शेर और बकरी की मित्रता

किसी जंगल में एक शेर रहता था। वह बहुत ही बूढा हो चुका था। शिकार करने के लिए इधर उधर ज्यादा भाग नहीं सकता था। आसपास जो भी शिकार मिलता उसको मार कर खा लेता था। एक दिन की बात है कि एक बकरियों से भरा ट्रक शहर की ओर जा रहा था। उसमें से एक बकरी नीचे गिर गई। उस बकरे की टांग में चोट लगी। वह जोर-जोर से मैं मैं करने लगी। वह दर्द से कराह रही थी। उस बकरी ने थोड़ी सी दूरी पर उस शेर को देखा।

वह अपना कराहना छोड़ कर चुप हो गई।। वह भाग भी नहीं सकती थी। वह झाड़ियों के पीछे छिप गई। झाड़ियों के पीछे से उसे कोई नहीं देख सकता था। वह वहां से शेर को देख सकती थी। दूसरे दिन वह थोड़ा थोड़ा चलने लग गई थी। वह डर भी रही थी कि शेर उसे मार कर खा जाएगा। वह वृक्ष की पत्तियों को खाकर गुजारा कर रही थी। वह शेर को देखकर सोचने लगी यह शेर बूढ़ा हो चुका है यह ज्यादा भागदौड़ नहीं कर सकता। जंगल में तो बहुत सारे जानवर रहते हैं। कोई ना कोई मुझे मार कर खा ही जाएगा। अगर मैं इस शेर के साथ दोस्ती कर लूं तू मैं भी निर्भय होकर इस जंगल में आराम से रह सकती हूं। शेर के साथ ही दोस्ती कर लूंगी।

एक दिन शेर विश्राम कर रहा था। बकरी ने देखा कि एक जहरीला सांप शेर की टांगों के पास से जा रहा था? वह उसको काटने ही वाला था। बकरी नें सांप को देख लिया था। बकरी सोचने लगी कि आज चाहे कुछ भी हो जाए मुझे इस शेर की जान अवश्य बचानी चाहिए, नहीं तो वह जहरीला सांप इसको काट खाएगा। वह बकरी दौड़ी-दौड़ी शेर के सामने जाकर खड़ी हो गई। उस बकरी को देखकर शेर बोला वह आज तो बिना मेहनत किए ही मुझे मेरा शिकार मिल गया है। आज का दिन मेरे लिए बड़ा ही खास है। मरने के लिए अपने आप ही मेरे सामने आ गई हो।

शेर उठने की वाला था तो बकरी ने कहा जैसे हो वैसे ही बैठे रहो अगर तुम मुझ पर जरा भी विश्वास करते हो तो जो मैं कह रही हूं उसको ध्यान से सुनो। मैं तुम्हारी जान बचाने के लिए यहां आई हूं। मुझे तुम बाद में खा लेना। पहले तुम अपनी जान बचाओ। तुम्हें अगर मुझ पर जरा भी विश्वास हो तो यूं ही निश्चिंत होकर बैठे रहो। बिना हिले-डुले अगर तुम उठोगे तो तुम्हें जहरीला सांप काट खाएगा जो तुम्हारे सामने पैरों के पास चल रहा है। शेर अपने मन को काबू में कर के चुपचाप निश्चिंत होकर बैठा रहा। थोड़ी देर बाद धीरे-धीरे सांप वहां से चला गया।।
शेर बकरी की ओर देख कर बोला बहन मैं तुम्हें मारकर खाने ही वाला था। तुमने आज सांप से मेरी जान बचाई। तुम मेरी सच्ची दोस्त हो। आज मैं तुम्हें अपना दोस्त बनाता हूं। तुम यहां जंगल में बिना किसी डर के निर्भय होकर यहां पर रह सकती हो। बकरी उस दिन के बाद शेर की दोस्त बन गई। शेर उसे कुछ नहीं कहता था। उसे जंगल में किसी भी जंगली जानवर से डर नहीं था क्योंकि शेर उसका मित्र बन गया था।

जंगल के सारे के सारे जानवर हैरान थे कि शेर और बकरी आपस में मिल जुल कर रहते हैं। एक दूसरे के मित्र हैं। इसलिए वह बकरी को कुछ भी नहीं कहते थे।

एक बार इतना अकाल पड़ा कि कहीं भी दूर दूर तक कुछ भी नहीं बचा। सभी जानवर जंगल छोड़कर इधर उधर भागने लगे। जंगल एकदम सुनसान हो गया। शेर को भी काफी दिनों तक कुछ भी खाने को नहीं मिला। बकरी से अपने दोस्त को यह दुख देखा नहीं जाता था। बकरी तो रूखा-सूखा पत्तों को खा कर अपना गुजारा कर लेती थी परंतु उसका मित्र शेर काफी दिनों से भूखा था।

वह शेर के पास जाकर बोली तुम्हें तो कई दिनों से खाने के लिए कुछ भी नहीं मिला है। तुम मुझे खाकर अपनी भूख को शांत करो। शेर बोला नहीं मैं तुम्हें नहीं खा सकता। बकरी बोली अगर शाम तक कुछ भी नहीं मिलेगा तो तुम मुझे खा लेना। शाम होने को आई थी। बकरी शेर के पास जाने ही वाली थी कि तभी पेड़ पर उसने बकरी ने एक आदमी को देखा। वह आदमी शेर से जान बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ गया था। बकरी उस आदमी से बोली कि तुम कौन हो? वह बोला कि मैं एक व्यापारी हूं मैं अपने मुर्गियों का मांस बेचने के लिए शहर जा रहा था। मेरी नजर उस पर पड़ी। मैंने सोचा कि शेर मुझे मार कर खा जाएगा। मैं इसलिए जान बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ गया। बकरी बोली अगर तुम मेरी बात मानोगे तो शेर तुमको नहीं खाएगा। वह बोली शेर मेरा पक्का मित्र है। वह कई दिनों से भूखा है अगर तुम उसके पास कुछ मुर्गियों का मांस रख दोगे तो वह तुम्हें नहीं खाएगा। मैं उस से कह दूंगी कि तुम उसको ना खाओ। वह मुर्गीयों का व्यापारी बोला ठीक है।

बकरी नें शेर के पास मुर्गियों का मांस रख दिया। शेर ने उस व्यापारी को छोड़ दिया। व्यापारी बोला तुमने मेरी जान बचाई है मैं तुम्हें अपने साथ गांव लेकर चलता हूं। तुम्हें मैं अपने घर में ले जाऊंगा। बकरी बोली नहीं मैं शेर को छोड़कर नहीं जा सकती। वह आदमी बोला यहां पर अकाल पड़ा है। कुछ दिनों के लिए शेर को यहां पर यह मुर्गियों का मांस काम में आ जाएगा। तुम शेर को मेरे यहां से मुर्गियों का मांस लाकर दे दिया करना।

बकरी उसकी बात मान गई। वह शेर के पास जाकर बोली भाई मैंने तुमसे सच्ची दोस्ती की है। मैं भी वादा करती हूं कि जब तक आकाल समाप्त नही होगा तब तक मैं तुम्हें हर रोज एक मुर्गी लाकर देती रहूंगी। यह व्यापारी मुर्गियों का मांस शहर में बेचता है। मैं इसके साथ जा रही हूं तो मैं तुम्हें हर रोज खाने के लिए मुर्गी देती रहूंगी। वह व्यापारी के साथ उसके घर पर चली गई। वह हर रोज शेर को एक एक मुर्गी लाकर देने लगी।

कुछ दिनों के पश्चात वर्षा होने लगी और अकाल भी समाप्त हो गया। सभी जीव जंतु वापिस जंगल में आ गए थे और जंगल फिर से हरा भरा हो गया था। बकरी भी खुश हो गई थी। उसने अपनी दोस्ती निभा कर अपनी मित्रता का सबूत दे दिया था।

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