घर की फुलवारी

एक बच्चा रोहित स्कूल से घर आ रहा था। उसे रास्ते में एक औरत मिली। रोहित उसे पहचानता था। वह रोहित की मां की सहेली मीरा थी। वह बोली बेटा तुम्हारी मां ने मुझसे बीज मांगे थे। तुमने ये बीज अपनी मां को दे देना। रोहित जैसे ही घर पहुंचा बोला मां मुझे बहुत भूख लगी है। उसकी मां ने उसे भोजन दिया। भोजन खाकर वह भूल ही गया कि मीरा चाची ने उसकी मां को देने के लिए उसे बीज दिए थे। मां को बोला हमें कल छुट्टी है। मैंअपने दोस्तों के साथ बाहर खेल कर आ रहा हूं। बाहर की ओर दौड़ा चला गया। उसके घर के पास एक छोटा सा खलिहान था वहां पर खेलने लगा
वहां पर उसकी मां ने क्यारियां भी बनाई हुई थी। रोहित वहां खेलने लगा। खेलते खेलते ना जाने कितनी देर हो गई। वह घर आ गया। एक दिन मीरा काकी उसके घर आकर बोली तू ने अपनी मां को बीज नहीं दिए। रोहित बोला वह तो मैं देना ही भूल गया। मैंने तुझे बहुत से बीज दिए थे। कद्दू भिंडी तोरी करेला शिमला मिर्च उसकी चाची बोली तुम्हारी मां ने मुझे बताया कि तुम भी अपनी मां के साथ घर में उनकी छोटी सी क्यारी में देखभाल करते हो। उसकी मां बोली यह बच्चा है। पिछले हफ्ते मैंने और रोहित ने मिलकर अपने खलियान के साथ खेत में सफाई करके उसे बीज बोने के लायक बनाया। लेकिन कुछ जमीन उबर खाबर ही रह गई। रामू ने खेलते हुए देखा था कि समतल जमीन में कुछ पौधे उग आए थे। और उबड़ खाबड़ वाली जमीन में जो पौधे उगे हुए थे वह सूख गए थे। रोहित की मां मीरा से बोली बोली कि मैं इसे बीज को कैसे उगाया जाता है वह सिखा रही हूं। रोहित बोला कि मां मैं क्या खेलने जाऊं? वह बोली हां जा बेटा। रोहित बोला मां मैं भी तुम्हारे साथ खलिहान मेंचलता हूं। मीरा बोली कि मैं भी तुम्हारे साथ खलियानमें चल कर तुम्हारा खेत देखना चाहती हूं। मैं फिर से तुम्हें बीज दे दूंगी तब तुम देखना के बीज को कैसे बोया जाता है।रोहित बोला अच्छा। वह दोनों भी उसके साथ खलियान में आ गई। वहां पर आकर बोली देख तो तुम यहां पर उस दिन भी आकर खेल रहे होंगे। उस दिन तुम्हारी जेब से यहां पर बीज गिर गए होंगे। जहां समतल भूमि है वहां पर तो पौधे उग भी गये है। जहां पर पथरीली भूमि है वहां पौधा सूख गया है। बीज बोने के लिए पहले खेत को समतल करना पड़ता है। तब कहीं जाकर पौधा उगता है। मीरा बोली कुछ पौधे तो हवा के द्वारा उड कर आ जाते हैं। कभी कभी जानवरों मैं चिपक कर आ जाते हैं। जहां पर वे गिर जाते हैं वहीं पर पौधे उग आतें हैं। मीरा बोली कि हम लोग किराए के मकान में रहतें हैं। हमारे पास तो खलियान भी नहीं है। हमारे पास तो छोटे छोटे गमले है। जिसमें मैं सब्जियां उगाती हूं। वह भी बिना मिट्टी के। बिना खाद वाली सब्जियां। रोहित की मां हैरान होकर बोली क्या कभी बिना मिट्टी के भी सब्जियां उगाई जाती है? वह बोली बहन आज के युग में सब कुछ संभव हो गया है।
आज तो बाजार में सब्जियों में कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव किया जाता है। बाजार की सब्जियों को इंजेक्शन देकर दूसरे दिन इतना बड़ा किया जाता है। आप भी अपने गालों में सब्जियां उगा लिया करो। राहुल की मां बोली कैसे।मीरा ने बताया कि जो तुम्हारे पास घर में नारियल का बुरादा होता है या किसी भी चीज का बनाया लकड़ी का बुरादा या पेड़ों सूखे हुए पेड़ों का बुरादा अपने गमलें में डाल दिया जाता है। दो तरह का मिश्रण इस बुरादे में मिलाया जाता है। बाजार में सब्जियों में डालने के लिए यह मिश्रण मिलता है। वह सिमेन्ट के चूरे की तरह का होता है। तीनों को उचित मात्रा में मिलाना है घर में प्याज के छिलकों को भी गमलेें में महीन पीस सकते हैं। उनको भी अपनें गमले में डाल दें। आप के गमले में मिट्टी डालने की आवश्यकता नहीं होगी। घर पर इस तरीके से आप घर में उगा उगा कर सब्जियों का भरपूर आनंद उठा सकती हैं।
राहुल की मां बोली बहन तूने आज मुझे बहुत ही अच्छा सुझाव दिया है। मैं कभी भी बाजार से सब्जियां नहीं खरीदूंगी। राहूल की मां बोली बेटा मैंने तुम्हें जो बीज दिए थे फिर से अलग से बीज भेज दूंगी। देख राहुल तोरी का पौधा तो उग गया हे। राहुल बोलापौधों के कौन-कौन से भाग होते हैं बताओ। उनकी मां बोली जड़ तना फल और फूल। जड जमीन के अंदर होती है और तना बाहर की ओर होता है। जड जमीन से पानी और लवण सोखती है। पौधा बीज से बनता है। पौधे के मजबूत भाग को तना कहते हैं। पतियां सूर्य के प्रकाश में पौधे के लिए भोजन बनाती हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहतें हैं। पत्तियों में हरे रंग का एक पदार्थ होता है उसे हम क्लोरोफिल कहते हैं। जड़ का काम होता है पौधे को खड़ा रखना। रोहित बोला कि मां हवा के द्वारा उड़कर बीज कैसे आ जाते हैं।
उसकी मां बोली कभी कभी बीज जानवरों में चिपक जाते हैं। जहां कहीं भी झड़ जाते हैं वहीं पर भी बीज उग जाते हैं। हवा पानी पशु पक्षी और कीट बीजों और फलों को बिखरने में सहायता करते हैं। रोहित बोला मां पौधे अपना भोजन कैसे बनाते हैं। पतियां सूर्य के प्रकाश में पौधे के लिए भोजन बनाती हैं। जब पौधों की पत्तियां झड़ जाती है तो पौधों की डंडियो का सम्पर्क खुद ही खुद उसके तने से संपर्क टूट जाता है हऔर तना अपने भीतर इकट्ठी स्टार्च का भोजन के रूप में इस्तेमाल करता है। उसकी मां बोली बेटा मैंने आज तुम्हें बहुत सारी जानकारी दी है। मीरा बोली तू मेरे साथ चल कर बीज लेनें चल। अपनी मां के साथ अपनें खलिहान या खेलेंगे में सब्जी बिना मिट्टी के सब्जी भी उगा कर देखना। राहुल बोला मैं भी अपनी फुलवारी में अपनी मां का हाथ बंटाऊंगा। और सब्जियों को अच्छे दाम में बाजार में बेचूंगा। सबसे पहले ले आप को ही खिलाऊंगा। मीरा जोर जोर से हंसती है।

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