मौसी

एक किसान था वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ गांव में रहता था ।किसान और उसकी पत्नी दिन रात मेहनत करके अपना जीवन- यापन कर रहे थे । किसान की पत्नी हमेशा अस्वस्थ रहती थी न जाने उसे कौन सी बीमारी ने घेर लिया था ।उसकी बेटी की शादी हो चुकी थी। उसके पति ने उसे छोड़ दिया था ।वह अपने माता-पिता के पास ही अपने मायके में रहती थी शायद यही कारण था कि उसकी माता को हमेशा अपनी बच्ची की चिंता लगी रहती थी कि मेरी मौत के बाद इसकी देखरेख कौन करेगा। उन्होंने उसे तालीम भी नहीं दी थी क्योंकि उनके पास उसको पढ़ाने के लिए इतने अधिक रुपए नहीं थे । उसकी मां हमेशा बीमार रहती थी ।उनके पास एक सुरभि नाम की एक गाय थी उसकी पत्नी उस गाय से बहुत प्यार करती थी ।वह उस गाय को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती थी। एक बार किसी ने उससे उस गाय को बेचने के लिए पूछा तो उसने कहा सुरभि में तो उसकी जान बसती है ।वह सोने से पहले उस गाय को देखना नहीं भूलती थी , गाय ने ठीक ढंग से चारा खाया या नहीं जितना अधिक प्रेम वह अपने पति और बेटी से करती थी उतना ही वह प्रेम अपने गाय सुरभि को भी करती थी । किसान की पत्नी की बीमारी इतनी बढ़ चुकी थी कि वह एक दिन अपनी बेटी और पति को रोता बिलखता छोड़ कर सदा के लिए उनके जीवन से दूर चली गई ।सुरभि ने तो मानो मौन धारण कर लिया हो दो दिनों तक उसने चारे को हाथ तक नहीं लगाया और ऐसा महसूस होता था कि वह ं चारों तरफ अपने घर की मालकिन को ढूंढ रही हो परंतु होनी को कौन टाल सकता था।किसान के मुश्किल भरे दिन आ चुकेथे । उसकी बेटी भी अपनी मां के वियोग में सुख सुख कर कांटा हो चुकी थी ।एक तो पति के छोड़ने का गम और दूसरा अपनी माता के विरह का गम, ऐसे में वह आंसू बहाने के सिवा क्या कर सकती थी। उसने अपने दुख को कुछ कम किया इस तरह आंसू बहाने से क्या होगा मेरी मां तो आंसू बहाने से वापस नहीं आ सकती है ।मेरे दुखी रहने से मेरे बाबा पर क्या बीतेगी ।वह अपने बाबा को और दुखी देखना नहीं चाहती थी इसलिए उसने सोचा कि अब वह कभी दुखी नहीं रहेगी। वह अपने आप को समझाने की बहुत काेशिश करती रही।काफी दिन तक तो उसके बाबा चुपचाप चुप्पीसाधे बैठे रहे । मेहनत करना भी जरूरी था।।वह सोचने लगी कि एक दिन मैं भी भगवान के पास चला जाऊंगा तब मेरी बेटी अकेली कैसे

जीवित रहेगी। उस ने सोचा कि क्यों ना, मैं अपनी बेटी की कोई अच्छा सा नवयुवक देखकर शादी कर दूं । किसान सोचने लगा इसके लिए तो खर्चा भी बहुत होगा । किसान ने सोचा अपनी बेटी की शादी करनेके लिए खर्चा तो मैं अवश्य करूंगा ।मैं अपनी लड़की को अच्छी तालीम तो नहीं दे सका इसके लिए मैं अपने आपको जीवन भर कोसता रहूंगा।मैं अपने मरने से पहले इसके हाथ पीले अवश्य करूंगा ।उसने अपनी बेटी केलिए अपनी गाय को बेचने का फैसला कर लिया । मुझे इस गाय की कोई न कोई अच्छी कीमत देगा ।मैं इस गाय को बेचकर अपनी बेटी की शादी कर दूंगा ।उसकी बेटी ने जब अपने पिता को किसी साहुकार के हाथ गाय को बेचते हुए देखा और यह कहते हुए सुना कि मैं अपनी बेटी की शादी करना चाहता हूं। उसकी बेटी को बहुत ही धक्का लगा ।वह भी गाय को बेहद प्यार करती थी ।उसने अपने पिता को तो कुछ नहीं कहा परंतु ,अंदर ही अंदर वह मायूस हो गई। वह उस गाय को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती थी ।वह भी उस गाय से हिल मिल गई थी वह गाय को अपनी सच्ची दोस्त मानती थी ।उसके पिता को कौन समझाए ?वह अपने पिता के पास गई और बोली ,बाबा आप इस गाय को मत बेचो और मेरी शादी का ख्याल दिल से निकाल दो ।मेरी जिंदगी में अगर सुख लिखा ही नहीं तो आप मेरे लिए दुखी क्यों हो रहे हो बाबा? मैं जिंदगी भर शादी नहीं करुंगी आप तो मेरी शादी करवा कर मुझे खुश रखने का प्रयत्न करना चाहते हैं।

मुझे एक जगह जब सुख नहीं मिला ,क्या पता मुझे दूसरी जगह भी खुशी ना मिले ।जब उसकी बेटी ने ऐसे कहा तब उसके पिता ने उसके मुंह पर हाथ रख कर कहा बेटा ऐसा नहीं कहते ,जब तक बेटी अपने घर नहीं चली जाती तब तक मां-बाप सुखी कैसे रह सकते हैं। मैं तुम्हें सुखी देखना चाहता हूं मेरे निर्णय को कोई नहीं बदल सकता ।किसान की बेटी ने देखा उसके घर पर दो साहुकार आए हुए थे उसके पिता ने सुरभि को उन्हें देते हुए कहा यह गाय अब मैं तुम्हारे हवाले करता हूं। मेरी पत्नी ने इस गाय को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार से पाला था ।तुम इस गाय को अच्छे ढंग से पालना । मेरी मजबूरी न होती तो मैं इस गाय को बेचने की भी नहीं सोचता। उसका गाय के प्रति इतना स्नेह देख कर किसान को समझाते हुए साहुकार किसान से बोले ,आप चिंता मत करो ,हमारे घर में इस गाय को कोई कष्ट नहीं होगा। साहुकार गाय को लेकर चले गए। उस दिन किसान ने और उसकी बेटी ने खाना तक नहीं खाया। किसान की बेटी को ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई उससे उसकी जान निकाल कर ले जा रहा है उस गाय में उसे उसकी मां की छवि दिखाई देती थी। किसान की बेटी ने वहां से जाने का निश्चय कर लिया । वह भी अपने बाबा पर बोझ नही ंबनेगी वह भी उन मुसाफिरों के पीछे पीछे चलने लगी। काफी अंधेरा हो चुका था वहं भी अपने गांव से बहुत दूर किसी दूसरे ही गांव में पहुंच चुकी थी। वह साहूकार एक घर में उस गाय को लेकर अंदर चले गए, शायद आज रात वे वहां बिताना चाहते थे। किसान की बेटी ने देखा कि उन्होंने गाय को सामने गौ-शाला में बांध दिया था। आधी रात हो चुकी थी उसकी नींद टूटी ।वह एक पेड़ के नीचे सो रही थी। उसे ऐसा महसूस हुआ कोई उसके मुंह को चाट रहा था। उसने देखा कि गाय रस्सी तोड़कर उसके पास आ चुकी थी। किसान की बेटी की आंखों में खुशी के आंसू साफ साफ नजर आ रहे थे ।सुरभि गाय की आंखें भी छलक रही थी। किसान की बेटी ने चुपचाप आधी रात के समय ही बिना समय गंवाय वहां से निकल जाना ही उचित समझा। वह साहूकार जिन्होंने गाय खरीदी थी उन्होंने किसान की बेटी को रोते हुए देख लिया था। उन्होंने उससे पूछा तुम यंहा कैसे पंहुंची? किसान की बेटी की आंखों में आंसू देखते हुए उन्होंने कहा बेटी हमें माफ कर दो ,हमने तुमसे इस गाय को तुम से बिना पूछे यूंही ले लिया। वह गाय भी अपनी रस्सी तोड़कर तुम्हारे पास आना चाहती है ।हम इस गाय को अपने पास नहीं रखेंगे बेटी ,आज से यह गाय तुम्हारी ही है ।हम इस गाय को तुम्हें ही दान करते हैं। किसान की बेटी नें साहूकारों के पांव छुए और कहा कि, आप मेरे पिता समान हो ।आपने मुझे मेरी गाय को लौटा कर जो उपकार आपने मुझ पर किया है उसके लिए जीवनभर मैं आप की आभारी रहूंगी । मेरे पास आपको देने के लिए जब कुछ रुपए इकट्ठे हो जाएंगे तब मैं आपको इस गाय की कीमत चुका दूंगी । गाय के बिना जिन्दा रह सकूं या नहीं आप मुझे अपने गांव का पता मुझे दे दो ।मैं आपको इस गाय की कीमत जल्दी ही अदा कर दूंगी । उन साहुकारों ने गाय उस लड़की को दे दी ।उसे कहा बेटा आधी रात को तुम कहां पर जाओगी सुबह के वक्त तुम इस गाय को लेकर चले जाना। किसान की बेटी गाय को पाकर बहुत ही खुश थी ।वह दूसरे दिन गाय को लेकर उस गांव से बहुत दूर दूसरे गांव में जहां उसको कोई भी पहचानता नहीं था गाय को ले कर चली ग्ई।उसने गांव में गाय का दूध बेच कर अपना गुजारा करना शुरू कर दिया ।उसने वहां पर एक घर भी किराए पर ले लिया था और खाली वक्त में एक पास के घर में बर्तन मांजना ,कपड़े धोना ,और झाड़ू पोछा लगाना आदि का काम करने लगी ।वह घर एक पुलिस इंस्पेक्टर का था ।वह उन्हें दूध बेचती , उनके घर का काम करती और उनके बेटे को रखती, इस तरह अपने आप को व्यस्त रखती थी ।गांव कें घने जंगल में उस गाय को शाम के समय जब भी समय मिलता वह अपनी गाय को चराने ले जाया करती थी। जंगल में जब भी जाती हर रोज एक बच्चा भी गाय चराने के लिए वहां पर आता था ।वह उस बच्चे से काफी हिल मिल गई थी ।वह गाय भी चराता और साथ ही साथ पढ़ाई भी करता था ।उसे पढ़ता देकर उसका भी मन होता की वह भी आज पढी लिखी होती तो कितना अच्छा होता? बच्चा बोला, मौसी क्या आप पढी लिखी हो तब उसने कहा नंही, अपनी गर्दन हिला दी ।बच्चे ने फिर पूछा, मौसी आप क्यों नहीं पढी? उसने बच्चे को कहा मेरे मां बाप ने मुझे नहीं पढ़ाया। छोटी उम्र में ही मेरी शादी कर दी थी मेरे पति ने भी मुझे घर से निकाल दिया ।मैं अपने मां बाप के पास अपने मायके में रहती थी । मेरी मां की बीमारी के कारण मेरी मां चल बसी। मेरे बाबा ने मेरी शादी करनी चाही परंतु मैंने शादी करने से इंकार कर दिया और इस गाय को लेकर चली आई। मैं अपने बाबा पर बोझ बनकर नहीं रहना चाहती थी। उस बच्चे की आंखों में आंसू आ गए ।वह बोला मौसी में आपको थोड़ा थोड़ा पढ़ाया करूंगा । मैं आपको हर रोज पढ़ना लिखना सिखाऊंगा लेकिन आपको मेरा शिष्य बनना होगा । उसकी मौसी ने कहा अच्छा गुरु जी तभी दोनों हंस पड़े ,भोलु ने कहा तुम भी मुझे बहुत ही गंभीर दिखाई देते हो । तुमने मुझे मौसी कहा है तुम भी मुझसे कुछ मत छिपाओ अपनी सारी कहानी मौसी को सुना दी उसकी सौतेली मां उसे बहुत तंग करती थी भोलू ने कहा मेरे पिता को मरे हुए अभी थोड़े ही दिन हुए हैं जब तक मेरे पिता जिंदा थे तब तक, उसने मुझे कुछ नहीं कहा जब उनकी मृत्यु हो गई वह मुझे बहुत ही तंग करने लगी ना अच्छे ढंग से खाने को देती है और मुझसे रात दिन कोल्हू के बैल की तरह सारा दिन काम करवाती है ,।मैं कहता हूं मां आज मैं बहुत ही थक गया हूं तब वह कहती है निकल जा मेरे घर से ,मौसी बताओ अब मैं क्या करूं ? भोलू ने अपनी मौसी को थोड़ा बहुत पढ़ना लिखना सिखा दिया था। वह कुछ-कुछ पढ़ना लिखना सीख गई थी । एक दिन भोलू आते ही रोने लगा मौसी मौसी ,आज तो सौतेली माता ने मेरी खूब पिटाई की और आज मैंने किसी व्यक्ति के साथ उसे यह कहते हुए सुना कि वह उसे बेच देगी ।वह मुझे पढ़ाना नहीं चाहती। उसने मेरी पढ़ाई भी छुड़वा दी यह कहकर वह जोर जोर से रोने लगा। उसे रोते हुए देखकर मौसी का कलेजा पसीज गया वह बोली बेटा, हिम्मत नहीं हारा करते, तुम्हारी मां तुम्हें कुछ नहीं देती तो तुम मेरे घर पर आ जाना । तुम मेरे दोस्त ही नहीं ,मेरे सच्चे हमदर्द और मेरे बेटे की तरह ही हो । मैंने भले ही किसी बेटे को जन्म नहीं दिया हो, परंतु मुझे ऐसा महसूस होता है कि तुम्हारा मेरा जन्म जन्मों का नाता है ।मौसी गाय चराने गई उसने भोलू को ं नहीं देखा, दो-तीन दिनों तक वह गाय चराने नहीं आया ।उसने गांव वालों से उसके घर का रास्ता पूछा । वह जब गाय चरा कर घर की तरह वापस आ रही थी तो उसने एक ट्रक को वहां से गुजरते देखा ।उसने उस ट्रक में एक बच्चे को जोर जोर से चिल्लाते हुए देखा। उसे धक्का सा लगा ,उसके दिमाग में ख्याल आया कि कहीं वह भोलू तो नहीं है। उसकी मौसी ने उसे किसी को बेच तो नहीं दिया उसने चुपचाप उस गाड़ी का नंबर अपनी कॉपी पर नोट कर लिया । वह अपने पास एक छोटी सी कॉपी और पेंसिल हमेशा रखती थी। भोलू उसे पढाता था।मौसी ने उस ट्रक का पीछा करना शुरू कर दिया ।एक जगह ट्रैफिक अधिक था वह ट्रक वहां रुक गया था उस में से अभी तक चिल्लाने की आवाज आ रही थी ,तभी उसे गांव की तीन चार औरतें दिखाई दी। वह आपस में कह रही थी कि उस बेचारे भोलू का क्या कसूर ?बाप के मरते ही उसने भोलू को कहीं दूर भेजने का निर्णय कर लिया । वह सोचने लगी हो ना हो ,उस ट्रक में भोलू ही गया है ।वह घर ना जा कर उस ट्रक का पीछा करने लगी ।उसने एक टेलीफोन बूथ पर जाकर गांव की किसी औरत को कहा कि जब तक मैं ना आऊं ,तब तक तुम सुरभि को देख लेना उसे चारा भी खिला देना । गांव की औरतों के साथ उसकी खूब पटती थी। उसकी सहेली ने कहा की कोई चिंता करने की बात नहीं ,हम तुम्हारी गाय को देख लेंगे। वह बिना किसी चिंता के उस ट्रक का पीछा करने लगी। गांव से बहुत दूर एक बहुत बड़े होटल के पास वह ट्रक रुक गया था। उस ट्रक पर नेम प्लेट भी नहीं थी । उस ट्रक में उसे कोई नजर नहीं आया ।वह काफी देर तक सोचती रही क्या करूं, कहां जाऊं ?वह कमजोर नारी नहीं थी। उसने बहुत बड़े ढाबे को देखकर वहां चाय पीने का विचार किया ।वहां पर वह चाय पीने जाने लगी।ढाबे की मालकिन ने उसे गर्मगर्म चाय दी। चाय पी कर और खाना खाकर उसने अपने आपको तरोताजा महसूस किया ।उसने वहां पर एक किराए किराए पर कमरा लेना चाहा।उस होटल की मालकिन ने उसे कहा कि उस सराय में रहने के लिए कोई कमरा खाली नहीं है तब उसने वहां से लौट जाना ही उचित समझा ।वहां से लौट कर अपने गांव वापस आ गई । भोलू को ना पाकर वह बहुत उदास रहती थी ।वह पुलिस इंस्पेक्टर के पास गई जिनके पास वह काम करती थी ।उससे कहा भाई साहब इस गांव के बच्चे भोलू को उसकी सौतेली मां ने बेच दिया है ।मैंने उसके घर जाकर भी देखा पर इतने दिन तक वह मुझसे बिना मिले रह नहीं सकता था ।आप उस बच्चे का पता लगाओ । पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा कि मैं पता लगाने की कोशिश करुंगा ।तुम्हारे पास क्या कोई सबूत है। उसने कहा मैं उसे ढूंढे बगैर नहीं रह सकती ।पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा अच्छा बहन तुम उसे ढूंढने अवश्य जाओ, मैं तुम्हें एक मोबाइल देता हूं तुम्हें पढ़ना लिखना तो आता ही है उसने कहा कि भोलू ने मुझे थोड़ा बहुत पढ़ना लिखना सिखाया है । उस पुलिस इंस्पेक्टर ने उसे मोबाइल चलाना सिखाया। उसने पुलिस इंस्पेक्टर को कहा कि उसने उस ट्रक का नंबर भी नोट कर लिया था। वह हरे रंग का ट्रक था परंतु जैसे ही मैंने उस ट्रक का पीछा किया, और मैंने उस ट्रक को खड़े देखा तब उसकी नेमप्लेट गायब हो चुकी थी ।उसने पुलिस इंस्पेक्टर को ट्रक का नंबर भी दिखाया अब वह भालू की तलाश में एक बार फिर चली गई वह जब उसी स्थान पर पहुंची वहां पर पंहुंच कर पास में ही उसने एक घर किराए पर ले लिया और सब्जी बेचने वाली बनकर वहां उस होटल में सब्जी बेचने लगी ।उसने वहां पर ही सभी ट्रकों को खड़े देखा था ।उसने सोचा कि कहीं आस-पास ही उन अपहरण क्ने भोलू को रखा होगा । वह हर रोज उस होटल वाले को सब्जी देती और हर रोज उस पर नजर रखती थी ।एक दिन उस होटल में उन्होंने किसी को ऊपर वाली मंजिल में स्ट्रेचर पर ले जाते हुए देखा ।उसने सोचा कि कोई बीमार व्यक्ति होगा जिसको लिटा कर ले जा रहे हैं ।थोड़ी देर बाद उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया । एक दिन किसान की बेटी ने होटल की मालकिन को सुबह सुबह जगा दिया और कहा कि मुझे चाय बनाओ ,वह चाय बनाने लगी उसे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी आवाज ऊपर से आ रही थी ।किसान की बेटी जल्दी जल्दी चाय पीकर अपने घर वापस आ रही थी तो होटल की मालकिन ने कहा, मैं सोने जा रही हूं यह चाबी तो तुम्हीं रखो ।तुम्हीं होटल बंद करके चाबी बाहर वाले कमरे में रख देना । मुझे बहुत ही नींद आ रही है वह होटल वाली मालकिन चाबी किसान की बेटी को पकड़ा कर सोने चली गई। वह जब सोने चली गई तो किसान की बेटी ने सोचा यह अच्छा मौका है ऊपर चल कर देख कर आती हूं कि इस घर में हर रोज रोने की आवाज किसकी है यहां पर कौन बीमार है ?वह जल्दी जल्दी में सीढ़ियां चढ़ने लगी । वह जब तीसरी मंजिल पर गई वहां तो ताला लगा था ।एक कमरे से रोने की आवाज अभी भी आ रही थी । किसान की बेटी ने सोचा कि इस कमरे को कैसे खोलें । चाबी के गुच्छे से एक चाबी लगाई जिसमे ं लाल धागा बंधा था , चाबी लगा कर देखा दरवाजा खुल गया। वहां पर दस साल का बच्चा जो बेहद कमजोर हो चुका था रो रहा था ।वह सोचने लगी कि भोलू को भी किसी ने ऐसे ही कैद कर लिया होगा ।जैसे ही उस बच्चे ने उस औरत को देखा वह उससे लिपट लिपट कर जोर जोर से रोने लगा ।उसे रोता देखकर किसान की बेटी ने पूछा तुम कौन हो ?तुम क्यों रो रहे हो ? उस बच्चे ने रोते-रोते कहा कि मैं तुम्हारा ंभोलूं उसने अपना कोड वर्ड जो दोनों आपस में कहते थे वह कहा , किसान की बेटी ने कहा तुम्हारी यह हालत कैसे हो गई? भोलू ने कहा कि मेरी सौतेली मां ने मुझे इस होटल के मालिक को बेच दिया ,इस होटल के मालिक का बेटा उसने किसी व्यक्ति को ट्रक के नीचे कुचल कर मार दिया था । होटल के मालिक नेंमुझे मौसी से खरीद लिया। उन्होंने मेरी मार मार कर मेरी यह दर्गति कर दी है। उस होटल की मालकिन के बेटे की शक्ल कुछ- कुछ मुझ से मिलती है। अस्पताल ले जा कर डाक्टर को घूस खिला कर ठीक वैसा ही तिल मेरे गाल पर भी बना दिया जैसा तिल उस होटल के मालिक के बेटे के मुंह पर था।मुझसे कहा कि पुलिस के सामने कबूल कर दो कि खून तुम्हारे द्वारा ही हुआ। तुम कहां जाओगे? तुम्हारी सौतेली मां ने तो तुम को हमें बेच दिया है। तुम यहां से कहां जाओगे ? तुम्हें कोई भी नहीं बचा सकता। भोलू की मौसी यह सुन कर हैरान रह गई ।उसने कहा बेटे तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं । तुम्हारी मौसी तुम्हें बचाने आ गई है। तुम चुपचाप यहीं पड़े रहो जब तक मैं तुम्हें यहां से निकालकर नहीं ली जाती । मौसी ने चुपके से दरवाजे में ताला लगाया और चुपचाप नीचे आकर चाबी दूसरे कमरे में रखकर घर चली आई ।उसने सबसे पहले पुलिस वाले को सूचना दी कि इस होटल के मालिक ने भोलू को उसकी सौतेली मां से खरीद कर सजा दिलवाने का हकदार बना दिया है जो गुनाह उस बच्चे ने नहीं किया । बच्चे पर खून करने का झूठा आरोप लगाया जा रहा है। उसने अपने भाई पुलिस इंस्पेक्टर को भी मोबाइल से फोन करके भोलू की सारी कहानी सुनाई कि उसको दूर एक गांव में होटल के मालिक ने अगवा करके बंदी बनाकर रखा हुआ है । उस पर एक व्यक्ति के मारने का आरोप लगा दिया था। उसने अपने भाई पुलिस इन्सपैक्टर को यह भी बताया कि उस होटल के मालिक ने भोलू को अस्पताल ले जा कर उसके गाल पर भी तिल बनवा दिया था जैसा उसके बेटे के गाल पर था। उसका चेहरा होटल के मालकिन के बेटे जैसा ही दिखाई देनें लगा। किसान की बेटी जब उस पुलिस इंस्पेक्टर के पास पहुंची तो गांव के पुलिस इंस्पेक्टर ने उससे कहा ,तुम बिना किसी सबूत के यह कैसे कह सकती हो? यह खून उस बच्चे ने नहीं किया। वह कहने ही जा रही थी तभी उसने उस पुलिस इंस्पेक्टर को उस होटल के मालिक को फोन करते हुए सुना ।वह कह रहा था कि तुम्हारा पर्दाफाश हो चुका है ।तुम्हारी सारी सच्चाई एक औरत को मालूम हो चुकी है ।तुम तुरंत यहां आ जाओ, और उस औरत को भी पकड़ लो । किसान की बेटी ने पुलिस इंस्पेक्टर को यह जताया जैसे उसने कुछ भी नहीं सुना। रोशनी ने पुलिस इंस्पेक्टर को कहा कि मैं यहां पर बैठ जाती हूं ।पुलिस इंस्पेक्टर ने सोचा कि यह औरत तो अनपढ़ है उसने उसे बताया था कि वह पढ़ना लिखना नहीं जानती। वह जैसे ही अंदर गया ,किसान की बेटी जल्दी से गाड़ी करके वहां से चली गई और एक मालिन का भेष धारण कर लिया । होटल का मालिक तब तक इस्पेक्टर के पास पहुंच चुका था । वह औरत तो वहां से जा चुकी थी वह मालिन का भेष धारण कर होटल की मालकिन के पास गई। उस होटल की मालकिन नें उसे नहीं पहचाना क्योंकि उसने अपनें मुंह पर काला रंग मल दिया था । थोड़ी देर बाद होटल का मालिक भी वहां पहुंच चुका था उसकी पत्नी ने अपने पति से पूछा तुम्हें उस पुलिस इंस्पेक्टर ने क्यों बुलाया था? मालिन ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड का बटन दबा दिया था होटल के मालिक ने कहा कि हमारी असलियत सबके सामने आ चुकी है ।किस तरह उस बच्चे की प्लास्टिक सर्जरी करके हमने उसका चेहरा अपने बेटे के चेहरे की तरह कर दिया है ? होटल की मालकिन बोली कि मेरे बेटे ने खून करके बड़ा बुरा किया ।हमें उस लड़के को ही अपना गुनहगार साबित करना होगा क्योंकि उस बच्चे का उसकी सौतेली मां के सिवा कोई नहीं है । भोलू को उसकी सौतेली मां ने 50,000 रू में तुम्हे बेचा था। होटल की मालकिन बोली

उस बच्चे को ही मेरे बेटे की जान बचाने होगी इसके सिवा हम कुछ नहीं कर सकते ।हमें अपने बेटे की जान तो बचानी है। उस होटल के मालिक ने भोलू के पास जाकर कहा , तुम्हें मिलने कौन आया था ?तुम्हें फांसी से कोई नहीं बचा सकता है यह कह कर उसे हवालात में ले जाने लगा तभी मालिन सीढ़ियां चढ़कर ऊपर आ चुकी थी । होटल के मालिक ने उसको सीढ़ियां चढ़ते देखकर कहा कि तुम कौन हो ?आप दोनों को जोर-जोर से बातें करते सुना ,यह बच्चा कौन है ?होटल के मालिक ने कहा कि यह बच्चा बीमार है । इसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है । हम इसे अस्पताल ले कर जा रहें हैं। किसान की बेटी ने अपने गांव के पुलिस इंस्पेक्टर को बताया कि इस गांव के पुलिस इन्सपैक्टर भी उस होटल के मालिक से मिले हुए थे ।आप जल्दी से आकर उस बेगुनाह बच्चे को बचा लो ।वह पुलिस इंस्पेक्टर अब उस गांव में पहुंच चुके थे मामला हवालात तक पंहुच गया । जज से मिलकर उसने जज को सारी बात सुनाई ।अदालत में जब जज ने पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है तब उस बच्चे ने कहा कि जज साहब! मेरा इस गुनाह से कोई लेना देना नहीं है ।मैं तो इस गांव के बारे में कुछ भी नहीं जानता ।मेरी सौतेली मां ने मुझे इस गांव के होटल मालिक के हाथ ₹50,000 में बेच दिया । मुझे कुछ सूंघा कर बेहोश करके मेरे चेहरे को और ही रूप दे दिया ।मैंने जो खून नहीं किया उसकी सजा मुझे दे दी ।मैं बेगुनाह हूं ।मेरी मुंहबोली मौसी के सिवा इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है । मेरे गांव में ही मांसी की मुझसे जान-पहचान हुई।मैंने उन्हें पढ़ाया और आज यह मुझे छुड़वाने यहां तक पहुंच गई ।उस होटल के मालिक ने मुझे इतने दिन तक कैद रखा और मुझे मारने के लिए छोड़ दिया ।मेरी मुंह बोली मौसी ने मुझे यहां पर आकर मेरे बचने की उम्मीद जगा दी ।मेरे गांव के पुलिस इन्सपैक्टर भी मुझे बचाने के लिए यहां आए है।ं पुलिस इन्सपैक्टर ने कहा मुझे इसकी मौसी ने पहले ही सब कुछ बता दिया था। मैंने ही उसे मोबाइल दिया था ताकि वह सारी बातें इस मोबाइल में नोट कर लिया करें ।उसने आज तो होटल के मालिक और मालकिन की सारी बातें रिकॉर्ड कर ली थी ।हम ने उस ट्र्क का नम्बर भी पता कर लिया वह नम्बर उस होटल के मालिक का ही है।

आप किसी बेगुनाह को सजा कैसे दे सकते है?ं पुलिस इंस्पेक्टर ने उसकी सौतेली मां को भी जेल में डलवा दिया जिसने अपने बेटे को उन दरिंदों को बेच दिया था ।होटल के मालिक और मालकिन को भी छ: महीने की सख्त सजा सुनाई और होटल के मालिक के बेटे को पांच साल की सजा दे दी गई ।उस मासूम गोलू के साथ बुरा बर्ताव करवाने के आरोप में उसे 20,000 रुपए भी दिलवा दिए । भोलू को रिहा कर दिया गया ।मौसी ने उसे कानूनी रूप में गोद ले लिया । वह अपने बेटे के साथ खुशी-खुशी रहनें लग गई थी।बेटे को लेकर सबसे पहले साहूकार के पास जाकर उसने गाय की कीमत साहूकार को अदा की। अपने पिता के पास उस बच्चे को लेकर अपने गांव लौटी।अपनी बेटी को सही सलामत देखकर और सुरभि गाय को वापस आता देखकर उसके पिता फूट-फूटकर अपनी बेटी को गले लगा कर रो दिए ।बेटी मुझे माफ कर दो मैंने तेरे दिल को दुखाया है जो तू, बिना बताए मुझे यहां से चली गई ।मेरे मन में एक बोझ साथ था। मैं अब खुशी-खुशी इस दुनिया से जा सकूंगा । उसकी बेटी बोली देखो बाबा हमारी सुरभी हमारे घर वापिस आ गई है ।ं एक नन्हें मेहमान को लेकर आई है । बाबा को बताया कि उसने उस बच्चे को कानूनी तौर पर गोद ले लिया है यही अब मेरे बुढ़ापे का सहारा है ।हम इस बच्चे को अच्छी तालीम देंगे । उस बच्चे ने भी बाबा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया सब खुशी से झूम रहे थे।

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