होनहार रामू

बहुत समय पहले की बात है कि एक जुलाहा था। वह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ खुशी-खुशी समय व्यतीत कर रहा था। जुलाहा  सूत कात कात  कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। एक दिन जुलाहे का हाथ सूत कातने वाली मशीन में फंस गया। डॉक्टरों ने कहा कि उसके हाथ को ठीक होने में काफी समय लगेगा  उसकी पत्नी के ऊपर मानो दुखों का पहाड़ फट पड़ा। वह सोचने लगी कि वह अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करेगी ।उसके पति ही परिवार का पालन पोषण करते थे ।उनकी पत्नी ने निर्णय लिया कि चाहे कैसी भी हो वह अपने बच्चे को कभी भी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने देगी ऐसा सोच कर काम की तलाश में निकल पड़ी ।एक जगह उसे खाना बनाने और बर्तन साफ करने का काम मिल गया वह आकर अपने पति से बोली कि अभी तो आप इस साल काम पर नहीं जा सकते डॉक्टरों ने आपको काम करने से मना किया है अगर आपने काम करने की कोशिश भी की तो आपको अपना हाथ  गंवाना पड़ सकता है इसलिए तुम्हें चिंता करने की जरुरत नही।मुझे काम मिल गया है यह बात उनका बेटा राम सुन रहा था यह सुन कर उसकी आंखों में आंसू आ गए कि मेरी मां को दूसरे घरों में बर्तन साफ करने पड़ेंगे।

 

रामू ने सोचा जब मेरी मां काम कर सकती है तो मैं क्यों नहीं?। सुबह जल्दी जल्दी उठकर थोड़ी देर स्कूल लगने से पहले ही कहीं काम पर जा सकता हूं और शाम को छुट्टी होने के बाद 2 घंटे काम कर सकता हूं। जब वह स्कूल से घर आया तो उसके घर के पास ही एक अखबार बेचने वाले अंकल की दुकान थी। वह उनके पास गया और प्यार से उन्हें कहने लगा अंकल जी क्या मुझे कोई काम मिल सकता है।? रामू का काम करना बहुत ही जरूरी हो गया था क्योंकि रामू ने अखबार वाले से कहा कि मेरे पापा का हाथ काटने वाली मशीन में फंस गया है जिसके कारण वह अभी काम पर नहीं जा सकते। अखबार बेचने वाले अंकल उदार आदमी थे। उन्होंने रामू से कहा ठीक है तुम्हें एक  घंटा सुबह अखबार बांटने हैं। बच्चा मान गया अब तो खुशी खुशी अपनी मां के पास आकर बोला मुझे भी काम मिल गया है।

अब वह भी हर रोज अखबार पढ़ने भी लग गया। एक दिन उसने अखबार में एक इश्तिहार देखा। उसमें लिखा था कि ₹1000 में काम। यहां पर इस बताये  गये पते पर प्लॉट नंबर 16 में आकर मिलो अब क्या था।? रामू शाम को स्कूल के बाद उस स्थान पर गया जहां से इश्त़ हार मिला था। वहां पर पहुंचकर उसने वहां पर एक बड़े लंबे कोर्ट वाले इंसान से मिला ।वह राम को अंदर ले गया और उसे कहने लगा तुम्हें हमारा काम करना होगा और इसके बदले में मैं तुम्हें हजार रुपए दूंगा हमारी शराब बनाने की फैक्ट्री है। हमारा शराब का धंधा है तुम्हें तो सिर्फ जो काम हम कहेंगे वही काम तुम ही करना होगा क्योंकि इसके बदले में मैं तुम्हें हजार रुपए दूंगा।

 

घर आकर उसने सारी बात अपनी मां को कहीं मां ने उसे कहा कि हो सकता है वह अच्छा आदमी न हो बिना सोचे समझे मैं तुम्हें वहां काम नहीं करने दूंगी वह कहने लगा मां आप मुझ पर विश्वास नहीं करती। मैं आपके सिर पर हाथ रखकर कसम खाता हूं कि मैं कभी भी बुरा काम नहीं करूंगा। इस तरह उसे काम करते-करते 2 महीने हो गए थे ।उसे वहां का मालिक एक सूटकेस को ले जाने के हजार रुपए देता था। एक  दिन उसकी मैडम स्कूल में बच्चों को पढ़ा रही थी कि किस तरह बड़े बड़े गैंग के आदमी बच्चों से गलत काम करवाते है सूटकेस में हीरे जवाहरात आदि डालकर उन्हें कहीं बाहर भिजवाते है। बाहर का माल यहां लाते हैं। गिरोह के चुंगल में जो एक बार फस जाता है वह आसानी से नहीं छूट सकता।

 

मैडम की बातों को सुनकर रामू का कलेजा मुंह को आने लगा। वह सोचने लगा कि मेरा मालिक भी उसे सूटकेस को बाहर भीजवाता  है और दूसरे व्यक्ति का सूटकेस मैं यहां लेकर आता हूं ।मैंने कभी सूटकेस को खोल कर नहीं देखा कि इसमें क्या है? अब क्या करूं उसके पसीने छूटने लगे परंतु वह डरपोक बच्चा नहीं था। इस बार वह दसवीं की परीक्षा देने वाला था ।घर आकर उसने सारी बातें अपनी मां से कहा मां ने कहा कि तुम्हारे पापा के एक पुलिस अंकल दोस्त है ।वह कल हमारे घर आएंगे उन से सलाह विमर्श करेंगे ।दूसरे दिन जब उनके पुलिस अंकल घर आए तो रामू ने सारी बात पुलिस अंकल से कही पुलिस अंकल ने उसे सांत्वना दी और कहा अच्छा तुम्हें यह काम करते हुए  दो महीने ही हुए हैं। वह आदमी अगर किसी धंधे में लिप्त होगा तो हम आसानी से उसके अड्डे पर पूरी निगरानी रखेंगे ।तुमने यह बातें किसी से नहीं कहनी है। जब  वह तुम्हें सूटकेस कहीं भिजवाने के लिए देगा तो मैं उसको खोल कर देखूंगा कि इसमें क्या है? उसने पुलिस अंकल को बताया कि वह सूटकेस के साथ शराब का बॉक्स भी भेजता है।  पुलिस वाले को उस पर संदेह हो गया कि किसी गैंग वाले ने उस मासूम बच्चे को हथियार बना लिया है।

 

उन्होंने रामू को कहा कि तू चुपचाप सूटकेस मुझे दे देना।  रामू ने कहा कि उसके मालिक ने यह कहा है कि हमारी तुम पर नजर है कि अगर तुमने इस को खोलकर देखा तो हमें पता चल जाएगा। हम तुम्हें हजार रुपए नहीं देंगे। तुम्हारी नौकरी भी छीन लेंगे। पुलिस ने कहा तुम डरो मत हम हर तीन किलोमीटर के दायरे पर हमने एक एक पुलिस वाले को तैनात किया हुआ है। जब उस लंबे कोट वाले आदमी ने एक दिन उसे सूटकेस ले जाने के लिए कहा तो उसने जल्दी से सूटकेस लिया और जाने के लिए तैयार हो गया।  लंबे कोट वाले आदमी ने रामू को कहा कि तुमने यहां पर काम करने की बात किसी को बताई तो नहीं। रामू ने कहा नहीं अपनी मां के सिवा उसने यह बात किसी को नहीं बताई है। उस लंबे कोट वाले आदमी ने उसे जाने के लिए कहा  जैसे ही  रामू जाने लगा और वह सूटकेस को लेकर बाहर निकला उसका डर के मारे बुरा हाल था। उसने देखा कुछ दूरी पर पुलिस इंस्पेक्टर खड़े थे। वह उनके पास ही आने वाला था तभी उसने देखा कि एक लंबे कोर्ट वाले की नजर उस पर थी। वह पुलिस इंस्पेक्टर की ओर ना जाकर वहां चल पड़ा जहां उसे भेजा गया था।

 

थोड़ी दूर चलेे जाने पर दूसरे पुलिस इंस्पेक्टर को देखकर वह चौका ।पुलिस इंस्पेक्टर के हाथ में वह वैसा ही सूटकेस था पुलिस इंस्पेक्टर ने जल्दी से उसका सूटकेस बदल दिया और उसे अपना सूटकेश थमा दिया ।और उसका सूटकेस ले लिया रामू ने जल्दी से सूटकेस लिया और जल्दी जल्दी चलने लगा ।उसने वह सूटकेस एयरपोर्ट पर एक आदमी को दे दिया।  उस से दूसरा सूटकेस ले लिया। जब पुलिस इंस्पेक्टर ने उसे खोलकर देखा तो उसे सूटकेस में नकली नोट थे और सबसे नीचे हीरे थे । उसे समझते देर नहीं लगी कि वह  गैंग का ही ग्रुप था। दूसरे दिन पुलिस इंस्पेक्टर  के सारे पुलिस के सिपाहियों ने शराब की फैक्ट्री पर धावा बोल दियाऔर सब को पकड़ कर हवालात में बंद कर दिया। और रामू की पढ़ाई का खर्चा सरकार ने अपने ऊपर ले लिया।

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