकर तुम्हारा पर्दा फास कर देंगें। छोटू के साथ अपराजिता और आकाश आ चुके थे। उन्होंनें आ कर कहा जल्दी से हमारा मकान खाली करो। अपराजिता नें अपनें देवर देवरानी को कहा कि आप लोंगों नें हमें धोखा दे कर हमारी गाड़ी को दुर्घटना ग्रस्त करवा कर सारी जमीन जायदाद अपनें नाम करवानी चाही मगर जाको राखे साइयां मार सके न कोई। जिस इन्सान को भगवान बचाना चाहता है उस का कोई भी शत्रु बाल बांका नहीं कर सकता। बच्चे लिपट लिपट कर अपने माता-पिता से मिलकर रो रहे थे। अपने माता-पिता के बिछड़ने के पश्चात् उन्हें कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। वह बोले अगर छोटू भैया नहीं होते तो ना जाने चाचा-चाची हमारा क्या हाल कर देते? उन्होंने हमें किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। स्कूल में खाना लेकर पहुंच जाते थे। चाची स्कूल को कभी खाना नहीं देती थी। छोटू ने हमेशा अपनी जिम्मेवारी एक बड़े भाई की तरह संभाली। आकाश ने छोटू को कानूनी तौर पर अपना लिया था। उन्होंने उसे कहा कि आज तुमने अपने बेटे होने का कर्तव्य अच्छी तरह निभाया। तुम सचमुच में ही तारीफ के काबिल हो। आज से व्यापार के हर काम में तुम्हारी राय अवश्य लिया करुंगा। तुम नहीं होते तो आज हम अपनें बच्चों से कभी भी नहीं मिल पाते। हमें तुम पर गर्व है।

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