रहस्यमयी गुफा भाग3

भोलू जैसे ही हड्डियों को दबाकर आया उड़ने वाले घोड़े पर बैठकर सीधा गुफा से बाहर निकल गया। उस नें गोलू को कहा कि गाय की हड्डियों को मैं उस गुफा के पास बरगद वाले पेड़ के पास बनें गड्डे  में 5 कोनों में दबा आया हूं। जल्दी से घर चलते हैं। उड़ने वाले घोड़े को उसने अपने घर की ओर दौडाया। उस पर बैठ कर जल्दी ही घर पहुंच गए। भोलू की मां उसके लिए परेशान हो रही थी। उसके माता-पिता बूढ़े थे। वह अपने माता पिता को खुश देखना चाहता था। वह जैसे ही घर पंहुचा उसकी माँ बोली तुम कंहा चले गए थे? तुम्हारा इन्तजार कर कर थक गए। बुरे बुरे विचार मन में आ रहे थे। तुम जल्दी बताओ तुम इतने समय तक कंहा थे? वह बोला माँ मैं पहाड़ की कन्दराओं में गया था। उसनें सारी कहानी माँ को सुना दी। माँ उसे कहने लगी तुम्हें आज मैं अपनी कहानी सुनाती हूं। ध्यान से सुनो।

वह बोली आज तक मैनें तुम्हें तुम्हारे पिता के बारे में यह नहीं बताया कि उनके बोलने की शक्ति कैसे चली गई थी। तेरे पिता काम की तलाश में अक्सर बाहर ही रहते थे। एक दिन वह मुझ से बोले कि आज मैं तुम्हें पहाड़ के दूसरी छोर पर घुमाने ले चलता हू। वहां पर मैं अक्सर जाता रहता हूं।  उसकी मां ने  भोलू से कहा  कि बेटा तुम्हारे पिता के साथ एक बार जब वह पहाड़ की यात्रा पर गई थी तो  एक दिन इतनी जोरों का तूफान आया कि चारों ओर सारे  के सारे पेड़ ही हिलनें लगे। ऐसा लगता था कि आज कोई भी जीवित नहीं बचेगा। चारों ओर ऐसे लगने लगा धरती के जीवों का भी नामो निशान नहीं रहेगा। दूर दूर तक कुछ भी दिखाई नहीं दिया। लोग उस भयंकर तूफान से ना जाने कहां कहां गिरे। हम जब उठने का प्रयत्न करन लगे तो हमें ऐसा महसूस किया कि हम उठ ही नहीं पा रहे थे।

हम तूफान से बचने के लिए एक गुफा में छिप गए। वहां पर विचित्र प्रकार की डरावनी आवाजें आ रही थी। हम डर के मारे गुफा से निकले ही थे कि वह गुफा हमारे देखते ही देखते गायब हो गई। हम भागते भागते जा रहे थे कि हमने एक भयानक दानव को अपनी ओर आते देखा। उन पहाड़ की कंदराओं की गुफा में  फिर से कभी मत जाना। वहां पर एक दुष्ट दानव बहुत ही खतरनाक है। उसके पास जादू की ऐक छड़ी थी। तुम्हारे पिता पर उसनें लाठी से प्रहार किया। उछड़ी के प्रहार से तुम्हारे  पिता  के बोलनें की शक्ति जाती रही। उन्होंने काफी देर तक उस दानव के साथ युद्ध किया। तुम्हारे पिता के साथ युद्ध करते समय उस दानव का जूता नीचे छूट गया। एक जूता खो जाने के कारण जादूगर की शक्ति बहुत कम  हो गई थी। दुष्ट जादूगर  को  दूर से उड़ती हुई चीलें दिखाई दीं। वह दुष्ट जादूगर उसी समय आंखों से ओझल  हो गया। वह जूता जल्दी से उठा के हम लोग वहां से भाग निकले। हम जल्दी जल्दी घर पहुंचे। वह जूता तुम्हारे पिता ने रास्ते में कहीं छिपा दिया था। तुम्हारे पिता बहुत ज़ख़्मी थे। बहुत इलाज कराया मगर तुम्हारे पिता की आवाज़ लौट नहीं पाई। एक बहुत बड़े वैद जी ने मुझे बताया कि तुम्हारे पिता के बोलनें शक्ति तब आएगी जब उस दुष्ट जादूगर से जादू की छड़ी लाई जाएगी। लेकिन मैं तुझे इसलिए आज तक  यह नहीं बता रही थी कि तू भी वहां जाने की ज़िद करेगा । बेटा अब तू दोबारा कभी भी वहाँ मत जाना । तुझे भी उसने मार दिया तो मैं किसके सहारे जीऊंगी। बेटा तू कभी भी वहां जाने का प्रयत्न मत करना वह दुष्ट जादूगर दैत्य बहुत ही शक्तिशाली प्रतीत होता है।

भोलू बोला पिता जी मुझे उस दानव के बारे में कुछ तो बताओ। याद करने की कोशिश करो कि वह जूता कहां है? याद करने की कोशिश करो तुम्हारे साथ घर पर  कौन-कौन आया था? इशारे से ही सही कुछ तो बताओ पिताजी। उसके पिता कुछ कह नहीं पाए। तभी उसकी माँ कुछ याद करते हुए बोली, कि उस दिन जूते के बारे में मुझे वे कुछ बताना चाहते थे शायद, पर वह मुझे समझ में नहीं आया । फिर पड़ोस से जल्दी से जा कर में तुम्हारे मुह बोले चाचा को बुला लाई। तुम्हारे मुंह बोले चाचा को इशारे से उन्होनें समझाया। और मैंने पूरा किस्सा तुम्हारे मुँह बोले चाचा को बताया। वह उसी समय जूता ढूंढने निकल गए पर शायद उन्हें कुछ हाथ नहीं लगा तो वह बहुत निराश हो के आपने गांव लौट गए। भोलू  बोला कि वह कहां रहते हैं? उसकी मां बोली कि वह राम-गढ़ गांव में रहते हैं। वह अपने मन में सोचनें लगा कि वह गांव जाकर ही रहेगा और वह जूता भी चाचा जी की मदद से प्राप्त कर  के  उस जूते की मदद से वह जादू की छड़ी प्राप्त कर के ही रहेगा।  वह अपने मन में सोचने लगा कि क्या किया जाए? उसके मन में ख्याल आया कि मेरे पिताजी की याददाश्त का आना बहुत ही जरूरी है क्यों ना मैं अपनी भूरी से इन जवाबों को ढूंढने की कोशिश करूंगा?

उसने अपने दोस्त गोलू को बुलाया चलो आज अभी इसी वक्त हमें उस  खंन्डर में जाना है। वहां  जा कर अपनी भूरी  से पूछूंगा कि मेरे पिता की याददाश्त कैसे आएगी? उसने जल्दी से उड़ने वाले घोड़े पर बैठकर खंडहर की ओर रुख किया। उसने  खंडहर में अंदर जाकर  के जादू के मोतीओं की माला  अपनें गले  में पहन ली।  उसने बरगद के पेड़ के पास जाकर उसके पास पहुंच  कर वहां अपनी भूरी को प्रणाम किया। मेरी  भूरी वापस आ जाओ। मैं बहुत ही मुश्किल में फँस गया हूं। उसे ऐसा महसूस हुआ कि उसकी भूरी  उसको प्यार से थपथपा रही है।  उसनें हड्डियों  को बाहर निकाला और  भूरी भूरी। मुझे बताओ। उसने कहा कि मुझे  जादू के  जूते के बारे में कुछ बताओ। मेरी मां नें मुझे सारी कहानी बताई कैसे दानव के साथ युद्ध  करते वक्त  उसके दानव का जूता नीचे छूट गया था। जूते को प्राप्त करनें के लिए वह दुष्ट दानव मेरे पिता के साथ युद्ध करनें के लिए आया।  मेरे पिताजी मां को बता नहीं पाए कि  जूता कहां है? भूरी बोली बेटा उस दिन जो आदमी तुम्हारे पिता के साथ था उनका पता करो। उसके पास ही वह जूता हो सकता  है। उस जूते को जब तुम अपनें पिता को सूंघाओगे तब तुम्हारे  पिता में थोड़ी सी हरकत आ जाएगी।  याददाश्त वापस तभी आएगी जब तुम उस जादू की छड़ी  प्राप्त कर लोगों। उस को प्राप्त करने के लिए तुम्हें वहां बिल्कुल अकेले जाना होगा। उन हड्डियों को वही  दबा दिया। घर आ कर अपनी मां को बोला मुझे उन चाचा जी से काम है।  उनके घर का पता बताओ। उसकी मां ने गांव का पता लिख कर भोलू को  दे दिया।  भोलू नें अपनी मां को का कहा कि  मैं जल्दी ही जूता प्राप्त करके  वापिस आ जाऊंगा।  वह जूता मेरे बड़े काम का हे। वह जूता शायद उनके पास है।  पिताजी की याददाश्त के लिए उसे प्राप्त करना बहुत ही आवश्यक है। भोलू ने अपनी मां को कहा कि मां में जल्दी ही वापिस  आऊंगा। वह जूता हमारे बड़े काम का है पिता की याददाश्त के लिए और जूता प्राप्त करना बहुत ही आवश्यक है। भोलू अपनी मां से विदा लेकर  जूते  को प्राप्त करने के लिए अपने चाचा जी के घर जाने के लिए निकल पड़ा। उसने उड़ने वाला घोड़ा दौड़ाया। वह घोड़ा बड़े बड़े पर्वतों दुर्गम जंगलोंं को पार करता हुआ सीधा उस गांव में पहुंच गया।

वह छोटा सा गांव था। गांव वाले लोगों से पता किया कि चौधरी मंगतराम का घर कहां है?। उसनें वहां एक सराय में एक कमरा  किराए पर ले लिया।

मालिक  ने बताया कि मंगतराम तो यहां के जाने-माने धावक हैं।उन को तो आज तक कोई भी दौड़ में हरा नहीं पाया। 3 सालों से लगातार दौड़ में जीतते आ रहे हैं। उनके जैसा दौड़ में समर्थ तो शायद उस गांव में कोई भी व्यक्ति नहीं है जो उन्हें दौड़ में हरा दे। वह   उस गांव में जहां ठहरा हुआ था उस  मालिक  से  बोला अच्छा तो मैं भी देखना चाहता हूं कि अपना कमाल वह कैसे दिखाते हैं? मैंने उनके बारे में बहुत सुना है लेकिन आज  उनकी प्रतिभा को देखने के लिए मेरे कदम मुझे  यहां तक खींच कर ले  आए। मैं भी तो देखूं मंगतराम  कैसे दौड़ में अदभुत करिश्मा दिखाते हैं? उसने कमरे  के  मालिक को  कहा कि दौड़ कब है? वह बोला उन का करिश्मा  देखने के लिए तो तुम्हें 2 दिन का इंतजार करना पड़ेगा।

देखना आज भी वह अपने दोस्तों के साथ चाय पीने पास के ही एक ढ़ाबे में अवश्य आएँगे। उनको तुम से मिला दूँगा।  उसने दूर से आते हुए  एक लम्बे चौड़े हट्टे-कट्टे व्यक्ति को आते देखा। मोटी मोटी मूंछों वाले  व्यक्ति को ढ़ाबे के सीट में बैठते देखा। उनकी शक्ल से ही वह किसी पठान का चेहरा नजर आ रहा था। भोलू उन के पास बैठकर बोला चाचाजी  नमस्ते। भोलू की तरह देख करके बोले बेटा तुम कौन हो? तुम  शायद यहां नये नये आए हो। वह बोला जी मैं गांव  घूमने आया हूं। मैं गाजियाबाद का रहने वाला हूं। पठान बोला गाजियाबाद में तो मेरे भाई भाभी भी रहते हैं।तीन साल हो गए जाने का मौका ही नहीं मिला। वह बोला होटल के मालिक से पता चला कि आप बहुत ही बड़े धावक हैं। मैं आपकी प्रतिभा देखना चाहता हूं इसलिए 2 दिन और यहाँ रुकना चाहता हूं। खेलों में तो मेरी भी रुचि है। मंगतराम बोला चाचू भी कहते हो और धर्मशाला में रुक रहे  हो। मेरे साथ मेरे घर पर चलो।  दो दिन वहीं पर रहना फिर गांव चले जाना। वह मन ही मन खुश हो रहा था। मेरी इच्छा पूरी हुई। वह बोला चाचू जब आप इतना कह ही रह तो मैं आपको कैसे इनकार कर सकता हूं? आपके घर पर चलूंगा। आपको मेरे साथ कोई कष्ट तो नहीं होगा न। वह बोला भला मुझे कष्ट क्यों होने लगा?  चाचू क्या है न  मुझे दूसरी जगह पर अकेले नींद नहीं आती। डर लगता है। रात को मैं क्या आपके कमरे में ही सो सकता हूं? आपको मंजूर हो तो ठीक है वरना मैं उस कमरे में ही रहना पसंद करूंगा। यहां सारी रात जाग कर किताब पढ़ कर काट दूंगा। मंगतराम बोला बेटा तुम तो मेरे बच्चे जैसे हो।  मेरा भाई भी गाजियाबाद में रहता है। उसका भी एक बेटा है तुम क्या उन लोगों को जानते हो? उसका नाम दौलतराम है। पूर्व अपने पिता का नाम सुनकर हैरान हो गया। वह मन ही मन सोचने लगा कि वह अपने बारे में कुछ भी नहीं पाएगा।चाचू मैं उन्हें नहीं जानता। दौलतराम नाम के न जानें   कितने लोग इस दुनिया में होंगे। पठान ने उसके घर का सही सही पता बता दिया। उस मालूम हो गया था कि वही व्यक्ति उस के चाचा हैं। मंगतराम जी उसे अपने घर ले गए।  उनका बहुत बड़ा बंगला देखकर वह हैरान हो गया। उस बंगले में वह  अकेले  ही रहते थे। वह सारी चीजों को टकी टकी लगा कर देख रहा था। सोच रहा था कि कहीं ना कहीं तो उन्होंने वह जूता छुपाए होगा।

पठान ने उसे कहा कि बेटा जो कुछ खाना हो रसोई में फल पड़े हैं  तुम्हें खाना बाहर से ही मंगवा देता हूं। वह बोला मेरे रहते आप बाहर से क्यों मंगवाओगे।  मैं आज आपको खाना बनाकर खिलाऊंगा। उसने बहुत ही स्वादिष्ट  खाना  बनाया। उन दोनों ने मिलकर खाना खाया। मंगतराम  जी बोले बोला बेटा एक बार दौड़ते वक्त उनके पैर में इतनी गहरी चोट लगी तो डॉक्टरों ने उनके नाप का जूता बनवा कर दिया और कहा कि उसको अपने पैर से  कभी अलग मत करना। यह थोड़ा सख्त है, लेकिन मुझे इस जूते की आदत पड़ चुकी है। मुझे उस जूते के बगैर नींद ही नहीं आती है। गांव वाले लोगों के पास मैं इस जूते को पहनकर नहीं जाता। मै इस  जूते पर से अपने दूसरे जूते आसानी से पहन लेता हूं।  यह जूता बहुत ही हल्का है। मैंने उसको बनवाने में बहुत रुपए खर्च किए। बड़ी दूर से मंगवाया है।

भोलू बोला चाचू जब तक  मैं कुछ  पढ़ ना लूं मुझे नींद ही नहीं आती  है।  मंगतराम बोले बेटा तुम बाद में सो जाना। तुम मेरे साथ वाले पलंग पर सो सकते हो। कोई बात नहीं इसमें क्या है? आपके साथ वाले बिस्तर में मैं आराम से सो जाऊंगा। आप मेरी चिंता मत करो। उसे अपने चाचा जी से जूते का रहस्य मालूम हो चुका था। दूसरे दिन भी अपने चाचा जी को दौड़ में भाग  लेते हुए देख रहा था। इतनी तेजी से फुर्ती से दौड़ते देखा मानो कोई 25 साल का नवयुवक दौड़ रहा हो। अपने मन में सोचने लगा इस जूते  को प्राप्त करके ही  रहूंगा। उसके चाचा जी के जीतने पर सब लोगों ने तालियां बजाई। एक बार फिर से वे जीत गए थे। होटल के मालिक  भोलू से बोले, देख लिया ना इन बाबू जी  का सचमुच ही दौड़ में कोई  सानी नहीं है।

उस रात को भोलू नें खाना बनाया उसने चाचू के खाने में नींद की गोली  मिला दी। उसके चाचू जूता पहनकर ही सो गए थे। उसने खाना लगाया। उसने अपने आप  भी खाना  खाया और चाचू को भी  खिलाया।  उनके खाने में उसने नींद की गोलियां डाल दी थी। जैसे ही उन्होंने खाना खाया उन्हें नींद आनें लगी। वह भोलू   से बोले बेटा मुझे बड़ी जोर की नींद आ रही है। वह जब सो गए जल्दी से जूता उनके पैर से  निकाल लिया। रात को ही उड़ने वाले घोड़े पर बैठकर वापस अपने गांव आ गया। घर आकर अपनी मां को बताया कि मैंने बड़ी मुश्किल से यह जूता प्राप्त किया है। उसने वह जूता अपने पिता को  सुघांया। उससे वह हिलने ढूंढने लगे। पहले अपने बिस्तर से उठते भी नहीं थे। धीरे-धीरे अपने बिस्तर से उठने लगे। उसकी मां उन्हें हिलते डुलते देख कर बड़ी खुशी हुई। वह भोलू से बोली बेटा मुझे खुशी है कि तुम ने अपने अपने पिता के लिए इतना जोखिम लिया परंतु जादू की छड़ी प्राप्त करना तो बड़े ही जोखिम का काम है। वह बोला मां बस आप की आज्ञा की जरूरत है। मुझे कुछ नहीं होगा। आपके आशीर्वाद से मैं जादू की छड़ी प्राप्त करके ही रहूंगा।

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