रहस्यमयी गुफा भाग(4)

गोलू ने अपने दोस्त को कहा कि वह काला नकाबपोश आदमी राजा का पता करता हुआ राजा के महल की ओर गया है। भोलू बोला कि तुम पता लगाकर आओ कि वो राजा के महल में जाकर क्या करता है? तुम वहीँ मेरा इंतजार करना मैं अपने माता पिता को जल्दी ही राजा के महल में ले कर आता हूं। गोलू राजा के पास जा रहा था तो उसने नक़ाबपोश  को राजा के महल की ओर जाते देखा। नाकाबपोश ने एक बूढ़े व्यक्ति का भेष धारण कर लिया। राजा के महल मे पहरेदारों ने उस वृद्ध से वहां आने का कारण पूछा। तब उस व्यक्ति ने कहा कि मैं बड़ी दूर से आया हूं। आज रात यहां पर विश्राम करना चाहता हूं। पहरेदार ने संदेश राजा के मंत्री को पहुँचाया। मंत्री को उस पर दया आ गई। उसने कहा कि ठीक है आने वाले मेहमानों का स्वागत  है। आपका हमारे महल में स्वागत है। मैं राजा को सूचना दे कर आता हूं। राजा उस समय विश्राम कर रहे थे।राजा का मंत्री उसे अंदर लेकर गया। उसने उस व्यक्ति के ठहराने का प्रबंध कर दिया।  मंत्री ने पूछा कि आप कहां से आए हैं आप कहां रहते हैं? उस वृद्ध ने बताया कि वह भी एक राज्य का मन्त्री है। जंगल से गुज़रते हुए रास्ता भटक गया और यहां पर पहुंच गया। हमारा राज्य यहां से  100 किलोमीटर की दूरी पर  पहाड़ की तराई पर है वहां पर मैं अपनी पत्नी के साथ राजा के महल में रहता हूं। वृद्ध व्यक्ति ने राजा के बारे में थोड़ी जानकारी ले ली थी।

राजा जागा तो मंत्री ने  सारा  हाल राजा से कह सुनाया कि  एक  वृद्ध व्यक्ति  चलते चलते अपने मार्ग से भटक  गये थे। वे सुनसान रास्ते पर चलते जा रहे थे। । उन्हें मार्ग ही नहीं सूझ रहा था। इसलिए आज रात ये हमारे अतिथि हैं। राजा ने कहा ठीक है  हर मेहमान का हमारे घर में स्वागत है।

गोलू नें उस नकापोश को महल में घुसते देख लिया था । उस नकाबपोश वाले मंत्री नें एक साधारण वृद्ध का भेष धारण कर लिया था। भोलू नें माला के दो मोती  अपनें दोस्त गोलू को दिए थे। मोती की माला उसने अपने गले में पहन ली। उस की मदद से उसने मन्त्री और उस व्यक्ति की सारी  बातें सुन ली थी। उसे याद आया कि उस के पास उस दुष्ट दानव के बाल भी थे।जैसे ही  गोलू नें उन्हें हाथ में लिया एक बौना प्रकट हुआ और बोला के मैं  तुम्हारी क्या   सेवा कर सकता हूं? गोलू बोला तुम मुझे शिकारी की वेश भूषा दिलवा दो। उस  बौनें नें गोलू को शिकारी की वेषभूषा पहना दी और उस के बाल भी शिकारी जैसे बना दिए।

राजा ने देखा कि एक शिकारी उस के महल में हाथ में  भाला लिए आ रहा था। गोलू ने राजा को देखकर शिकारी का भेष धारण कर लिया था।। शिकारी बोला क्या आज रात को मैं आपका मेहमान बन सकता हूं। राजा बोला क्यों नहीं?  महल में आप का स्वागत है। शिकारी अपना परिचय देने के उपरान्त उस वृद्ध व्यक्ति के साथ बैठ गया। वृद्ध ने शिकारी को घूर कर देखा। भोलू ने देखा कि वह  आदमी राजा से बात करने  के  इंतजार में बैठा  था।  वृद्ध व्यक्ति राजा से बोला क्या कभी आप शिकार पर गए हो? राजा बोला कि हां मैं एक  एक बार जंगल में  एक विचित्र  गुफामें फँस गया था। वृद्ध बोला फिर क्या हुआ? राजा आगे कहने ही जा रहा था की तभी  शिकारी नें  राजा को कहा कि राजा जी क्या अकेले में आप मेरी बात सुन सकते हैं? मैं आपके पास एक विनती लेकर आया हूं। मैं इस व्यक्ति के सामने अभी कुछ नहीं कह सकता हूँ। राजा बोला ठीक है। राजा ने उन वृद्ध मेहमान को कहा कि आप महल में जाकर आराम कीजिए। आप के लिए कमरे का इन्तज़ाम कर दिया गया है। वृद्ध के जाने के बाद गोलू बोला राजा जी आप  मुझे नहीं पहचानते क्या? राजा बोला कि मैं तुम्हें कैसे पहचान  सकता हूं? यहां जो व्यक्ति आपके पास आया है वह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। जादूगर ने आप का पता करवाने के लिए उसे यहां भेजा है। आप इस आदमी से बच कर रहना। आपने अपना सारा किस्सा उस उस व्यक्ति को सुना दिया। वह आप से पूछना चाहता था कि आपने वह माला कहां रखी है?  तुम्हें माला के बारे में कैसे पता चला राजा बोला। मैं ही आपके दोस्त भोलू का दोस्त गोलू हूं। मुझे यहां पर आने के लिए शिकारी का वेश धारण करना पड़ा। आपका दोस्त भोलू भी आपसे मिलने के लिए कल यहां पर आएगा।

मैंने उस दुष्ट जादूगर को यह कहते सुना कि हम सामान्य व्यक्ति का वेश धारण कर राजा के महल में जाएंगे। उससे मोतियों की माला प्राप्त कर लेंगे। गोलू को देखकर राजा बड़ा प्रसन्न हुआ। दूसरे दिन  वह वृद्ध व्यक्ति राजा को धन्यवाद कह कर चला गया।

अगले दिन भोलू अपने माता-पिता को ले कर राजा के महल में आया। भोलू को देख कर राजा बड़ा खुश हुआ। मैनें ही अपनें दोस्त को कल आप की सहयता के लिए उसे यहां भेजा था। आप को किसी भी अनजान से बच कर रहना चाहिए। वह आप को हानि पहुंचा सकता है।  मैं उस दिन आप से अलविदा ले कर  आ ही रहा था तो मैने उस महल में जाने के लिए वह मोतियों की माला पहन ली थी। रास्ते में मुझे अचानक वह नकाबपोश और वह दुष्ट जादूगर दिखाई दिए। वह चुप चाप एक महल में चले गए । मेने उनका पीछा किया तो पता चला कि आप से मोतियों की माला चुरा के वो आप का राज्य हत्याने का षड्यंत्र रचा रहे थे। तभी मेने आप को सावधान करने के लिए गोलू को आप के पास भेजा। राजा नें भोलू का धन्यवाद किया और कहा एक बार फिर तुमनें मेरी सहायता की है मैं तुम्हारा उपहार कभी नहीं भूल सकता।

भोलू अपनें माता पिता को राजा के पास छोड़ कर छड़ी प्राप्त करनें के लिए निकल गया।

राजा एक दिन शिकार खेलने के लिए जंगल चला गया।  चलते चलते बहुत दूर पहुंच गया था। रास्ता भटक गया।  उस गुफा के पास ही पहुंच गया था।  दुष्ट जादूगर ने उसे आते हुए देख लिया था। उसने अपने मन में सोचा कि इस से पहले  राजा को पता चल जाए कि वह वही गुफा है  जहां पर उसे जादू के मोतियों की माला मिली थी। क्यों न जादू के बल से  इस पर एक सुन्दर सा महल बना देता हूं?  जादूगर के मंत्री ने अपने जादू के बल से वहां एक सुंदर सा महल बना दिया। जगह-जगह तालाब झरने उसमें इतना सुंदर महल बना दिया। राजा ने इतना सुंदर महल देखकर सोचा अंदर जाकर पता करता हूं कि यहां कौन रहता है? वही  बूढा  मंत्री राजा को दिखाई दिया। राजा का मंत्री बोला यहां पर मैं और मेरी पत्नी रहते हैं। राजा जी कुछ दिनों के लिए अपने भाई के पास गए हैं। राजा की उन दोनों पति पत्नी ने बहुत खातिरदारी की। नाना प्रकार के पकवान बना कर खिलाए।

राजा  सोचने लगा यह तो बूढा मन्त्री है। वह तो जादूगर नहीं हो सकता। उस से पता करता हूं कि तुम इस जंगल में अकेले यहां क्यों रहते हो? राजा उस बूढे मन्त्री से बोला आप यहां अकेले क्यों रहते हो। वह बूढा मन्त्री बोला मेरा भी एक सुन्दर महल था। मेरे पास सब कुछ था। मेरे अपनों नें ही मुझे धोखा दिया। खास कर मित्रों नें। उन्होनें मेरा सब कुछ छिन लिया। राजा जी को मुझ पर दया आई उन्होंनें मुझे और मेरी पत्नी को आश्रय दिया। वे मुझे अपनें घर के एक सदस्य की तरह समझते हैं।  राजा सोचने लगा कि यह कोई जादूगर नहीं हो सकता। यह मंत्री  तो कितना समझदार है।? राजा का विश्वास जीतने में सफल हो गया था। उसने बूढ़े मंत्री को कहा कि आप दोनों भी मेरे महल में आते जाते रहा करो।

एक दिन वह दोनों राजा के महल में कुछ दिन बिताने के लिए आ गए थे। राजा भी उनकी खूब खातिरदारी करने लगा। एक दिन गोलू ने उनको देखा। उसे पता चल गया था कि वह कोई राजा का मंत्री नहीं है। वह  तो उस दुष्ट जादूगर का मंत्री है। वही नकाबपोश  व्यक्ति है। यह राजा की जादू की माला का पता करने आया है।

एक दिन गोलू ने देखा कि उस मंत्री ने अपने भाई और भाभी को भी राजा के महल में बुला लिया था। वह तो दुष्ट जादूगर था जो राजा के महल में घूम रहा था।  उस दुष्ट जादूगर की नजर भोलू के पिता पर पड़ी। वह उसको पहचान गया। वह उसके पास जाकर बोला तुम यहां कैसे? तुम्हें इतना ढूंढा मगर तुम नहीं मिले। मैं तुम्हारा ही पता करते हुए यहां तक आया हूं। आज अच्छा मौका है। तुम मिल ही गए। तुम जल्दी बताओ कि मेरे जादू का जूता कहां है?

उस दिन तुम मेरी जादू की छड़ी के  प्रकोप से बच गए लेकिन आज मेरे  कहर से तुम्हें कौन बचाएगा? गोलू के पिता को  जोर जोर से झंझोडते हुए बोला जल्दी बताओ मेरा  जादू का जूता कंहा है।

वह कुछ नहीं बोला।  नकाबपोश  व्यक्ति जिसने बूढ़े मंत्री का भेष धारण किया हुआ था दुष्ट जादूगर  को बोला कि आप के भाई और भाभी कुछ दिनों के लिए आपके पास गए थे। मुझे अपने महल में तैनात करके गए। आज भी मैं आपको यहां सैर कराने ले आया। आपको तो पता ही होगा कि जो जादू के मोतियों की माला राजा  आप के भाई से छीन कर  लाए हैं हम उन राजा के ही महल में आ गए हैं। यही वह राजा का महल है जिन्होंने उनकी मोतियों की माला छीनी है। मैं भी राजा से मोती की माला का पता करने आया था। दुष्ट जादूगर  बोला  भाई और भाभी  तब तक मेरे ही महल में रहेंगें  है जब तक  उनके  वह मोतियों की माला नहीं मिलती।  वह माला उन्हें नहीं मिली तो उनकी शक्तियां क्षीण हो जाएगी। मैं तो ऐसे ही घूमने के लिए यहां आ गया था क्योंकि मेरा भी जादू का जूता एक आदमी के साथ लड़ते हुए नीचे गिर गया था। मैं अपना जादू का जूता प्राप्त करना चाहता हूं। लेकिन आज वह आदमी मुझे मिल गया है। वह आदमी हमेशा पहाड़ की तराई में हमेशा आता रहता था। एक दिन भंयकर तुफान में मेरा सामना उस से हुआ। वहां पर  वह बाज नहीं आए होते तो मैं इस आदमी को वहीं ढेर कर देता। लड़ाई करते करते मेरा जादू का जूता मेरे हाथ से गिर पड़ा। वह व्यक्ति इसी महल में है। बूढ़ा मंत्री जिसने नकाब पहना था वह बोला वह कौन है? दुष्ट जादूगर बोला मैं उससे पूछ रहा था कि तुमने वह जादू का जूता कहां डाला? लेकिन वह कुछ नहीं बोला। दुष्ट जादूगर  नें  भोलू के पिता की तरफ इशारा करते हुए कहा यह है वह व्यक्ति। गोलू यह सब कुछ देख रहा था।  उसको पता चल गया था कि वही दुष्ट जादूगर है जिसके पास जादू की छड़ी है। जिसने भोलू के पिता पर जादू की छड़ी का प्रहार किया था। उनके बोलने की शक्ति जाती रही। गोलू यह सब सुन रहा था।

तभी राजा सामने आकर बोला कि आपको हमारा महल कैसा लगा? दुष्ट जादूगर बोला यहां आ कर मन खुश हो गया। यहां पर आने की बडी़ तमन्ना थी। दुष्ट जादूगर राजा को बोला यह बुढे इंसान कौन है? वह बोलते क्यों नहीं है? शायद इन के बोलने की शक्ति चली गई है। राजा बोला यह मेरे मित्र भोलू के पिता हैं। किसी दूष्ट जादूगर  की छड़ी के प्रहार से इन के बोलनें की शक्ति जाती रही। । उनके बोलने की शक्ति तो  तब वापिस आएगी जब वो जादू की छड़ी प्राप्त करके  भोलू यहां पर ले आएगा।

गोलू राजा के पास चुपके से आकर बोला  ये वही राजा जादूगर का भाई है जिसने भोलू के माथे पर जादू की छड़ी का प्रहार किया था। इनसे बचकर रहना चाहिए। राजा को पता चल गया था कि वह दुष्ट जादूगर का भाई है जिसकी मोतियों की माला भोलू के पास है।।  भोलू  तो जादू की छड़ी प्राप्त करनें के लिए निकल गया है। वह दुष्ट जादूगर  राजा के महल में भी पहुंच गया। राजा गोलू को बोला कि अब क्या करें? इन से कैसे अपनें  आप को बचाया जाए। कुछ उपाय सोचतें हैं।

दुष्ट राजा के नंत्री ने गोलू और राजा की  सारी बातें सुन ली थी। उसने अपने राजा के साथ मिल कर षड्यंत्र से राजा को बंदी बना लिया और  कहा कि तुमने अगर मोतियों की माला के बारे में हमें नहीं बताया तो हम तुम्हें मार देंगे। गोलू चुपके से वहां से भागने में सफल हो गया। गोलू  ने सोचा के भोलू को सब बता देना चाहिए। उसने सोचा कि  वह ज्यादा दूर नहीं गया होगा। गोलू नें उस बौने को कहा कि मुझे जल्दी से भोलू के पास पहुंचा दो। उस बौने नें गोलू को कहा कि तुम्हारा दोस्त सात समुद्रों को पार करना चाहता है। लेकिन अभी वह पहला समुद्र भी पार नहीं कर पाया है। अचानक उस बौनें नें गोलू को भोलू के पास पहुंचा दिया। बौना उस को वहां पर छोड़ कर अदृश्य हो गया। भोलू अपनें दोस्त को आता देख कर परेशान हो गया। कुछ न कुछ गडबड़ तो अवश्य है। भोलू बोला तुम यहां कैसे। भोलू नें गोलू को सारी कहानी सुना दी कि किस तरह उस जादूगर   नें राजा को अपनें काबू में कर लिया। जिस दुष्ट जादूगर का जूता तुम्हारे पिता को मिला था वह दुष्ट जादूगर  यहां राजा के दरबार में आ गया था। वहां पर तुम्हारे पिता को पूछनें लगा मेरा जादू का जूता कहां है? उसनें राजा को भी बन्दी बना लिया है। तुम्हारे माता पिता को भी उस दुष्ट जादूगर नें बन्दी  बना लिया है। भोलू यह सुन कर चिन्ता में पड़ गया। वह सोचने लगा कि अपने माता पिता को उस जादूगर से कैसे छूडाऊं। मैं अपनें माता पिता को  और राजा को अवश्य ही छुड़ा कर रहूंगा। अपने जान की बाजी ही क्यों न लगानी पड़े मैं उन्हें जल्दी ही जादूगर की कैद से मुक्त करवाऊंगा।  शेष अगले अंक में
मीना

                                      

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