बेटा

, विधाता का रचा एक खिलौना। तुझको पाकर मेरा जीवन हुआ सलोना।। चंदा भी तू सूरज भी तू। मेरे डूबते नैया की पतवार भी तू।।   उंगली पकड़कर चलना सिखाती हूं मैं। लोरी गा गा के पलना झूलाती हूं मैं।।। कान पकड़ के रास्ते पर चलना सिखाती हूं मैं। कभी डांट से कभी फटकार से।… Continue reading बेटा

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