सच्चा न्याय

बहुत पुरानी बात है कि एक छोटे से राज्य में एक राजा रहता था। वह राजा बहुत ही निर्दयी था। वह अपनी प्रजा को बहुत ही तंग करता था। लोग उसकी बात नहीं मानते थे
तो वह अपनी प्रजा के लोगों के साथ बूरा बर्ताव करता था। राजा का एक मंत्री था। मंत्री भी उसी की तरह चालाक था।

राजा को शिकार खेलने का बहुत ही शौक था वह जंगल में जा कर तीर कमान चला कर किसी ना किसी जानवर को मारकर खा जाता था। उसे उन बेजुबान प्राणियों पर जरा भी दया नहीं आती थी। एक दिन जब वह जंगल में शिकार को गया हुआ था तो उसने अपने मंत्री को कहा कि हमें बड़ी जोर की प्यास लगी है चलो अपने घोड़े को हम यही छोड़ जाते हैं। उन्होंने अपना घोड़ा एक वृक्ष के पास जाकर खड़ा कर दिया। दोनों पानी की तलाश में पैदल ही निकल पड़े। उन्हें कहीं भी पानी नहीं दिखाई दिया तभी उन्हें झाड़ियों में सरसराहट सुनाई दी। उन्होंने सोचा शायद शेर या जंगली जानवर होगा। वह दोनों बचाव के लिए झाड़ियों में छुप गए। उन्होंने वहां से देखा कुछ लोग पेड़ काटने आए हुए थे। वह पेड़ों को काटने ही लगे थे तभी वहां से गुजरते हुए एक साधु महात्मा ने उन पेड़ काटनें वाले लोंगों को देखा। उन्होंने पेड़ काटने वाले लोगों को कहा तुम्हें पेड़ों को काटना नहीं चाहिए। तुम बेवजह पेड़ों को काटते हो। जहां तो तुम्हें पेड़ लगाने चाहिए तुम वहां पेड़ो को काटने का घिनौना कार्य कर रहे हो? पेड़ हमारे वातावरण को स्वच्छ रखते हैं अगर पेड़ नहीं होंगे तो हमें भी शुद्ध वायु नहीं मिलेगी। यह हमारे पर्यावरण सरंक्षण है। हम नहीं सुधरेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी भी हमसे यही सीख लेगी। सारे के सारे जंगली जीव जंतुओं का यह वृक्ष आवास स्थान स्थान है। तुम्हारे घर को कोई अगर नुकसान पहुंचाएंगा तो तुम्हें कैसा महसूस होगा? जंगली जीव जंतु भी नष्ट हो जाएंगे। पेड़ो को काटने से शुद्ध ताजा हवा भी नहीं मिलेगी। हम अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि जिस प्रकार हम अपनें जन्म दिन पर बहुत सारी मिठाइयाँ व फल अपने दोस्तों को बांटते हो अगर हम अपने बच्चों को यह ज्ञान बांट दें कि अपने जन्मदिन पर एक-एक बच्चा एक-एक घर से एक भी पौधा लगा दे तो कितना पुण्य का काम होगा। हमारे पूर्वज भी हमें आशीर्वाद देंगे और हमारे ना रहने पर भी यह पेड़ सुरक्षित रहेंगे। कहीं ना कहीं हम ही पेड़ काटने के लिए जिम्मेवार हैं।।।

राजा ने यह शब्द सुने तो उसकी आंखों से आंसू आ गए मैं भी तो न जाने कितने जीव जंतु को यूं ही मारकर खाता रहा हूं। मुझे इन प्राणियों से सीख लेनी चाहिए आगे से मैं भी इन जंगल के जानवरों को नहीं मारूंगा। और किसी बेकसूर मनुष्य को भी सजा नहीं दूंगा उसने अपने राज्य में घोषणा कर दी कि कल अपने राज्य में एक सभा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें सभी दूर दूर दराज आसपास से आए हुए लोग शामिल होंगे। राजा की सभा में सारे के सारे सभा जन उपस्थित हुए राजा ने कहा कि आज तक मैं तुम पर और जंगली जानवरों पर अत्याचार करता रहा। मैं किसी बेकसूर प्राणी या जीव को सजा नहीं दूंगा
। आज मैं अपने राज्य में घोषणा करता हूं कि मेरे राज्य में सभी लोगों को सूरज निकलने से पहले उठना होगा। जो देर तक सोता रहेगा और जो नहीं उठेगा उसे दंड दिया जाएगा। तुम भी जंगल में किसी भी जानवर को नहीं मारोगे या जंगलों को काटोगे जो मेरे राज्य में जंगलों को काटेगा उसको मैं कड़ी से कड़ी सजा दूंगा सभी लोगों ने कहा कि राजा जी हमें आपकी आज्ञा मंजूर है। उन्हें पता था कि राजा की आज्ञा तो पत्थर की लकीर होती है। माननी ही पड़ेगी नहीं तो राजा से सजा भूगतनें के लिए तैयार रहना पड़ेगा। राजा से सारी प्रजा के लोग थरथर कांपते थे ।

राजा जब अपने महल में आया तो उसने अपने बेटे को बुलाया बेटा एक दिन तुम ने हमें सलाह दी थी कि हमें जानवरों को नहीं मारना चाहिए बेटा तुम तो बहुत ही होशियार हो। मैंने उस दिन तुम्हारी बात नहीं मानी थी आज मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि जो मेरा बेटा न्याय करेगा वह पत्थर की लकीर होगी। मेरे बाद तो तुम्हें ही राज पाट सम्भावना है। मैं तो वैसे ही बूढ़ा हो चुका हूं। सारे के सारे प्रजाजनों के सामने राजा ने यह बात कही थी । सब के सब लोग अपने घरों को जा चुके थे।

दूसरे दिन राजा का बेटा अपने दोस्त के साथ खेलते हुए बहुत ही दूर निकल गया। उनके स्कूल में छुट्टी होने की वजह से वह बहुत ही दूर निकल गए। उसका दोस्त एक गरीब लड़का था वह एक शिकारी का बेटा था। उसका घर समीप ही था। गप्पे मारते मारते हुए बहुत दूर निकल गए। उन्होंने अपने आगे जाते दो आदमियों की बातें सुनी। वह कह रहे थे कि बडा आया हम पर हुकुम चलाने वाला। सूरज निकलने के बाद उठेंगे तो हमें दंड देगा। हम क्यों उठे जल्दी? दूसरा बोला आहिस्ता बोल किसी ने सुन लिया तो क्या होगा? पहला आदमी बोला मैं कोई राजा वाला से नहीं डरता ऐसा डरपोक राजा और अत्याचारी राजा बिना वजह सभी को दंड देता रहता है। राजा के बेटे ने सुन लिया। धीरे धीरे चलने लगा। अचानक उस व्यक्ति को ठोकर लगी। उसने पीछे मुड़कर देखा और दूसरे आदमी को कहा यह तो राजा का बेटा है। दूसरे व्यक्ति ने अपने दोस्त को इशारा किया राजा के बेटे को आज मार ही देतें हैं। इसको मार कर भाग जाएंगे।

राजा को क्या पता चलेगा? शिकारी के बेटे नें राजकुमार की सारी बातें सुन ली थी। उसने राजकुमार को कहा कि इस रास्ते से जाना खतरे से खाली नहीं है। राजकुमार बोला कि मैं भी देखता हूं मेरे पिता को गाली देने वालों से मैं बदला लेकर रहूंगा।

उन दोनों आदमीयों ने राजकुमार को पकड़ लिया और उसकी खूब पिटाई की। उसके शिकारी दोस्त को एक विचार आया उसने तीर कमान एक आदमी की बाजू में मार दिया। दूसरा आदमी जैसे ही अपने साथी की बाजू से तीर निकालने लगा तो तभी राजकुमार को शिकारी के बेटे ने कहा कि यहां से जल्दी भागते हैं। दोनों जान बचा कर वहां से भाग आए।

दूसरे दिन राजकुमार का दोस्त सूरज निकलने से पहले नहीं जागा। उन्हीं आदमीयों नें राजा के पास शिकायत कर दी कि एक शिकारी का बेटा है जो सुबह सूरज निकलने से पहले नहीं जागा। राजा ने उसे पकड़कर लाने को कहा। उसे राजा के सामने पकड़ कर लाया गया। राजा ने उससे कहा कि तुमने हमारी आज्ञा का उल्लंघन किया है। इसका दंड भुगतना ही पड़ेगा। तुम सुबह क्यों नहीं उठे?

राजा शिकारी के बेटे को दन्ड देना ही चाहता था।, सारी की सारी प्रजा के लोग महल में उपस्थित थे। यह देखें लिए कई राजा क्या न्याय करता है? राजा ने शिकारी के बेटे को बीस कोड़े लगाए तभी वहां पर राजा का बेटा आ कर बोला पिता जी आपने उचित न्याय नहीं किया। आज फिर आपने बिना वजह किसी बेकसूर को सजा दी है। उसका पिता हैरान होकर उसकी तरफ देख कर बोला। उसने गुनाह किया है? इसने मेरी आज्ञा नहीं मानी है। वह बोला पिता जी आपने इस से एक बार भी पूछा कि इसको उठने में क्यों देरी हुई? वह बताने ही वाला था आपने उसे रोक दिया। मैं आपको बताता हूं कि कल मैं इस शिकारी के बेटे के साथ काफी दूर निकल गया था। तभी मैंने दो व्यक्तियों को बातें करते सुना वे दोनों व्यक्ति आपकी निंदा कर रहे थे। वह आपके बारे में ना जाने क्या-क्या कह रहे थे। वह कह रहे थे कि बड़ा आया सूरज निकलनें से पहले उठाने वाला। उसी समय एक आदमी का पैर फिसला वह गिरने ही वाला था। उसने पिछे मुड़ कर मुझे देखकर अपने दोस्त को कहा कि यह तो राजा का बेटा है। अगर इसने घर जाकर अपने पिता को सारी बात बता दी तो हमें फांसी हो जाएगी। इससे पहले कि राजा हमें सजा दे हम ही इसके बेटे को मार देते हैं। वे मुझे ही मार डालते लेकिन इस शिकारी के बेटे ने तीर चला कर उन दोनों को पीटने से हटा दिया। आदमी की बाजू में तीर लगा दूसरा व्यक्ति जैसे ही अपने साथी की बाजू से तीर निकालने लगा हम दोनों वहां से भाग आये।

राजा अपनी करनी पर पछता रहा था। मैंनें आज फिर गल्ती न्याय कर दिया। उसका बेटा बोला आज मैं सच्चा न्याय करना चाहता हूं आपने मुझे राजा बनाया। उसने अपने पहरेदारों को बीस कोड़े अपने पिता को लगानें का आदेश दिया। आज सही मायनों में असली न्याय हुआ। सारी प्रजाजन उसे देखने लगी। राजा ने कहा शाबाश बेटा। आज तुमने सचमुच ही मेरी आंखें खोल दी है। मैं आगे से हमेंशा सच्चा न्याय करूंगा। ं

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