कविता मौसी

कविता के नाम से पहचाने जाने वाली महिला इतनी मशहूर नहीं थी। उसको कविता नाम से कोई नहीं पहचानता था जितना कि सारे मोहल्ले के बच्चे उन्हें मौसी के नाम से पुकारते थे। मौसी-मौसी कहकर सारे बच्चे उन्हें घेर लेते। उनसे हर रोज कहानी की फरमाइश करते हुए भी बच्चों को जिस दिन ना देख ले उनको खाना  हजम नहीं होता था। बेचारी अकेली ही अपने परिवार में बची थी ।वह उसे दो वक्त की रोटी दे । बेचारी वह अपाहिज थी दुर्घटना में केवल एक वह ही बची थी। उसके चाचा उसे अपने घर ले आए थे तभी से वह उनके यहां पर रह रही थी ।वह अपने आप को कभी भी अपाहिज नहीं समझती थी ।वह हर वक्त खुश रहती थी। वह अपना सारा समय बच्चों के साथ मस्त रहती। सारे मोहल्ले के बच्चों की जान थी कविता मौसी ।सारे मोहल्ले वालों मे मौसी के नाम से पहचाननेे जाने लगी थी । वह  उनके बच्चों की चहेती थी ।वह जब तक बच्चे मौसी से नहीं मिलते बच्चों के गले से खाना हजम नहीं होता । मोहल्ले वाले तो उन्हें यह तक कह देते थे कि इस जादूगरनी ने हमारे बच्चों पर ना जाने क्या जादू कर दिया है कि बच्चों के गले से भोजन का एक निवाला भी नहीं निकलता जब तक वह मौसी के पास उन्हें नहीं भेज देते ।मौसी थी ही इतनी प्यारी कि वह सभी बच्चों को इतने प्यार से कहानी सुनाती कि बच्चे उन्हें घेर कर कहते कि मौसी आगे क्या हुआ   । कविता मौसी उन बच्चों को भी थोड़ा बहुत। पढा। दिया करती थी ।आठवीं तक पढ़ी हुई थी वह एक दिन मौसी बहुत ही बीमार हो गई ।सारे बच्चे उन्हें देखने आए। वे बहुत ही बेचैन हो गए। उन्हें बीमारी की हालत में तपता हुआ देखकर वह अपने अपने घरों में मौसी की सलामती की दुआ मांगने लगे। उनके चाचा जी सोचते कि कविता मौसी यहां से कहीं चली जाती ।मोहल्ले वाले उनसे कह देते थे कि मौसी के आने के बाद हमारे बच्चे हमारे घर पर टिकते नहीं हैं ।वह पढ़ते भी नहीं है ।यह बातें कविता के चाचा ने कविता से कह दी कि मोहल्ले वाले तुमसे बहुत ही नाराज है ।तुमने बच्चों को अपने घर पर बुलाकर अच्छा नहीं किया ।तुम उन्हें पढ़ने के बजाए उनके जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही    हो ।तुम यह बात कहां समझोगी। तुम्हें अपने घर पर रख कर एक तो तुम को हमने तुम्हें पनाह दी और अब तुम इन बच्चों को यहां पर आने से मना करो गी नहीं तो हम तुम्हें अनाथालय में भिजवा देंगे ।इस बात को कविता मौसी ने अपने दिल से लगा लिया और वह बहुत ही बीमार हो गई। उसकी आंखों से आंसू छलक आए बच्चों में तो उसकी जान बसती थी वह सोचने लगी की जब वह थोड़ा ठीक हो जाएगी तब वह चाची जी से कह देगी कि उन्हें अनाथालय में छोड़ दें ।एक दिन जब सारे के सारे बच्चे कविता मौसी के यहां आए तो उन्हें बुखार से तड़पता हुआ देखकर कोई कहता मौसी हमें बताओ कौन सी दवाई देनी है? ।इतने में कविता मौसी के चाचा आए और कटाक्ष शब्दों से बोले चले जाओ आज के बाद यहां पर कभी मत आना नहीं तो मैं तुम्हारी मौसी को अनाथालय में भेज दूंगा ।मेरे पास इसकी दवाई के लिए रुपए नहीं है एक तो यह अपाहिज है और तुम्हारे मां बाप भी मुझे ही कहते रहते हैं कि इन की मौसी ने हमारे बच्चों पर जादू कर दिया है ।सारे के सारे बच्चे चाचा की बातों को सुनकर दंग रह गए। वह दौड़े-दौड़े मौसी के पास आए और बोले मौसी आप यहां से कहीं नहीं जाओगी ।आप हमारे घर पर रहोगी। आपको यहां से कोई नहीं निकालेगा। मौसी की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े वह बोली बच्चों मैंं अपाहिज हूं ।मैं किसी पर भी बोझ बनकर जीना नहीं चाहती। दुर्घटना में मेरी दोनो टांगे बेकार हो गई थी । मै अगरं चल फिर सकती तो मैं भी मेहनत मजदूरी करके अपने चाचा जी को खुशियां देती ।तुम बच्चो  मेरे चाचा जी की बातों का बुरा मत मानना और एक वायदा मुझसे करो कि मुझे खुशी खुशी अनाथालय जाने दोगे जब मैं तंदुरुस्त हो जाऊंगी तब मैं यहां से चली जाऊंगी ।सारे के सारे बच्चों में अपनी गुल्लक में जो जो रुपए इकट्ठे किए थे उनसे वह कविता मासी की दवाइयां ले आए और चाचा को देते हुए बोले चाचा जी ये। हमारी मौसी की दवाईया है। उनमें से एक बच्चा बोला चाचा जी हम चुपके से अपने घर से एक एक बच्चा अपनी मौसी के लिए खाना लेकर आया करेगा ।पीयूष जब घर आया तो वह वह बहुत ही उदास था ।उसकी मां ने जब उससे उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने कहा कि पापा आज मैं आप दोनों से एक चीज मांगता हू।ं आप अगर दोनों मेरी बात मानोगे तो मैं खूब पढूगा । आपकी सारी बातें मानूंगा पहले आप भगवान जी के पास मंदिर जाकर कसम खाओ कि आप मेरी बात मानोगे ।उसके मम्मी पापा दोनों डॉक्टर थे ।अपने बच्चे की आंखों में आंसू नहीं देखना चाहते थे। वह उसे खूब पढ़ाना चाहते थे ।वह बोले बेटा हमें बताओ तो सही क्या बात है तभी उसने अपने पापा से कहा। आप एक डॉक्टर है और ममी जी आप भी एक डाक्टर हैं। आप मेरी मौसी को ठीक कर दो ।आप उनकी टांगों को ठीक कर दो और उनको अपने घर में रहने की जगह दे दी।  तो उस के यह वचन सुनकर और अपने दोनों बच्चे की दरिया दिल्ली देखकर वे प्रसन्न हो गये और उन्होंने कहा कि बेटा

तुम्हारी मौसी की टांगे  ठीक हो जाएगी तो हम उन्हें नहीं जिंदगी देंगे। पीयूष बोला पापा डॉक्टर का कर्तव्य होता है अपने रोगी की जान बचाना हमारी मौसी बुखार से तप रही है। आप उन्हें जल्दी से ठीक कर दो। और उन्हें अपने घर में रहने के लिए आश्रय दे दो बाकी मोहल्ले के बच्चों ने अपने अपने घरों में अपने मां-बाप से कहा कि हमारी मौसी को बदनाम दुआ क्यों देते हो? आप हमें उनके घर जाने से क्यों रोकते हो। आप लोगों ने हमारी मौसी को यहां से निकलवाकर अच्छा नहीं किया। उनके चाचा उन्हें अनाथालय भेज देंगे ।ठीक है मम्मी पापा जब हम बड़े होंगे तब हम भी आपको अनाथालय भेज देंगे । हमारी   बेचारी मौसी हमें कहानी ही तो सुनाती है ।वह हमें अच्छी लगती है । मोहल्ले वालों को अब तो अपनी गलती का एहसास हो गया था। कविता मौसी के यहां जाकर उनके चाचा जी से कहने लगे कृपया करके आप हमें माफ कर दो। हमने मौसी और बच्चों का दिल दुखाया है। तुम चिंता मत करो मौसी की दवाइयों में जितना खर्च होगा हम सब मिलकर उन का खर्चा उठाएंगे यह हमारे बच्चों की मौसी ही नहीं आज से हम भी उन्हें मौसी जी पुकारा करेंगे मौसी बच्चों का अपने प्रति इतना प्रेम देखकर फूल नही समाई। ं उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे कि चलो कोई तो उन्हें प्यार करता है कौन कहता है इस संसार में ईश्वर नाम की कोई शक्ति नहीं। ईश्वर नें हीं तो उन्हें बच्चों से मिलवाया था वह मन ही मन प्रभु को धन्यवाद देनें लगी। पीयूष के माता-पिता मासी को अपने क्लीनिक पर लेकर गए। वह जब पूरी तरह ठीक हो गई तब उसकी टांगों का ऑपरेशन किया गया उसकी एक टांग तो ठीक हो गई। और एक टांग उसके  नकली लगा दी थी। उसके माता पिता ने मौसी को अपने क्लीनिक में नौकरी पर लगा दिया वहां पर वह रोग ग्रस्त मरीजों को पट्टी बांधना मरहम लगाना और बिमार लोंगों को दवाइयां देना यह छोटे-छोटे काम करने लगी। अब वह बहुत ही खुश थी क्योंकि बच्चों ने उसकी मदद करके उसे इस काबिल बना दिया था कि वह अब किसी पर भी बोझ नहीं थी। वह खुद कमा सकती थी अब तो उसने अपने चाचा जी को कहा चाचा जी आपने मेरे लिए इतना किया अब मैं इसी मोहल्ले में रहकर रोग ग्रस्त पीड़ितों की मदद करके अपना सारा समय इस मोहल्ले में रहकर ही गुजार दूंगी। अब तो शाम को फिर वह सब बच्चों को घेर कर कहानी सुनाती थी और सुबह अपने काम पर चली जाती थी। उसके चाचा जी भी अपनी भूल पर पश्चाताप कर रहे थे। परंतु कविता ने अपने चाचा जी को कहा की आप को शर्मिंदा होने की कोई जरुरत नहीं है आप अगर इतना बड़ा फैसला नहीं लेते तो आज मैं अनाथालय में होती इसके लिए मैं आपसे कभी भी नाराज नहीं हूं। मैं अपने नए घर में प्रस्थान करना चाहती हूं अलविदा उसने अपने चाचा चाची जी के पैर छुए और वहां से उनके घर से सदा सदा के लिए चली गई

 

 

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