सिफारिश

विभु के पापा ने वैभव को आवाज दी बेटा  यहां आओ वह बोला आप क्या कहना चाहते हैं!? उसके  पापा एक जाने माने राजनीतिक नेता थे। वह हर बार चुनाव में खड़े होते थे। आज भी जनता ने उन्हें वोट देकर जीता दिया था। वह अपने गांव वाले लोगों और जो लोग उनके पास अपनी फरियाद लेकर आते थे उनकी इच्छा पूरी किया करते थे। वह एक नामी राजनीतिक व्यक्ति थे। उनके पास रुपए और धन दौलत की कोई कमी नहीं थी। गरीब लोग उनके पास अपनी फरमाइश लेकर आ जाते थे। हमारे बेटे को लगवा दो। बस नेताजी आप की ही दया है। विभु बोला क्या बात है? पापा आपने मुझे क्यों बुलाया।? वह बोला पापा आज फिर मैडम ने आप से मेरी शिकायत की होगी। आपका बेटा पढ़ाई नहीं करता है। आपने ठीक है  सुना है। पापा मैंने आपको कितनी बार कह दिया कि मैं नौकरी नहीं करूंगा। यह पढ़ाई पढ़ाई मेरे बस की बात नहीं है। उसके पापा नाराज होकर बोले कुछ तो पढ़ लो। तुझे भी मैं राजनीतिक दल में प्रवेश करवा दूंगा। इस के लिए भी थोड़ी बहुत पढ़ाई करनी पड़ती है।

 

राजनीति मेरे बस की बात नहीं यह काम मुझसे नहीं होता। वह बाहर चला आया। ऐसे तो अच्छा लड़का था मगर उसे दूसरों की बातें सुनने में बड़ा मजा आता था। आज भी उसके दिमाग में सुबह की घटना चलचित्र की भांति घूम रही थी। रास्ते में जा रहा था एक बहुत ही गरीब व्यक्ति किसी बड़े अधिकारी से कह रहा था आप सेठ विश्वनाथ जी के पास जाकर मेरे  बेटे की सिफारिश कर दो। मेरा बेटा 3 बार इंटरव्यू दे चुका। पढ़ाई में इतना होशियार है। इतना मेहनती है हर बार किसी और को ही सेलेक्ट कर लिया जाता है। आज उसने  जब अपना परिणाम देखा तो खुश हो कर बोला   इस बार तो मैं जरूर चुन लिया जाऊंगा अपने पापा के सपनों को साकार करूंगा। इस बार तो मैंने जी जान लगाकर मेहनत की है। इस बार तो अवश्य ही मैं सिलेक्ट हो जाऊंगा। जब परिणाम पता करने कार्यालय पहुंचा तो देखा वहां तो शिफारिश के लिए एक बहुत बडी  लाइन लगी थी। अन्दर जाना ही मुश्किल था। मेरा बेटा लिखित परीक्षा में 90% लेकर निकल चुका है। बस अब केवल मौखिक टेस्ट बाकी है। कल परिणाम घोषित होने वाला है। मैंने अपने किसी खास आदमी को जब उस कार्यालय में पता करने के लिए भेजा तो उन्होंने कहा कि केवल दो बच्चों का ही नाम है वह भी बड़े-बड़े व्यापारियों के बच्चे हैं। मेरे अखिल का तो नाम ही नहीं। मेरा बेटा इसी गम में कहीं कोई गलत कदम ना उठा ले। अपने इस इंटरव्यू में सेलेक्ट नहीं हुआ तो ना जाने वह क्या कर बैठेगा?

 

हम गरीब लोग अपना दुखड़ा रोने किसके पास जाएं। हमारा तो कोई भाई भतीजा या कोई हमदर्द नही है  जिसके पास जाकर अपनी फरियाद सुनाए। विभू का माथा ठनका   जिस व्यापारी के बेटे की स्लैक्शन की बात कर रहे थे वह तो बहुत ही नालायक है। मेरे पिता की सिफारिश के बल पर उसको सेलेक्ट किया जाना होगा। इससे पहले कि कुछ गलत हो जाए मुझे उन अधिकारियों से मिलकर उस बच्चे का नाम   कटवाना होगा। वह अपनें पढाई वाले कमरे में गया। अचानक उस बच्चे का प्रार्थना पत्र जो उसके पापा ने मेरे पापा के पास सिफारिश के लिए भेजा था। सारा पत्र पढ़कर माजरा समझ में आ गया। उसके पापा अगर किसी गरीब की भलाई करते तो अच्छा था। जिस बच्चे ने इतनी मेहनत की है उस की सिफारिश कर आते तो अच्छा था। उसके पापा ने तो उस व्यक्ति की सिफारिश की थी जो सचमुच में ही सिलेक्ट होने के काबिल नहीं था। उस गरीब बच्चे का चांस उस से छीन लिया जाएगा। इससे पहले की देर हो जाए उस बच्चे के लिए वही कुछ करेगा। जल्दी से विभाग के ऑफिस में जाकर पूछताछ कि जहां कल इंटरव्यू हुए थे उसे सब कुछ मालूम हो गया था। किस ने टेस्ट में परीक्षा में प्रश्न पूछे थे।

 

शाम के समय विभाग अधिकारी महोदय को फोन किया है हेलो मैं  विश्वनाथ प्रताप बोल रहा हूं। कल मैंने आपको एक बच्चे के स्लैक्श्न के लिए फरमाइश की थी। अधिकारी बोले वह बच्चा तो इतना काबिल नहीं था। उस से काबिल तो एक दूसरा बच्चा था। वह सचमुच में ही तारीफ के काबिल था। उसके लिखित परीक्षा में 90% अंक आए थे। तुम्हारी  सिफारिश के दम पर हमने उस बच्चे का नाम काट दिया। मैंने प्रमोद का सेलेक्शन कर दिया। विभु ने कहा मुझे बड़ाही खेद  है। बड़े खेद से कहना पड़ रहा है मैंने आपको जल्दबाजी में नाम प्रमोद बता दिया। दरअसल उस बच्चे का नाम तो अखिल है। अखिल को सेलेक्ट करना है। अधिकारी महोदय बोले मैंने तो प्रमोद को सेलेक्ट कर दिया। विभू अपने पिता की आवाज में टेलीफोन पर बोला मुझसे गलती हो गई क्या करूं। न जाने कितने लोगों के कॉल आते हैं। आंखों से दिखाई भी नहीं देता। अब बूढ़ा हो चुका हूं। इसलिए जरा सुनने में गलती हो गई होगी। अधिकारी महोदय प्रमोद का नाम काटकर आप अखिल का नाम लिखिए।

 

अधिकारी महोदय बोले वह बच्चा तो सचमुच ही स्लैक्ट होनें के काबिल है। चलो अभी मैंने परिणाम बाहर नहीं भेजा है। मैं अखिल का नाम लिख दूंगा।

 

विभु खुशी महसूस कर रहे था। । उसने अपने पापा की आवाज निकाल कर एक बच्चे को बचा लिया जो सच में स्लैक्ट  होनेके काबिल था। जब परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया तो  अखिल खुशी से फूला नहीं समा रहा था। वह सेलेक्ट हो गया था।

 

प्रमोद के पापा विश्वनाथ जी के पास जाकर बोले हमने आपको अपना शुभचिंतक माना था मगर आपने तो मेरे बेटे को सेलेक्ट ही नहीं करवाया। एक गरीब बच्चा निकल गया।।

 

विभू  अपनें पापा और उन अंकल के पास जा कर बोला  जब आप जैसे नेता यह सब धांधली करने लगेंगे तो गरीब बच्चों के भविष्य का क्या होगा? मैंने आपका प्रार्थना पत्र देख लिया था मैंने ही आपकी आवाज में अखिल के सेलेक्ट होने की सिफारिश के लिए कहा तो अधिकारी बोले  वह बच्चा तो सच में ही सिलेक्ट होने के काबिल है। अभी मैंने प्रणाम बाहर नहीं भेजा है मैं अखिल का नाम लिख दूंगा  पापा अगर आप कुछ बोले तो मैं अपने सब दोस्तों को कह दूंगा आप को वोट ना दें। उसके पापा अपने बच्चे की बात सुनकर चुप हो गए। विभू अंकल से बोला अंकल आपका बेटा कहीं भी प्रवेश ले लेगा। मगर उस व्यक्ति को सेलेक्ट करना चाहिए जो बच्चा योग्यता का पात्र होता है अधिकारी महोदय ने मुझसे कहा कि तुम्हारी इस बारिश के कारण मैंने उसका नाम काट दिया है मैंने उन्हें उनकी आपकी आवाज में कहा मैंने गलती से प्रमोद नाम बता दिया वह बच्चा तो अखिल है अधिकारी महोदय  बोले अगर आप फोन नहीं करते तो तो मैं उस बच्चे को ही सिलेक्ट करता। क्योंकि नौकरी का हकदार तो वही  एक बच्चा है विश्वनाथ प्रताप बोले तुम्हें इसी दिन के लिए मैंने यह शिक्षा दी थी। वह बोला पापा हम नई पीढ़ी के बच्चे हैं। हमें ही  अपने आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना है। अगर आप कुछ बोले तो मैं अपने सब दोस्तों को कह दूंगा कि आप को वोट ना दे। उसके पापा अपने बच्चे की बात सुनकर चुप हो गए।

 

विभु उस अंकल के पास जाकर बोला अंकल आपका बेटा कहीं भी प्रवेश ले लेगा मगर उसी व्यक्ति को सेलेक्ट करना चाहिए जो बच्चा सचमुच ही  योग्यता का पात्र होता है।

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