जाको राखे साइयां मार सके न कोई

किसी गांव में एक बुढ़िया रहती थी। वह बहुत ही दयालु थी। वह अकेली रहती थी। उसके परिवार में कोई नहीं था। उसके पास  दो कमरों का मकान था। जिसमें वह रहती थी। वह बुढिया बहुत ही समझदार थी। वह किसी भी व्यक्ति को अपना मकान किराए पर नहीं देती थी। वह समझती थी कि अगर उसने अपना मकान किसी भी ऐसे व्यक्ति को दे दिया जो बाद में उसके मकान को ना छोड़ें इसलिए वह अपना मकान किसी को भी देने में कतराती थी। उसके पास दो तीन बकरियां थी। जिसका दूध वह बाजार में बेच देती थी। लेकिन बकरी के दूध को कम लोग ही पीते थे। एक दिन उसके पास उसकी मुंह बोली बहन आकर बोली बहन तू झूठ मूठ में ही कह दिया कर बकरी का दूध तो सेहत के लिए बहुत ही अच्छा होता है। इसको पीने से बहुत बीमारियां ठीक होती है। तब देखना चमत्कार। यह बात किसी को मत बताना। वह बोली तुम अपनें आप को अकेला महसूस भी नहीं करोगी। तुम्हारे पास लोग आने लगेंगे। तुम लोगों को कहना इस दूध के पीने से कितने बीमार व्यक्ति ठीक हुए हैं? तुम यहां के लोगों को मत कहना। तुम अगर कोई बाहर से कोई व्यक्ति इस गांव में आयेगा उस को  तुम ऐसा कहना। बुढ़िया बड़ी खुश हो गई। उसकी मुंह बोली बहन कुछ दिनों के पश्चात अपने घर वापस चली गई। बुढ़िया ने सोचा क्यों ना मैं अपनी बहन की बात को आजमा कर देखती हूं।

 

उसके घर के पास ही कुछ दूरी पर एक विदेशी नवयुवक नें मकान किराए पर लिया था। वह दंपत्ति अपने बेटे के साथ रहने के लिए आए थे। उनकी पत्नी हरदम बीमार रहती थी। एक दिन सैर करते-करते चंपा विदेशी दंपति के घर के पास से जा रही थी। बातों ही बातों में चंपा ने उनके छोटे से बच्चे को टॉफी पकड़ा कर कहा ले लो बेटा। लगता है नए-नए यहां आए हो। वह महिला बोली हां बहन मैं मेरा पति और मेरा बच्चा यहां पर जलवायु परिवर्तन के लिए हिमाचल की वादियों में घूमने के लिए आए हैं। तुम्हारा प्रदेश तो  बहुत ही अच्छा लगता है। यहां पर कल कल करते झरनें हरी-भरी वादियों प्रकृति की अद्भुत छटा का नजारा देखते ही बनता है। वह बोली हां यहां पर  रहोगी तो आपको विलायत जाने का मन ही नहीं करेगा। मैं भी तुम्हारे सामने वाले घर में रहती हूं। अगर आपका दिल ना लगे तो आप हमारे घर में खुशी से आ सकते हैं।   छोटा सा घर है। अतिथि तो पूजने  लायक होते हैं अतिथि तो पूजनीय होते हैं। मैं अपने घर में आपका स्वागत करूंगी। आना जरूर। चंपा उनसे मेल जोल बढ़ा कर चली गई थी। एक दिन चंपा का बच्चा बाहर अकेला खेल रहा था। उसने उस को बुलाया बेटा क्या बात है? तुम्हारी मां नहीं आ रही। मेरी मम्मी बीमार है। इसीलिए तो हम यहां आए  हैं। चंपा से रहा नहीं गया उसके घर जाकर बोली। मेंम साहिब नमस्ते।  मयंक की मम्मी उठ कर बोली। बहन तुम। चम्पा बोली आप के बेटे से सुना आप बीमार हैं। वह बोली आप नें ठीक ही सुना है। मुझे गुर्दे की बीमारी है। मुझे डॉक्टर ने कहा है कि आपको जलवायु परिवर्तन के लिए किसी पर्वतीय स्थल पर जाना है। शायद ज्यादा ही बीमार पड़ जाती इसीलिए हम यहां पर सैर करने आ गए।

 

चंपा बोली बीवी जी आपने ठीक ही सुना है हिमाचल की भूमि  ही देवताओं की भूमि है यहां पर देवता निवास करते हैं। आप जल्दी ही ठीक हो जाएंगे। आपको एक सलाह देती हूं मैं। उनकी मम्मी बोली क्या? तुम दूध कहां से लेते हो। वह बोली हम पैकेट का दूध लेते हैं। चंपा बोली छोटी मुंह बड़ी बात। मैं आपको एक सलाह देती हूं।  आप बकरी का दूध कुछ दिनों के लिए पीओ तब देखना चमत्कार। तुम्हें लगेगा तो वह बुरा मगर आप की बीमारी जड़ से समाप्त हो जाएगी। शाम को शैफाली ने अपने पति को कहा यह साथ वाली औरत  मुझे कह रही थी कि बकरी का दूध पी कर देखो।  शायद इस का दूध भी बिक नहीं रहा होगा। इसलिए वह हमें ऐसा कह  रही है। शेखर बोला  हो सकता है वह ठीक कह रही हो। बकरी का दूध बहुत ही पौष्टिक होता है। बस थोड़ी दूर्गन्ध वाला होता है। पी कर  देखने में क्या जाता  है? हो सकता है तुम्हे कुछ लाभ मिले। कितनी दवाइयां तुम्हें मै खिला चुकाहूं? बकरी का दूध  खराब भी नहीं करेगा।

शैफाली उन को बकरी का दूध देंनें लगी। कुछ दिनों बाद जब शैफाली विदेश गई वह शैफाली को बोला आपको कोई बीमारी नहीं। आप तो बिल्कुल स्वस्थ  हो चुकी हैं। वह हैरान हो गई। वह तो सचमुच  ठीक हो चुकी  थी। बाहर से जब विदेशी लोग आते  उन्हें वह बकरी का दूध देती। लोग  उसके द्वारा दिए गए दूध  को पीकर स्वस्थ हो जाते। एक छोटे से प्रदेश में रहने वाली बुढिया की इतनी ख्याति हो ग्ई  लोग उसकी बकरी का दूध पीने दूर दूर से आने लगे। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी मुंह बोली बहन की बातों का उस पर इतना  गहराअसर होगा।

 

वह एक दिन बड़ी मशहूर हो गई। उसने बहुत सारी बकरियां रख ली। शैफाली  हर बार की तरह छुट्टियों में  विदेश से आ कर उन के घर के पास ही रहती थी। उस बुढ़िया के कारोबार को फैलता  देख कर  लोग उसकी  जमीन और उसकी बकरियों  को चुराने की योजना बनाने लगे हम इस बुढ़िया को मार देंगे।

 

एक दिन बुढ़िया की  मुंह बोली बहन अंजली का बेटा  रोहण  गांव से आया। उसकी मां नें उसको बताया था कि बकरी का दूध बेचने की योजना तो अपनी बहन को मैंनें ही दी थी। वह यह देखने आया था कि उस का कारोबार कैसा चल रहा है? उसको देख कर बोला मौसी आप तो बहुत ही भाग्यवान है। आपका कारोबार अच्छा चल रहा है। अब आप आराम करो। मैं आपकी बकरियों की देखभाल किया करूंगा। आप मुझे अपना बेटा समझो। बुढ़िया उसके मन में अंदर क्या चल रहा है? उसमें छिपी मकसद को समझ नहीं सकी। वह बोली कुछ दिन यंहा रह कर देख लो।  जब तुझे अच्छा लगेगा तब तुम देख लेना। वह सोच रही थी कि इसकी मां नें ही तो मुझे यह योजना बताई थी। अगर इस का बेटा इस व्यापार को संभाल लेगा तो ठीक है। इसमें बुराई  हीक्या है? थोड़ा-थोड़ा रोजी रोटी का गुजारा चलता रहेगा।

 

एक दिन रोहण  नें उसे  मिठाई में मिलाकर जहरीली दवा खिला दी। उसने कहा मौसी जी मैं आज आपको बूंदी के लड्डू  लाया हूं। चंपा ने लड्डू खा लिए थे वह बेहोश  हो गई थी। वह लड्डू  बहुत जहरीले थे। जैसे ही बुढ़िया बेहोश हो गई रोहण वहां से खिसक गया ताकि उस पर किसी को शक ना हो। उसे बेहोश होता देखकर वह वहां से जल्दी से बाहर चला गया। इस बुढ़िया की लाश को कंहा ठिकाने लगाऊं। उसने दरवाजा बंद कर दिया। जल्दी में  ताला लगाना भूल गया।  जल्दी से एक दुकान पर पहुंचा। उसने वंहा दो बोरियां और एक रस्सी खरीदी। बोरी में उसे भरकर उसकी लाश को नदी में फेंक देगा।।

शाम के समय शेफाली  का दूध लेकर चम्पा आती थी। जब वह दूध लेने नहीं आई तो शेफाली और उसका पति शौर्य दोनों उसके घर चले। उनको किसी मरीज को देखने जाना था। दोनों ने अपना सामान लिया और दवाइयां ली। शैफाली अपनें पति शौर्य से बोली पहले मैं चंपा के घर में दूध का बर्तन छोड़ कर आती हूं। जैसे ही उसने दरवाजा खटखटाया  दरवाजा खुल गया। वहां पर चंपा बेहोश पड़ी थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था।शैफाली नें उस पर पानी के छींटे डाले। जहर धीरे धीरे सारे फैलता जा रहा था। शैफाली नें अपनें पति को कहा उसे क्लिनिक ले चलते है। उन्होंनें उसे अपने क्लिनिक ले जा कर उसे इन्जैक्शन  लगाया। उसे उल्टी आ गई थी। थोड़ी देर बाद उसे होश आया। चम्पा बच गई। शैफाली बोली तुमने यह जहरीला लड्डू खा लिया था जिस के कारण तुम्हारी ऐसी हालत हुई।

 

बुढिया  को समझ आ गया था कि उस की मुंह बोली बहन के बेटे नें ही उसे जहरीला लड्डू खिलाया। वह मेरा मकान अपनें नाम करना चाहता है। उसने सोचा होगा ये बुढिया अकेली रहती है इसको मार   कर  इसके घर पर कब्जा कर लेता हूं। चंपा ने अपनी सारी कहानी डॉक्टर और उसकी पत्नी को सुना दी। शैफाली बोली बहन जाको राखे साइयां मार सके ना कोई। जिसको भगवान ने  बचाना होता है उसको दुष्ट व्यक्ति चाहे कितनी भी कोशिश कर ले वह अपने इरादों में कभी भी कामयाब नहीं हो सकता।।

 

शेफाली बोली हम उसकी परीक्षा लेंगे। वह अभी फिर आएगा तुम ऐसे ही पड़ी रहना। हम देखना चाहते हैं कि वह क्या करेगा? उसकी परीक्षा लेना बहुत ही जरूरी है। हम विश्वास दिलाते हैं कि हम तुम्हारे साथ कोई भी बुरा नहीं होने देंगे। चंपा बोली एक पुलिस वाले के साथ मेरी पहचान है। उसे भी बुला लो। शेफाली ने उस पुलिस इंस्पेक्टर को फोन पर सारी बात समझा दी। पुलिसवाला   बोला मैं तुम्हारे घर के आस पास ही हर आने-जाने वाले  पर अपनी नजर रखूंगा। डाक्टर और उसकी पत्नी ने भी अपनी गाड़ी बाहर एक ओर खड़ी कर दी।

बुढ़िया की मुंह बोली बहन के बेटे को आने में देरी हो गई थी। रास्ते में ट्रैफिक बहुत था उसकी वजह से उसे देरी हो गई थी। उसे पता था कि मेरी मौसी के घर में कोई आने वाला नहीं है। उसने तो उसे जहरीला लड्डू खिला दिया था। बढ़िया चुप-चाप वहीं पड़ी होगी। वह आ कर बहुत खुश हुआ। बुढ़िया तो मर चुकी है। उसने उसे बोरी में बंद किया। और अपनी गाड़ी की डिक्की में डाल दिया। उसने गाड़ी  में एक बोरी भी रख दी। उसने अपनी मौसी को बोरी में डाल दिया।

 

वह बढ़िया के कमरे में अंदर चला गया। जल्दी से जमीन के कागजात ढूंढनें लगा। पुलिस वालों   नें जल्दी से बोरी को खोला उसमें से बुढिया को बाहर निकाला। उन्होंने  उतने ही वजन वाला सामान  उसमें भर दिया। रात को वैसे भी कुछ दिखाई नंही दे रहा था कि बोरी में क्या है?।

 

उसको घर के कागजात मिल गए थे। वह बहुत ही खुश हुआ। उसने अपनी मां को फोन किया मैंने बुढ़िया का काम तमाम कर दिया है। उसकी लाश को  नदी नाली में फेंक दूंगा। जल्दी से वहां से गाड़ी को जल्दी से गाड़ी को ले गया।

 

अंधेरा हो चुका था वह नदी के पास जाकर उसने चारों ओर  देखा उसे कोई देख तो नहीं रहा है। उसनें बोरी निकाली और उसको बहती नदी में फेंक दिया। पुलिस इन्सपैक्टर नें उसको ऎसा करते  देख लिया था। उस दिन चम्पा नें सारी रात डाक्टर के घर पर गुजारी। सच्चाई सबके सामने आ चुकी थी। वह बोली डॉक्टर साहब आप लोगों ने मेरी जान बचाई। मैं आपका शुक्रियादा कैसे करुं। आप मेरे मर जाने के बाद यहां पर आकर ठहरा करना।

 

अपने लोगों से ज्यादा अच्छे तो पराए होते हैं।जो मुश्किल पडने पर मदद के लिए आगे आतें है। चंपा ने पुलिस इंस्पेक्टर को कहा मेरी मुंह बोली बहन का बेटा  लालच में आकर वह मेरे साथ बुरा करने चला था। मैं भी अगर इसके साथ बुरा करूंगी तो हम दोनों में क्या फर्क रह जाएगा। मैं इसे अपने तरीके से सजा दूंगी। पुलिस इन्सपैक्टर  मान गए। उन्होंने कुछ नहीं कहा। हमें उस पर कड़ी नजर रखनी है। सजा तो हम इसे अवश्य देंगे। जब तुम कहोगी।  पुलिस  इन्सपैक्टर चले गए थे।

 

शैफाली बोली तुम क्या करोगी।? वह बोली मैं रात  के समय उसे भूत बन कर डराऊंगी। वह डर के मारे मेरे घर की ओर आने का रुख नहीं करेगा। दूसरे दिन जब  रोहण आया वह बहुत खुश था। वह बुढ़िया कीचारपाई पर सो गया। रात को चंपा नें उसे डराया। मैं भूत हूं। मैचंपा का  भूत हूं। तुम नें मुझे नदी में फैंका मैं तुम से बदला लेने आई हूं। कहां है  मेरी जमीन के कागजात? कहां छिपाये हैं जल्दी से बताओ वर्ना तुझे भी मैं नदी में फेंक दूंगी। तूने मुझे जहरीले लड्डू खिलाकर मार डाला। नही नही मुझे मत मारना मुझे ऐसा करनें के लिए मेरी मां नें मुझे यंहा भेजा था। ं मैं बताता हूं। जब तक तू नहीं देता तब तक मैं तुझे भूत बनकर  यूं ही डराती रहूंगी। वह बोला मेरी अटैची में है।

 

उनका को मेज पर रख दो। अगर तुम ने उन्हें अब हाथ भी लगाया तो मैं तुझे भी वही भिजवा दूंगी। वह  डर के मारे कांपने लगा।तू आज के बाद यहां आने की हिम्मत भी नहीं करेगा। मैं यहां कभी नहीं आऊंगा। बुढिया नें वह कागज उठा लिए। रात को किसी होटल मेंठहरा। सुबह डरते डरते अपनी अटैची लेने आया।बुढ़िया के मुंह बोली बहन के बेटे नें देखा कागज वंहा नंही थे। सामनें  से आती हुई मौसी दिखाई दी। वह बेहोश होते होते बचा। वह बोला मौसी मां मुझे माफ कर दो। चम्पा बोली मौसी का मतलब भी जानता है तू अरे तू क्या जानेंगा। मौसी का मतलब होता है मां जैसी तूने तो मुझे भी नंही  बख्शा। बुढ़िया बोली जाको राखे सांइयां मार सके न कोई। मैं नंही मरी थी और न ही मैं कोई भूत वूत हूं। तूने जहरीला लड्डू खिला कर मुझे मारनें की पूरी साजिश की थी। तू उस में विफल हो गया। इस बार तो मैंने तुझे जेल जानें से बचा लिया अगर आगे से तूने ऐसी कोई साजिश कि तो तुझे जेल भिजवा कर ही दम लूंगी। पुलिस इन्सपैक्टर वंहा पहुंच कर बोले चलो तुम्हें हवालात की सैर करवाएं। वह बोला मुझे माफ कर दो। मैं कभी भी आइन्दा से ऐसा गुनाह नंहीं करूंगा। इन्सपैक्टर साहब बोले तुम्हें तीन महीनें की सजा तो अवश्य होगी। उन्होंने उसे हथकड़ी पहनाई और उसे कालकोठरी मे कैद कर दिया।

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