प्रकृति का लाल

चीकू रास्ते में जल्दी-जल्दी अपने कदम बढ़ा रहा था। उसका मालिक जब वह समय पर काम पर नहीं पहुंचता था उसको कहता था तब तक तुम्हें खाना नहीं मिलेगा जब तक तुम काम नहीं करोगे। चीकू 12 वर्ष का था रास्ते में फुटपाथ पर उसके मालिक को पड़ा मिला था। मुश्किल में उस समय चीकू… Continue reading प्रकृति का लाल

प्रकृति की मूल्यवान धरोहर उजड़ते वन

एक किसान था वह बहुत ही गरीब था। वह एक दिन सोचने लगा। कि क्यों ना मैं भी अमीर बन जाऊं? जिससे मेरा जीवन सार्थक बन जाए। वह अपने घर में बैठा-बैठा योजना बनाने लगा ऐसा मैं क्या करूं? जिससे मेरा सारा जीवन आराम से कटे। वह सपनों की साकार दुनिया में ही हिलोरे खाने… Continue reading प्रकृति की मूल्यवान धरोहर उजड़ते वन

चिन्टू का कमरा

किसी पहाड़ी की तलहटी पर एक छोटा सा गांव था। उसमें बिहारी बाबू अपनी पत्नी निर्मला और दो बच्चों के साथ रहते थे। बीनू बड़ी थी और चीनू छोटा था। चीनू छोटा होने के कारण घर में सबका लाडला था। मां बाप ने उसको इस कदर बिगाड़ दिया था कि वह हर काम को करने… Continue reading चिन्टू का कमरा

चंदा मामा चंदा मामा

25/9/2018 चंदा मामा चंदा मामा, एक दिन तुम, मेरे घर पर आना। ढेर सारी बातें करके तुम्हें दोस्त बनाएंगे। फिर तुम्हें अपने सभी दोस्तों से मिलवाएंगे । चंदा मामा चंदा मामा, एक दिन तुम मेरे घर पर आना। खेलेंगे गिल्ली डंडा,। नहीं करेंगे किसी से दंगा। खेलेंगे कूदेंगें, करेंगे मस्ती। फिर हम मिलकर करेंगे कुश्ती।… Continue reading चंदा मामा चंदा मामा

नटखट भोलू

एक किसान था। उसके एक बेटा था वह बहुत ही शरारती था। उसका नाम भोलू था। वह हमेशा शरारतें किया करता था। पढ़ने में उसका कभी दिल नहीं लगता था। वह स्कूल से भाग कर घर आ जाता था। गांव वालों को परेशान करना और पक्षियों को पत्थर मारना उसके फसलों को नष्ट कर देना… Continue reading नटखट भोलू

बंदर आया बंदर आया

बंदर आया बंदर आया। उछल कूद कर सारा घर सिर पर उठाया। पेड़ पर चढ़कर इधर उधर इठलाया। छज्जों पर हर जगह चढ़कर करता  शैतानी। हर जगह धूम चौकड़ी मचा कर करता अपनी मनमानी। खो खो करता बंदर आया। हर आने जाने वाले राहगीरों को डराया। नकल करता बंदर आया। बंदर आया। मोटी शाखाओं पर… Continue reading बंदर आया बंदर आया

मेरी सहेलियां

देखो देखो यह मेरी सहेलियां। मुझे लगती है यह पहेलियां। मेरी सहेली अंजली हमेशा हंसती खिल खिलाती। नीलाक्षी है हमेशा पक्की दोस्ती निभाती। डिंपल रहती है चुप चुप। नेहा बातें करती है गुपचुप। तारुषि  को कहते हैं सब भोली लेकिन वह है बंदूक की गोली। अर्चना है हमेशा गाना गाती। अंजना की लिखाई भी है… Continue reading मेरी सहेलियां

होनहार टफी

रामप्रकाश एक छोटे से कस्बे में रहने के लिए आए थे क्योंकि कुछ दिन पहले ही उनका तबादला सोनपुर के एक छोटे से कस्बे में हुआ था ।उन्होंने वहां पर एक घर किराए पर लिया हुआ था। उस घर में वह अपनी पत्नी के साथ रहते थे अभी उनकी शादी को दो-तीन महीने ही हुए… Continue reading होनहार टफी

चिन्टू और गडरिया

किसी गांव में एक गडरिया रहता था। वह  भेड़ और बकरियों को चराने जंगल में ले जाया करता था। उसका एक बेटा था वह दो साल का था। कभी कभी वह  उसको भी अपनें साथ भेड़ बकरियां चराने साथ ले जाता था। गडरिया हमेशा बीमार ही रहा करता था। वह सोचने लगा कि मेरे बाद… Continue reading चिन्टू और गडरिया

मेरा टॉमी

मेरा टॉमी बड़ा ही प्यारा। मेरी आंखों का है यह तारा। पूंछ  हिला कर दौड़ा आता। भौं भौं करके मुझे बुलाता दूर इससे मैं रह न पाता। यह पास आकर मुझे सताता। मेरा टॉमी बड़ा ही प्यारा। मेरा आंखों का यह तारा सबके मन को भाने वाला। घर में है यह सब को हर्षानें वाला।… Continue reading मेरा टॉमी