हेराफेरी

नीमों हर रोज की तरह रसोईघर में खाना बनाने में व्यस्त थी। उसके भाई धनीराम एक बहुत ही बड़े
व्यापारी थे। उनके पास सब कुछ था। गाड़ी और बंगला था। जिंदगी की सभी खुशियाँ थी। धनीराम ने
आवाज दी बहना कहां हो? जल्दी आओ मुझे बड़ी जोर की भूख लग रही है। खाना लाओ।वह रसोईघर
से आकर बोली भैया अभी लाई। नीमों जैसे ही नाश्ता लेकर अपने भाई को देने गई तो वह बोला क्यों
अपने हाथों से नाश्ता तैयार करती हो? तुम तो जिंदगी में बस आनंद लेना सीखो। घूमो फिर, और अपना
समय टेलिविज़न देखनें और अपनें शौक पूरे करने में लगाओ। काम तो नौकर चाकर कर लेंगे। वह
बोली मुझे नौकरों के हाथ का बनाया हुआ खाना अच्छा नहीं लगता। मैं तो जितना काम अपने हाथों से
करूं वहीं अच्छा लगता है। आप तो हरदम व्यापार में मस्त रहते हैं। मुझे भी घर के कामों को अपने हाथों
से काम करना बहुत ही अच्छा लगता है।
उसका भाई बोला मैं तुम्हें अच्छी शिक्षा दिलाना चाहता था मगर तुमने आगे पढ़ने से इंकार कर दिया।
चलो कोई बात नहीं पढ़ लिखकर तुमने कौन सी नौकरी करनी थी? मैंने तुम्हारा हाथ आनंद के हाथ में
देखकर बुरा नहीं किया। आनंद मेरा अच्छा दोस्त है। उसके साथ व्यापार करने में मुझे बहुत ही मजा
आता है। नीमों बोली। आप दोनों भी ना जाने कौन सी नौकरी करते हो? इतने रुपए कमाते हो। आपने
कभी भी मुझे नहीं बताया कि आप क्या नौकरी करते हो? और पैसा पानी की तरह बहाते हो।अगर किसी
गरीब की मदद करनी हो तो आप कंजूस बन जाते हो ऐसा क्यों?मरते समय माता पिता ने मेरा हाथ
आपके हाथ में देकर कहा था कि अपने बहन की शादी करके अपना फर्ज पूरा करना। आप नें अपना
फर्ज पूरा किया। अब मेरी बारी है। मैं भी तो आपकी बहन हूं। मुझे भी तब तक चैन नहीं आएगा जब तक
कि आपको खुश ना देखूं। मैं आपको कोई भी गलत काम करते हुए नहीं देख सकती। भाभी के जाते ही
आप भी अकेले हो गए। मैंनें आनंद को आप के साथ रहने के लिए मना लिया। आनंद तो व्यापार के
सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहतें हैं। आपको आज मुझे बताना ही होगा कि आप दोनों क्या काम करते
हो? वह बोला कि हमारी आभूषणों की दुकान है। सोना चांदी हीरे आदि हम दोनों मिलकर इस व्यापार
को संभालते हैं। तुम बस इन बातों की चिंता मत किया करो। खुश रहा करो और छुटकी को भी अच्छे
ढंग से संभाला करो। बाकी तुम्हें कुछ करने की जरूरत नहीं है।
नीमों घर के कामों से निबट कर सैर करने चली जाती। उसने अपनी सहेलियां कम ही बनाई थी। उसके
भाई और उसके पति की अपार संपत्ति को देखकर उसकी बहुत सारी सहेलियां बन गई थीं। वे सभी
अपनी ज्वेलरी अपनी शादी को लेकर बातें करती। उसकी कोई भी दोस्त नहीं थी जो उसी की तरह उसके
सुख दुःख में शरीक हो सके। वे सभी एक दूसरे की बातें बनाने में मस्त रहती थी।

वह अपनी भतीजी को संभालती थी। वह उसे स्कूल लेकर जाती उसे स्कूल से वापस लाती और उसे
पढ़ाती और उसके साथ मस्त रहती थी। वह अपनी भतीजी को लेकर बहुत ही गंभीर थी। उसने सोचा कि

अगर उसकी भतीजी यहां रही तो वह भी अपने पिता की ही तरह ही बनेगी। उसे कई बार आभास होता
था कि उसके पति और उसके भाई का व्यापार ठीक नहीं है। वह इतना रुपया न जानें कहां से कमाते हैं?
वह कई बार अपने भाई को घर के लॉकर में काफी सारा रूपया रखते देखा करती थी। लेकिन उसनें
कभी भी अपने भाई के लॉकर को हाथ नहीं लगाया था। ना जाने कहां कहां से इतनें रुपए आए थे।
अपने पति से कई बार पूछती थी कि आप इतना रुपया कहां से कमाते हो उसका भाई और उसका पति
उसे कहते कि तुम्हें आम खाने से मतलब है या गुठलियों गिनने से।
तुम्हें इससे क्या तुम तो बस खुश रहा करो। वह अपने भाई से कहती एक दिन ऐसा ना हो कि आपको
पछताना पड़े। उसका भाई उस से गुस्सा हो तुम इस विषय के बारे में मत ही सोचा करो। तुम तो बस
छुटकी की देखभाल करती चलो। तुम्हें अगर किसी चीज की जरूरत हो तो हमसे कहो। मैं और आनंद
तुम्हें सारी खुशियां देंगे। काफी साल गुजर गए।छुटकी भी बडी हो चुकी थी। वह बारहवीं कक्षा में आ
चुकी थी। दिन अच्छी तरह गुजर रहे थे। छुटकी अपनी बुआ को बहुत ही प्यार करती थी। एक दिन नीमों
घर पर कूड़ा करकट कबाड़ी को देने के लिए जा रही थी। उसके भाई बोले तुम हर महीने कबाड़ी को क्या
बेचती रहती हो वह बोली जो आप इतना कबाड़ ईकट्ठा करते रहते हो कितनी पेटियां आदि और घर में
जो सामान प्रयोग नहीं होता वही तो बेचती हूं मुझे तो इतना बेकार का सामान घर में रखना अच्छा नहीं
लगता। इस से घर में घुटन होती है। आनंद गुस्से में बोला तुम्हें घुटन होती है तो तुम बाहर सैर करने
चली जाया करो। रोज कूड़ा कर्कट फैला कर रखती हो। आज भी और दिन की तरह धनीराम जल्दी घर
आ गए थे। नीमों ने पूछा कि भैया आज इतनी जल्दी घर कैसे आ गए वह बोला क्या बताऊं सुबह से सिर
भारी है? इसलिए आ गया। तुम तो सीआईडी इन्सपैक्टर की तरह मुझसे सवाल जबाब करती रहती हो।
एक दिन छुटकी बोली दोनों मिल कर सफाई करते हैं। उस दिन भी कबाड़ी को दोनों मिल कर कबाड़
बेच रही थी। एक बड़ा सा संदूक था। उसमें जंग लगी हुई थी। उसन कबाड़ी वाले को कहा भाई इस ट्रंक
को भी ले जाना मैं तो घर से कबाड़ बाहर निकालते निकालत थक गई। भैया पर और इन पर तो कोई
असर ही नहीं होता है। आज तो इनसे बिना पूछे ही यह ट्रंक दे दूंगी। ना जाने आलतू फालतू सामान हर
जगह सामान फैलाया होता है।छुटकी बोली पहले इस ट्रन्क को खोलने कर देखते है। उस में पुरानी
अखबारें भरी पड़ी थी। छुटकी बोली बुआ इसमें तो पुरानी अखबारें हैं। बुआ बोली तो इसे कबाड़ी को
बेचने में कोई बुराई नहीं है।
कबाड़ी वाला बोला बहन आपसे तो मेरा ना जाने कौन सा रिश्ता है? आपका ही घर ऐसा है जंहा मुझे
बहुत सारा सामान मिलता है। मैं उनको बाजार में बेच देता हूं। भगवान की दया से मेरा जुगाड़ हो जाता है।
बहन मेरे भी एक बेटा है। उसे भी स्कूल में डालना है। पता है आप पिछले जन्म में मेरी बहन होंगी। कबाड़ी
वाले की ओर इशारा करती हुई नीमों बोली की इस जंग लगे ट्रंक को उठाकर चलता बन। यह लो कुछ
रुपये खाना खा लेना। मेरे भैया के सिर में दर्द है। मुझे उनके लिए चाय भी बनानी है। कबाड़ी वाला बोला

आपके पास तो इतने नौकर चाकर है तो भला आप क्यों अपने हाथ से चाय बनाने लगी। कबाड़ी को
बोली की मुझे अपने हाथ से चाय बनाना बहुत ही अच्छा लगता है।कबाड़ी वाला ट्रन्क उठा कर चलता
बना।
इस बात को दो महीने व्यतीत हो गए। धनीराम अपने काम में व्यस्त हो गया। एक दिन धनी राम के घर
पर इनकम टैक्स अधिकारी ऑफिसर आ पहुंचे थे। किसी ने सूचना दी थी कि धनीराम के पास करोड़ों
रूपयों की धन दौलत है। पुलिस इन्सपैक्टर नें आते ही दस्तक दी। टैक्स इंस्पेक्टर को देखकर नीमों
हैरान हो गई। वह इन्कम टैक्स अधिकारी से बोली साहब जी ऐसा क्या हुआ जो आपने मेरे भाई का ही
घर चुना। इस्पेक्टर बोला क्षमा चाहता हूं मुझे अपना कर्तव्य पालन करना है। हमें आपके घर की तलाशी
करनी है। टैक्स ऑफिसर अधिकारी ने सारा घर छान मारा मगर मगर कहीं भी उन्हें कुछ भी नहीं मिला।
उसके घर पर जब इन्कम टैक्स अधिकारी आए तो वह एक ट्रंन्क के बक्से पर बैठी थी। छुटकी स्कूल
गई थी। इन्कम अधिकारी महोदय ने सारे घर की तलाशी ले डालीे मगर उन्हें वहां पर कुछ भी नहीं मिला।
टैक्स अधिकारी महोदय छानबीन कर चले गए तो उसने अपने भाई धनी राम को फोन किया। हमारे घर
में अभी टैक्स इंस्पेक्टर आए थे। और उन्होंने सारा घर खंगाल मारा। धनीराम ने टैक्स अधिकारी का
नाम सुना तो उसके होश उड़ गए कांप कर बोला ठहरो बहना मैं जल्दी ही घर आ रहा हूं यह कह कर फोन
काट दिया।
धनीराम ने अपनी दुकान पर ताला जड़ा और घर की ओर कदम बढा दिए।
रास्ते में सोचता जा रहा था कि जब उसकी शादी पूनम से हुई थी तो उसका एक छोटा सा व्यापार था।
पूनम छुटकी को जन्म देते ही चल बसी। अगर आज उसके साथ उसकी बहन और उसके जीजा नहीं
होते तो वह कभी का निराश हो गया होता। उसकी बहन और जीजा ने आकर उसे संभाल लिया। उसने
अपने जीजा के साथ मिलकर नकली गहने का व्यापार करना शुरू कर दिया। हीरे डायमंड विदेश से
मंगवाते थे। उसके साथ ना जाने कितने लोग थे जो इस काम में शरीक थे। उसने अपनी देवी जैसी बहन
की आंखों में धूल झोंकी थी। उसने कभी भी अपनी बहन को नहीं बताया था कि उसका नकली हीरों
आदि का व्यापार है। उस केवल यही पता पता था कि उसके भाई और उसके पति एक अच्छे खासे
व्यापारी हैं। आज कहीं वह पकड़ा ना जाए। उन्होंने करोड रुपए उस पुराने से बक्से में छुपाए हैं किसी को
भी भनक भी नहीं लग सकती। आज कंही वह पकड़ा न जाए। उस ट्न्क के ऊपर कपडा ढका है। उस
ट्न्क में सबसे नीचे अखबारों के नीचे एक पोटली में करोड़ रुपये हैं। इतनी महंगा महंगा फर्नीचर बिछा है
उस पुराने से ट्न्क की तरफ तो शायद ही किसी की नजर जाए।
नीमों के पति व्यापार के सिलसिले में आखिर बाहर ही रहा करते थे। वह तो कभी कभी घर आते थे। नीमों
सोच रही थी कि आज तो अपने भाई की लड़- खडाती जुबान से उसे मालूम हो चुका था की दाल में कुछ

तो काला जरूर है। वह अपने मन में सोचने लगी की आज तो अपने भाई से पूछ कर ही रहेगी। नहीं नहीं
मैं भी कैसी बेवकूफ हूं? मैंने ऐसा कैसे सोच लिया? यहां अगर उन्होंने करोड रुपए छिपाए होते तो क्या
पुलिस इंस्पेक्टर को मिलते नहीं? हे भगवान मैं भी ना जाने क्या-क्या सोचती रहती हूं। इतने में दरवाजे पर
दस्तक सुनाई दी। उसका भाई आते ही बोला इनकम टैक्स ऑफिसर यहां पर क्या लेने आए थे? वह
बोली भाई क्यों भोले बनते हो? आप को तो पता होगा ही वह किस लिए आए होंगे? टैक्स इनकम
अधिकारी महोदय को किसी ने खबर कर दी थी कि धनीराम सेठ के घर में करोड़ों की जायदाद है।
आपको डरने की कोई जरूरत नहीं। यहां उन को कुछ भी नहीं मिला। उसका भाई बोला मैं तो ईमानदारी
से अपना काम करता हूं। भला हमारे पास कितने करोड़ों की दौलत कहां से आएगी? उसकी बहन जैसे ही
रसोई घर में गई उसे राहत मिली आज तो बाल बाल बच गये। धनीराम ने देखा कि ट्रंक पर कपड़ा वैसे ही
बिछा था। उसने ट्रंक को हाथ भी नहीं लगाया और अपनी बहना को बोला चलो आज मैं तुम्हें घुमाने ले
चलता हूं। वे तीनों सैर करने के लिए चल पड़े। रास्ते में आनंद भी उन्हें मिल गए थे। आज तो हम बाहर ही
खाना खा कर आएंगे। वे तीनो के तीनो छुटकी को लेकर घूमने के लिए निकल गए। आनंद ने अपनी
पत्नी को हीरो का हार दिलवा दिया। धनी राम ने अपनी बहन को एक डायमंड का सैट दिया। अपनी बेटी
को उसकी मन पंसदीदा वस्तुएं दिला दी।
पति और अपने भाई के बदलते व्यवहार को देखकर हैरान थी कि आज तक तो उन्होंने कभी भी उसके
लिए इतना महंगा हीरो का हार नहीं दिया था। वह हैरान हो रही थी वह हार ना जाने कितना महंगा होगा?
इतनें रुपये कहां से आए। रात को 1:00 बजे के करीब वे सब घूम कर घर पहुंचे। दूसरे दिन धनीराम व्यापार
के सिलसिले में बाहर जाने के लिए तैयार हो रहा था वह अपनी बहन से बोला बहना अपनें हाथ की
स्वादिष्ट चाय तो पिलाओ। तुम्हारे हाथ की चाय अच्छी लगती है। उसकी बहन अपनी तारीफ सुन कर
फुल नहीं समाई। वह चाय बनाने चली गई।
धनीराम दूसरे कमरे में आया। उसने तुरंत बक्से पर से कपड़ा हटाया उसने देखा वहां पर तो ट्न्क ही नहीं
था जिसमें उसनें करोड़ों रुपयों की दौलत रखी थी। वह एकदम चक्कर खाकर गिर ने ही वाला था। वह
अपनी बहन पर चिल्लाया जल्दी यहां आओ। वह रसोईघर से बोली मैं चाय बना रही हूं। वह चाय बना
चुकी थी। उसके हाथ में चाय थी। वह आ कर बोली चाय पियो। उसका भाई बोला तुम्हे चाय की पड़ी है।
मेरा कलेजा बैठा जा रहा है। पहले बताओ जो यहां ट्रंक होता था वह कहां है? वह बोली इतना जंग लगा
ट्रंक रखने की क्या जरूरत थी? वह तो एक महीना पहले मैंने और छुटकी दोनों नें मिल कर कबाड़ी को बेच
दिया। धनीराम नें जब यह सुना तो वह बेहोश हो कर नीचे गिर पड़ा। उसे जब होश आया तो वह अस्पताल
में था। वह नीमों पर चिल्लाया तुमको यहां बुलाकर मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी। इस बक्से में मेरी
करोड़ों की धन दौलत थी। नीमों बोली मुझे क्या? उस दिन जब हमनें वह ट्रन्क कबाड़ी को बेचा था हमनें

वह देख कर दिया था। उसमें अखबार भरे पड़े थे। होती रहे करोड़ों की दौलत। मैं एक दिन जब आप दोनों
की बातें सुन रही थी नकली हीरे। तभी मेरा माथा ठनका था कहीं आप दोनों नकली हीरों का व्यापार तो
नहीं करते। मैनें समझा यह मेरा बहम होगा। एक दिन टैक्स अधिकारी महोदय हमारे घर आए तो मैं
समझ गई कि दाल में कुछ काला अवश्य है। मुझे तब खुशी हुई जब हमारे घर से कुछ नहीं मिला। आप
बताओ तो उस बक्से में क्या था? वह बोला उस ट्रन्क में पुरानी अखबारों में सबसे नीचे पोटली में करोड़ों
रुपये थे। वह बोला हां उस बक्से में नकली हीरों को बेच कर कमाई दौलत थी। मेरा ओर तुम्हारे पति का
नकली गहनों का व्यापार है। हम कभी पकड़ में नहीं आए। इस बात को सुन कर नीमों दंग रह गई उसका
भाई और उसके पति नें चोरी के दम पर इतना बड़ा कारोबार खड़ा किया था। नीमों सोचने लगी अच्छा
हुआ मैनें वह ट्रन्क कबाड़ी को बेच दिया। वह अगर टैक्स अधिकारी महोदय के हाथों लग गया होता तो
हमारी तो नाक ही कट जाती। मेरे माता पिता कि छवि को कलंक लग जाता। वह अपनें भाई को बोली
मैनें उस ट्न्क को बेच कर गल्ती नहीं की। जेल होती सो अलग। ऐसे भी वह दौलत हमारी नहीं थी जिस
पर दुःख किया जा सके। वह दौलत तो टैक्स अधिकारी ले जाते। अच्छा ही हुआ। कबाड़ी वाले नें हमें
उसके ₹500 दिए। जिससे हमनें वैसा ही दूसरा ट्रंक ले लिया। यह नया तो है।
उसका भाई बोला तुमने मुझे कंगाल बना दिया। नीमों सब कुछ समझ चुकी थी वह बोली वह तुम्हारी
मेहनत की कमाई नहीं थी। मेहनत की कमाई होती तो मजाल है घर से बाहर जाती। आपने तो हमेशा
रुपए को ही अपनी जिंदगी में ऐहमियत दी है। मुझे अब पता चला कि उस दिन पुलिस इंस्पेक्टर सच कह
रहे थे कि यहां धनीराम सेठ के घर में करोड़ों की धन दौलत है। यह बात तो सत्य थी।
धनीराम अपनी बहना को बोला तुमने हम दोनों को आज कंगाल कर दिया। वह बोली आज तुम दोनों ने
मुझे बहुत ही दुःख दिया है मैंने हमेशा मेहनत करके पेट पाला है और आगे भी मेहनत कर कमा लूंगी।
आप दोनों की ऐसी कमाई से मुझे कोई लेना देना नहीं। चलो आप दोनों को तो कुछ नहीं हुआ आप तो
सही सलामत हैं अगर उस दिन आप दोनों को टैक्स इन्सपैक्टर पकड़ कर ले जाते तो हमारी क्या इज्जत
रहती?
धनीराम सेठ इतना बड़ा व्यापारी नकली हीरो को बेचने खरीदने में संलिप्त है। आपको सबक लेना
चाहिए आप का बेईमानी से कमाया रुपया वहीं चला गया। जहां से आप लाए थे। अभी भी वक्त है
संभल जाओ वर्ना पछताओगे। धनीराम बोला जब आनंद को पता लगेगा तो वह तो तुम्हें घर से बाहर ही
निकाल देगा। वह बोली कि चाहे मुझे घर से निकाल दे मैं छुटकी को लेकर कहीं भी चली जाऊंगी मगर मैं
ऐसी कमाई पर बिल्कुल भी अपने भतीजी को नहीं पालूंगी। धनीराम सेठ बच्चों की तरह फूट फूट कर
रोते बोला अब हम कंगाल हो गए। आज से मैं धनीराम सेठ से भिखारी भीखा बन गया। मुझे सब अब
भिखारी कह कर पुकारेंगे। बेटी को पढ़ाने के लिए क्या क्या सपने देखे थे? वह बोली वह सपनें फिर भी

पूरे हो सकतें हैं। यह पढाई लिखाई में तेज है। मैनें उसे हमेशा बुराई की काली छाया भी अपनी भतीजी पर
नहीं पड़नें दी। वह हर बार की तरह बारहवीं में प्रथम आई है।
शाम के समय धनीराम को पता चला कि उसके कई दोस्तों के घर में पुलिस वालों ने छापा मारकर उन्हें
जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था धनीराम के विरुद्ध भी कड़ी कार्यवाही की गई मगर कोई सबूत
ना मिलने के कारण उसे सजा नहीं हुई।
भीखू मल जब घर आया तो उसने संदूक को खोला तो वह बेहोश होते-होते बचा। वह तो बैठे बिठाए
धनवान बन चुका था। वह अपनें मन में सोचने लगा बहना के साथ छल कपट नहीं करूंगा। वह मेरी सगी
बहन की तरह लगती है। छुटकी का तो कहना ही क्या? घूंघराले बाल गोलमटोल चेहरा और नेक। सभ्य
और ईमानदारी कि मिसाल जो उसको अपनी बुआ से विरासत में मिली है। उस देवी जैसी बहन के साथ
वह कभी छल नहीं कर सकता। उसे जा कर बताता हूं जो ट्रन्क तुम नें मुझे दिया था उस में करोड़ों की
दौलत थी। वह नीमों के घर पहुंचा बोला बहना जो तुम नें मुझे ट्रन्क दिया था उसमें बहुत सारी धन दौलत
थी। उस धन को तुम्हे लौटानें आया हूं। आप अपनी अमानत संभालो। नीमों बोली भाई मेरे तुम कितने
सीधे सादे हो काश ऐसी अक्ल मेरे भाई को भगवान नें दी होती। कबाड़ी वाला बोला बहना तुम क्या कह
रही हो सुनाई नहीं दिया। वह बोली अच्छा ही हुआ जो सुनाई नहीं दिया। नीमों बोली मैनें तो तुम्हें वह ट्रन्क
बेच दिया था अब तो वह बहुत कुछ तुम्हारा हुआ। वह बोला बहना इतना रुपया देख कर मेरी रातों की
नींद भी हराम हो गई। वह बोली अब तुम जो कुछ करना चाहते हो उस रुपये से करो। उस पर हमारा कोई
अधिकार नहीं है।आज के बाद तुम को यहां आनें की जरुरत नहीं

उसे बैठे बिठाए करोड़ों की दौलत मिल गई थी। उसने उससे सबसे पहले एक अनाथ आश्रम खोला।
उसने एक बोर्ड पर लिखा दिया था कि अनाथ और वृध्द जन जिनका इस दुनिया में कोई नहीं सेठ
भीखामल उन को अपने आश्रम में शरण देता था। जिसके मां बाप ने उन्हें छोड़ दिया होता था उसने यह
लिखवा दिया था कि जो कोई भी निराश व्यक्ति यहां आएगा उसे यहां शरण दी जाएगी। बीच-बीच में वह
अपनी संस्था में आकर उन लोगों की देखभाल किया करता था। वह इतना ईमानदार आदमी था इतनी
धन दौलत को अपने अनाथ आश्रम में ही नही, उसने एक स्कूल भी खुलवाया जिसमें गरीब बच्चों को
मुफ्त में शिक्षा दी जाती थी। जिन लोगों के पास पढ़ाई के लिए रुपए नहीं होते थे। मुफ्त में उन बच्चों को
पढ़ाई करवाई जाती थी और उसने अपाहिज व्यक्तियों के लिए भी एक संस्था खुलवाई थी जहां पर
अपंग व्यक्तियों का इलाज करवाया जाता था। उसने अपने बेटे को डॉक्टर बनने के लिए विदेश में भेज
दिया। अपने आप एक बड़े से बंगले में अपनी पत्नी के साथ चैन से रहने लगा। भिखारी भीखामल मल
करोड़ों का मालिक बन गया था। उसने उन संस्था का नाम नीमों के नाम से खोला।

एक दिन जब वह अपने अनाथ आश्रम में पहुंचा तो वहां पर उसे एक औरत दिखाई दी उसके साथ एक
बेटा था। वह बच्चा 15 साल का था। उस औरत को पहचान कर बोला बहन आपने मुझे पहचाना नहीं। मैं
वही भीखामल नीमों उसको हैरान होकर देखने लगी बोली भाई मेरे मैं बहुत ही बड़ी मुसीबत में हूं। हमारा
सब कुछ नियती ने हमसे छीन लिया। मेरे पति ने और मेरे भाई ने हमेशा झूठी कमाई से धन कमाया। मैं
उन्हें हमेशा समझाती रही परंतु उन्होंने मेरी बात नहीं मानी। अपनी मनमानी की। मैं अपनी भतीजी को
अच्छा इंसान बनाना चाहती थी। मैंने अपनी भतीजी को हमेशा गुनाहों से दूर रखा लेकिन अब मुझे ज्ञात
हो चुका है कि मेरे भाई ने और मेरे पति ने गलत धंधे में अपना व्यापार खड़ा किया। मेरी भतीजी बहुत ही
खुद्दार है। आज रात हम यहां रहेंगे। कल ही यहां से चले जाएंगे। कहीं नौकरी मिल ही जाएगी। भीखामल
मल बोला बहन तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं। तुमने मेरी इतनी सहायता कि मैं मैं तुम्हारे दिए गए कबाड़
से ही तो धनवान बना हूं। आपकी मेहरबानी का ही परिणाम है। उस दिन उस कबाड़ से मुझे इतना रुपया
मिला था उस से मैंने इतना बड़ा व्यापार खड़ा किया। वह भी ईमानदारी से तुम यह बात अपने पति और
अपने भाई को कभी भी मत बताना। वह बोली मैंने तुम्हें भाई कहा है। भला बहन भी अपने भाई को कभी
दगा दे सकती है। यह कहते-कहते उसकी आंखों से झरझर आंसू बहने लगे। वह बोला छुटकी बेटा तुम
इस संस्थान में निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर सकते हो। उसने अपनें पति को और अपनें भाई को कभी नहीं
बताया कि वह वही कबाडी है जिस को उसने ट्न्क बेचा था। भीखामल नें उसके पति और भाई को नौकरी
पर रख लिया। उसका भाई धनीराम और उसके पति आनंद को ठोकरे खाने के बाद अब अकल आ
चुकी थी। उन्होंने अपना काम ईमानदारी से करना शुरू कर दिया।
एक दिन फिर उन्होंने अपना बंगला गाड़ी और खोया हुआ सम्मान वापस पा लिया। आनंद बोला नीमो
तुम तो मेरे घर की लक्ष्मी हो। तुम्हें मैंने बहुत ही दुःख दिए हैं। मैं तुम्हारा भी कहीं ना कहीं गुनहगार हूं।
धनीराम भी पास आकर बोला बहना मुझे माफ कर दो आज कहीं हम दोनों को अकल आई है। छुटकी
भी आईएएस अफसर बन कर सिलेक्ट हो गई थी। छुटकी बोली पापा अगर आप नें फिर कभी हेराफेरी
की तो मैं आप को छोड़कर चली जाऊंगी। धनीराम बोला बेटा ऎसा नहीं कहते न जानें मेरे दिमाग को
क्या हो गया था। आगे से फिर कभी ऐसा नहीं होगा। धनीराम अपनी बहन से बोला तुम ठीक ही कहती
थी कि मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है। वह मेहनत के बल पर क्या हासिल नहीं कर सकता?
पुरुषार्थ के बल पर ऊंचाइयों के शिखर तक पहुंच सकता है। आज नीमों बहुत खुश थी। उसके भाई और
उसके पति को अपनी गल्ती का एहसास हो चुका था।

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