जौहरी की सूझबूझ

बहुत समय पहले की बात है कि किसी गांव में एक सुनार रहता था। वह लोगों के गहने बनाता और हर ग्राहक को अपनी चिकनी चुपड़ी बातें करके उसका मन मोह लेता था। उसकी दुकान पर अधिकतर लोगों की भीड़ लगी रहती थी वह बहुत ही चतुर था। हर एक आने जानें वाले ग्राहकों की उसे खबर होती थी कि कौन आ रहा है कौन जा रहा है? उसने अपनी दुकान पर कोई भी चौकीदार वगैरह नहीं रखा था इसलिए कि उसको उन्हें भी कुछ रुपया देना पड़ेगा इसलिए वह हर एक काम को स्वयं ही करता था। सुबह जल्दी उठकर अपनी दैनिक दिनचर्या से निवृत होकर दुकान पर बैठकर स्वयं ही अपनी दुकान संभालता था। उसका कोई रिश्तेदार या उसका कोई सगा कहता कि थोड़ी देर हम आपकी दुकान पर बैठ जाते हैं परंतु उनको किसी पर भी उस उसको किसी पर भी विश्वास नहीं होता था। वह अपना काम स्वयं करना चाहता था।

एक दिन की बात है कि उसकी दुकान पर लोग शादियों की खरीददारी करने आए हुए थे। शादी के लिए सैट की खरीददारी कर रहे थे। वह सभी को गहने दिखा रहा था। उसको हर बात की खबर होती थी उसके पास कितनी अंगूठियां है। कितने सैट हैं। वह सब उसे याद रहता था। वह हर एक आने जाने वाले पर अपना ध्यान रखता था ताकि कोई उसके गहनों पर हाथ साफ ना करें। उसको कई दुकानदारों ने और कई उसके चाहने वालों ने उसे कहा कि अब तो तुम्हें अपने साथ एक व्यक्ति को अपनी दुकान पर जरूर रखना चाहिए। वह किसी को भी रखना पसंद नहीं करता था क्योंकि उसका एक ही कारण था वह बहुत लालची था। उसे किसी को काम करने के रुपए ना देने पड़े। एक दिन की बात है कि उसकी दुकान पर काफी सारे ग्राहक गहनें खरीदने आए हुए थे। उसकी दुकान पर एक औरत आई। शक्ल से वह एक मध्यमवर्गीय महिला लगती थी। वह आते ही बोली मुझे अंगूठियां दिखाओ। जब वह सुनार उसे अंगूठी दिखा रहा था उस औरत की नजर एक हीरे की अंगूठी पर पड़ी। उस अंगूठी को देखते ही उसके मन में लालच आ गया। क्योंकि वहां पर वैसी बारह अंगूठियां पड़ी थी। उसने अपने मन ही मन में सोचा कि अगर मैं इन अंगूंठीयों में से -एक अंगूठी चुरा लूं तो क्या हो जाएगा।?

सुनार को तो यह मालूम भी नहीं होगा कि ये कितनी अंगूठियां है? इसलिए जब यह कुछ और दिखाएगा तो मैं चुपके से अंगूठी में से एक अंगूठी निकालूंगी। उसने तभी एक सैट की ओर इशारा किया मुझे यह सैट दिखाओ। वह सोने का सैट दूसरे किनारे पर पड़ा हुआ था। उस सुनार नें सैट दिखाने के लिए जैसे ही डिब्बा निकाला उसने जल्दी में दूसरी तरफ से अंगूठी को उसने अपनी बनियान की जेब में डाल दिया। अंगूठी चुरानें के बाद वह बहुत ही डर गई थी। सुनार नें उसे सैेट दिखाया। सैट को प्राप्त करके वह उसे देखने लगी। ताकि सुनार को उस पर जरा भी शक ना हो। सुनार नें उसे अंगूठी चुराते हुए देख लिया था।
सुनार नें जब अपनी अंगूठी के डिब्बे में से एक हीरे की अंगूठी कम देखी तो वह बहुत ही नाराज हुआ परंतु वह कुछ नहीं बोला। अंदर ही अंदर सुनार का खून खौल उठा। वह सोचनें लगा इस औरत से किस प्रकार अपनी चुराई हुई अंगूठी वापस ली जाए। उसके मन में एक विचार आया वह उस औरत से बोला बहन जी आप कहां रहती हैं? अपना पता लिखकर दे दो।? आपका मोबाइल नंबर क्या है।? आप कहां नौकरी करती हैं? आप अपना मोबाइल का नंबर मुझे दे दो। जब भी आपको मेरा कोई नया डिजाइन वाला सेट देखना हो तो मैं सबसे पहले आपको सूचित कर दूंगा। सुनार नेंउसका पता अपने पास लिख लिया था। इस प्रकार उसने उस औरत के बारे में सारी जानकारी हासिल कर ली। अचानक जब उसकी नजर अपनी अंगूठियों के डिब्बे की ओर गई तो वह बोला बहन जी यहां पर एक अंगूठी कम है। वह बोली कहीं तुम मुझे तो चोर नहीं समझ रहे हो। मैंने तुम्हारी अंगूठी नहीं चुराई। मैं तुम्हारी अंगूठी का क्या करूंगी।? वह मुस्कुराते हुए बोला नहीं नहीं बहन जी मैं भला आप को क्यों चोर समझूंगा? दुकानदार ने चारों तरफ नजर दौड़ाई मगर उसे कहीं अंगूठी नहीं दिखाई दी। वह बोला बहन जी आप अपना पर्स भी चेक कर लो कहीं गलती से तो यह अंगूठी आपने अपने पर्स में तो नहीं रख ली। वह महिला भड़क कर बोली तुम लोग हमें चोर समझते हो। वह बोला नहीं बहन जी।

उसने तब तक पुलिस वाले को फोन कर दिया था। उसका फोन नहीं मिला। वह बाहर जाकर फोन करने लगा। उसने अपने विश्वसनीय मित्र को कहा कि तुम मेरा एक काम करना होगा तुम्हें यहां आना होगा क्योंकि एक औरत ने मेरी दुकान में आकर मेरे हीरे की अंगूठी चुरा ली है? तुमने सिर्फ आना है। बाकी मैं संभाल लूंगा। ख्याल रहे तुम्हें पुलिस की वर्दी में आना है देखता हूं पुलिस को देखकर वह सच बोलती है या नहीं। सुनार फोन करके वापिस आ गया वह औरत बोली आप क्या करने गए थे? वह बोला मैं पुलिस को बुलाने गया था। पुलिस का नाम सुनकर वह चौंक कर बोली आपकी अंगूठी यहीं कहीं गिर गई होगी। वह बोली मुझे इजाजत दो। सुनार बोला अभी तो आपने कहा था कि आप अपने बेटे का यंही इंतजार करेंगी। अब आप जल्दी में जाने की बात कर रही हैं। वह औरत बैठकर पत्र पत्रिकाओं को पढ़ने का प्रयत्न करने लगी। वह सोचने लगी कि अगर वह यहां से चली गई तो वह सुनार उसे ही चोर समझेगा। मुझे तो उसे इस तरह से महसूस कराना है कि जैसे कि उसने चोरी की ही ना हो। वह बोला मैडम जी मैं आपको एक घटना सुनाता हूं। मैं अपने भाई के पास पिछले साल बनारस गया हुआ था। मेरे भाई की भी वंहा सोने की दुकान है। वहां पर एक औरत मेरे भाई की दुकान पर सोने के गहने खरीदने आई। उसने अंगूठियों में से एक अंगूठी चुरा ली। उसको अंगूठी चुराते मेरे भाई ने देख लिया। उसने उसे बताया कि आज चतुर्थी है अगर आज कोई चीज चुराता है तो उस पर कलंक लगता है। कलंक लगता ही नहीं बल्कि उसका इतना नुकसान होता है कि वह चोरी करने वाला इंसान कंगाल बन जाता है। अगर वह इंसान किसी को बता दे कि मैंने चोरी की है तो भी उसे क्लॉक लगता है। अगर वह इंसान बिना किसी को कुछ कहे उस वस्तु को वही रख दें जहां से उठाई है तो उसे उस व्यक्ति पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वह औरत बोल पड़ी दुकानदार साहब मैंने चोरी की है। परंतु मेरे भाई ने कहा चोरी करने से कोई लाभ नहीं। तुमने तो अपने मुंह से अपनी चोरी की कबूल कर ली है। तुमने मुझे चोरी की बात बता दी। तुम्हें अब भगवान के कहर से कौन बचाएगा? क्योंकि तुमने यह बातें अपने मुंह से कह दी है।

उसी समय भारती का चेहरा देखने लायक था जिस दिन वह अंगूठी खरीदने आई थी उस दिन चतुर्थी थी। उसको महसूस हो गया था कि वह भी चतुर्थी वाले दिन अंगूठी खरीदने आई थी। क्योंकि उसने भी तो चतुर्थी वाले दिन चोरी की थी। वह डर के मारे कांपने लगी। उसको कांपता हुआ देखकर सुनार बोला बहन जी आप कांप क्यों रहे हैं।? वह बोली मैंने आज सुबह कुछ नहीं खाया। सुनार बोला बहन जी कोई बात नहीं। मैं आप को पानी पिलाता हूं। वह पानी लाने अंदर चला गया।

उस औरत ने सुनार को अंदर जाते देख लिया था। उसने वह अंगूठी जहां से उठाई थी वंही रख दी और मन ही मन खुश हो ग्ई कि अब मुझे कलंक नहीं लगेगा। और मेरे परिवार वालों को भी कुछ नहीं होगा। हे भगवान आज तो मैं बाल-बालबच गई। वह खड़ी थी तभी सुनार पानी लेकर आ गया। वह बोला बहन जी यह लो पानी। वह पानी का गिलास एक ही सांस में पी गई। चोरी छुपे सुनार ने अंगूठी रखते उसे देख लिया था। वहां पुलिस भी आ गई थी पुलिस वाला बोला क्या हुआभाई? सुनार बोला कुछ नहीं। मेरी हीरे की अंगूठी गुम हो गई है। परंतु पता नहीं यहीं कहीं होगी।

पुलिसवाला बोला कहीं इस महिला ने ही तो नहीं चुराई है। सुनार बोला नहीं भाई यह महिला क्यों मेरी अंगूठी चुराने लगी? तुम जाओ यंहीं मिल जाएगी। जब अंगूठी ढूंढी तो दुकानदार ने पाया अंगूठी तो उसी डिब्बे में पड़ी थी। दुकानदार बोला शायद मेरी नजर कमजोर हो गई है। मैंने तुम्हें ऐसे ही बुला लिया भाई मेरे। अब मैं तुम्हें बाहर तक छोड़ कर आता हूं।
सुनार पुलिस इंस्पेक्टर को बाहर छोड़ने जाने लगता है। सुनार ने उस औरत को कहा कि आप यहीं बैठकर अपने बेटे का इंतजार करो। सुनार पुलिस इंस्पेक्टर बने अपने दोस्त के साथ बाहर आकर उससे बोला भाई मेरे अंगूठी उस महिला ने ही चुराई थी मैंने उसे एक कहानी सुना कर उसे अंगूठी रखने पर मजबूर कर दिया। उसका असली वीडियो तो मैं तुम्हें बाद में दिखाऊंगा। जैसे ही सुनार पुलिस इंस्पेक्टर को बाहर छोड़ने गया। वह अपनें आप से बोली शुक्र है भगवान का। सुनार नें मुझे अंगूठी रखते नहीं देखा। मैंने तो मुंह से कुछ भी नहीं कहा। अब तो मुझे भी चोरी का कलंक नहीं लगेगा। क्योंकि आज मैंने इतनी बड़ी भूल कैसे कर दी। मुझे यह भी नहीं पता था कि चतुर्थी वाले दिन कहीं से भी कुछ नहीं उठाते नहीं तो चार गुना दण्ड मिलता है। हमारा तो घर बिक जाता। इस अंगूठी के चक्कर में मैं अपने परिवार वालों से हाथ धो बैठती। चलो आज बाल-बाल बच गई। सुनार अन्दर आ कर बोला बहन जी क्या आपने कुछ कहा? वह बोली मेरे बेटे का फोन आ चुका है वह मुझे दुकान के बाहर मिलेगा। सुनार बोला बहन जी आज तो आप चाय पीकर ही जाइएगा।

उसका पुलिस वाला दोस्त कुछ भूल गया था वह बोला अरे भाई मुझे तो चाय के लिए पूछा ही नहीं चलो मैं भी चाय पीकर जाता हूं। उसने अपना टेप रिकॉर्डर ऑन कर दिया। उसमें भारती के शब्द गुंजनें लगे। चलो आज तो बच गई। मैंने चतुर्थी वाले दिन ऐसी गलती कैसे कर दी।? सुनार ने मुझे अंगूठी उठाते नहीं देखा वर्ना आज मैं रंगे हाथों पकड़ी जाती और आज चतुर्थी वाले दिन जो कंलंक लगता सो अलग उसकी सारी बात रिकॉर्ड हो चुकी थी। असली चोर का पता चल चुका था। सुनार बोला बहन जी आज तो मैं आपको हवालात की सैर करवा ही देता हूं। वह औरत रो-रोकर सुनार के पैरों पकड़कर माफी मांगने लगी। रो रो कर बोली मुझे माफ कर दो। हीरे की अंगूठी देख कर मुझे लालच आ गया था। अब मुझे माफ कर दो। पुलिस इंस्पेक्टर साहब यह बात आप दोनों तक ही सीमित रहनी चाहिए वर्ना एक बहन का अपने भाई पर से विश्वास उठ जाएगा।

सुनार बोला कसम खाओ कि तुम आज के बाद तुम कभी भी चोरी नहीं करोगी वर्ना अभी तुम्हें मैं पुलिस के हवाले कर दूंगा। उसको रोते गिड़गिड़ाते देखकर सुनार द्रवित हो उठा और बोला यह कोई पुलिस इंस्पेक्टर नहीं है। यह तो मेरा विश्वसनीय दोस्त है। मैंने तुम्हें चोरी करते देख लिया था। तुम्हें सबक सिखाने के लिए यह नाटक किया था। सुनार ने उसे माफ कर दिया सुनार ने उसे कहा कि कसम खाओ कि आज के बाद तुम कभी भी चोरी नहीं करोगी। वह सुनार के पांव पकड़ कर बोली भाई आगे से कभी भी ऐसी गलती नहीं होगी। मुझे माफ कर दो सुनार ने उसे माफ कर दिया।

Posted in Uncategorized

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *