जादुई अंडा

एक शिकारी था। उसके पास बहुत सारी मुर्गियां थीं। मुर्गियों के अंडों को बाजार में बेच देता था। एक दिन शिकारी उन मुर्गियों के अंडों को बेचने गया तो उसने सब अंडों को बाजार में बेच दिया। एक आखरी अंडे को देख कर हैरान हो गया वह अंडा बहुत ही बड़ा था। वह उसे बेचना नहीं चाहता था। ग्राहकों की बहुत भीड़ लगी हुई थी। शिकारी कह रहा था जिस किसी को भी यह अंडा चाहिए उसे मैं उसे ₹50 में बेच दूंगा।

एक ग्राहक वह अंडा ₹50 में ले गया। उसकी औरत को किसी ने कहा था कि अगर वह ताजा मुर्गी का अंडा खाएगी जिसका भार एक सामान्य अंडे से अधिक होगा तो वह जल्दी ही स्वस्थ हो जाएगी। किसान उस अंडे को अपनी पत्नी को खिलाना चाहता था। जिसको खाकर उसकी पत्नी ठीक हो जाएगी। किसान के पास केवल ₹50 ही थे फिर भी वह उसे खरीद कर ले गया। शाम को जब वह घर आया तो उसने वहां अंडा अपनी पत्नी को खिलाने के लिए जैसे ही तोड़ने लगा उस अंडे में से आवाज आई। तुम इस संडे को मत तोड़ो यह जादू का अंडा है। वह बोला मेरे पास अपनी पत्नी को बचाने के लिए केवल रू50 ही रुपए थे। मैं किसी भी तरह इतने वजन वाला अंडा खरीदना चाहता हूं जिससे मेरी पत्नी बच सके। जादू के अंडे में से आवाज आई। यह जादू का अंडा बहुत ही करामात वाला है। जिस किसी के पास भी यह जादू का अंडा होता है वह जादू का अंडा उसकी मदद करता है।

किसान जादू के अंडे से बोला तुम ही बताओ मैं क्या करूं? जादू का अंडा बोला। तुम उसी शिकारी के पास जाओ जिसके पास से तुमने वह अंडा खरीदा था। तुम उससे एक और अंडा खरीद कर लाओ। वह किसान शिकारी के पास जाकर बोला शिकारी भाई मुझे एक अंडा और चाहिए। शिकारी बोला मैंने तुम्हें कल एक अंडा दिया था वह कहां है।? शिकारी बोला वह तो जादू का अंडा था। शिकारी चौक कर बोला क्या कभी जादू का अंडा भी होता है? किसान बोला तुम जानो तुमने ही मुझे जादू का अंडा दिया था। शिकारी बोला अगर तुम सच कह रहे हो तो तुम्हें मैं एक और अंडा मुफ्त में दूंगा। मेरे पास वैसा ही एक बड़ा अंडा है। मैं तुम्हें वह अंडा देता हूं। शिकारी ने उस अंडे को जांच परख लिया कहीं वह भी तो जादू का अंडा तो नहीं है। वह सामान्य अंडा था।
उस अंडे को लेकर शिकारी किसान के घर गया किसान बोला पहले मैं तुम्हारा दिया हुआ अंडा अपनी पत्नी को खिलाऊंगा जिससे मेरी पत्नी ठीक हो जाएगी। शिकारी बोला ठीक है किसान ने वह अंडा अपनी पत्नी को खिला दिया। किसान की पत्नी सचमुच में ही स्वस्थ हो गई। किसान को विश्वास हो गया कि वह सचमुच में ही जादू का अंडा था। शिकारी सोचने लगा कि इस किसान से अपना जादू का अंडा वापस करके ही रहेगा। किसान हर रोज जादू के अंडे से कुछ ना कुछ खाने को प्राप्त करता था। जादू के अंडे ने उसे कहा था कि कभी लालच मत करना। जिस दिन तुम लालच करोगे उस दिन इस अंडे का जादू समाप्त हो जाएगा। कोई भी ऐसा काम मत करना जिससे तुम्हें पछताना पड़े किसान बोला ठीक है शिकारी ने किसान को हर तरह से लालच देने की कोशिश की कि इस अंडे को मुझे दे दो बदले में मेरी सारी मुर्गियां ले लो मगर वह नहीं माना। उसने कहा मुझे कोई मुर्गा नहीं चाहिए। शिकारी बड़ा दुखी हुआ पर किसान तो अपनी बात पर ही कायम था। किसान ने अपनी पत्नी को बताया कि इस जादू के अंडे को किसी को भी मत देना। इस जादू के अंडे में से हर रोज खाने को प्राप्त करता हूं। किसान की पत्नी बोली ठीक है मैं कभी भी इस जादू के अंडे को बेचने की भी नहीं सोचूंगी। एक दिन शिकारी ने किसान की पत्नी के पास आकर कहा तुम इस जादू के अंडे को मुझे बेच दो बदले में मेरी सारी मुर्गियां ले लो। मेरे पास और भी मुर्गे है। शिकारी की पत्नी सौ मुर्गियों का सुनकर लालच में आ गई। वहां से चले गई।वह सोचनें लगी यह जादू का अंडा तो केवल खाने को ही रोटी देता है लेकिन सौ मुर्गियां होगी तो मैं इनको बाजार में बेचूंगी तो मुझे ढेर सारे रुपए मिलेंगे। उसने वह जादू का अंडा शिकारी को बेच दिया.। , शाम को किसान की पत्नी ने किसान को सारी बात बताई उसने वह अंडा बेच दिया। बदले में उसे सौ मुर्गियां मिली। वह जादू का अंडा तो केवल खाने को ही देता था। वह भी केवल थोड़ा सा। मैंने तो उसके बदले में सौ मुर्गियां ले ली है।

किसान उदास होकर बोला अरी भागवान वह कोई मामूली अंडा नहीं था। वह तो जादू का अंडा था। वह शिकारी किसी भी समय तुम से वापिस मुर्गियां छीनने आता ही होगा। इससे पहले कि वह सारी मुर्गियां तुमसे छीन कर ले जाए तुम उन मुर्गियों को बेच दो। उस जादू के अंडे में से जो आवाज आती थी वह जादू की थी। उस जादू के अंडे ने मुझे एक दिन बताया कि अगर तुम इसका सही सदुपयोग नहीं करोगे तो और लालच करोगे तो इस अंडे का जादू समाप्त हो जाएगा। तुमने भी लालच किया और शिकारी ने भी। शिकारी के पास पहुंचते ही अंडा सामान्य अंडा जैसा हो गया।

किसान की पत्नी जल्दी से एक मुर्गी खाने जाकर बोली मेरे पास सौ मुर्गियां हैं। क्या तुम खरीदना चाहोगे? मुर्गी खाने का मालिक बोला हां मैं खरीदना चाहता हूं। यह मुर्गियां तो मेरे पास से ही कोई ले गया था। मैं अपनी मुर्गियों को पहचानता हूं। किसान की पत्नी ने सारी मुर्गियां मुर्गी खाने के मालिक को बेच दी और₹2000लेकर घर आ गई।

शिकारी किसान के घर आकर बोला तुमने मुझे कैसा अंडा दिया वो जादू का अंडा नहीं था। किसान बोला वह सचमुच में ही जादू का अंडा था। जादू के अंडे में से आवाज आती थी अगर हम उससे कोई प्रश्न करते थे वह हमारे प्रश्न का उत्तर देता था। मुझे उस अंडे ने कहा था कि तुम अगर लालच करोगे तो इस अंडे का जादू समाप्त हो जाएगा। शिकारी बोला मैं तुम्हारी शिकायत यहां के पंचो से करूंगा।

शिकारी पंचायत प्रधान के पास जाकर बोला मैंने शिकारी की पत्नी से सौ मुर्गियों के बदले में उससे जादू का एक अंडा खरीदा था। मगर घर जाकर देखा तो वह जादू का अंडा नहीं था। पंच बोला जादू का भी कोई अंडा होता है। पंचों ने शिकारी, किसान और उसकी पत्नी को पकड़ लिया। बोले जब तक तुम सच सच नहीं बताओगे तब तक मैं तुम तीनों को नहीं छोडूंगा किसान ने पंचो को कहा कि उसने वह मुर्गियां एक मुर्गी खाने में बेच दी।। शिकारी नें वह मुर्गियां उसी मुर्गी खाने से ही खरीदी थी। उस मुर्गी खाने के मालिक ने बताया कि सभी मुर्गियां मैंने ही एक शिकारी को बेची थी। उस समय मैं बहुत ही मुश्किल में था। इसलिए मुझे उन मुर्गियों को बेचना पड़ा। वहां जाकर पता करते हैं कि सचमुच में ही यह अंडा जादू का था। सभी उस मुर्गी पालन केंद्र में जाते हैं। वहां पंहुचने पर उस मुर्गी के मुखिया नें शिकारी को पहचान लिया और कहा कैसे हो? किसान की पत्नी नें और शिकारी नें मुर्गी खाने के मुखिया को सारी कहानी सुनाई कि कैसे शिकारी ने सौ मुर्गीयों के बदले में किसान की पत्नी से एक जादू का अंडा खरीदा था। वह जादू का अंडा तुम्हारे पास कैसे आया? मैंने तो तुम्हें सामान्य अंडा दिया था। मुझे एक साधु महात्मा ने दो अंडे दिए थे। उनमें से एक जादू का अंडा था एक सामान्य अंडा था। मैंने तुम्हे सामान्य अंन्डा दे दिया था। शिकारी थर-थर कांपने लगा। शायद तुमने वह जादू का अंडा अपने आप मेरे यहां से उठा लिया होगा। इसी कारण जादू के अंडे का सारा जादू तुम्हारे पास जाते ही समाप्त हो गया। अब सब कुछ साफ हो गया था। शिकारी ने जानबूझकर वह जादू का अंडा उस मुर्गी केंद्र से उठा लिया था।

अचानक शिकारी को याद आया उसने दोनों एक जैसे अंडे देखकर उसने वह उठा लिया था। जब मुर्गी केंद्र का मुखिया लिफाफा लेने अन्दर गया था तो उसने वहां से वह अंडा उठा लिया था। मुखिया नें कहा जाओ तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी। शिकारी हाथ मलते रह गया। पंचों नें किसान और उसकी पत्नी को छोड़ दिया।

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