मासूम भाग(2)

समृति को डॉक्टर ने बताया कि वह बेहोशी में भी बघिरा बघिरा पुकार रहा था। लगता है बघिरा का इन से कोई खास लगाव है। स्मृति के मानस पटल पर सारी घटना चलचित्र की भांति खीची चली बघिरा के कारण ही यह सब कुछ हुआ। बघिरा को दोषी ठहराते हुए उसको भला बुरा कहने लगी।
सारी घटना का दोषी वह बघिरा है अच्छा हुआ बघिरा हमारे घर से सदा के लिए चला गया। शुक्र है मेरी सहेली का उसनें मुझे आनें वाले खतरे से पहले ही सूचित कर दिया। उसनें मेरे पति की क्या दुर्दशा कर दी है? काफी समय हो चुका है मेरे पति अभी तक उस सदमें से बाहर नहीं आए हैं। वह बेहोशी की अवस्था में भी बघिरा बघिरा पुकार रहें हैं। मेरे पति जल्दी से ठीक हो जाए।
बघिरा अपने दोस्त से बिछड़ कर उस स्थान पर आकर हर रोज़ बैठ जाता और टकटकी लगाकर हर आने-जाने वाले पर नजरें गड़ाए रखता। उसे पूरा विश्वास था कि उसका दोस्त उसे लेने जरूर आएगा उस मासूम के मन में एक बार भी ख्याल नहीं आया कि उसका दोस्त उसे यूं तन्हा छोड़ सकता है। क्या मेरे दोस्त को मेरी याद नहीं आई? वह मायूस होकर हर किसी आने जाने वाले राहगीरों के पीछे भागता। उन सभी के चेहरों में वह अपने दोस्त को ढूंडनें की कोशिश करता रहता था। वह ठंडे स्थान पर रहने वाला प्राणी था। उसे गर्मी की आदत नहीं थी। कड़ी धूप में भोजन की तलाश में इधर उधर भटकता। जूठे खाने के ढेर में से लोगों के बचे हुए जूठे खाने को खाता। किसी ना किसी तरह अपनी जिंदगी गुजार रहा था। उसकी इतनी सुंदर आंखें भोला भाला चेहरा मासूम सा। नीयति ने उसे इतनी दर्दनाक स्थिति में पहुंचा दिया कि वह सारा दिन इधर उधर भटकता। उसे कभी भी इतने ट्रैफिक के बीच में चलने की आदत नहीं थी। जैसे बच्चा अपनी मां बाप की उंगली पकड़कर चलता है वैसे ही वह अपने दोस्त के साथ हर जगह जाता था। एसी वाले कमरे में सोता था। अपने दोस्त के साथ बिस्तर पर उसके बिस्तर पर ही सो जाता। उसका दोस्त ही उसके लिए पूरी दूनिया था। इतनी दर्दनाक स्थिति में पहुंच गया था हर आने जाने वाले लोग सब यही कहते इसका मालिक कितना निर्दयी होगा जिसने इतने प्यारे मासूम से कुत्ते पर जरा भी दया नहीं कि।
लोग अपने शौक के लिए ना जाने क्या-क्या करते हैं। वह कुत्ता खरीदते वक्त यह भूल जाते हैं कि वह भी तो हमारी तरह एक जीव है। उसे भी तो महसूस होता है। उसे भी तो दर्द होता है। उसमें भी जीवन है। उसे अपनी शौक और मनोरंजन के लिए उसे पाल तो लेते हैं मगर यह भूल जाते हैं कि वह कोई खिलौना नहीं है। जीता जागता प्राणी है। उस के लिए उसका मालिक ही उसका परिवार होता है। हमें उनके साथ अपने परिवार के सदस्यों जैसा ही व्यवहार करना चाहिए। उसे मनोरंजन की वस्तु समझ कर नहीं पालना चाहिए। कुत्ते से ज्यादा वफादार कोई हो ही नहीं सकता। वह अपनी जान कुर्बान कर सकता है परंतु अपने मालिक पर आंच तक नहीं आने देता।

शेरभ बेचारा तो दुर्घटना का शिकार हो गया था। वह अपने दोस्त को ढूंढने निकला तो अचानक उसकी गाड़ी एक ट्रक की चपेट से दुर्घटनाग्रस्त हो गई। वह आज तक बेहोशी में पड़ा पडा जिन्दगी और मौत के बीच झूल रहा है। बेहोशी में भी वह बघिरा बघिरा पुकार रहा था।
एक दिन एक नीले रंग की गाड़ी के पीछे बघिरा दौड़ा। गाड़ी के पीछे भागते भागते वह हांप चुका था। वह उस गाड़ी के पीछे इसलिए भागा था क्योंकि उसके दोस्त के पास भी उसी तरह की गाड़ी थी। भागते-भागते वह एक
बाइक सवार की चपेट में आ गया। उसकी टांग से खून निकलने लगा बाइक सवार उसे डांटते फटकारते हुए कहने लगा तुझे मरने के लिए मेरी ही गाड़ी मिली थी। वह बाइक वाला उसे गालियां दे कर वहां से भाग गया। यह सब दृश्य वह नीले रंग की गाड़ी वाला व्यक्ति देख रहा था। उसकी चोट से बेहाल होकर बघिरा एक ओर बैठ गया। इतना सुंदर कुता जिसको सब लोग देखकर मोहित हो जाते थे वह आज हड्डियों का ढांचा बन गया था। उसकी सांसे तो अपने दोस्त से मिलने के लिए बेचैन थी। कर्ण गाड़ी से उतरा उसने उस कुत्ते को प्यार से सहलाया। अपनी गोद में लेकर प्यार किया। बघिरा की आंखें भी अपने मालिक को ढूंढते-ढूंढते थक गई थी। उसे बहुत ही तेज बुखार था। कर्ण की शक्ल उसके दोस्त से मिलती जुलती थी। थोड़ी सी मुस्कुराहट बघिरा के चेहरे पर दिखाई दी। उसके गले में पट्टा देखकर उसने अंदाजा लगा लिया था कि यह किसी का पालतू है। यह अपने मालिक से बिछड़ गया है या इसके मालिक ने इसे छोड़ दिया है। देखने में तो बहुत ही चतुर दिखाई देता है। कुछ भी हो जाए वह इस कुत्ते को नहीं छोड़ सकता। कुछ इंसानियत तो उस में भी बाकी है। उसको वह पास के सिटी अस्पताल में ले गया। उसका इलाज करवाया। वह सोचने लगा जब तक वह पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता तब तक वह इसको अपने घर में ही रखेगा। कर्ण को उससे प्यार हो गया। उसके पटटे पर बघिरा नाम खुदा हुआ था। जब कर्ण उसे बघिरा बुलाता तो बघिरा की आंखों से खुशी के आंसू छलक पडे। काफी दिनों बाद उसे
किसी ने इस नाम से बुलाया?
एक दिन शालिनी अपनी दोस्त स्मृति से मिलने उसके घर गई शालिनी उसे देखकर चौक गई शालिनी अपनी सहेली को देख कर उसे कहती है कि तुमने यह क्या हालत बना ली है? क्या बात है, तुम ठीक ढंग से खाती पीती नहीं हो। वह बोली तुम्हें क्या बताऊं? तुम भी तो मेरी खोज खबर लेने नहीं आई। मुझ पर जो जो बीती मैं तुम्हें बताती हूं। शालिनी बोली कि मैं मैं अपने मायके गई हुई थी। मेरी शादी तय हो गई है मैं तुम्हारे पास आ नहीं सकी। आज भी मैं अपने शादी का कार्ड देने आई हूं। शालिनी बोली जीजा जी कहां हैं? जब शालिनी नें उसे अपने पति शेरभ के बारे में बताया तो वह यह सुन कर बहुत दुखी हुई कि उसके पति बेहोशी की अवस्था में है। एक दिन जब मेरे पति बच्चे की ओर ध्यान न दे कर बघिरा को अपनें हाथ से खाना खिला रहे थे तो मैं गस्से में अपने पति को अनापशनाप कह गई। उसने गुस्से में अपने पति को कहा कि बघिरा हमारे बच्चे को नुकसान पहूंचा सकता है। मेरे पति कहने लगे बघिरा तो कभी भी हमारे बच्चे को नुकसान पहुंचा ही नहीं सकता। वह अपनी जान कुर्बान कर देगा मगर हम पर कोई आंच नहीं आने देगा। बहना तुम सच ही कहती थी बघिरा नें तो मेरे पति को भी नहीं छोड़ा। मेरे पति की बघिरा के कारण ही दुर्घटना हुई।मेरे पति बघिरा को ले कर गुस्से में न जाने कहां चले गए? वे रास्ते में एक ट्रक से टकरा गए। वह लहूलुहान हो कर नीचे गिर गए। लोंगों ने किसी न किसी तरह उन्हे बचा कर सिटी अस्पताल पहुंचाया दिया। वह आज तक बेहोशी की अवस्था से बाहर नहीं आए। बेहोशी में भी अपनें बघिरा को पुकारते रहतें हैं।
शालिनी को यह सुन कर बड़ा बुरा लगा। मैने तो इनके हंसते खेलते परिवार में फूट डाल दी। मेरे कारण यह सब कुछ हुआ। मैंनें डर के कारण अपनी सहेली को कह दिया कि बघिरा के कारण तुम्हारा बेटा गिरा। मुझे बच्चे को सम्भालनें का अनुभव नहीं था। मेरे हाथ से प्यार करते करते बच्चा गिर गया। अपनी सहेली के डर के कारण मैंनें बघिरा का नाम झूठमूठ में ले दिया। बघिरा तो मुझ पर भौंक रहा था। मैने बघिरा को, उसके पति को उन से दूर कर दिया। मैं जब तक इन को मिलवा न दूं तब तक मुझे चैन नहीं मिलेगा। आज मैं सब कुछ अपनी सहेली को सच सच बता दूंगी।। वह बघिरा को ही अपनें पति की दुर्घटना का कारण समझती है। शालिनी बोली बहन मुझे माफ कर दे जब मैं उस दिन तुम्हारे घर आई थी। बच्चे को गोद में ले कर प्यार कर रही थी पालनें में रखते रखते तुम्हारा बच्चा मेरे हाथ से नीचे गिर गया। मैंने तुम्हारे डर के कारण झूठमूठ में कह दिया बच्चा बघिरा नें गिराया है। बघिरा तो बच्चे को गिरता देख कर मुझ पर भौंका था। स्मृति नें जब यह सुना वह हैरान हो गई। वह सोचने लगी आज तक मैं अपने पति की दुर्दशा का कारण बघिरा को समझती रही। उस मासूम की तरफ तनिक भी ध्यान ही नहीं दिया। वह तो हमारे पास बहुत वर्षों से रह रहा था। जब तक मेरा बेटा भी पैदा नहीं हुआ था। ओह! गुस्से में मैं आज तक उसे क्या क्या गालियां देती रही। मेरी बुद्धि भी मन्थरा जैसी बन गई।
मैं अपने बघिरा के प्रती इतनी निष्ठुर कैसे हो गई। मेरी जीभ जल क्यों नहीं गई। यह मैने क्या अनर्थ कर डाला। स्मृति को शालिनी नें बताया कि डाक्टरों नें उसे बताया अगर एक महीनें तक बघिरा को ढूंढकर नहीं लाओगे तो वह कभी भी ठीक नहीं हो सकते। इससे पहले कुछ अनर्थ हो जाए मुझे बघिरा को ढूंढ कर लाना ही होगा। बघिरा जिन्दा भी होगा या नहीं। एक दिन शालिनी जब कर्ण से मिलनें गई तो उसने वहां पर एक कुते को देखा।शालिनी को देख कर वह जोर जोर से उस पर भौंकनें लगा। कर्ण बोला न जाने यह किस का पालतू कुत्ता था। वह एक व्यक्ति की बाइक से टकरा गया था। उसे की टांग में चोट लग गई।मैं उसे अपनें घर ले आया। मैंनें सोचा था कि मैं उसे ठीक होनें के बाद छोड़ दूंगा परन्तु अब मैं उसे नहीं छोड़ सकता। मुझे इसके साथ प्यार हो गया है। बघिरा शालिनी पर भौंकता जा रहा था। वह उसके गले में पट्टा देख, ओर कर्ण नें जब उसे बघिरा पुकारा, वह दौडता दौडता उस के पास जा कर उसे चाटनें लगा। शालिनी अपनें मन में सोचने लगी कहीं वह ही तो बघिरा नहीं। वह तो बहुत ही सुन्दर बडी बड़ी आंखो वाला था। यह तो कमजोर हड्डियों का ढांचा है। उस के पास जा कर जब उसने पट्टा देखा वह तो वही पट्टा था जो उसनें और उसकी सहेली नें बघिरा के लिए खरीदा था। उसने बघिरा को खूब प्यार किया। उस की आंखो में खुशी के आंसू चमकने लगे। शालिनी ने अपने पति को बताया कि यह कुता तो मेरी सहेली का है। उसने सारा वृतान्त कर्ण को कह सुनाया। स्मृति के पति को डाक्टरों ने बताया कि अगर तुम अपने पति को बचाना चाहती हो तो जल्दी से जल्दी बघिरा को ढूड कर ले आओ। आज भी मेरी सहेली नें मुझे कहा कि अपने पति से कहना हमारे बघिरा को ढूंढने में हमारी मदद करे।एक दिन जब मैं अपनी सहेली के घर शादी का कार्ड देनें उस के घर गई तब मुझे मालूम पड़ा कि एक साल से उसके पति बेहोश है। वह जब कभी बेहोशी से उठते हैं तो बघिरा को ही पुकारतें हैं।
शालिनी बोली एक दिन जब मैं उसके बच्चे से खेल रही थी। बच्चे को उठाने का मुझे अनुभव नहीं था बच्चे को पालनें में रखते रखते स्मृति का बच्चा मुझ से नीचे गिर गया। यह देख कर बघिरा आया और मुझ पर भौंकनें लगा। मैंने अपनी सहेली के डर के कारण अपनी सहेली को कहा बघिरा नें तुम्हारे बच्चे को गिराया है। वह सच मान बैठी। वह अपने पति पर हर रोज दबाब डालती रही कि बघिरा को कंही छोड़ आओ। अपनी पत्नी से परेशान हो कर गुस्से में वह घर से निकल गए। सारी रात घर नहीं आए तो दूसरे दिन स्मृति नें उसे पास के सिटी अस्पताल में उन्हे जिन्दगी और मौत के बीच जूझते पाया। सारी कहानी सुनाने के बाद शालिनी बोली आप ही मेरी सहेली के पति को बचा सकतें हैं।कर्ण बोला बघिरा मुझ से घुल मिल गया है। एक शर्त पर मैं सिटी अस्पताल चलनें के लिए तैयार हूं। शेरभ के ठीक होनें के बाद मैं बघिरा को अपने पास ही रखूंगा। शालिनी बोली इस वक्त तो किसी की जान बचाना हमारा पहला कर्तव्य है। बाकि बाद में देखा जाएगा।
शालिनी अपने पति कर्ण और बघिरा के साथसिटी अस्पताल में पहुंच गया। बघिरा शेरभ के बिस्तर के पास जा कर भौंकनें लगा। शेरभ के चारों ओर डाक्टर खडे थे। वे उसे आक्सीजन चढा रहे थे। बघिरा। उसके बिस्तर के पास चक्कर काट रहा था। और वह मायूस सा आंसूओं के सैलाब को रोके हुए जोर जोर से भौंकने लगा मानो कह रहा हो उठो दोस्त, जल्दी से मुझे गले लगा लो।। काफी समय तक जब शेरभ नहीं उठा तो उसी वक्त बघिरा भी बेहोश हो कर नीचे गिर गया। डाक्टरों नें उसे इनजैक्शन दे कर ठीक कर दिया। बघिरा उठा और दौड़ दौड़ा अपनें दोस्त के पास जा कर फिर एक बार फिर भौंका। शेरभ की आंख खुल गई। बघिरा उसे चाटने लगा। शेरभ नें उसे कस कर गले से लगा लिया। तूझे मुझ से कोई अलग नहीं कर सकता मेरे दोस्त। उन दोनों की दोस्ती देख कर हर आने जाने वाले लोग और डाक्टर भी दंग रह गए। शेरभ को ठीक होते होते एक महीना लगा। बघिरा तो अपने दोस्त को छोड़नें का नाम ही नही ले रहा था। शालिनी को कर्ण ने बताया कि जैसे ही शेरभ ठीक हो जाएगा वह अपने बघिरा को अपने पास ही रखेगा।एक दिन कर्ण नें शेरभ को पूछा तुम कैसे दुर्घटना के शिकार हुए। शेरभ नें सारा वृतान्त कह सुनाया कैसे अपनी पत्नी के बार बार परेशान करनें पर वह अपने बघिरा को छोड़नें के लिए राजी हो गया। उस दिन बारिश बहुत तेज हो रही थी। बघिरा खुश हो रहा था मेरा दोस्त मुझे खेलने ले जा रहा है। वह बारिश के मौसम में बघिरा को दूर दूर तक घुमाने ले जाता था।उस दिन जैसे ही उसे एक स्थान पर छोड़ कर वापिस आ रहा था। एक दम उसनें दोबारा बघिरा को घर वापिस लाने के लिए गाड़ी मोड़ दी। यह मैने क्या कर दिया। मैं अपने बघिरा को ऐसे कैसे अकेला छोड़ सकता हूं। यही सोचता हुआ गाड़ी चला रहा था। अचानक उसने सामने एक खतरनाक मोड़ को भी नहीं देखा। उसकी गाड़ी एक ट्रक के साथ जा टकराई। उसके बाद आज जा कर उसे होश आया। कर्ण बोला मैं तुम्हारी दोस्ती देख कर तुम्हे तुम्हारा दोस्त लौटानें आया था। मैं अब बघिरा को तुम्हे वापिस नहीं करूंगा।आज तो मैं तुम्हें तुम्हारा बघिरा वापिस भी कर दू। तुम अपनी पत्नी की बातों में आ कर बघिरा को फिर कहीं छोड़कर आ गए इस बात कि क्या गारन्टी है? अब कहीं जा कर यह कुछ ठीक हुआ है। इसकी क्या हालत हो गई थी? तुम इस बात का अन्दाजा भी नहीं लगा सकते।
शेरभ बोला ऐसा कभी नहीं होगा। शेरभ जोर जोर से अपनी पत्नी को डांटने लगा। बघिरा को यह बात बहुत ही बुरी लगी। वह शेरभ और उसकी पत्नी के बीच आ कर जोर जोर से भौंकनें लगा। शेरभ की पत्नी बोली मैंने आप की दोस्ती में दरार डाली आज इस के लिए मैं आप से हाथ जोड़कर माफी मांगती हूं। शेरभ गुस्से में बोला मुझे शादी ही नही करनी चाहिए थी। स्मृति बोली तुम खुश रहो।वह इतना कह कर अपना सामान समेटने लगी। शेरभ जब ऊंची आवाज में कह रहा था बघिरा उन दोनों के बीच में आ गया। जोर जोर से शेरभ पर भौंकनें लगा। शालिनी और उसका पति यह देख कर दंग रह गए। वह स्मृति के दुपट्टे को खींच कर उसे जानें से मना कर रहा था। शेरभ बोला अब देखो मेरा दोस्त कितना समझदार है? वह तुम्हे भी जानें से रोक रहा है। कर्ण बोला आया तो मैं इस इरादे से था कि आज मैं बघिरा को तुम से वापिस ले जाने मगर तुम्हारी इतनी गहरी दोस्ती देख कर मेरी भी आंखें नम हो गईं। यह तुम्हारे साथ ही ज्यादा खुश रहेगा। तुम्हारा बघिरा है ही इतना प्यारा कोई भी इसे देख कर अपना बनाना चाहेगा। मैं इस शर्त पर तुम्हारा बघिरा तुम्हें लौटा रहा हूं जब मेरी इच्छा होगी मैं अपने दोस्त से मिलनें आ जाया करूगा। शेरभ बोला हां यार तुम कभी कभी इसे अपनें पास भी रख सकते हो। शालिनी खुश हो कर बोली मैंनें आज एक दोस्त को दूसरे दोस्त से मिला दिया। आज वह असली मित्रता का मतलब समझी है।

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