गुलमोहर

शीतल अपने माता-पिता की इकलौती बेटी थी। उसके माता पिता गरीब थे उन्होंने उसे बड़ी मुश्किल से पढ़ाया। पढ़ लिखकर वह चाहती थी कि मैं अपने माता-पिता को सारी खुशियां दूंगी। उसके माता पिता ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए बहुत ही कठोर परिश्रम किया। वह अपनी मां को सारी सारी रात कपड़े सिलती देखा करती थी। बारहवीं तक पढ़ी उसके बाद उसने सोचा कि मैं डांस सीख लेती हूं। उसने डांस में भाग लेना शुरू किया। उसकी एक पक्की सहेली थी प्रीति। उसके साथ वह अपने दिल की हर बात बता देती थी। प्रीति के माता-पिता भी शहर को छोड़कर दूसरे शहर में जाने वाले थे। शीतु कादिल रो रहा था वह अपनी सहेली को जाते हुए नहीं देख देना चाहती थी। एक दिन जब वह संगीत में भाग लेने जा रही थी तभी उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई वह नीचे गिर गई। वह अपनी सहेली के साथ अस्पताल में गई। डॉक्टर ने उसे बताया कि वह जिन्दगी और मौत के बीच झूल रही है। तुम्हारे दोनों गुर्दे खराब है। वह अचानक घबरा गई सोचने लगी न जाने मुझे क्या बीमारी लग गई? मैं अपने जीते जी तो अपने माता-पिता को खुशियां नहीं दे सकी। मैं उनके ऊपर बोझ बनना नहीं चाहती। उसके माता पिता चाहते थे कि वह किसी अच्छे से लड़के से शादी करके अपना घर बसा ले। शादी करके अपना घर बसा ले। उसके पड़ोस में एक लड़का था वह उसे बहुत प्यार करता था। वह भी उसको मन ही मन चाहनें लगी थी। एक दिन जब वह आया तो वह बहुत ही उदास थी वह बोली तुम भी यहां से चले जाओ। मेरी प्यारी सहेली भी मुझे छोड़ कर जा रही है। मैं किसके साथ बातें करूंगी। एक ही तो मेरी पक्की सहेली थी। जिससे मैं अपना सुख दुख बांट लेती थी। गौरव ने उसे कहा कि तुम दुखी क्यों होती हो? मैं तुम्हारा दोस्त हूं।

तुम अपने मन की बात मुझसे कह सकती हो वह कुछ नहीं बोल बोली। उसकी सहेली उसको छोड़ कर चली गई जिस दिन वह अस्पताल गई उसकी सहेली ने कहा अंकल आंटी को अपनी बीमारी की बात बता दो। शीतल ने अपनी सहेली को कसम दे दी कि तुमने भी मेरी बीमारी की बात मेरे माता-पिता से की तो मैं तुमसे कभी बात नहीं करूंगी। तुम्हें कभी नहीं मिलूंगी। समझूंगी तुमने मुझे सदा के लिए खो दिया। मेरे माता-पिता वैसे ही बहुत परेशान हैं। मेरी बीमारी की बात सुनकर वे और भी उदास हो जाएंगे। मेरी बीमारी की बात सुनकर उन पर ना जाने क्या गुजरेगी। इतना रुपया कहां से लाएंगे।? हम गरीबों के पास तन ढकने के लिए कपड़ा भी मुश्किल से होता है ऊपर से मेरी बीमारी इससे अच्छा होता मैं यूं ही मर जाना चाहती हूं। किसी को दुखीः नहीं करूंगी। उसकी सहेली दूसरे शहर में चली गई थी। कुछ दिनों से शीतु उदास रहने लगी थी।

उसके माता-पिता उसे पूछते तुम उदास क्यों रहती हो।? तुम्हारी और सहेलियां बन जाएगी परंतु उनसे अपनी बीमारी की बात छुपा जाया करती थी। उसके माता-पिता उस से बोले गौरव बहुत ही अच्छा लड़का है। तुम उस से शादी करके अपना घर बसा लो। तुमसे वह बिना दहेज के शादी करना चाहता है। हम तब तक तुम्हारी शादी नहीं करेंगे जब तक तुम हां नहीं करोगी। उसनें अपने माता-पिता से कहा मुझे अभी शादी नहीं करनी है। उसनें एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। वह कड़ी मेहनत करके अपने माता-पिता के लिए रुपए इकट्ठा कर रही थी। उसने ₹50000 इकट्ठे कर लिए थे। उसने एक संयुक्त खाता अपने माता पिता के नाम खोल दिया था।

उसके माता-पिता पढ़ना लिखना नहीं जानते थे उसके माता पिता चाहते थे कि हम दोनों तो पढ़ नहीं सकें मगर हमारी बेटी पढ़ लिखकर एक दिन बड़ी अवसर अवश्य बनेगी। एक दिन गौरव उनके घर आया तो शीतु बेहद उदास बैठी थी। वह उससे बोला तुम्हारी सहेली तो चली गई है। तुम अब मुझे ही अपना दोस्त समझो। वह बोली तुम मेरे घर मत आया करो अच्छी सी लड़की देख कर शादी कर लो। मुझे शादी नहीं करनी है। कुछ दिनों से वह देख रहा था शीतु के व्यवहार में परिवर्तन आ गया था। वह सोच रहा था कि शायद अपनी सहेली के बिछड़ जाने का गम उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा है। शीतु को डायरी लिखने का बहुत शौक था। वह अपनी डायरी में कुछ ना कुछ लिखती रहती थी। एक दिन जब गौरव आया तो वह डायरी पर कुछ लिख रही थी। गौरव को देखकर उसने वह डायरी छुपा दी। गौरव ने घर जाकर सोचा शीतु पहले तो इतनी उदास नहीं रहती थी। आज ना जाने वह डायरी में क्या लिख रही थी।
मुझे चुपके से किसी ना किसी दिन उसकी डायरी को अवश्य पढ़ना चाहिए। शीतु को बाग में जाने का बहुत शौक था। उसके घर के पास एक गुलमोहर का पेड़ था। उस पेड़ को देखकर उसे घंटों निहारा करती थी। उस पेड़ के सारे पत्ते झड़ने लगे थे। उस पेड़ को देखकर वह सोच रही थी कि उस पेड़ को वह बचपन से देखते आ रही थी। उसके पत्ते कितने खिले-खिले से रहते थे? काफी दिनों से इसमें कम ही पत्ते दिखाई दे रहे थे। उसमें केवल अब केवल थोड़े से पत्ते बचे थे। जैसे तैसे पत्ते झड़ते जाते थे वह भी डरती जाती थी कि मैं भी एक दिन मर जाऊंगी। मेरी जिंदगी की भी चंद सांसे शेष हैं। मेरे पास भी गिने चुने ही दिन है।

उसने अपनी पास बुक के सारे रुपये जो अपने डांस से कमाए थे अपने माता-पिता के नाम पर दिए। एक दिन बाग में जब गई तो उस पेड़ पर केवल दस पत्ते ही दिखाई दिए। वह डरकर कांपनें लगी आकर उसने अपनी डायरी में लिखा मेरी जिंदगी भी शायद दस बारह दिन की हो। जब इस पेड़ पर एक भी पता नहीं बचेगा तो मैं भी मर जाऊंगी। मैं गौरव के साथ शादी नहीं करूंगी।

उसकी सहेली प्रीति से रहा नहीं गया उसने गौरव को फोन पर सारी बात बता दी कि शीतु अब केवल थोड़े दिन की ही मेहमान है। गौरव अपनी दोस्त को खोना नहीं चाहता था। वह सोचने लगा मुझे मुझे शीतु ने अपनी बीमारी की बात नहीं बताई और अपने माता-पिता से भी इसलिए छुपाई क्योंकि वह अपने माता-पिता को तंग नहीं करना चाहती थी। उनके पास उसकी बीमारी के इलाज के लिए रुपए कहां से आएंगे? गौरव अचानक उसके घर पहुंच गया अंदर जाकर दरवाजा खटखटाया। शीतु अभी तक डांस स्कूल से वापस नहीं आई थी। उसने आंटी को कहा आंटी जी क्या आज आप चाय नहीं पिलाएंगे? उसकी आंटी चाय बनाने के बाद अंदर चली गई। गौरव ने शीतु के कमरे में झांका। उसने उसके कमरे से डायरी निकाल ली। उसमें लिखा था गुलमोहर के पेड़ में केवल दस पत्ते बचे हैं। शायद मैं भी दस दिनों तक ही जिंदा बच पांच। मैं किसी को भी अपनी बीमारी के बारे में बता कर परेशान नंही करूंगी।

गौरव तो एक अच्छा लड़का है वह कहीं भी शादी कर सकता है। जिसके पास धन दौलत है। सब कुछ है मैं तो किसी के काम नहीं आ सकी। न ही एक अच्छी बेटी साबित हुई। गौरव ने बाग में जाकर गुलमोहर के पेड़ को निहारा। उस पर दस पत्ते बचे थे। वह सोचने लगा शायद मैं अपने दोस्त को,,,, बचा पांऊ। गौरव नें आंटी अंकल को कहा आप मेरी बात ध्यान से सुनो। आपकी बेटी नें आपसे अपनी बीमारी के बारे में छुपाया था। वह आपको इसलिए नहीं बताना चाहती थी क्योंकि आप उसकी बीमारी की खबर सुनकर इतना रुपया नहीं जुटा पाएंगे। शीतु के पापा बोले मैं अपना सब कुछ बेच कर अपनी बेटी को बताऊंगा। गौरव बोला आप चिंता मत करो आप अपनी बेटी को कुछ मत बताना। जैसा मैं कहूंगा वैसा ही करते रहना। गौरव नें अंकल आंटी को कहा कि आप दोनों से किसी पर्वतीय स्थल पर एक हफ्ते के लिए जाओ। उसके पापा ममी अपनी बेटी को ले कर कुल्लू मनाली ले गए। शीतु का दिल वहां पर भी नहीं लगा। गौरव नें अपने आदमियों को बुलाकर कहा कि तुम इस गुलमोहर के पेड़ पर उसी तरह के पत्ते लगा देना देखने में लगे कि वह असली पत्ते हैं। इसके लिए मैं तुम्हें बहुत सारे रुपए दूंगा। गुलमोहर के पेड़ पर उन लोगों ने उसी तरह के इतने पत्ते लगा दिए जिससे ऐसा लगता था कि वह खिल गई हों। शीतु जब कुल्लू मनाली से वापस लौटी तो बाग में घूमने गई। उसने देखा गुलमोहर के पेड़ पर चालीस पचास पते आ गए। उसे खुशी महसूस हुई वह सोचने लगी मेरी बीमारी ठीक भी तो हो सकती है। वह भी तो ठीक हो सकती है। उसमें जीने की तमन्ना जाग गई। वह खानपान का विशेष ध्यान रखने लगी। डॉक्टर ने उसे अस्पताल में बुलाया। जब हौसला कर के अस्पताल तक पहुंची तो डॉक्टर ने उसकी रिपोर्ट देकर कहा कि जो रिपोर्ट हमने तुम्हें दी थी वह तुम्हारी रिपोर्ट नहीं थी। वह किसी और लड़की की रिपोर्ट थी। तुम्हारी रिपोर्ट तो बिल्कुल नॉर्मल आई है। गौरव ने अपनी दोस्त का ध्यान रखा हवह अपनी दोस्त को अकेले नहीं छोड़ता था। उसे वक्त पर दवाइयां खिलाता था। वह उससे कहता तुम एक दिन तुम पहले वाली शीतु बन जाओगी। तुम्हें कुछ नहीं होगा। गुलमोहर के पेड़ पर खूब सारे फूल खिल गए थे। उन फूलों को देखकर उसका मन खुश होनें लगा। एक दिन उसके स्वास्थ्य में सुधार हो गया। गौरव ने उसकी जिंदगी में आ कर उसे नया जीवनदान दिया था। खुशी खुशी उसनें गौरव के साथ शादी करनें का फैसला कर लिया। सभी की खुशीयां लौट आई थी।

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