बुराई का फल

किसी गांव में एक बुढ़िया अपने बेटे के साथ एक छोटे से गांव में रहती थी। वह बहुत ही अच्छी थी। सोचती कि जब उसे बिना मेहनत किए सब कुछ हासिल हो जाता है तो मैं क्यों मेहनत करूं? क्योंकि इसका बेटा कमा कर ले आता था। उसी से उसके दिन व्यतीत हो रहे थे। वह बुढ़िया ₹1 तक भी किसी को भी खर्च करने के लिए तैयार नहीं थी। दूर-दूर से आने वाले आदमी उसी के गांव से दूसरे गांव की ओर जाते थे। बाहर से आने वाले लोगों को अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में फंसा कर के इंसान को भाप लेती थी कि वह इंसान मूर्ख है या चतुर बिना ₹1 भी खर्च किए बगैर वह उनके मन की बात जान लेती थी। एक बार की बात है कि एक भोला भाला नवयुवक उसी रास्ते से जा रहा था। वह बहुत ही थका हुआ था। उसने उस नवयुवक से बातों ही बातों में पूछ लिया भाई तुम कहां जा रहे हो।? वह बोला दादी अम्मा में घड़े खरीदने जा रहा हूं। गर्मी के मारे मेरा गला सूख रहा है। कृपया मुझे एक गिलास पानी पिलादो। बुढ़िया ने जैसे ही सुना वह घड़े खरीदने जा रहा है वह बोली बेटा ठीक है मैं तुम्हें पानी लेकर आती हूं। तुम बहुत ही थके लगते हो। खाना खाओगे। वह मन ही मन सोचनें लगा। यह दादी कितनी दयालु है जो खाने को पूछ रही है नहीं तो सारा लोग खाने तो क्या पानी के लिए भी नहीं पूछते। वह बोला नहीं दादी मां जब मैं घड़े खरीद कर आऊंगा तब मैं यही से होकर जाऊंगा। तब कुछ खा लूंगा। वह बोली बेटा मैं अपने आप को खुशनसीब समझूंगा अगर तुम मेरे घर पर भोजन करोगे क्योंकि आज मेरे बेटे का जन्मदिन है। वह बोला अच्छा दादी मां शाम को यहीं से होकर जाऊंगा।

बुढ़िया मन ही मन बहुत खुश हुई। अपने गांव में दो लोगों तक को एक गिलास तक पानी के लिए भी नहीं पूछती थी। वह बाहर से आने वाले लोगों को ही अपना मोहरा बनाती थी जैसे ही वह नवयुवक गया वह सोचने लगी जैसे ही वह घड़े लेकर आएगा वह उसका घडा ले लेगी और उसकी जगह अपना टूटा हुआ घड़ा रख देगी।। उस नवयुवक को पता ही नहीं चलेगा इस तरह से मेरी घड़े की कीमत वसूल हो जाएगी।

मैं काफी दिन पहले कुम्हार की दुकान से दो घड़े लाई थी। परंतु दोनों खड़े टूटे निकले। उसनें मुझे टूटे घड़े दिए थे। इन टूटे घडो का मैं क्या करूंगी?। बिल्कुल एक जैसे होंगे तो मैं आज उस नवयुवक से घड़ा चुरा कर ही रहूंगी। वह नवयुवक चलते-चलते कुम्हार की दुकान पर पहुंचा। वहां पर कुम्हारों की चार पांच दुकानें थी। एक दुकान पर पहुंचकर उसने कुम्हार को कहा मुझे एक घड़ा दिखाओ। कुम्हार से एक घड़ा खरीद कर वह नवयुवक बहुत खुश हुआ। उसने ₹250 में एक घड़ा खरीदा। वह सोच रहा था कि इस घड़े को संभाल कर रखेगा। रोज-रोज इतनी दूर आना संभव नहीं होता। घड़ा लेकर वापसी में वह उस बुढिया के घर पहुंचा। बुढ़िया ने देखा वह घड़ा तो बिल्कुल उसके घड़े की तरह ही था। बिल्कुल थोड़ा सा ही अंतर था। बहुत ध्यान से देखने पर ही अंतर दिखाई देता था। उसमें बीच में नीले रंग की धारी थी। उसके घड़े में काले रंग की धारी थी। वह सोचने लगी इस नवयुवक को बेवकूफ बनाना तो बाएं हाथ का खेल है। वह नवयुवक उस बुढिया के घर पहुंचा तो वह बहुत थका हुआ था। बुढ़िया बोली बेटा मुझे तो लगता ही नहीं है कि मेरा बेटा बाहर गया है। तुम में मुझे अपना बेटा ही दिखाई देता है। मैं तुम्हें खाना लगाती हूं। उसने उसे खाना खिलाया। खाना खाकर थोड़ी देर बाद सुस्ताने लग गया। जैसे ही वह सो गया बुढ़िया ने उसका घडाचुरा लिया। उसकी जगह उसने टूटा हुआ घड़ा रख दिया। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद वह अपने घर चलने के लिए तैयार हो गया। घर में उसने अपनी पत्नी को कहा कि आज मैं बहुत ही थक गया हूं। इस घड़े को उठाने में मेरी गर्दन भी अकड़ गई है। कम से कम हमें गर्मियों में ठंडा पानी पीने को तो मिलेगा। उसकी पत्नी ने जैसे ही घड़ी में पानी डाला देखा घड़ा तो टूटा हुआ था। वह बहुत ही दुखी हुआ। और उस कुम्हार को कोसने लगा उसने उसे टूटा हुआ घड़ा दे दिया। कल फिर वापिस जाकर उसके मुंह पर मार के दूसरा घड़ा ले कर आ जाऊंगा।
दूसरे दिन वह उस घड़े को लेकर उस बुढिया के घर के पास से ही आया। बुढ़िया ने उसे देखते ही पहचान लिया। बोली क्या हुआ? वह बोला उस कुम्हार नें मुझे बेवकूफ बना दिया। मुझे टूटा हुआ घोड़ा बेच दिया। मैंने उस वक्त घड़े को चेक भी नहीं किया।

बुढ़िया बोली यहां पर कुम्हारों की पांच दुकानें है। तुम किस कुम्हार से घड़ा लाए थे। वह बोला वह कुम्हार तो मुझे देखने में बहुत ही ईमानदार लगता था। उस कुम्हार का नाम तो मुझे पता नहीं लोग उसे शेखू कह कर पुकार रहे थे। तीन कुम्हार तो बहुत ही होशियार लगे उन्होंने तो घड़े का ₹1 भी कम नहीं किया। मगर उस कुम्हार नें ₹50 छोड़ दिए। वह नवयुवक जब कुम्हार की दुकान पर पहुंचा तो बोला भाई मेरे मैं कल तुम्हारे से एक घड़ा लेकर गया था। वह घोड़ा तो टूटा हुआ था। बोलते-बोलते वह नवयुवक रुवांसा हो कर बोला। कुम्हार बाबू इतनी कड़ी धूप में घड़े को उठा कर मेरी गर्दन अकड़ गई है। यहां पर हमारे घर को जाने के लिए कोई भी बस नहीं है। मुझे सात किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। इतनी कड़ी गर्मी में मेरे बच्चों को गर्म पानी पीना पड़ता है।।
मैं घड़ा पाकर खुश हुआ था परंतु आपसे घड़ा ले जाकर घर में मैंने जैसे ही उसमें पानी डाला वह टूटा हुआ था। कुम्हार को उसके ऊपर दया आ गई। मैंने तो उसको घड़ा बिल्कुल जांच कर दिया था परंतु घड़ा तो टूट नहीं सकता था। कुम्हार बहुत ही दयालु था। सोचने लगा पता नहीं उसका घड़ा किसने चुरा लिया। कोई बात नहीं इसको दूसरा घड़ा दे देता हूं। मैं इस टूटे घड़े को दोबारा ठीक कर दूंगा। बेचारे को तो यह टूटा घड़ा किस काम का नहीं। कोई बात नहीं मैं सोच लूंगा कि एक घड़ा मैंने किसी को यूंही दान कर दिया। कुम्हार ने उसको दूसरा घड़ा दे दिया। शाम के समय उस बुढिया के घर से जा रहा था तो उस बुढ़िया ने पूछा कि तुम्हें कुम्हार ने घड़ा दे दिया वह बोला देता कैसे ना उसने मुझे दूसरा घड़ा दे दिया। बुढ़िया उसकी बात सुनकर बहुत ही खुश हुई। बुढ़िया ने सोचा मैं भी अपना दूसरा घड़ा उस कुम्हार के पास ले जा कर अपना टूटा घड़ा उस की दुकान पर रख दूंगी और उसका घड़ा उठाकर ले आऊंगी।

एक दिन वह बुढ़िया उस कुम्हार की दुकान पर पहुंच गई। वह उस कुम्हार से खूब चिकनी चुपड़ी बातें करने लगी। बातों ही बातों में उसने कुम्हार को कहा भाई मेरे मैं बहुत थक चुकी हूं मेरे पास बहुत सारा सामान है। मेरा बेटा मेरी राह देख रहा है। मुझे एक गिलास पानी पिला दो। कुम्हार बोला दादी मां घड़ा ले कर जाओ वह बोली भाई मेरे पास दो घड़े हैं। मैं कुछ दिन पहले एक कुम्हार की दुकान से दो घड़े ले गई थी। उस कुम्हार ने पूछा किस दुकान से लेकर गई थी। वह बोली मैं चौबे से घड़ा लेकर गई थी। कुम्हारअंदर जाकर उसे पानी लेकर आया। इतनी देर में उस बुढ़िया ने अपना घड़ा उस कुम्हार के घड़े से बदल लिया था। उस बुढ़िया ने उस कुम्हार को भी मूर्ख बना दिया था।

घर पहुंचकर बुढ़िया बहुत ही खुश हुई। मैंने दो घड़े मुफ्त में खरीद लिए। मैंने अपने दोनों टूटे घड़े कुम्हार को और उस नवयुवक को बेवकूफ बनाकर हासिल कर लिए। बुढिया बहुत ही खुश थी। उसने बिना रुपए खर्च किए दोनों घड़े हासिल कर लिए थे। कुम्हार ने देखा कि यह घड़ा तो मेरा बनाया हुआ नहीं है।

उसने देखा वह घड़ा तो कुछ दिन पहले वह नवयुवक देकर गया था। उसने देखा उसके घडे पर तो काली धारियां थी। परंतु उसमें नीली धारी थी। उसने देखा नीली धारी वाला एक और घड़ा था। कुम्हार को समझते देर नहीं लगी कि यह दोनों घड़े एक ही दुकान के खरीदे लगते हैं। कुम्हार सोचने लगा यहां पर दो ही कुम्हारों की दुकानें हैं। वहां पर चल कर देखता हूं। उस कुम्हार को याद आया कि वह बुढ़िया ही इस दुकान पर चुपके से घडा छोड़ गई। हो ना हो शायद इस बुढिया नें ही उस नवयुवक का घडा चुराया था। उसको भी इसी तरह से उसने बेवकूफ बनाकर घड़ा हासिल कर लिया था। घड़े का चोर पकड़ा जाएगा। पहले मैं चौबे की दुकान पर जाकर पता करता हूं चौबे जी की दुकान पर गया तो वह कुम्हार बोला अपने घडे तो दिखाओ। वह बोला मेरे घडों में तो हमेशा नीली धारियां होती है। वह कुम्हार बोला तुमसे क्या कोई घडा खरीद कर गया था? वह बोला याद करके बताओ। वह बोला बाबूजी यहां पर तो हर रोज अनेकों ग्राहक आते हैं। कुम्हार बोला कि तीन महीनें पहले कोई बुढ़िया औरत आई थी। वह दो घड़े खरीद कर ले गई थी। उस कुम्हार नें चौबे को सारी घटना सुनाई कि कैसे वह औरत टूटा हुआ घड़ा मेरी दुकान पर, रख गई? और मेरा घड़ा चुराकर ले गई वह बोला मैं अपने हाथ का बनाया हुआ घडा पहचान सकता हूं।मैं भी उसके घर किसी काम से आया था उसने शेखू को कहा कि मैं अपने खड़े पर नीली धारिया लगाता हूं। यह घडा मेरी ही दुकान का है। जब एक बुढ़िया मुझसे घडा खरीद रही थी उसका बेटा भी साथ में ही था। उसके बेटे के चोट लगी हुई थी। मैंने उस बुढ़िया से कहा उसे क्या हुआ तो उसने कहा यह फिसल गया था। शायद उसी वक्त उसके दोनों दोनों घड़े टूट गए होंगे। वह घडो को वापस तो करनहीं सकती थी परंतु उसने सोचा यह घड़े टूटे नहीं होंगे। घर में जाकर उसे पता लगा होगा। कुम्हार को पता चल चुका था कि वह दोनों घड़े वही बुढ़िया ही लेकर गई थी। उसने दोनों घडे यूं ही संभाल कर रख दिए। किसी दिन जाकर उस का पर्दाफाश करूंगा। एक दिन की बात है कि एकदिन फिर वही नवयुवक जिसने पहले घड़ा खरीदा था वह आ कर बोला मुझे एक घडा और दे दो क्योंकि एक घडेसे गुजारा नहीं होता है। एक घड़ा और दे दो। कुम्हार उसको देख कर खुश होते हुए बोला भाई मैंने तुम्हारे घडे के चोर को पकड़ लिया है। तुम्हारा घड़ा किसने चुराया था। वह नवयुवक आश्चर्यचकित होकर बोला। जल्दी बताओ वह कौन है वह बोला हम दोनों उस चोर को मजा चलाएंगे। हम उस चोर को उसके कई हीभाषा में उसे उसी की चाल का जवाब देंगे। नवयुवक बोला पहेलियां मत बुझाओ मुझे जल्दी बताओ। कुम्हार नें उस नवयुवक को कहा मुझे तुम बताओ जब तुम घडा खरीद कर गए थे तब तुम सीधा अपने घर गए थे या कहीं ठहरे थे। े वह नवयुवक बोला हां में एक बुढ़िया के घर पर थोड़ी देर सुस्ताने के लिए ठहरा था। वह बुढ़िया बहुत ही दयालु थी। उसने मुझे खाना खिलाया और मुझसे पूछा कहां जा रहे हो? मैंने सारी बातें उसे बताई थी। और शाम को खाना भी उसके घर पर खाया। वह बोला बुढ़िया का क्या कोई बेटा भी है।? वह बोला हां तुम्हें कैसे पता है? कुम्हार नें सारी कहानी सुना दी कि कैसे एक बुढ़िया अपना टूटा हुआ घड़ा हमारी दुकान पर रख ग्ई और वहां से दूसरा घडा ले कर भाग गई जो तुम टूटा हुआ घडा लाए थे वह भी वैसा ही था। दोनों में नीलीऔर काली धारियां बिल्कुल बारीकी से देखने पर ही पता चलती है। दोनों घडे एक ही दुकान से खरीदे हैं। उसने हम दोनों को बेवकूफ बनाया वह नवयुवक बोला मैं जब सो रहा था तब उसने घड़ा बदल दिया था कुम्हार ने कहा कि अब हम दोनों वहीं चलते हैं। तुमयहां से घड़ा ले जाना और चुपके से तुम उसके घडे से बदल देना। मैं भी ऐसा ही करूंगा मैं भी मेरा घडा बदल कर आऊंगा

मैंनें भी उसका घर देख लिया है। वह घर सोमवार को घडाधोकर उल्टा करके रख देती है । हम सोमवार वाले दिन जब उसने घड़े उल्टे घड़े सुखाने के लिए रखे होंगे हम चुपचाप वंहा टूटा घडा रख लेंगेऔर उसका घडा ले कर आ जाएंगें। वह नवयुवक और कुम्हार एक लोहार बन कर उसके घर पर पहुंच गए। बुढ़िया को देख वह बोले हम दोनों दूर से आए हैं। इसके पास तो बहुत सामान है। हमें खाना खिला दो। बुढ़िया ने उन दोनों को कहा कि मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मैं तुम्हें चाय बनाकर देती हूं। चाय बनाने चली गई । एक आदमी उसके पीछे आया। दादी अम्मा मैं भी तुम्हारी रसोई देखता हूं। उतनी देर में कुम्हार ने दोनों घडे चुरा लिये। उसकी जगह दोनों टूटे हुए रख दिए। दोनों नें बुढिया को धन्यवाद दिया। और दोनों चलने लगे रास्ते में उन दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया। आज हमने बुढ़िया को उसी की भाषा में करारा जवाब दिया। जो इंसान किसी के साथ बुरा करता है उसे वैसा ही फल मिलता है। वह नवयुवक अपना घडा पा कर खुश हो गया। उस कुम्हार को भी अपना घडा वापिस मिल गया था। बुढ़िया जब शाम को पानी भरने लगी तो दोनों घरों में से पानी टपकने लगा वह बुढ़िया समझ गई। बुरा करनें वालों के साथ हमेशा बुरा ही होता है।

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