भेडू के बच्चे की वापसी

जंगल में सभी जानवर एक ही स्कूल में शिक्षा ग्रहण करते थे। सभी जानवर दूर-दूर के जंगलों से आकर हॉस्टल में पढ़ने आए थे। वहां पर सब जीवजन्तु मिल जुल कर रहते थे कोई भी जानवर किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकता था। स्कूल के हैडमास्टर  जी ने उन्हें सख्त हिदायत दी थी कि कोई भी जानवर एक दूसरे को नहीं मारेगा वर्ना उस बच्चे को स्कूल छोड़ना पड़ेगा। सभी जानवर प्यार से रहते थे।

सभी जीव जंतुओं की गर्मियों की छुट्टियां आने वाली थी सभी अपने-अपने घरों में जाने के लिए उत्सुक थे। एक भेड़ का बच्चा वह भी अपनी नानी अम्मा के पास जा रहा था उसकी मां घर पर नहीं थी उसकी मां उसकी मौसी से मिलने गई थी भेड़ का बच्चा भी घर जाने के लिए तैयार बैठा था जब वह चलने लगा वह बिल्कुल अकेला था उसका कोई भी रिश्तेदार उसे लेने नहीं आया था वह अकेला ही घर जाने की तैयारी कर रहा था। भेड़ का बच्चा वह अपनी धुन में चला जा रहा था। रास्ते में भेड़ के बच्चे को शेर मिला शेर बोलां खाडू खाडू तुझे  खा लूं या छोड़ दूं। अपनी भाषा में खाडू खाडू ताखे खाई लूं या छाडी दूं। भेड़ का बच्चा बोला नानकडे कर जाई आऊं।ं मोटा टेढा होई आऊं आऊंदडे तू माखे खा लिओ। मोटा टेढ़ा हो आऊं आऊंदडे तू माखे खा लिओ। मैं अपनी नानी अम्मा के घर जा रहा हूं मैं वहां से खूब मोटा खूब बलवान बनकर आऊंगा तब तुम मुझको खा लेना। शेर को उस पर दया आ गई शेर ने उसे छोड़ दिया।

 

आगे उसको बहुत सारे जानवर मिले आगे भालु चीता खरगोश हिरण बंदर बहुत सारे जानवर मिले सभी को उसने कहा।  आऊं मोटा टेढ़ा हो आऊं आऊंदडे तू माखे खा लेना। खाडू ने कहा मैं अपनी नानी के घर जा रहा हूं मैं वहां से खूब मोटा ताजा बनकर आऊंगा वापसी में तुम मुझे खा लेना। इस प्रकार बहुत सारे जानवर मिले सब को  उसने कहा मैं अपनी नानी अम्मा के घर जा रहा हूं वहां से खूब मोटा-ताजा बनकर आऊंगा तब वापसी में तुम मुझे खा लेना।

 

अपनी नानी अम्मा के घर पहुंच गया था। वहां पर उसने अपनी खूब सेहत बनाई। एक दिन उदास होकर बैठा था तो उसकी नानी अम्मा ने उसको पूछा कि बेटा तू उदास क्यों है? भेड़ू बोला अम्मा माखे े रास्ते में बहुत सारे जानवर मिले।तिना ने माखे खाई लेना।   छोडना नी। नानी अमा मेरे को रास्ते में बहुत सारे जानवर मिले उन्होंने मुझको खा लेना है उन्होंने मेरे को छोड़ना नहीं है। उसकी नानी अम्मा बोली तेसरी नानी बोली। पाऊआ तू किझी के डरो ए। बेटा तू क्यों डर रहा है मैं ताखे एक तुमरी दूंगी। तू तिस बच्चे छिपी जाया। मैं तुझे एक तुमडी देती हूं तूं उस में छिप जाना। ताखे तेस तुमडी के अन्दर कोई नंहीदेख पाएगा। तुझे उस तुमडी के अन्दर कोई नंही देख पाएगा। उस तुमडी के अन्दर भेड़ के बच्चे को छिपा दिया। तेसरी नानी अमा ने तेसखे एक मिर्ची का बूरा भी दे दित्या। ताखे अगर कोई छेडो गा तेस पान्दे तू मिर्ची फैंक दिओ।

 

चलते चलते जब भेड़ का बच्चा बहुत दूर आ गया रास्ते में उसे भालू मिला भालू ने पूछा तुमडी तुमडी तैं खाडू तो नी देखा। तुमडी बोली। खाडू न जानू लाड्डू न जानू तुमडी जानो बाटतुमडी साथे छेडया तो तुमडी मारेगी चंडाक। । तुमडी को भालू ने पूछा तुमडी तुमडी तुने भेड़ को तो नहीं देखा। तुमडी बोली। खाडू न जानू लाड्डू न जानू तुमडी जाने बाट तुमडी साथे छेडया तो तुमडी मारेगी चंडाक। तुमडी के साथ अगर तुमने कोई छेड़छाड़ की तो तुम्हे तुमडी एक जोरदार झांपड मारेगी। इस तरह से तुमडी को सारे  के सारे जानवर मिले।

 

लोमड़ी बडी़ ही चालाक थी उसे पता लगता गया था कि उस तुमडी के अन्दर भेड़ का बच्चा है। वह तुमडी से बोली। तुमडी लुडकती जा रही थी। उसने तुमडी को रोक कर कहा तुमडी तुमडी तू ने खाडू तो नही देखा। तुमडी बोली खाडू न जाने लड्डू न जाने तुमडी  जानो बाट तुमडी साथे छेड़ा तो तुमडी मारेगी चंडाक। तुमडी साथे छेड़या तो तुमडी मारेगी चंडाक। लोमड़ी बोली ठहर जा माखे पता चल गया है। इस बिच्चे खाडू के बच्चे तू छिपी रा है। जल्दी बाहर निकल। भेड़ का बच्चा बोला। ठहर पहले मेरी गल सुन। तब मुंह खोलिए। लोमड़ी बोली चल बोल क्या बोलना चाहो है। भेडू का बच्चा बोला आऊं ताखे एक बड़ी ही सुन्दर चीज ल्ई आया। देखा किसी खे  बतांदी। । मैं तेरे लिए एक बहुत ही सुन्दर उपहार लाया हूं देखना किसी को मत बताना। लोमड़ी बोली में तो झूठ बोल रही थी। भेडू का बच्चा बोला मेरे पास आ। लोमड़ी उसके पास जा कर बोली ला मेरा ईनाम। भेडू के बच्चे नें मिर्ची का बुक्का लोमड़ी की आंखों में फैंक दिया। लोमड़ी हाय मर गई मर गई कहते कहते नीचे गिर पड़ी। भेडू का बच्चा होशियार था जल्दी ही वह वहा से नौ दो ग्यारह हो गया। वह खुशी खुशी अपनें घर पंहुच गया था।

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