पवित्र रिश्ता

 बहुत समय बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में  रघु नाम का एक किसान रहता था। वह हर दिन बहुत मेहनत करता और अपनी पत्नी और बच्चे का पेट भरता था। उसकी एक बेटी थी वह उसे हमेशा बहुत ही खुश रखता था। मेहनत करके वह अपने घर की आजीविका बसर कर रहा था। एक दिन अचानक उसकी जिंदगी में एक बहुत ही भयानक हादसा हुआ। उसका सारा घर परिवार बाढ़ की चपेट में आ गया। उसका कुछ भी नहीं बचा वह अपनी बेटी से बहुत ही ज्यादा प्यार करता था। उसके बिना एक भी पल जीवित नहीं रह सकता था अब उसको संभालने वाला कोई नहीं था वह सोचने लगा कि अब मैं किसके लिए जीऊं। अकेली जिंदगी भी कोई जिंदगी होती है। इस प्रकार उस रघु को निराशा ने घेर लिया हरदम मेहनत करने वाला रघु सोचने लगा  मेहनत करने से कुछ नहीं हासिल होता है। मेरे पास सब कुछ था। परंतु अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा मैं क्या करूं कहां जाऊं।

 

यह सोच कर वह शहर की ओर चल दिया। ऐसे शहर  बम्बई में चला गया था पर कोई उसको जानता भी नहीं था इसकी कोई जान पहचान नहीं थी। उसके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं था। क्योंकि उसका सारा रुपया पैसा धन दौलत जो भी कुछ था वह सब बाढ़ की चपेट में बह गया था। उसके पास वही शेष था जो कुछ उसने पहना हुआ था। उसके इलावा उसके पास कुछ भी नहीं था। वह ऐसा ही भूखे ही एक स्टेशन पर सो गया। सारी रात उसने कुछ भी नहीं खाया था। उसे नींद कहां से आती। तभी उसने देखा सामने से दो चोर चोरी कर कर के जा रहे थे। उन दोनों चोरों ने उसे सोए हुए देखा और उसकी जेब टटोलने लगे उसकी जेब में उन्हें कुछ भी नहीं मिला अभी चोरी करने के लिए ही वहां पर आए थे तभी उस किसान की मन में आया क्यों ना मैं भी चोरी करके ही अपना पेट भर लूंगा। वह अचानक उठ गया और उसने उन चोरों पर जोर से घुसेंऔर लातों का प्रहार किया। दोनों चोर तो भागने ही वाले थे परंतु अचानक उनमें से एक का पर्स नीचे गिर गया। चोर तो भाग गए मगर उसे जीने का नजरिया मिल गया। उसने आस पास देखा उसे कोई देख तो नहीं रहा है वह चोर किसी का पर्स चुरा कर भाग रहे थे उसने पर्स को उठा लिया वह अपनी बेटी के साथ एक रेस्टोरेंट में खाना खाने के लिए चला गया। अंदर से उसका मन कर रहा था कि मैं उस पर्स को जिसका भी है उसे वापस कर दू एक आत्मा कह रही एक आत्मा कह रही थी उसे अगर काम नहीं मिला तो कैसे जीएगा अपनी बेटी को क्या खिलाएगा । उसके पास तो कुछ भी नहीं बचा है जो थोड़े बहुत रुपए थे वह यहां पहुंचने में खर्च हो गए।  उसने अपने मन को मना लिया अकेला मैं ही थोड़ा एक ऐसा आदमी हूं जो चोरी करता हूं चोरी नहीं करूंगा तो कहां से खाऊँगा। इस वक्त तो खाना मिलना बहुत ही जरूरी है। मेरी बेटी ने सारे दिन से कुछ भी नहीं खाया।  वह रेस्टोरेंट में जाने ही वाला था कि उसे वहीं पर एक औरत नीचे गिरी हुई दिखाई दी।  सभी उसकी तरफ दया की दृष्टि से देख रहे थे। उसे उठाने का कोई भी जतन नहीं कर रहा था। मुझसे नहीं रहा  गया।  आव देखा ना ताव सबको गुस्सा  दिखाते हुए बोला क्या तमाशा है? एक तो बेचारी औरत सड़क पर गिरी है और तुम सभी उस पर दया की जगह इस  का मजाक उड़ा रहे हो ं। जाओ अपने अपने घरों को मैं इसे अस्पताल पहुंचा दूंगा। लोग उसकी बातें सुनकर इधर उधर खिसक गए थे। वह भूखी होने की वजह से चक्कर खाकर गिर गई थी उसने होटल के आदमियों से पानी मंगवाया और उस पर छिड़का। वह होश में आ चुकी थी किसान ने पूछा तुम यहां पर क्यों गिरी हुई थी।? तुम्हें शायद चक्कर आ गया होगा। तुम इतना ज्यादा काम क्यों करती हो? वह बोली साहब इस पेट के लिए काम ना करें तो क्या करें। झुमरी मर जाएगी मगर अपनी आबरू पर कोई दाग नहीं लगने देगी। मुझे 2 दिन से खाने को कुछ भी नहीं मिला था मैंने मन में प्रण कर लिया था कि मैं ईमानदारी से ही अपना काम करूंगी। बाबूजी पर लगता है कि यह इमानदारी वगैरह सब एक तरफ रह जाते हैं। जब इंसान को भूख लगती है तो वह तो अपने सगे-संबंधियों को भी नहीं बख्शता। मैंने कसम खाई है कि मैं कभी भी अपने विश्वास को ठेस नहीं लगने दूंगी। 2 दिन से उसे खाने को भी नहीं मिला है मुझे कोई काम भी नहीं मिला बाबूजी आज मैं पढ़ी लिखी होती तो यूं दर-दर की ठोकरें नहीं खाती। मैं केवल आठवीं तक पढी हूं। मुझे कहीं ना कहीं तो काम अवश्य मिलता। मेरी ईमानदारी ही मेरा गहना है। रघु उसकी बातें सुनकर हैरान रह गया। एक  पर्स को लेकर अपनी सोच को बदल बैठा था। उसने झुमरी को खाना खिलाया उसने देखा झुमरी खाने पर इस तरह टूट पड़ी जैसे आज उसने पूरी तरह खाना खा कर अपना पेट भरा था। वह शाम को धन्यवाद देते हुए बोली साहब आपको भगवान बहुत दे। उसने एक भूखी औरत को गलत रास्ते पर भटकाने से बचा लिया था।

 

वह बोला मैं भी तुम्हें अपनी कहानी सुनाता हूं। गांव सूरत में मेरा पूरा भरा पूरा परिवार था। एक बार बाढ  नें आकर इतनी भयंकर तबाही मचाई कि हमारा सब कुछ पानी की चपेट में बह गया। मेरे पास मेरी 5 वर्ष की बेटी की इलावा कुछ भी नहीं बचा। मैंने सोचा कि दूसरे शहर में जाकर जिंदगी को नए सिरे से बसा लूंगा। मैं जब वहां पहुंचा तो देखा मेरे सारे पैसे खर्च हो चुके थे। अपनी बेटी को संभालने की जिम्मेदारी थी। एक बार तो मैंने सोचा कि मैं अपनी बेटी को लेकर रेल की पटरी के नीचे आकर आत्महत्या कर लूं। मेरी अंतरात्मा ने मुझे कहा कि डर कर कर जीना तो कायरता की निशानी होती है। सच्चा इंसान वही होता है जो मुश्किलों से कभी नहीं डरता। उसके सामने चाहे कितनी तूफान आ जाए उसका सामना डट कर करता है। मैंने निश्चय कर लिया कि मैं हार नहीं मानूंगा।   मैंने देखा कि कुछ चोर भागने का प्रयत्न कर रहे थे। उनके हाथ में से कुछ नीचे गिर गया था। वह जल्दी में किसी का पर्स चोरी करके भाग रहे थे। मैंने उस पर्स को उठाया और  उसमे पुरे पचास हजार रुपये थे। रुपयों को पाकर बहुत खुश हुआ। मैंने सोचा मुझे जीने का नजरिया मिल गया है। मैंने तुम्हें नीचे गिरे पाया। मैं जल्दी में तुम्हें उठाने लगा। जब तुम भूखी थी हम भी भूखे थे मैंने सोचा क्यों ना खाना खाने में क्या बुराई है।? मैंने अपने मन में सोचा मैंने चोरी थोड़ी की है मुझे तो यह रुपया मुफ्त में मिला है। यह तो मेरी कमाई है। मैंने उसी खाने का ऑर्डर किया। और अब इनमें से एक नया व्यापार करूंगा। झुमरी बोली बाबूजी आज मैं आपको कहूंगी। आप भी मुझे भले इंसान लगे मगर आप इन रुपयों को जिस किसी भी व्यक्ति का ये पर्स हैं उन्हें वापस कर दो। क्या पता इन रूपयों की  उस व्यक्ति को सख्त जरूरत हो।? वह आज आपको मिला है। आप अगर उस रुपए को वापस कर दोगे तो मैं समझूंगी कि आप एक भले इंसान हो। जब तक आपको काम नहीं मिलता तब तक आप और आपकी बेटी मेरी खोली में रह सकते हैं। तब तक मैं अपनी चूड़ियां बेच कर अपनी खोली चला सकती हूं। किसान उसकी हिम्मत देखकर खुश हो गया  बोला तुमने मुझे एक बहुत बड़ा पाप करने से बचा लिया। मैं आज ही जाकर उस पते पर उस साहब से मिलकर उसके रुपए लौटाने का प्रयत्न करूंगा। जब तक तुम मेरी बेटी को अपने पास रखना। किसान ने पर्स में से एक डायरी निकाली उस पर लिखे हुए पते पर पहुंच गया।

 

वहां जाकर उसने दरवाजा खटखटाया। वहां पर एक 35 वर्ष के लड़के ने दरवाजा खोला। उसकी आंखें रो-रोकर सूजी हुई थी। वह बोला आपको किससे मिलना हैं?। रघु बोला मैं अंशुल से मिलना चाहता हूं। रघु बोला क्या तुम ही अंशुल हो? वह बोला आप क्यों पूछ रहे हो? रघु बोला कि जब मैं अपनी बेटी के साथ ट्रेन में सफ़र कर रहा था तो मुझे एक गिरा हुआ पर्स मिला। चोर चोरी कर उस पर्स को वही फेंक कर चले गए थे। पुलिस के आदमी पहरा दे रहे थे। मैंने वहां पर से वह पर्स उठा लिया। मैंने भी बाढ़ की चपेट में अपना सब कुछ खो दिया था। मैं अपनी बेटी के साथ काम की तलाश में आया था। मुझे आपका पर्स मिला मैंने सोचा क्यों ना मैं इन रुपयों से अपना कारोबार चलाऊं परंतु एक लड़की ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया वह मुझे एक अनजान शहर में मिली। वह दो दिन से भूखी थी। उसने कभी किसी से भीख नहीं मांगी और ना ही चोरी की। उसने मुझे कहा कि अगर आप चोरी किए हुए रुपयों से अपना कारोबार खड़ा करोगे तो आप जिंदगी में कभी खुश नहीं रह पाओगे। आप यहां नए सिरे से काम ढूंढो। मैं इस काम में तुम्हारी मदद करूंगी। जिस किसी का भी यह पर्स है उसे लौटा कर आओ। मैं तुम्हारी बेटी को तब तक अपने पास रखूंगी। मुझे इतनी खुशी हो रही है कि मैं बता नहीं सकता।

 

अंशुल बोला मैंने तो सारी आस ही खो दी थी। आज मेरे पापा का ऑपरेशन होना था। मेरे पास उनके इलाज के लिए जो रुपए थे वह चोरी हो गए थे। मैंने सोचा था कि मेरे पापा को अब कोई नहीं बचा सकता लेकिन लगता है आप फरिश्ता बनकर मेरे रुपए लुटाने आए हैं। मैं आपका जितना भी शुक्रिया अदा करूं वह थोड़ा है। मैं उस लडकी का शुक्रिया अदा करने भी उसके घर अवश्य आऊंगा। अंशुल के पापा ठीक हो चुके थे। उनका ऑपरेशन सफल हो चुका था। उसके पापा का विदेश में करोड़ों का कारोबार था। वह दूसरे देश में आकर सैटल हो गए थे। इसलिए उनका अपना सारा रुपया वही बैंक में था। अचानक अंशुल के पापा को दूसरे देश में आते ही बीमारी ने घेर लिया। इस कारण जो भी रुपया था वह भी चोरी हो चुका था। अंशुल सोच रहा था कि एक बार मेरे पापा ठीक हो जाएंगे तब वह अपने रुपए लेकर वापस आ जाएगा। रघु अंशुल को रुपए देकर वापस आ चुका था। रघु ने झुमरी के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया। उसे छोटा-मोटा काम मिल गया। वह लोगों का सामान कंधों पर ले जाकर थोड़े बहुत रुपए कमा लेता था। झुमरी भी खुश थी। वह बोली तुम मेरे भाई हो। क्या मैं तुम्हें भैया बुला सकती हूं?। एक दिन झुमरी ने किसान को बताया कि मैंनें अपने बैंक में  पास बुकमें ₹50000 इकट्ठे किए हैं। यह  मेरी सारी उम्र भर की कमाई है। उसने  को बताया कि उसको एक लड़का पसंद करता है। सचमुच  ही वहमुझसे शादी करना चाहता है।

 

रघु बोला शादी का फैसला इतनी जल्दी नहीं लेते पहले। मैं उस लड़के के बारे में अच्छी तरह पता कर लूं कहीं वह तुम्हें धोखे से तुमसे शादी तो नहीं कर रहा है। बहन तुम बहुत ही भोली हो। वह बोली नहीं वह सचमुच में ही मुझसे बहुत ही ज्यादा प्यार करता है। उसकी मां के इलाज के लिए 20, 00, 000 रुपए की जरूरत थी। तो मैंने उसे उधार दिए हैं। वह जल्दी ही मेरे रुपए लौटा देगा। तभी तो मेरे पास उस दिन खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था। जो थोड़े बहुत रुपये थे वह मैंने बैंक में डाले हैं। आज से तुमने मुझे अपना भाई माना है।

 

मैं भी अपनें यानी होने वाले जीजा को देखने चुपके से उसके घर जाऊंगा। रघु जब अखिल के घर पर पहुंचा तो देखा बाहर ताला लगा था। अंदर से जोर जोर की आवाजें आ रही थी। वह कान लगाकर सुनने लगा आखिर एक सेठ जी से कह रहा था कि सेठ जी मैं एक लड़की से शादी कर रहा हूं। उसका नाम झुमरी है। वह गांव की भोली भाली लड़की है। मैं उससे प्यार नहीं करता। मैं तो शादी करने के बाद उसको तुम्हें बेच दूंगा। बोलो आप उसे खरीदने के क्या रुपए देते हो? सेठ बोला ठीक है। मैं तुम्हें ₹20000 दूंगा। अगर लड़की अच्छी होगी तो ₹30000 दूंगा। रघु तो अखिल की सच्चाई सुनकर हैरान रह गया। उसने आकर झूमरी को बताया कि जिस लड़की के साथ तुम शादी करने जा रहे हो वह लड़का फरेबी है। वह तुम्हें धोखा दे रहा है।

 

झुमरी ने सोचा मेरे भाई के दिमाग में शायद कुछ और ही चल रहा है। शायद वही मुझसे शादी करना चाहता है। वह किसान पर बहुत ही गुस्सा हुई। मैं आज से तुम्हें अपने घर पर नहीं रखना चाहती। मुझे तुम्हारी नियत पर शक था। आज तो तुम्हारी सचमुच का मुझे पता चल चुका है कि तुम मुझ पर गंदी नजर रखते हो। झुमरी मर जाएगी मगर अपनी आबरू पर आंच नहीं आने देगी।

 

रघु को इतना बुरा लगा कि वह अपनी बेटी को लेकर ट्रेन में वापस अपने गांव आने का विचार कर लिया था। उसने सोचा यह शहर भी उसे रास नहीं आया। जिसको अपना सच्चा हमदर्द समझा वही मुझे समझ नहीं सका। वह अपनी बेटी के साथ वापस अपने गांव आ गया कुछ एक ही लोग वहां पर रह रहे थे। उसने वहां पर काम मजदूरी करके धीरे-धीरे अपनी एक खोली बना ली। अपनी बेटी के साथ रहने लगा।

रघु  जब 2 दिन तक वापस नहीं आया तो झूमरी को दुख हुआ कि मेरी वजह से मेरा इतने प्यारे भाई का साथ मुझसे छूट गया,,

उसके मन में कोई खोट नहीं था। इसलिए वह वहां से चला गया। झुमरी फूट-फूट कर रोने लगी मैं कहां उसे ढूंढें। कहां जाऊं हे भगवान मैंने अपने देवता तुल्य भाई को खो दिया। पहले तो मैं उस अखिल के बच्चे को ऐसा सबक सिखाऊंगी कि वह भी याद करेगा। वह उसके शहर से चलने के लिए एक ट्रेन में बैठकर ट्रेन में उसकी मुलाकात एक लड़के अंशुल से हुई अंशुल को वह लड़की बहुत ही अच्छी लगी। अंशुल को बोली मैं एक छोटी सी  खोली में रहती हूं। बाबूजी मैं अपना पेट ईमानदारी से भर्ती हूं। बाबूजी सोच लो अगर आपने मुझे कुछ कहा या बुरी नजरों से देखा तो मैं चेंन खैंच दूंगी। झुमरी किसी से नहीं डरती। झुमरी अपना बचाव करना जानती है। वह बोली आप क्या करते हैं? अंशुल बोला मैं पेशे से वकील हूं। वह बोली आप तो सच को झूठ और झूठ को सच साबित करते होंगे। वकील साहब आपको  भी मेरा एक काम करना होगा

मैं एक लड़के से प्यार करती हूं। मैं  उसका पता लगाना चाहती हूं कि वह भी मुझे प्यार करता है या नहीं।  मेरे भाई ने मुझे बताया कि वह तुम से प्यार नहीं करता। वह तुम्हें एक सेठ जी को बेच देना चाहता है। पहले वह तुमसे शादी करके उसके बाद तुम्हें सेठ बिहारी को ₹30000 में बेच देगा। मैं उस अखिल का पता करने गया था। मुझे अपने भाई की सच्चाई पर विश्वास नहीं आया। वह कुछ दिन पहले ही गांव से अपनी बेटी को लेकर आया था। उसका सब कुछ बाढ़ में बह गया था। उसके पास एक पर्स था वह भी चोरी हो गया था। वह चोरी का पर्स था उसमें किसी व्यक्ति के 500, 000 रुपए थे। पता नहीं उसने वह उस इंसान को लौटाएं होंगे या नहीं। मुझे झूठ मूर्ख बना कर कहा कि मैं उस व्यक्ति को रुपए वापस करने जा रहा हूं। वह मेरे घर से चला गया लेकिन मुझे उसकी बातों में सच्चाई नजर आई। मैं पता लगाना चाहती हूं कि आखिर सचमुच में ही  अखिल मुझे प्यार करता है या मेरे साथ धोखा कर रहा है। आप उस काम में मेरी मदद करेंगे तो मैं आपको अपना दोस्त समझूंगी अंशुल  झुमरी से बोला  हां। वह इंसान मैं ही था। मेरे ही रुपए चोरी हो गए थे। मैंने उस इन्सान को ढूंढने की कोशिश की ताकि उस भले इन्सान की  मदद कर सकूं।  उसने मुझे बताया बाबूजी आप मुझ पर दया मत करो। आपकी मदद करने के लिए मेरी बहन ने कहा था। मेरी बहन ही नहीं मुझे सीख देने वाली मेरी गुरु भी है। मैं उसके सामने नतमस्तक होकर उसे प्रणाम करता हूं।   भगवान ऐसी बहन मुझे पहले मिली होती तो आज मेरी जिंदगी पता नहीं क्या होती। झुमरी की आंखों में आंसू आ गए। मैंने अपने भाई  रघुके विश्वास को ठेस पहुंचाई। मैं एक अच्छी बहन साबित नहीं हो सकी। मैं अपने भाई को ढूंढने उसके गांव अवश्य जाऊंगी।

अंशुल बोला सचमुच में तुम एक देवी हो। अंशुल नें झुमरी के साथ मिलकर अखिल को ढूंढ निकाला। सच में वह धोखेबाज इंसान था। उसने ना जाने कितनी ही लड़कियों को शादी के प्यार के चक्कर में फंसा कर उसे सेठ जी के पास बेच कर कोठे पर बिठा दिया था। अंशुल नें झुमरी को कहा कि मैं तुमसे शादी कर सकता हूं। बाबूजी बाबूजी मैं ठहरी गांव की गंवार आप एक पढ़े लिखे इंसान हो। वह बोला  मैं तुम्हें पढ़ लिख कर इतना काबिल बनाऊंगा कि सारी दुनिया देखती रह जाएगी। तब तक मैं तुमसे शादी नहीं करूंगा जब तक तुम इतनी काबिल ना बन जाओ। तब तक मैं तुम्हारा दोस्त  बनकर तुम्हें हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहूंगा। उसने झुमरी को पढ़ने के लिए हॉस्टल भेज दिया था। उसने नर्स का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था वह अच्छी नर्स बन चुकी थी। आज वह बहुत खुश थी। उसका तबादला एक छोटे से गांव में हुआ था। उस गांव में खुशी-खुशी आ गई थी। गांव का नाम सुनकर हर गांव में अपने भाई को ढूंढने का यत्न करती थी।। गांव में जब वह हॉस्पिटल से शाम को घर वापस जा रही थी तो वह ऑफिस में एक चपरासी को देखकर  चौंकी। उसनें रजिस्टर में नाम पढा। उसकी शक्ल उसके भाई रघु से मिलती थी। उसने रजिस्टर पर नाम पड़ा रघु। रघु जैसे ही आया उसने रघु के पैर छुए और बोली। मेरे प्यारे भाई आज मैंने तुम्हें ढूंढ निकाला। मैंने तुम्हें कहाँ कहाँ नहीं ढूंढा। तुमने मुझे एक ऐसे अनोखे रिश्ते में बांध दिया था मेरा और तुम्हारा तो जन्म जन्म का नाता था। तुम मुझसे रुठ कर आ ग्ए थे। मेरी अंतरात्मा मुझे धिक्कार रही थी। तुमने मुझे ठीक ही कहा था अखिल अच्छा आदमी नहीं था। वह मेरी कमाई से इकट्ठा की गई दौलत पर अपना हक जाना चाहता था। मेरे प्यारे भाई मुझे माफ कर दो। मैंने आपको गलत समझा। मैं अब तुम्हारे पास वापस आ गई हूं। मैं तुम्हारी छोटी बहन हू। मैं तुम्हें कल किसी से मिलवानें लाऊंगी। दूसरे दिन अंशुल उसको मिलने गांव आया। झूमरी  नें अंशुल को बताया कि मेरा भाई इसी गांव में रहता है आज तुम से मिलने वाला था। जब अंशुल और झुमरी  उनसे मिलने उनके घर आए सामने फोटो पर माला देख कर खामोश हो गए।  झूमरी बोली हमारी छोटी सी गुड़िया कहां है? वह बोला जब मैं वापस आया तो मेरी बेटी को भी बिमारी नें अपनी चपेट में ले लिया। वह नहीं बची। वह फूट फूट कर रोने लगा। उसको रोता देखकर झूमरी भी रोने लगी   भाई मेरे तुम मुझे माफ कर दो। हमारा अनोखा रिश्ता है। एक भाई और बहन का पवित्र रिश्ता आज से मैं आपकी बेटी बनकर  इस अनोखे रिश्ते को और भी मजबूत बनाती हूं। आज से आप सोचना कि आप की छवि वापिस आ गई है। आज रघु अपनी बहन के गले लग कर बहुत जोर जोर से रो रहा था। आज उसके मन से सारा बोझ हट चुका था। वह बोला सचमुच ही मेरी छवि आज वापिस आ गई है। अंशुल बोला यह लो ₹100, 000 का चेक आपकी ईमानदारी के लिए आज आप इस से अस्पताल खोलकर मरीजों का इलाज मुफ्त में कर सकते हो। रघु ने सचमुच में उस अस्पताल को वह रुपया दान कर दिया। अंशुल और झुमरी भी वही गांव में अपनी प्रेक्टिस करने लगे थे। वे तीनों खुशी खुशी रहने लगे थे।

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