झूठा नकाब

शैलेंद्र और शालू के घर में उनकी बेटी स्वीटी और एक बेटा अभि था। स्वीटी तो बचपन से ही चंचल और चुलबुली थी। वह बचपन से ही नर्स बनने का सपना देखा करती थी। गुड्डा गुड़ियों के खेल खेलते हुए भी वह नर्स बनकर इंजेक्शन लगाती रहती थी। एक दिन उनके घर में दूर के रिश्तेदार उसके पापा के एक अंकल आए हुए थे। वह बातों ही बातों में बच्चों से पूछने लगे कि बेटा तुम दोनों क्या बनना चाहते हो? स्वीटी झट से बोल उठी मैं तो नर्स बनना चाहती हूं। उसके पापा उसकी बात काट कर बोले बेटा नर्स तो तुम कभी मत बनना और ना ही पुलिस ऑफिसर। बाकि जो भी तुमने बनना होगा वह बन जाना। रोहित बोला मैं तो पायलट बनूंगा। शैलेंद्र के दोस्त बोले बच्ची बुरा क्या कह रही है? नर्स कोई बुरी नहीं होती। बच्चे बाहर खेलनें चले गए। स्वीटी बचपन से ही नर्स बन कर अपनी मोहल्ले की सहेलियों को इंजेक्शन लगाया करती थी।

धीरे-धीरे समय पंख लगा कर उड़ गया। थोड़ा सा बड़ा होने पर उसे सब ने कह दिया बेटा नर्स बनने का ख्वाब मत देखना। घर में सभी की यही राय थी। घर की राय को कोई मिटा नहीं सकता था। उसके दादा दादी भी यही चाहते थे कि वह नर्स ना बनें।

नीतू के माता-पिता उसकी पढ़ाई के विरुद्ध नहीं थे। उसे कहते थे कि जितना मर्जी पढ़ ले नौकरी करनी है तो वह भी ठीक है मगर नर्स और पुलिस को छोड़कर। स्वीटी के बारहवीं की परीक्षा में बहुत ही अच्छे अंक आए। वह खुश नजर आ रही थी। स्वीटी ने सोचा शायद मेरे अच्छे अंक देखकर मेरे माता-पिता का दिल पिघल जाए। वह अपने पिता के पास जाकर बोली पापा मुझे नर्स बनना है। पापा मेरी बात मान जाओ। उसके पापा बोले इसीलिए तो तू मेरे पास आई है। नहीं, मैं तुम्हें कभी भी नर्स बनने के लिए नहीं भेज सकता। नर्सों को तो ना जाने क्या-क्या करना पड़ता है? वह बोली क्या-क्या करना पड़ता है पापा? सभी मरीजों की देखभाल करनी पड़ती है। एक रोगी की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म होता है। उनकी सेवा इस तरह से करनी पड़ती है जैसे एक मां अपने बच्चे की करती है। इसमें क्या बुराई है।? आपको यह बुरा लगता है कि लोग क्या कहेंगे? हमारे परिवार में नर्स बनना अच्छा नहीं समझा जाता। पापा अगर नर्स रोगी को ठीक ढंग से ना देखे तो वह कभी ठीक ही नहीं होगा। नर्स को तो नम्रता और सहनशीलता की मूर्ति होना चाहिए।

मेरा तो बचपन से एक ही सपना है मैं एक अच्छी नर्स बन कर अपने माता पिता और अपने देश का नाम रोशन करना चाहती हूं इसके लिए मुझे बाहर भी जाना पड़े तो मैं पीछे नहीं हटूंगी। मैं तो सरहद पर भी काम करना पसंद करूंगी जहां पर सैनिक अपनी जान न्योछावर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। वह तो मौत से भी नहीं घबराते।

मैं तो आगे तभी पढ़ूंगी अगर आप मुझे आगे के प्रशिक्षण के लिए भेजेंगे। घर वालों ने उसे नर्स बनने की आज्ञा नहीं दी। दस पन्द्रह दिन स्वीटी ने अपने आप को घर के अंदर बंद कर लिया फिर भी उनके घर वाले नहीं माने। एक दिन उसकी सहेली श्वेता आ कर बोली। अंकल आपने स्वीटी की क्या हालत बना दी है? स्वीटी के पापा बोले हालत तो उसने खुद चुनी हैं।। हम तो उसको किसी भी चीज की मनाही नहीं करतें है। मनाही है तो नर्स बनने के लिए। हमारे यहां पर लड़कियों का नर्स बनना अच्छा नहीं समझा जाता। वह बोली अंकल मैं स्वीटी को समझाऊंगी।

श्वेता स्वीटी के पास जाकर बोली इस प्रकार अगर घर में बंद रहोगी तो क्या तुम्हारी समस्या सुलझ जाएगी? इस तरह समस्या सुलझनें लगी तो ठीक है। यहीं पर बैठी रहो। घुटती रहो। जो मैं कहना चाहती हूं वह सुनो। तुम तो इतनी होशियार हो। तुम उनसे पूछो ही मत।

मेरी एक अस्पताल में जान पहचान है। मेरी चाची एक अस्पताल में काम करती है वहां पर नर्स का प्रशिक्षण करवाया जाता है। तुम्हें इस काम में आनंद आता है तो तुम थोड़े समय के लिए अस्पताल में काम कर सकती हो। मैं चाची से कहकर तुम्हें वहां पर भिजवा सकती हूं। तुम दो-तीन घंटा वहां पर काम किया करो। तुम्हारा मन भी बहल जाएगा और तुम भी खुश रहोगी। स्वीटी बहुत खुश हो गई। अरे यार तुम्हारा तो दिमाग बहुत चलता है। वह उसके साथ चलने के लिए तैयार हो गई श्वेता बोली अंकल आज मैं अपनी सहेली को अपने साथ ले जाना। चाहती हूं स्वीटी के पापा बोले मैं इसे कहीं जाने से कंहा मना करता हूं स्वीटी अपनी सहेली के साथ उसकी आंटी के अस्पताल में गई। वहां पर वह सारे कार्यकर्ताओं से मिली। श्वेता की आंटी ने कहा बेटा अगर तुम्हें नर्स बनने का शौक है तो यहां पर नर्स का प्रशिक्षण चल रहा है। तुम यहां एक-दो घंटे सब सीख सकती हो। वहां पर वह नर्स का कार्य सीखने लगी।

उसने घर में कह दिया पापा मैं कॉलेज में पढ़ना चाहती हूं। उसके पापा ने उसे कॉलेज में दाखिला लेने से नहीं रोका। उसने चुपचाप नर्स के प्रशिक्षण में दाखिला ले लिया। उसके अपने घर में किसी को भी नहीं पता था कि वह नर्स का प्रशिक्षण ले रही थी। वह उसी अस्पताल में मरीजों की देखभाल करने में लगी। उसे यह कार्य करने में बड़ा ही मजा आता था।

उसके अच्छे काम को देखकर अस्पताल के सभी कर्मचारी उसे सिस्टर निवेदिता कह कर पुकारते थे। उसे स्वीटी नाम से कोई भी नहीं जानता था। वह सबके दिलों में अपना स्थान बना लेती थी। जब भी कोई मरीज कराह रहा होता तो दौड़कर उसे देखने चल जाती। वह सभी मरीजों को कडवी से कडवी दवाई भी प्यार प्यार से खिला देती। जब कोई मरीज दवाई नहीं खाता तो सारे डाक्टर सिस्टर निवेदिता को बुला कर ले जाते। वह घर जल्दी चले जाती थी। उसनेंं सभी सहकर्मियों को बताया था कि अगर मेरे परिवार का कोई कोई भी सदस्य मिले तो यह मत बताना कि मैं यहां नर्स का प्रशिक्षण ले रही हूं क्योंकि उसके पिता उसे नर्स बनने की इजाजत नहीं देते। सारे के सारे अस्पताल के कार्य कर्ता उसके काम से खुश थे क्योंकि वह बिना वेतन लिए वह दो घंटे वहां पर काम भी कर रही थी और प्रशिक्षण भी ले रही थी।

आज वह नर्स की डिग्री ले चुकी थी। उसके पापा बोले बेटा तुमने कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी कर ली है बेटा। तुम नौकरी करना चाहते तो कोई भी इंटरव्यू दे सकती हो। नर्स बनने के बारे में सोचना भी मत।

उसके पापा ने उसकी शादी के लिए एक लड़का भी देख लिया। जब उसने सुना कि उसकी शादी का फैसला किया जा रहा है। वह अपने पापा को बोली पापा मैं अभी शादी नहीं करना चाहती। उसके पापा बोले नहीं बेटा लड़की को शादी कर के दूसरे घर जाना ही पड़ता है। वह बोली वह तो ठीक है। तुम्हारे लिए हमें रोहण को पसंद किया है। वह पेशे से डॉक्टर है। उसके पिता मेरे अच्छे दोस्त हैं। वह अगर तुम्हें पसंद करेगा तब तो ठीक है वर्ना तुम्हारे लिए कोई और लड़का देखना पड़ेगा। ठीक है पापा जैसा आप उचित समझे।

वह सोचने लगी कि वह रोहण को मिलने उसके घर जाएगी। उसके पापा मम्मी से पूछेगी कि आपको बहू के रूप में एक नर्स कैसी लगती है।? वह अगर एक नर्स को अपनी बहू बनाना चाहते हैं तो ठीक है वर्ना वह शादी कभी नहीं करेगी। वह बिना शादी किए ही रोगियों की देखभाल किया करेगी। वह अपने घर को छोड़ देगी और अपना जीवन उनकी देखभाल में ही लगा देगी।

एक दिन स्वीटी रोहन के घर का पता मालूम करके उसके घर पहुंच गई। घर पर दरवाजा खटखटाने पर घर की मालकिन ने दरवाजा खोला। नौकर ने बताया कि यह शिवानी जी का घर है। उसकी मम्मी ने उसे बताया था कि शिवानी तुम्हारी होनें वाली सास का नाम है। उसनें जाकर उनके पांव छू कर बोली मैं डाक्टर रोहण से मिलना चाहती हूं। शिवानी उसकी ओर देख कर बोली कि तुम कौन हो? और यहां क्यों आई हो? वह बोली मेरे माता-पिता ने हमारा रिश्ता जोड़ा है आपके बेटे के साथ। आप क्या चाहती हैं?वह बोली मैं क्या चाहूंगी? मां जी मैं आपके बेटे के साथ खुशी-खुशी शादी करने के लिए तैयार हूं। लेकिन मेरी एक शर्त है

मैं अपने माता-पिता को बताए बगैर आपसे मिलने चली आई। क्या आप एक नर्स को अपने घर की बहू आएगी? वह बोली मैं एक नर्स को कभी भी अपने घर की बहू नहीं बनाऊंगी। हमने तुम्हारे माता-पिता से पहले ही पूछ लिया था वह बोली मां जी मैं तो ऐसे ही कह रही थी। मैंने सोचा कि अपने ससुराल को देखने में क्या बुराई है इसलिए मैं यहां चली आई। मैं आजकल की पढ़ी-लिखी लड़की हूं। क्या आपको बुरा लगा? वह बोली नहीं मुझे क्यों बुरा लगेगा?

स्वीटी बोली कि आपके बेटे कौन से अस्पताल में काम करते हैं? उसकी सास बोली कि वह संजीवनी अस्पताल में काम करते हैं। संजीवनी अस्पताल का नाम सुनकर स्वीटी चौंक गई। वह भी तो उसी अस्पताल में नर्स का परीक्षण प्रशिक्षण ले रही थी। उसे कैसे पता चलेगा। वंहां तो ना जाने कितने डॉक्टर काम करते हैं? अब तो मुझे उनसे पता करना ही पड़ेगा कि वह एक नर्स को अपनी पत्नी बनाना पसंद करते हैं या नहीं। जब वह हस्पताल में वापस आई तो वह डॉक्टर रोहण से मिली। उसे स्वीटी नाम से तो कोई भी नहीं जानता था। उसे सिस्टर निवेदिता के नाम से ही सब जानते थे। डॉ रोहन उस से मिलकर बहुत खुश हुआ।। वह बोला तुम जैसी होनहार और सभ्य लड़की से कौन शादी करना नहीं चाहेगा? वह बोली मेरी मां पिता और आप के परिवार के लोग सब मेरे नर्स बनने के खिलाफ हैं। मैंनें आपके घर में जाकर मां जी से पूछा कि क्या आप एक नर्स को अपनी बहू के रूप में देखना चाहती है। वह बोली नहीं मैं एक नर्स को अपनी बहू बनाना नहीं चाहती। वे सब के सब अभी भी रूढ़िवादी विचारों से ग्रसित है। उन्हें यह नहीं पता कि नर्स का काम तो इतना शोहरत वाला होता है।

डॉ रोहन बोला मैं तुम्हारे अतिरिक्त किसी से भी शादी नहीं करूंगा। स्वीटी ने अपनी सारी कहानी रोहन को सुना दी। उसके मां-बाप ने उसे नर्स का काम करने की इजाजत नहीं दी।

मैंने उन्हें झूठ कहा कि मैं कॉलेज में पढ़ रही हूं और मैं अस्पताल में जाकर नर्स का प्रशिक्षण लेने लगी। रोहन बोला वक्त आने पर वह सब समझ जाएंगें। हम उन्हें जब तक मना नंहीं लेंगे तब तक शादी नहीं करेंगें।

एक दिन शैलेंद्र उसकी पत्नी शालिनी और रोहन के माता-पिता ने शादी की खरीदारी के लिए और शादी की बात चलाने के लिए आपस में मिलने का प्रोग्राम बनाया। शैलेंद्र और उसकी पत्नी ने रोहन के माता-पिता को एक होटल में मिलने का निमंत्रण दिया। उन्हें चार बजे होटल ताज में मिलना था। वायदे के मुताबिक वे वहां पर इकट्ठे हुए। शादी का मुहूर्त निकलवाया। जब चारों वापिस जा रहे थे तो रास्ते में जहां रोहण के माता-पिता ने उतरना था रास्ते में गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। गाड़ी का तो चकनाचूर हो गया। गाड़ी पहाड़ी के मार्ग पर एक ढलान से जा टकराई।

स्वीटी और श्वेता पिकनिक के लिए कॉलेज की तरफ से देहरादून आई हुई थी। स्वीटी ने जैसे ही दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी को देखा तुरंत उन्हें संजीवनी अस्पताल पहुंचाया। स्वीटी अपने साथ नर्स का सामान भी अपने साथ रखती थी। उसने उन्हें इंजेक्शन लगा दिया था। चारों को काफी चोटें आई थी।

स्वीटी की आंखों से आंसू आ गए उसके माता-पिता और उसके होनें वाले सास ससुर संजीवनी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। तीन दिन बाद उनको होश आया। स्वीटी का भाई रोहित भी वहां पहुंच चुका था। होश आने पर वे अपने आप को एक अस्पताल में देख कर हैरान हो गए। डॉ रोहन ने आकर उन्हें हैरान कर दिया। डॉ रोहण बोला अगर आज आप यहां सब वक्त पर नहीं पहुंचते तो आप लोग इस दुनिया में नहीं होते। शुक्र करो उस लड़की का जिसनें इंजेक्शन उपलब्ध करवा दिया और आप लोंगों को बचाया। उस जंगल में आप चारों की उस लड़की ने देवी बनकर आपके प्राणों की जान बचा ली। चारों के सिर पर चोट लगी थी वह बोले हम उस लड़की से मिलना चाहते हैं। जल्दी से उस लड़की को हमसे मिलवा दो।

रोहन बोला उस बच्ची ने एक नर्स का काम बखूबी निभाया। उसने अपना खून देकर और जल्दी से आपके खून को उपलब्ध कराकर आप लोगों की जान बचाई। रोहण के माता पिता और स्वीटी के माता-पिता ने उस लड़की का धन्यवाद करनें के लिए अपने बेटे रोहन से कहा कि जल्दी से उसको बुला कर लाओ। उन्होंनें पूछा उसका क्या नाम है? डॉ रोहन बोला कि उसका नाम सिस्टर निवेदिता है। रोहण स्वीटी को बुलाकर लाया।

शैलेंद्र अपनी बेटी को देखकर और रोहण की मां स्वीटी को देखकर बोली बेटा हमें माफ कर दो। शैलेन्दर बोले यह सिस्टर निवेदिता नहीं है यह तो मेरी बेटी है। रोहन बोला आप सब लोग इसको नर्स बनने के लिए मना करते थे।

बचपन से ही इसमें नर्स बनने की चाह थी। वह कॉलेज नहीं जाना चाहती थी। वह तो नर्स का प्रशिक्षण ले रही थी। सब हैरान होकर स्वीटी को देख रहे थे। आज हम अपने वचनों को वापस लेते हैं । आज हम जान गए कि नर्स का काम तो मरीजों की जान बचाना होता है। तुमने अपना कर्तव्य बखूबी निभाया।

आज हम ही कहते हैं कि बेटे तुमने बहुत ही अच्छा काम किया। हम तुम्हारे नर्स बनने पर गुस्सा नहीं है। आज तक सभी ने यही कहा था हम सभी से सुनते आए थे कि नर्स बनना लड़कियों को शोभा नहीं देता। सुनी सुनाई बातों पर हमनें विश्वास कर लिया था। बेटी हमें माफ कर दो। हमें तो नर्स बहुत ही पसंद है। आज तुम्हारे जज्बे को हम सलाम करतें हैं। कल ही हम तुम दोनों की सगाई कर देते हैं।आज इसने हमें सच्चाई से अवगत करा दिया है। आज से हम तुम्हें नर्स बनने के लिए नहीं रोकेंगे।

रोहन ने स्वीटी का हाथ पकड़ा और बोला आज हमारे माता पिता की आंखों से झूठ का नकाब उतर गया है। अब हम खुशी-खुशी शादी करने के लिए तैयार हैं।

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