हमशक्ल

चीनू को उसकी मम्मी ने हॉस्टल में दाखिल करवा दिया था क्योंकि वह घर में ज्यादा पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाती थी। उसकी मम्मी ने इसलिए दाखिल करवाया था ताकि वह अपना पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई में केंद्रित करें। घर पर उसे पढ़ाना मुश्किल था। वह आगे हॉस्टल से कोचिंग भी ले रही थी। हॉस्टल में उसकी सहेली बीनू बन गई थी। दोनों ही रूम पार्टनर थी। एक ही कमरे में उन्हें रहने को मिला था दोनों के चेहरे इतना आपस में मिलते थे कि कोई यह नहीं बता सकता है कि यह दोनों सहेलियां हैं। ऐसा लगता था मानो वे दोनों सगी बहनें हो। परंतु उन में फर्क इतना था कि एक के बाल लंबे एक के छोटे। चीनूं के बाल छोटे-छोटे थे। उसकी सहेली अभी उसको देखकर दंग रह जाती थी। अगर एक अपने बालों को ढक ले तो सब यही समझते थे कि वे दोनों जुड़वा बहने हैं।

कई बार तो उनकी अध्यापिकाएं भी चीनू और बीनूं को नहीं पहचान पाती थी। चीनू को बीनू और बिन्नू को चीनू कह देती थी।

बरसात की छुट्टियां होने वाली थी। दोनों को एक एक महीने की छुट्टियां हो रही थी। दोनों हॉस्टल के वातावरण से निकलकर घर जाना चाहती थी। वीनू के दिमाग में एक विचार आया क्यों ना इस बार चीनूं तुम मेरे घर जाना और मैं तुम्हारे घर पर जाऊंगी। क्योंकि हम दोनों ने अपनी मम्मी और पापा के बारे में एक दूसरे से काफी कुछ बताया है। चीनूं के पापा नहीं थे। और बीनूं की मम्मी। चीनू कह रही थे कि वीनू मैं पापा का प्यार पाना चाहती हूं। मैंने तो अपने पापा का प्यार कभी नहीं देखा। मुझे तो यह भी नहीं पता कि पापा कैसे होते हैं? मुझे मेरी मां ने पाल पोस कर बड़ा किया है। मेरी मम्मी ने मुझे खाना बनाना सिखाया। मैं तो घर का खाना खा खाकर पली-बढ़ी हूं। मेरे नाना नानी हमारे साथ रहते हैं। मेरे दादाजी जब मैं पैदा हुई थी उनके कुछ दिनों बाद दुनिया से जा चुके थे। मैंनें तो अपनें दादा जी को कभी नहीं देखा। तुम वंहा पर जा कर नाना नानी के पैर छूना। और उनका कहना मानना। जो कुछ मैनें तुम्हे समझाया तुम वैसा ही करना। उन्हें पता ही नहीं चलेगा कि तुम बीनू हो। इस तरह से तुम्हें मां का प्यार भी मिल जाएगा। तुम सदा कहती रहती हो मेरी मां पता नंही कैसी दिखती होगी? तू मेरी मां में हीअपनी मम्मी को देख लेना। इस तरह से तुम्हारा दिल भी लग जाएगा। और तुम नया शहर भी देख लोगी। इसके लिए तुम्हेअपने बाल छोटे करवाने होंगे। चीनूं बोली तुम्हे नकली बाल लगाने होंगे। तुम पापा को देख कर चौक मत जाना। तुम ब्रेड पकौड़ा पनीर इडली डोसा पसंद करती हो। वह तुम्हें मिल जाएगा क्योंकि मेरे पापा इन चीजों को पसन्द करतें हैं। कहीं ना कहीं यह चीज खाने में अच्छी लगती है।

दोनों एक दूसरे के घर पहुंच गई थी। जैसे घर आई उसकी मां ने कहाअपने नाना नानी के पैर नहीं छूएंगी। बीनू को ध्यान आया मैंने यह गल्ती कैसे कर दी। उसनें नाना नानी के पैर छू। उसकी ममी नें कहा तुम बहुत दिन बाद आई हो। तुम जब बोलना शुरु करती हो तुम चुप हीं नंही होती। उसनें चीनूं की मां को एहसास नहीं होने दिया कि वह चीनूं नहीं है। वह तोअपनी मां के गले लग कर रोना चाहती थी। वह सोच रही थी कि चीनूं कितनी भाग्यवान है? उसे कितना प्यार करने वाली मां मिली है? अपनी बेटी का इतना ख्याल रखती है। मेरे पापा ने तो मुझे मेरी मां के बारे में कुछ भी नहीं बताया।

वीनू भी अपने पापा के पास पहुंच गई थी। वीनू नें अपनें पापा के गले लगा कर कहा पापा मैं आपको छोड़कर नहीं जाना चाहती। तभी उसने देखा कि उसके पापा की आंखों से आंसू आ चुके थे। उन्होंने अपने आंसुओं को छिपाने की कोशिश की थी ताकि उन की बेटी देख न ले। इसलिए बात बदल कर बोले इतने दिन बाद आई हो चलो किसी रैस्टोरैन्ट में चल कर बर्गर खाते हैं। आज हम दोनों बाहर ही खाना खाएंगे। चीनूं बहुत ही खुश हो गई थी। क्योंकि उसे अभी उसके मनपसंद की वस्तुएं खाने को मिल गई थी। पापा का प्यार पा कर उसे महसूस हो रहा था जैसे कि उसे उस के बिछड़े हुए पापा मिल गये। उसकी मम्मी ने उसे बताया था कि जब वह पैदा हुई थी तब उसके पापा बिना बताए कहीं चले गए थे। उन्होंने कहा था कि पता नहीं क्या कारण था परंतु मैं इतना जानती हूं कि तुम्हारे पापा के यहां जाने पीछे कोई ना कोई कारण तो अवश्य होगा। अभी तक इसी विश्वास पर कायम है कि वह एक न एक दिन आकर तुम्हें भी अपना प्यार देंगे। और तुम जैसी मासूम बच्ची को अपने गले से लगा लेंगे।

छुट्टियां समाप्त होने पर दोनों अपने अपने हॉस्टल में वापस आ चुकी थी। चीनूं आ कर बोली तुम्हारे घर जाकर तो मुझे पापा का इतना प्यार मिला। उन्होंने मुझे इतना घुमाया और मेरी मनपसंद वस्तुएं मुझे दिलवाई। मुझे भी मां का प्यार बरसों बाद मिला और इतने दिनों बाद अपने नाना नानी का प्यार पाकर मैनें इतना अच्छा महसूस किया कि मेरा मन वापिस आने को ही नहीं कर रहा था ।

चीनू मीनू दोनों अपनी पढ़ाई में इतनी व्यस्त हो गई अब तो अगले महीने चीनू की मम्मी का जन्मदिन आने वाला था। चीनूं नें बीनू को कहा इस बार मैं उनके जन्मदिन पर अपनी मम्मी को यहां बुलाऊंगी। और यहां के किसी रेस्टोरेंट में उन्हें ढेर सारा केक खिलाऊंगी और एक बड़ी सी पार्टी दूंगी। तभी बीनू बोली मेरे पापा का जन्मदिन भी इसी महीनें आता है। तो क्यों ना हम अपने मम्मी पापा का जन्मदिन एक ही दिन मनाते हैं। मेरे पापा का जन्मदिन 7 अक्टूबर को है। चीनी बोली मेरी ममी का जन्मदिन भी 7 अक्टूबर को आता है। एक ही जगह अपने मम्मी पापा का जन्मदिन आयोजित करते हैं। और हम दोनों एक साथ जन्मदिन मनाएंगे। हम एक दूसरे को अपने अपने मम्मी पापा से मिलवाएंगे। सोनू ने जन्मदिन की पार्टी के लिए पहले से ही तैयारियां कर डाली थी। दोनों ने अपने मम्मी पापा को एक स्पेशल केक भी मंगवा लिया था। और अपने मम्मी पापा के आने का इंतजार कर रही थी। बाहर गाड़ी का हॉर्न सुना दिया। उन्होंने अपनी मम्मी और पापा के लिए मुंबई के एक खास होटल ताज में बुलाया था और उन्हें पहले बता दिया था कि इस जगह पर आपने आकर ठहरना है।

गाड़ी से एक लंबा सा इंसान उतरा। उसने वेटर को कहा कि 5 नंबर मेज कहां है? वेटर ने दूसरी तरफ इशारा किया। वह जल्दी से बैग लेकर वहां जाकर टेबल के पास वंहा बैठ गया। कमरे को खूब सजाया था। तभी पीछे से एक महिला ने वेटर को पूछा पांच नंबर टेबल कहां है। उसे भी वेटर ने कहा दूसरी तरफ। पांच नंबर टेबल के पास जाकर जैसी ही बैठने लगी वह एकदम सौरभ को देख कर चौंक गई। और जोर जोर से रोने लगी। तुम क्यों मुझे छोड़ कर चले गए थे। तुम्हें क्या पता तुम्हारे जाने के बाद मैंने कैसे 18 साल गुजारे है। तुम्हारी याद को सीने में लगाए जीती रही। मेरे मम्मी पापा ने मुझे कहा कि तुम दूसरी शादी कर लो और कहा कि तुम्हें सौरभ सदा सदा के लिए छोड़ कर चला गया है। परंतु मैंने विश्वास ही नहीं किया क्योंकि मुझे विश्वास था कि किसी ना किसी दिन तो मुझे और मेरी बेटी को लेने तुम जरूर आओगे। तुमने मुझसे किनारा क्यों कर लिया? अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं था तो तुमने मुझसे शादी क्यों की? और शादी के एकदम जब चीनूं होनें वाली थी तुम मुझे बताए बगैर वहां से क्यों चले गए? आज तो बताना ही पड़ेगा कि तुम तुझे छोड़कर क्यों गए। सौरभ चौंक कर बोला कौन चीनू? तुम्हारी बेटी तुम्हारे पिता ने तो कहा था कि तुम्हें मरी हुई बेटी पैदा हुई थी। अचानक विभा यह सुन कर हैरान हो गई। मेरे पापा ने सौरभ को इतना बड़ा झूठ कहा था। सौरभ बोला कहां है मेरी बेटी। मैं उससे मिलने के लिए आतुर हूं। विभा बोली वह यही है हॉस्टल में पढ़ती है। उसने मेरा जन्मदिन मनाने के लिए मुझे यहां बुलाया था। विभा बोली मेरे पापा ने कहा कि सौरभ तुम्हे छोड़कर चला गया है। परंतु मुझे विश्वास ही नहीं हुआ मुझे अपने प्यार पर विश्वास था तभी तो मैंने आज तक किसी और से शादी नहीं की। मेरे मम्मी पापा ने मेरी शादी के लिए काफी जोर लगाया परंतु मैंने उन्हें कहा कि आप मुझसे जबरदस्ती नहीं कर सकते।

सुभाष बोला तुम्हारे पापा तो पहले ही मुझे नापसंद करते थे। वह चाहते थे कि तुम्हारी शादी किसी उच्च खानदान में हो। उन्होंने तुम्हारे लिए एक उच्च घरानें का लड़का भी देख रखा था।मैं एक गरीब परिवार का लड़का तुम्हें इतनी खुशियां कैसे दे सकता था? जब हमने भाग कर शादी कर ली और जब चीनू पैदा होने वाली थी तब उन्होंने मुझसे जबरदस्ती कागजात पर हस्ताक्षर करवा लिए कि मैं तुमसे अलग होना चाहता हूं और उन्होंने तुम्हें आज तक नहीं बताया होगा हमारे एक नहीं दो बेटियां पैदा हुई थी। एक बेटी को उन्होंने मुझे सौंप दिया था और मुझे भी उन्होंने झूठ कहा था कि विभा नें एक लड़की को जन्म दिया है। मैंने कहा था कि कृपया करके मेरी बेटी मुझे दे दो। उन्होंने मेरी बेटी मुझे सौंप कर कहा कि तुम अपने बेटी को ले जाकर कहीं दूर चले जाओ। अगर तुम यंहा रहे तो हम तुम्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्योंकि तुमने हमारे खिलाफ जाकर शादी की थी। तब मैं बीनू को लेकर तुम से कहीं दूर चला गया।

मैंने सोचा कि मैं तुम्हें इतनी खुशी नहीं दे सकता जितना की एक अमीर परिवार वाले। मैं तुम्हारी जिंदगी से चला गया। विभा बोली हमारी बेटी कंहा है? मैं अपनी बेटी को गले लगाना चाहती हूं। दोनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। वे दोनों इतने दिनों बाद आज इकट्ठा अपना जन्मदिन मना रहे थे। उन्हें क्या पता था कि उनका जन्मदिन उनके लिए कितनी खुशियां लेकर आया था। उनकी बेटियों ने उन दोनों को आज मिलवा दिया था।

उन्हें कमरे के बाहर चीख सुनाई दी। बीनू दौड़ते-दौड़ते आई और बोली पापा चीनू के घुटने में चोट लग गई है। तभी मीनू के पापा बोले चलो पास एक अस्पताल है वहां चलते हैं। वह गाड़ी में अस्पताल पहुंचे। चीनू की मां ने वीनू को प्यार किया और बोली बेटा तुम तो कितनी प्यारी हो? तभी चीनू बोली पापा भी तो प्यारे है। चीनू की मम्मी बीनू से बोली बेटा आज तुमने हमें जो उपहार दिया है वह कोई भी बेटी अपनी मां को नहीं दे सकती। क्योंकि इतने वर्षों के बाद मुझे तुम्हारे पापा मिल गए हैं।

चीनूं को उसकी मां ने कहा कि तुम्हारी बहन बीनूं तुम्हारी सगी बहन है। और यह भी उनके पापा ही नहीं तुम्हारे भी पापा है क्योंकि यही तुम्हें तुम्हारे बिछड़े हुए पापा हैं। चारों एक दूसरे के गले लग कर रो रहे थे। डॉक्टर ने नर्स को कहा कि तुम चीनूं को पट्टी कर दो। उसी समय एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया और बोला डॉक्टर तीन नंबर वाले वार्ड में जो बूढ़ा बीमार व्यकित 18 साल से कोमा में था आज उसे होश आ गया है। वह विभा विभा कर रहा है। विभा को कहां से लाएं? विभा सुन कर अचानक चीनूं बोली डॉक्टर साहब मेरी मां का नाम भी विभा है। आप इसे ही विभा बनाकर उसे बूढ़े के पास ले जाइए। शायद वह बूढा इंसान उनकी आवाज सुनकर होश में आ जाए।

डॉक्टर साहब बोले मैं इस बूढ़े आदमी को हर रोज विभा विभाकहते हुए सुनता हूं। इसके बाद वह आदमी बेहोश हो जाता है। शायद यह विभा कहीं ना कहीं उसकी कुछ लगती होगी। जो कि वह विभा को कुछ बताना चाहता है। डॉक्टर साहब चीनूं की बात सुनकर बोले बेटी तुम तो बहुत ही होशियार हो। शायद तुम ठीक ही कहती हो। डॉक्टर ने विभा को कहा कि कृपया थोड़ी देर के लिए उस बूढ़े आदमी के पास जाकर कहो मैं विभा हूं।

विभा और सुभाष दोनों उस वार्ड में गए जहां बूढ़ा व्यक्ति बिस्तर पर पड़ा हुआ था। उसकी आंखें बंद थी। वह बार-बार विभा विभा कह कर बेहोश हो रहा था। डॉक्टर ने जाकर उस बूढ़े आदमी मरीज को कहा कि तुम्हारी विभा आ गई है। आश्चर्यचकित होकर बूढ़ा उठ कर खड़ा हो गया बोला बेटा ना जाने कितने दिनों से तुम्हारी राह देख रहा था? मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूं। विभा अपने बूढ़े दादा जी को देखकर चौक गई। क्योंकि सचमुच में ही उसके दादा जी इतने वर्षों बाद उसे मिले। उन्होंने तो सोचा था कि उसके दादा जी मर गए हैं क्योंकि 18 वर्ष पहले वह एक ट्रक की चपेट में आ गए थे। उनको ढूंढने की बहुत कोशिश की लेकिन उनके मम्मी पापा ने कहा कि ट्रक के टुकड़े टुकड़े हो गए थे। सारे के सारे लोग उस दुर्घटना में मारे गए थे। इतने वर्षों बाद अपने दादाजी को जिंदा देख कर विभा ने अपने दादाजी को गले से लगाया। उसके दादा जी ने सुभाष को भी साथ देखा तो उन्हें खुशी हुई वह बोले बेटा मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूं। जिस दिन तुम्हें मेरे बेटे ने घर से चले जाने के लिए कहा था और तुमसे झूठ कहा था कि विभा ने एक बेटी को जन्म दिया है परंतु मेरे सामने उसने दो बेटियों को जन्म दिया था। मैं यह बात बताने के लिए उस दिन तुम्हारे पीछे आ रहा था कि तुम विभा को छोड़कर मत जाओ। परंतु तुम्हारे ससुर ने मुझे भी धमकी दी और कहा कि वह लड़का हमारे घरानें लायक नहीं परंतु मैंने तो तुम्हें स्वीकार कर लिया था। जब मैं सड़क में तुमसे मिलने ही वाला था मैंने तुम्हें देख लिया था तभी ट्रक वाले ने आकर मुझे टक्कर मार दी। उसके बाद मुझे कुछ पता नहीं है मैं 18 वर्षों तक अस्पताल में बेहोशी की अवस्था में पड़ा रहा। विभा ने चीनू और मीनू को दादाजी से मिलवाया। वह भी दादाजी के गले लग कर बोली दादा जी आप भी हमारे साथ ही रहोगे।

शाम को आकर विभा अपने मां पापा से बोली आपने मुझे सच्चाई से हमेशा दूर रखा। आपने तो अपने बच्चों के प्यार के काबिल भी नहीं समझा और मेरी जिंदगी में खुशियां देने से पहले ही मुझे वीराने में जीने के लिए मजबूर कर दिया। आप दोनों अब खुश रहो। आज मैं अपने पति के साथ अपनी बेटियों को लेकर सदा के लिए जा रही हूं। दादाजी भी जिंदा है वह भी हमारे साथ ही रहेंगे। विभा के माता-पिता ने सौरभ से कहा कि हमें अपने किए पर पछतावा है। हमने तुम दोनों को दूर कर दिया था इसके लिए भगवान भी हमें माफ नहीं करेंगे मेरी बेटी समझदार थी। इसने शादी का फैसला नहीं किया। बेटा हमें अपनी गलती का आज सचमुच में ही अफसोस है। हमें माफ कर देना सौरभ बोला बड़े माफी नहीं मांगा करते। हम बच्चों को तो आपका आशीर्वाद मिल जाए वही अच्छा है। अब सबके चेहरों पर खुशी के आंसू थे।

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