
लड़का लड़की एक समान।
दोनों हैं घर की आन,बान और शान।।
माता पिता उन पर छिड़कते हैं जान।।
लड़की बिना जीवन अधूरा।
लड़की के आनें से वह होता है पूरा।।
लड़का भी होता है घर का दुलारा।
बहन के आ जानें से वह बन जाता है और भी प्यारा।।
नर के अभाव में नारी भी है अपूर्ण।
नर के साथ नारी भी है पूर्ण।।
गृहस्थी का बोझ उठा कर भी सदा मुस्कुराती है।
पति का साथ आजीवन भर निभाती है।
गृह लक्ष्मी, सहधर्मिणी, अर्धांगिनी है कहलाती।
वात्सल्य की मूर्ति बन कर बच्चों को पढ़ाती।।
हर क्षेत्र में आगे आ कर अपनी पहचान बनाती।।
लड़की है तो घर की बीज।
उसे संस्कारी बना कर ही तो पूरी होती है घर की नींव।।
वह तो है गुणों की सौम्यमूर्ति।
त्याग प्रेम और करुणा की प्रति मूर्ति।।