मेहनत का फल मीठा होता है

, किसी गांव में कलवा नाम का  बहुत नेक दिल  किसान था। हमेशा दूसरों के दुख दर्द में शामिल रहता था। उसका एक दोस्त था धनिया।  उसका घर समीप में ही था। धनिया उसको हर रोज काम करते देखा करता था। वह उसके घर आता जाता रहता था। वह एक आलसी किस्म का इंसान था। वह बोलता तो रहता था कि मैं यह करूंगा यह करूंगा जब काम करने की बारी आती थी तो वह अपना काम स्वयं नहीं करता था। दूसरों से करवाता था अपने आप तो उसको काम करने की आदत ही नहीं थी। वह बैठा-बैठा सब पर हुक्म चलाता रहता था। कालू ने अपने दोस्त को कहा कि हमें अपने खेतों को साफ कर देना चाहिए। इसके लिए पहले हमें खेतों को हल हल से जोतना पड़ेगा। इसके लिए मेहनत तो करनी ही पड़ेगी। एक दो दिन तक जुताई के बाद  खेत को अच्छे ढंग से साफ  कर जमीन को उसके अनुकूल बनाना होगा। तभी हम खेत में बुवाई कर सकेंगे। धनिया उसको काम करते देखकर उसके पास ही गप्पे लड़ाने बैठा रहा। कलुआ खेत में हल चलाता रहा। उसका खेत बुवाई लायक बन गया।

 

धनिया अपने दोस्त को बोला तुम ही मेरे लिए बाजार से बीज लेकर आना। तब तक मैं भी अपने खेत  में हल जोत  कर उसे बुवाई के अनुकूल बनाने दूंगा। वह कहता तो रहा मगर काफी दिन तक उसने अपनें खेत में बुवाई नही की। आलसी बन कर बैठा रहा। एक दिन जब वह अपनें दोस्त के घर गया तो उसका दोस्त कालू बोला तुमनेंभी खेत जोत दिया होगा उसनें झूठमूठ ही  अपनें दोस्त कालू को कहा हां मैंने भी खेत जोत दिया है। कालू नें अपने दोस्त को कहा कि चलो दोनों चलकर बाजार से बुवाई के लिए बीज लेकर आते हैं। उसका दोस्त बोला मैं अपने भाई के बेटे को भेजता हूं। कालू ने बीज लाकर जमीन में  बीज बो दिये। कालू के दोस्त ने अपने भाई के बेटे को कहा कि तू मेरे खेत में बीज बो दे। उसके भाई ने उसकी जमीन में बीज बो दिए। मगर जिन रुपयों से उसने बीज  खरीदे थे वह चोरी के रुपए थे। उसके दोस्त के बेटे ने उन चोरी की हुए रुपयों से बीज लाकर जमीन में बीज बो दिये। कालू ने तो खून पसीने की कमाई से इकट्ठे हुए रुपए से  बीज बोए थे और अपने  खेत में हर रोज सिंचाई करने लगा।  कुछ दिनों के बाद उसके खेत में इतनी फसल हुई। उसको किसी वृद्ध जन ने बताया था कि जो भी तुम्हारे खेत में अनाज हो उसका कुछ भाग मंदिर में चढ़ाना चाहिए और कुछ भाग गरीबों में बांटना चाहिए और जो उसके बाद बचे वह अपने लिए रखना चाहिए। इससे घर में बरकत होती है।

 

कालू के दोस्त धनिया ने अपने आप खेत में जुताई नहीं कि अपने भाई के बेटे को बुआई करने भेजा और जो उसने अपनें खेतों मे बीज बोया  वह चोरी के रुपयों से था। आलस करके उसने भाई के बेटे से सब काम करवाए। अपने आप बैठे-बैठे हुक्म चलाता रहा। समय पर न फसल के लिए जमीन को तैयार किया न खाद डाली। उसके दोस्त कालू नें उसे समझाया भी था कि हमें बाहर से खाद नंहीखरीदनी चाहिए उसमें जहरीली दवाइयां छिड़ी होती हैं। जो कि हमारे लिए नुकसान करती हैं।  हमे घर में जो गाय के गोबर के उपलों की खाद खेतों में डालनी चाहिए। जहरीली खाद हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसान पहुंचाती हैं। बाद में  अपने दोस्त की लहराती फसलों को देख कर उसे अपनें दोस्त से ईर्ष्या होने लगी। मेरे खेत में तो अनाज बहुत ही कम पैदा हुआ है। इसने अपने आप तो अच्छे बीज खरीदे और मुझे खराब बीज ला कर दे दिए होंगे। बैठ बैठ कर खाने वाले आलसी धनिया ने अपने दोस्त पर छींटाकशी कर दी।

 

उसको अपने दोस्त से ईर्ष्या होने लगी। उसके घर में उसके  दादा जी जो बहुत ही बुढे  वह कुछ दिनों के लिए उन के घर पर रहने आए बोले बेटा तुम उदास क्यों हो? बोला आजकल लोग अपना ही भला चाहते हैं एक मेरा दोस्त है कालू। हम दोनों ने इकट्ठे खेती की थी। इस की फसल तो लहलहाने लगी मगर मेरे खेतों में तो पैदावार बहुत ही कम हुई। जो फसल उगी  वह भी नाम मात्र को। सब कुछ बेकार हो गया।  यहां तो रोटी के भी लाले पड़ गए। क्या करूं?

 

उसके दादा जी बोले हमें बिना सोचे समझे किसी पर भी शक नहीं करना चाहिए। हमें हर काम ईमानदारी से करना चाहिए। तुम्हारे दोस्त नें ईमानदारी से अपनी फसल उगाई है। जिसका वह भरपूर फायदा उठा रहा है। उसने इसके लिए भरपूर परिश्रम किया है।

 

धनिए के भाई का बेटा आकर बोला चाचा जी आप समझ रहे होंगे मैंने खेत अच्छे ढंग से नहीं बोए। आप के खेत में फसल अच्छी नहीं हुई। वह बोला नहीं रे भला मैं ऐसा क्यों सोचने लगा? जब वह घर चला गया उसके दादा जी को सारी बात समझ में आ गई। वह धनिये को बोले  अपने आप तुम ने कोई काम नहीं किया। बैठ बैठ कर उसे हर काम करने को कहा। जब हम किसी से भी कोई काम  करवाना चाहते हैं तो हमें उस व्यक्ति की निगरानी रखनी चाहिए। तुम्हे भी अपनें भाई के बेटे के साथ मिल कर काम करवाना था। और देखना था कि वह अपना कार्य अच्छे ढंग से निभा रहा है या नहीं। हमें बिना देखे   किसी के बारे में कोई राय कायम नंही करनी चाहिए। धनिया  अपनें दादा जी से बोला आपका इशारा मेरी तरफ है। उसके दादा जी बोले बेटा तुम ही गलत हो। तुमने मुझे कहा कि मैंने फसलें अच्छे ढंग से बो दी। तुमने तो खेतों में कुछ भी नहीं किया। बैठे-बैठे हुक्म चलाया। खेतों में बुवाई करनें के एकदम बीज बो दिए।उसके दादा जी बोले मैं तुम्हें अच्छी तरह से जानता हूं। मुझे सच-सच बताओ वह बोला हां दादा जी

 

मैं बहुत ही आलसी हूं। मैंने ही अच्छे ढंग से  खेत की देख रेख नहीं की।  पहले ही नींव  भी  चोरी के रुपयों से। वह भी झूठ के दम पर। तभी मेरी फसलें आने से पहले ही उजड़ गई। और मैंन अपने आप कोई काम नहीं किया। उसके दादा जी बोले तुम नें अपनें खेतों में रसायनिक खाद का प्रयोग किया। जबकि  तुम्हारे दोस्त नें तुम्हे बताया दिया था।वह बोला हां दादा जी मैं अपने दोस्त को गुनाहगार समझता रहा। उसके दादा जी  बोले तुम्हारे साथ  कोई धोखा  नहीं हुआ। धनिया बोला दादा जी मुझे माफ कर दो।

 

अगली बार उसने मेहनत के पैसों से बीज लाकर खरीदे और अपने खेत में बुवाई कि उसकी फसलें भी उसी तरह लहराने लगी। वह खुशी से झूम उठा। उसके दोस्त कालू ने आकर उसे गले से लगा लिया बोला अब की बार तुमने अपने स्वयं हाथों से मेहनत की है। मेहनत का फल मीठा होता है।

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