नन्हा जासूस

एक छोट सेे गांव की छोटी सी बस्ती में झुग्गी झोपड़ी वाले रहते थे। उनके छोटे-छोटे बच्चों ने भी स्कूल में दाखिला ले लिया था। उनकी बस्ती का एक लड़का था दीनू वह भी स्कूल जाने लगा था। जब बच्चे स्कूल में पढ़ते तो उसका ध्यान पढ़ने में नहीं लगता था क्योंकि उसको घर में भरपेट खाना नहीं मिलता था। वह तो इसी लालच में स्कूल में पढ़ने जाता था कि स्कूल में भर पेट भोजन मिलता है वह तो घंटी बजने का इंतजार करता रहता कि कब आधी छुट्टी हो और वह खाना खाये। खाने की घंटी बजती तो वह जल्दी ही दौड़ पडता। कई बार तो उसको मैडम से झिडकी भी पड़ती की पहले हाथ धो लो। जल्दी-जल्दी हाथ धोने लगताऔर खाने बैठ जाता। बहुत ही होशियार था। जो मैडम पढाती उसको ध्यान से सुनता। स्कूल मेंबच्चों की किताबें पेंसिल और छोटी मोटी चीजें चुरा कर ले जाता। चोरी करने पर उसकी मां उसे कभी नहीं डांटती थी और ना ही उसे सजा देती थी।

एक दिन की बात है कि छवि रोते-रोते बोली मैडम जी मेरी किताब नहीं मिल रही। सभी बच्चे कहने लगे थे किताब दीनू के थैले में ही है। मैडम ने सबके बस्तों की तलाशी ली। किताब तो सचमुच ही दीनू के बस्ते में थी। मैडम ने उसे अकेले एक कोने में बुलाया और कहा बेटा तुमने चोरी क्यों की।?मुझे बताओ मैडम ने कहा बेटा चोरी करना बहुत ही बुरी बात है। आज तो तुमने यह किताब उठाई है। धीरे-धीरे तुम बहुत ही बड़े चोर बन जाओगे। चोरी करना बहुत ही बुरी बात होती है। आज से कसम खाओ कि तुम चोरी नहीं करोगे। दीनू नें कहा जब मैं बच्चों के बस्ते से चीजें चुरा कर ले जाता हूं तो मेरे माता पिता मुझे कुछ नहीं कहते। मुझे वह मुझे डांटते नहीं है और न ही सजा देते हैं।

उसकी मैडम बच्चे की बात सुनकर हैरत में आ गई बोली कुछ नहीं। उसने कहा बेटा सब बच्चों के सामने मैं तुम्हारा अपमान नहीं करना चाहती थी। तुमने चोरी तो की है बोलो, तुम्हें क्या सजा दे दी जाए?, बच्चा सजा का नाम सुनकर डर गया बोला मैडम अब मैं कभी चोरी नहीं करूंगा। मैडम जी मुझे माफ कर दो उसकी मैडम ने बताया कि ईश्वर उन बच्चों को कभी कुछ नहीं देता जो चोरी करते हैं बल्कि उन से उनका सब कुछ छीन ले लेते हैं। दीनू नें कहा हमें भगवान तो दिखते नहीं। वह हमें कहां देख सकते हैं?मैडम ने कहा कि तुम जब चोरी करते हो तुम समझते हो कि तुम्हें कोई देख नहीं रहा है ऐसा नहीं है ईश्वर हमें दिखाई नहीं देते हुए हमें हर वक्त देखते रहते हैं।

दीनू बोला मैडम जी अब मैं कभी चोरी नहीं करूंगा। मेरी कक्षा में कोई चोरी करेगा तो उसे मैं पकड़ लूंगा। मैडम ने उसके मुंह पर उंगली रख दी। दीनू के मन में यह बात घर कर गई कि हमें चोरी नहीं करनी चाहिए। इस बात को बहुत दिन व्यतीत हो गए। बच्चों की परीक्षा का समय भी नजदीक आ रहा था। सब बच्चों को मैडम ने समझा दिया था मैंने दीनू को माफ कर दिया है उसे एक मौका तो अवश्य ही मिलना चाहिए इसलिए अगर आगे से उसने कभी चोरी की तो उसे बहुत ही बड़ा दंड दिया जाएगा। सभी बच्चे परीक्षा की तैयारी में मस्त थे। स्कूल में संगीत का आयोजन भी होने वाला था। सभी बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारी में बड़े जोर शोर से जुटे हुए थे। उनके स्कूल में मुख्य अतिथि तौर पर वहां के नेतागण उपस्थित होने वाले थे। जैसे ही नेतागण आए तालियों से सारा हाल खचाखच भरा हुआ था बच्चों के अभिभावक गण भी उपस्थित थे। सभी बच्चों के माता-पिता को भी समारोह देखने के लिए आमंत्रित किया गया था। एक लड़की रोती रोती आई बोली मैडम मैडम मेरा लहंगा नहीं मिल रहा है। सभी की नजर दीनूं पर थी। वही चोरी किया करता था। उन्होंने सोचा कि दीनूं अपनी बहन के लिए उसे चुरा कर ले जा गया होगा। सभी ने चोरी का इल्जाम दीनूं पर लगा दिया। दीनू से यह सब कुछ सहन नहीं हुआ बोला मैडम आज मैंने चोरी नहीं की है। आप मेरा बस्ता देख सकती हैं। यह सारे बच्चे मुझे ही चोर समझ रहे हैं। मैं चोर नहीं हूं। यह कहते-कहते दीनू रोने लगा।

मैडम नें कहा मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि दीनू नें चोरी नहीं की। दीनू तो असली चोर को ढूंढने में लगा था। मैडम ने उसे इशारा किया और मुंह पर उंगली रखने को कहा। मैडम ने कहा कि आज से मैं चोर को ढूंढनें का काम दीनूं को सौंपती हूं। वही असली चोर का पता लगा कर देगा। दीनूं को जब यह काम सौंपा गया तो दीनूं बहुत ही गर्व महसूस कर रहा था। मैडम ने सब बच्चों में से उसे ही चोर ढूंढने को कहा था। वह फूला नहीं समा रहा था। उसे खुशी हो रही थी कि उसकी मैडम उसे चोर नहीं समझती। सारे के सारे बच्चे दीनूं के इर्द-गिर्द खड़े हो गए। सब दीनू के साथ बहुत ही प्यार से बातें करनें लगे। जो बच्चे दीनूं से नफरत करते थे वह भी दीनू के साथ अच्छे ढंग से बात करने लगते गया। वह अपनें आपको किसी नेता से कम नहीं समझ रहा था मैडम ने कहा पहले तो हम सांस्कृतिक कार्यक्रम का प्रोग्राम देखते हैं। क्योंकि अतिथि जनों के आने का समय हो चुका था। दीनूं तो चोर को ढूंढ कर पता लगाना ही चाहता था। एकाएक तालियों की गूंज से मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। उन्हें माला से नवाजा गया लड़के-लड़कियों ने समूह गान प्रस्तुत किया। प्रोग्राम के बाद सभी अपने घर जाने के लिए उत्सुक थे। मैडम हाल में बच्चों की एग्जामिनेशन फीस इकट्ठा कर रही थी। सभी बच्चों के माता-पिता फीस दे रहे थे।
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दीनू की मम्मी को कमरे में आते देख कर बोली तुमने फीस जमा करवा दी। दीनूं की मम्मी बोली हां अभी तो आप को दी। अच्छा कह कर मैडम ने सारे रुप्एअलमारी में रख दिए। केवल ₹100 का नोट ही बचा था। मैडम को उसी समय फोन आया। मैडम प्रधानाचार्य के कमरे में चली ग्ई। जब वापिस आई तो वहां रु100 का नोट नही था। दीनूं की मम्मी बाहर चली गई थी। मैडम सोचने लगी अभी तो मैंने 100रू का नोट मेज पर रखा था। कंही मैंने अलमारी में तो नहीं रख दिया। उसमें सौ रुपए का नोट कम था। उसमें सौ रुपए की टी सीरेज की एक गड्डी थी। उस गड्डी में से नोट् नहीं मिल रहा था। मैडम सोचने लगी कि कहीं दीनू फिर से नंहीं नहीं वह सुधर गया है। सोचने लगी कि इस कमरे में कौन-कौन आया था। उसे याद आ गया कि दीनूं की मम्मी आई थी। वह तो पहले ही चली गई थी दीनूं नें अपनें माता पिता के बारें में अपनी मां पिता के बारे में कहा था कि जब वह चोरी करता है तो वे उसे कुछ नहीं कहते हैं। शायद उसका नोट वह ही चुराकर ले गई होगी। बाद में कमरे में आ कर अकेला कमरा देखकर लेकर गई होगी। उसने देख लिया होगा की मेज पर ₹100 का नोट पड़ा है ।मैडम ने दीनू को बुलाया और कहा जो असली चोर को दंड दिलवाएगा उसको मैं ₹1000रूइनाम में दूंगी।

दीनू पर चोर को ढूंढने का जुनून सवार था। वह हर बच्चे पर पूरी तरह नजर रख रहा था मैडम की नजर भी उस पर होती थी। लहंगा तो मिल चुका था वह तो स्कूल में ही मिल गया था। वह तो जल्दी में सामान रखते वक्त अलमारी के पीछे गिर गया था। मैडम ने बच्चों से कहा कि सी सीरीज का नोट है। और लास्ट का नंबर है 670। क्योंकि मैं सब सीरीज को अपने डायरी में नोट कर रखती हूं। किसी के पास यह नोट मिले तो मुझे बताना सब ने कोशिश की मगर वह नोट नहीं मिला।

दीनूं जब घर आया तो मां ने उसे कहा कि बाजार से आटा लेकर आओ। मेरी चुनरी से ₹100का नोट निकाल लो । उसमें से ₹50 का आटा लेकर आओ ।दीनू नें जैसे ही चुनरी की गांठ खोली उसकी नजर ₹100 के नोट पर पड़ी। सी सीरीज का नोट थाऔर उसका एंड का नंबर 670 था। वह समझ गया वह तो वही नोट है। उसने चुपचाप वह नोट चुनरी में ही रखा रहने दिया और अपनी मां को कहा मां आपको स्कूल में मैडम ने बुलाया है। दीनूं की मां बोली अच्छा कल जाएंगे। क्या कोई और फीस देनी है? मां आप अभी रुपए मत खर्च करना। उसकी मां ने अच्छा कहकर सिर हिलाया। सुबह ही जब दीनूं स्कूल आया तो उसने मैडम को कहा कि मैडम मैंने आपका चोर पकड़ लिया है। आज मैं उसे आपके सामने पेश कर दूंगा। मैडम जी आपको अलग कमरे में आना होगा।

मैडम ने कहा ठीक है दूसरे दिन दीनूं की मां स्कूल पहुंची उसने मैडम को कहा कि मैडम जी आपने मुझे क्यों बुलाया? मैडम हैरान हो कर बोली मैंने तो आपको नहीं बुलाया। दीनूं बोला मैडम जी आप का असली चोर आपके सामने हाजिर है। मैडम बोली बेटा मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझी। दीनू बोला मां आप अपनी चुनरी की गांठ खोलो। उसने मां की चुनरी की गांठ खोली। उसमें सौ सौ रूपए के तीन नोट थे। मैडम ने देखा वह तो वही ₹100 का नोट था और उस सीरीज का लास्ट भाग 670 था। मैडम को विश्वास हो गया था कि उस दिन दीनू की मां नें ही रु 100 का नोट चुरा लिया था। मैडम नें दीनू को कहा बेटा तुम बाहर जाकर खेलो। उसको बाहर भेज दिया। मैडम ने कहा कि आपका बच्चा झूठ नहीं बोल रहा है। यह नोट आप ही यंहा से चुरा कर लेकर गई हैं। आप अपने झूठ को कबूल करें। आपके बच्चे को तो मैंने सुधार दिया है वह कभी भी चोरी नहीं करेगा। परंतु आपको तो इस छोटे से बच्चे से शिक्षा लेनी चाहिए। आप ने चोरी क्यों की? काफी इन्कार करने के बाद वह बोली मैडम जी मुझे माफ कर देना। मेरा बेटा ठीक कहता है जब वह चोरी करता था मैंने उसे कभी नहीं डांटा और ना ही मैंने उसकी पिटाई कि आपने मेरे बच्चे को सुधार दिया। मैंने 100 रुपए देख कर लालच कर लिया था। आज के बाद मैं कभी चोरी नहीं करूंगी। मैडम आप भी मुझे एक बार माफ कर दो। आप यह बात किसी को नहीं बताएंगे उसे अब अपनी गलती का एहसास हो गया था मैडम ने कहा अगर आप इसी तरह चोरी करते रहें और आपको देखकर आपका बेटा भी एक दिन बड़ा चोर बन सकता है। ना जाने किसी दिन वह जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गया तब आप क्या करेंगे। तुम्हारे पास तो इसको छुड़वाने के लिए भी रुपए नहीं होंगे। दीनू की मां समझ चुकी थी। दीनू आकर बोला मैडम ठीक ही कहतीं हैं। मां आप भी चोर हो। आप भी कसम खाओ कभी चोरी नहीं करोगी। चोरी करना बुरी बात है अगर चोरी करोगी तो मैं भी एक दिन बड़ा चोर बन जाऊंगा। आप मुझे कभी नहीं मिल सकोगी उसने दीनूं को गले लगाया मुझे माफ कर दो तूने मुझे एहसास दिला दिया है। मैडम नें ₹1000 का नोट दीनू को देते हुए कहा मेरे नन्हे जासूस यह लो अपना इनाम। उसे वह 1000 रुपये इनाम के तौर पर दिए। सब बच्चों के सामने उसे ईनाम दिया गया।

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