साकार सपना

सोनू के माता पिता ने उसकी शादी तय कर दी थी। सोनू अभी 18 वर्ष में ही लगी थी। उसने अपने माता पिता को कहा कि वह शादी नहीं करना चाहती क्योंकि वह अभी अपनी संगीत की शिक्षा जारी रखना चाहती है सोनू को बचपन से ही संगीत का शौक था ।जब कोई भी गाने का प्रोग्राम होता तो वह सबसे पहले वहां देखने पहुंच जाती ।उसको संगीत की शिक्षा लेते लेते 5 साल हो चुके थे ।वह अपनी पढ़ाई के साथ अपना संगीत का कोर्स भी पूरा कर रही थी ।वह बोली पिताजी मैं इस साल शादी नहीं करना चाहती इस साल मेरा संगीत का आखिरी वर्ष है। उसके पिता ने कहा हमने तुम्हारे लिए एक अच्छे लड़के का चुनाव किया है। वह शादी के लिए रजामंद है अब मैं तुम्हारी शादी में कोई भी विलम्ब नहीं कर सकता। लड़के की सुनार की दुकान है वह बहुत ही योग्य लड़का है इससे अच्छा लड़का तुम्हें नहीं मिल सकता। मैंने लड़के से और उसके माता-पिता से बात कर ली है ।तुम शादी के बाद भी अपनी संगीत की शिक्षा को जारी रख सकती हो ।मैं सौरभ को समझा दूंगा शाम को  सौरभ के माता-पिता उसे देखने आ गए थे उन्होंने सोनू को पसंद कर लिया था। उन्होंने सोनू को कहा कि हमारे वंश में संगीत सीखने का रिवाज नहीं है।हमारे गांव में संगीत को अच्छा नहीं समझा जाता ।तुम बाहर जाकर संगीत नहीं सीखोगी ।यह बात सोनु ने अपने पिता से कही पिताजी संगीत में मेरी जान बसती है। उसके पिता ने कहा देखो बेटा तुम हमारी जग  हंसाई मत करवाना। मेरी लाज तुम्हारे हाथ में है मजबूरी के कारण सोनू को शादी के लिए हां करनी पड़ी ।

 

वह दिन भी आ गया जब सोनू अपने माता-पिता से अलविदा कहकर शादी के बाद अपनी ससुराल आ चुकी थी ।उसके पति अच्छे थे उन्होंने सोनू को कहा कि देखो तुम्हें मेरे माता पिता की आज्ञा का सम्मान करना होगा ।वह तुम्हारे संगीत की शिक्षा को अच्छा नहीं समझते। तुम संगीत का नाम भी नहीं लोगी ।सोनू ने अब तो अपने आप को इस परिवार में पूरी तरह से ढाल लिया था। पहले पहल तो वह बहुत ही दुखी होती थी कि मुझे मेरी संगीत की शिक्षा को पूरी नहीं करने दिया गया कहीं ना कहीं वह इसके लिए पहले अपने मायके को जिम्मेदार ठहराती थी।  मेरे माता-पिता ने मुझे संगीत की शिक्षा को जारी नहीं रखनी दिया। अपने सास-ससुर से भला वह कितने दिनों तक नाराज रहती। उसने किसी ना किसी तरह अब उसने परिस्थितियों से समझौता कर लिया था। उसने शादी के बाद भी अपने अपना  घर का कार्य समाप्त करने के बाद कंप्यूटर पर संगीत का कार्यक्रम जारी रखा।वहां से सारे कार्यक्रम को देखना नहीं भूलती इस तरह से चुपचाप अपनी संगीत की शिक्षा प्राइवेट की पास कर ली ।

उसने एक नन्ही सी कली को जन्म भी दे दिया था। वह उस बच्चीे को पाकर बहुत खुश थी। उसने अपने मन में निश्चय कर लिया था कि मेरा भाग्य अब मेरी बच्ची में छुपा है ।मैं अपनी बच्ची को इतनी बड़ी कलाकार बनाऊंगी की सारी दुनिया वाह वाह करेगी। उसे संगीत की शिक्षा दिलवाऊंगी। मैं ऊंचाइयों के शिखर तक पहुंचना चाहती थी अब अपना सपना मैं अपनी बेटी के द्वारा पूरा करुंगी ।वह सोचने लगी कि कोई भी मेरी बेटी के भविष्य के आड़े आएगा मैं उसे ऐसा नहीं करने दूंगी। मैं अपने पति और पत्नी सास-ससुर के खिलाफ जाकर उसके भविष्य को संवारने का प्रयत्न करूंगी। सोनू ने और भी अधिक मेहनत करनी शुरू कर दी थी

 

उसने अपनी बेटी को संगीत की तालीम दी उसकी बेटी अब बड़ी हो चुकी थी। उसके पति भी इतने व्यस्त हो गए थे क्योंकि उनका काम भी अच्छा चल रहा था। वह अपने काम में इतना व्यस्त थी कि वह सोनू और अपनी बेटी की ओर ध्यान ही नहीं दे पा रहे थे सोनू ने अपनी बेटी के लिए एक पार्ट टाइम संगीत का विद्यालय खोला था ।उसमें वह लड़कियों को छः घंटे संगीत सिखाती थी ।उसने अपने सास-ससुर को कहा था कि वह एक स्कूल में काम करती है ।उसने अपने पति को भी अपने स्कूल के बारे में कुछ भी नहीं बताया था ।वह अपनी संगीत की शिक्षा के साथ वह मंदिर जाना भी कभी नहीं भूलती थी। जब भी मंदिर में अच्छे-अच्छे कार्यक्रम आयोजित होते वह वहां जाना नहीं भूलती थी ।वहां जाकर वह भजन गाती थी ।उस के भजनों की सब लोग फर्माइश करते थे।  उसको मंदिर में पहचानने लग गए थे। उसके पति नास्तिक थे वह कभी भी मंदिर नहीं जाते थे। सोनू कहती कि कभी कभी आपको भी मंदिर चलना  चाहिए परंतु वह कहते कि इसके लिए तुम ही काफी हो।

सोनू के पति जब अपनी गाड़ी में दुकान जा रहे थे तो उनकी कार एक मोटरसाइकिल से टकराकर उन्होंने मोटरसाइकिल   को चकनाचूर कर दिया था। उसमें 26वर्ष का युवक था जो मोटर साइकिल चला रहा था। सौरभ की गाड़ी से मोटरसाइकिल वाले को जोर से टक्कर लगी थी ।वह इतनी ऊंचाई से उछल कर नीचे गिर गया था। वह युवक कोमा में चला गया था। उसके सिर पर गहरी चोट लगी थी।  सौरभ का  अब डर के मारे बुरा हाल था ।वह सोचने लगा कि अगर वह युवक मर गया तो वह  उसके माता पिता को क्या मुंह दिखाएगा ।सौरभ ने एक फोन कॉल करके उस नवयुवक के माता पिता को सूचना दी कि आपका बेटा मेरी गाड़ी से टकरा गया है ।मैंने उसे शहर के अस्पताल में दाखिल करवा दिया आप जल्दी से जल्दी सिटी अस्पताल में मुझसे मिलो ।उस नवयुवक के माता-पिता जल्दी ही अस्पताल पहुंच गए थे ।वह अपने बेटे को देख कर कह रहे थे अगर हमारे बेटे को कुछ हो गया तो हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे ।सौरभ ने सोनू को कहा कि तुम जल्दी से सिटी हॉस्पिटल आ जाओ। जैसे ही सोनू ने सिटी हॉस्पिटल  का नाम सुना तो वह देखकर डर गई कि कहीं मेरे पति को कुछ हो तो नहीं गया उसने जल्दी से सिटी हॉस्पिटल पहुंच गई। वहां अपने पति को बहुत हड़बड़ाए हुए देखा  सौरभ बोला मेरी गाड़ी से एक नवयुवक टकरा गया था। वह बहुत ही बुरी अवस्था में है। वह बोला हे भगवान उसे बचा लो ।।

सुमित के मुंह से भगवान का नाम अचानक निकला था ।वह बोली चलो तुमने इसी बहाने ही भगवान का नाम लिया तो सही ।वह बोला सोनू तुम भगवान को मानती हो तुम अपने भगवान से प्रार्थना करो कि यह बच्चा ठीक हो जायेः। उसको ठीक करने के लिए डॉक्टर ने ₹50,000 मांगे थे और दवाइयों का खर्चा अलग और प्लास्टिक सर्जरी करने के पांच  लाख। इतने सारे रुपयों का खर्चा देख कर सौरभ बहुत ही हड़बड़ा गया था सोनू बोली फिलहाल तो आप भगवान से प्रार्थना करो कि वह बच्चा सही सलामत अपने घर पहुंच जाए किसी ना किसी तरह बच्चा बच जाये।जितने रुपयेे उसने अपनी दुकान में कमाये थे वह अब सब समाप्त हो चुके थे ।वह सोनु से बोला हमारे घर का खर्चा करने के लिए भी रूपये नहीं बचे हैं ।  

सोनू ने हिम्मत न हारते हुए कहा कि  मेरे रहते हुए आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।मैंने आज तक आप को यह नहीं बताया कि मैंने संगीत शिक्षा का एक विद्यालय खुला उसमें मैंने 7,00,000 रुपए इकट्ठे कर लीए हैं। सुमित अपनी पत्नी के मुंह से यह सुनकर खुश हो गया और कहने लगा शाबाश तुमने अपनी संगीत की शिक्षा को बरकरार रखा ।तुम्हें हमनें इसके लिए बहुत ही इनकार किया था कहीं ना कहीं मैं भी गलत था। आज तुम्हारे संगीत की शिक्षा से कमाये गए रुपयों से अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहा हूं ।आज मैं भी तुम्हारे साथ मंदिर चलूंगा। सोनू अपने

पति की ओर मुस्कुराते हुए देख रही थी  उस दिन सौरभ सचमुच ही उसके साथ मंदिर गया था ।उसने अपने पत्नी का कार्यक्रम मंदिर में सुना तो वह बड़े  संगीतज्ञों को भी मात दे रही थी  ।वह अपने आप को कोस रहा थाे मैंने अपनी पत्नी की रुचि को नहीं समझा ।सौरभ अपनी दुकान में  वापस अपने काम पर जाने लगा था ।वह लड़का भी अब ठीक हो चुका था  उसकी बेटी शीतल भी संगीत में बढ़-चढ़कर भाग लेने लगी थी ।

सोनू ने  अपनी बेटी की संगीत की शिक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। एक दिन उसकी बेटी को संगीत के सबसे बड़े कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला ।उसने जल्दी से फार्म भर दिया था ।उसने अपनी मम्मी को कहा था कि मेरा यह कार्यक्रम काफी दिनों तक चलेगा इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए सोनू अपनी बेटी शीतल के साथ गई थी । शीतल ने  गाना गा गा कर दर्शकों को आत्मविभोर कर दिया ।वह अपने संगीत के मुकाबले में अव्वल रही थी ।उसे संगीत का सबसे बड़ा खिताब मिलने वाला था। जब तालियों की गड़गड़ाहट से शीतल का नाम पुकारा गया और उसे ट्रॉफी दी गई  सोनू की आंखों में खुशी के आंसू छलक लगे । वह सोचने  लगी काश आज मेरे पति और मेरे सास-ससुर अपनीबेटी कोे ईनाम लेते देखते  ।

सोनू को विश्वास ही नहीं हुआ तभी सामने से सौरभ और उसके दादा दादी भी कार्यक्रम देखने पहुंच चुके थे ।उन्होंने अखबार में पढ़ लिया था कि हमारी बेटी को आज संगीत की सबसे बड़ी ट्रॉफी मिलने वाली है जब शीतल को ट्रॉफी दी गई तो सबसे पहले आकर उसने अपनी मां के पैर छुए । अपने पापा और दादा दादी से शीतल ने कहा कि आज जो मुझे संगीत में ट्रॉफी मिली है उस की हकदार केवल मेरी मां है ।मेरी मां ने मुझे संगीत की शिक्षा दिलवाने में और मेहनत से इस मुकाम तक पहुंचाने का श्रेय मैं अपनी मम्मी को देती हूं। जिन्होंने इतनी कठिन परिस्थितियों में भी मेरी संगीत की शिक्षा को हमेशा कायम रखा और मैंने हर रोज छः घंटे रियाज किया । हर प्रोग्राम में हिस्सा लेना  नहीं  छोड़ा। आज मैं गर्व से कह रही हूं कि यह जीत मेरी नहीं मेरी मां की जीत है। जिसके सपने वह हमेशा देखा करती थी। अपने सपने को तो वह पूरा नहीं कर सकी क्योंकि कहीं ना कहीं आज भी  रूढ़िवादी सोच मौजूद थी। परंतु मेरी मां ने इस इन सब कुरितीयों से बाहर निकलकर मुझे संगीत की शिक्षा ही नहीं  बल्कि मुझे अच्छे संस्कार भी दीये। जो कुछ आज मैं हूं वह अपनी मां की सूझबूझ और हौंसले के कारण हूं  ।पारितोषिक वितरण करने वाले मैनेजर ने शीतल्र को कहा कि आप अपनी माता जी को मंच पर लाओ आज हम मां और बेटी दोनों से एक गाना सुनना चाहते हैं। जब सोनू ने  अपनी बेटी के साथे गाना  सुनाया तो लोग तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहने लगे एक बार और एक बार और। वह आज अपने आप को भाग्यवान महसूस कर रही थी। इतने वर्षों के बाद उसे अपनी बेटी के साथ गाने का मौका मिल रहा था ।जैसे ही कार्यक्रम समाप्त हुआ सोनू के सास ससुर ने सोनू से अपने किये व्यवहार के कारण क्षमा मांगी।उन्होंने  कहा बेटा वास्तव में हम तुम्हारी संगीत के प्रति असीम लगाव को समझ ही नहीं सके।  बेटा हम दोनों को माफ कर देना ।

 

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