दर्जी और उसका दोस्त पुरु

एक दर्जी था। वह  रोज लोगों के कपड़े सिलकर अपनी आजीविका चला रहा था। लोगों को उस दर्जी से कपड़े सिलवाना अच्छा लगता था क्योंकि वह लोगों के कपड़े बहुत ही अच्छे ढंग से उनके नाप के अनुकूल सिलाई करता था। उसका एक बेटा था वह कॉलेज में पढ़ता था। वह अपने पापा को कहता था कि पापा इतने अच्छे कपड़े कैसे सिल लेते हो? मेरे सभी दोस्त आपके सिले हुए कपड़ों की प्रशंसा करते हैं। मुझे बहुत ही खुशी होती है जब वे सभी आपकी प्रशंसा करते हैं। मेरा सिना गर्व से तन जाता है। मैं अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझता हूं। आप अपना काम इतनी ईमानदारी से करते हैं।

 

उसका पिता बोला बेटा मैं हमेशा अपना काम ईमानदारी से करता हूं भले ही मुझे किसी के कपड़े को सिलने में देर हो जाए तब तक मुझे तसल्ली नहीं होती जब तक मैं उन्हें ठीक ढंग से ना  सिलसिला लूं।  उसका बेटा विभु बोला पापा मेरे दोस्त कहते हैं तुम्हारे पापा सचमुच में ही तारीफ के काबिल है। इस गांव में और भी दर्जी है मगर कोई कपड़ा चुरा लेता है। कोई तंग बना देता है। कहीं से छोटा कहीं से बड़ा।

 

दर्जी शाम के समय हमेशा अपने घर के पास ही सैर करने जाता था। उसके घर के पास ही एक नदी थी। जिसमें वह हर रोज नहाता था। उसका एक दोस्त हाथी था। वह भी शाम के  समय आ कर उसके साथ खेला करता था। उन दोनों की इतनी गहरी दोस्ती थी कि इंसानों में भी इतनी गहरी दोस्ती देखने को नहीं मिलती। वह अपने हाथी को बहुत ही प्यार करता था। उसने अपने हाथी का नाम रखा था पूरु जैसे ही वह उसे पूरु पूरूबुलाता था। पूरु दौड़ता दौड़ता उसके पास आ जाता था। अपनी सूंड से हाथी अपने दोस्त के हाथ से खाता। जो कुछ दर्जी लाता उसको वह बहुत ही प्यार से खाता। कपड़े सिलने के पश्चात अपना मन बहलाने के लिए हर रोज नदी के तट पर जा पहुंचता। उसको देखते ही दोनों की दोस्ती को देखकर सारे आने-जाने वाले भी  उनकी दोस्ती देखकर दंग रह जाते। वह उनकी फोटो अपने कमरे में कैद करते।

 

एक दिन की बात है कि विभु के दोस्त  दर्जीके पास आए बोले हमने सूट सिलाना है। कृपया करके कल सिल कर दे देना। राजेश की तबीयत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी। उसने कहा बेटा तुम मेरे बेटे विभू के दोस्त हो। मेरी तबीयत ठीक नहीं है। जिस वजह से मैंने तुम्हारा सूट  जल्दी नहीं  सिलसिला सकता अगले हफ्ते सूट सिल दूंगा। विभु का दोस्त मान गया। राजेश के पास इतना काम आ गया वह जल्दबाजी में उसका सूट सिलना भूल गया। जब औरों के कपड़े देख रहा था तो कपड़ों में उसके दोस्त का कपड़ा दिखाई दिया। विभूषित कादोस्त अपना सूट लेने आया था। विभु ने अपने दोस्त को कहा तुम्हारे पिता के पास मैंने सूट सिलने को दिया था।  उन्होंने सिल दिया होगा। राजेश को बड़ी ग्लानि महसूस हुई। वह बोला बेटा मुझे माफ कर देना तुम्हारा सूट सिलना मैं भूल गया। उस के दोस्त ने विभु को गुस्से में ना जाने क्या-क्या कह डाला। गुस्से में  वह अपने पिता के पास आया बोला पापा आप ने जानबूझकर मेरे दोस्त का सूट नहीं सिला। वह बोला बेटा ऐसी बात नहीं है। कुछ दिनों से मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। तुम्हारे दोस्त का सूट सिलना भूल गया। मैंने उस से क्षमा भी मांग ली है।

 

विभु को मन ही मन अपने पापा पर गुस्सा आया। शाम के समय राजेश अपने हाथी के साथ खेलने चला गया। हाथी के साथ खेलते देख विभु देख रहा था। उसको अपने पापा पर गुस्सा आया। इस हाथी के साथ खेलने के लिए तो मेरे पापा के पास समय है।  मगर मेरे दोस्त का सूट सिलने के लिए समय नहीं है। उसने आव देखा ना ताव दर्जी जब नदी के पास कपड़े धो रहा था उसके बेटे ने तौलिए में सुई रख दी। उस तरह से हाथी को  नुकसान पहुंचाना चाहता था। सुई हाथी की सूंड में चुभ गई। दर्जी को तो पता ही नहीं चला। हाथी चिंघाड़ता हुआ वह आज से भाग गया। डर के मारे उसे अपने दोस्त पर गुस्सा आ रहा था। उसके दोस्त ने उस पर सुई चुभोकर वार किया था।

 

दर्जी तो अपने घर आ गया। हाथी कई दिनों तक नदी के पास नहीं आया। दर्जी बहुत उदास रहने लगा। उसका दोस्त ना जाने कहां चला गया है। एक दिन दर्जी कपड़े सिल रहा था अपने उसने बहुत सारे कपड़े सिल कर रखे हुए थे। हाथी भी उसकी दुकान के पास आकर बाहर बैठ गया। हाथी सोच रहा था कि जैसे ही दर्जी दरवाजा खोलेगा वह अपने दोस्त से बदला ले लेगा। उसने जानबूझकर मुझे सूई चुभोई   है। हाथी ने देखा उसके आस पास से बहुत सारे लड़के वहां पर जोर-जोर से बातें कर रहे थे। उसमें दर्जी का बेटा विभु भी था। उसका दोस्त बोला तुम्हारे पापा ने मेरा सूट नहीं सिला कोई बात नहीं। तुमने अपने पापा को ना जाने क्या-क्या कह सुनाया। मैंने तो गुस्से में ऐसा कह दिया था। तुमने तो अपने पापा पर विश्वास नहीं किया। तुम तो उनके बेटे हो।

 

विभु बोला मैंने तो उस दिन अपने पापा का बदला लेने के लिए उस हाथी को मोहरा बनाया मैंने सोचा पापा तो हरदम  पुरु पुरु करते रहते हैं। मैंने जिस तौलिए से वह पुरु को  पौंछतें हैं उसमें सूई फंसा दी। वह सुई हाथी की सूंड में घुस गई। वह दर्द के मारे चिल्लाने लगा। क्योंकि वह शरारत तो मेरी थी। मगर हाथी ने तो उस दिन से मेरे बाबा की शक्ल भी नहीं देखी। आज भी ना जाने यहां बाहर बैठकर  उनसे बदला लेने आया होगा।

 

उस दिन से मेरे पापा ने ठीक ढंग से खाना  भी नहीं खाया। वह बार-बार मुझसे हर रोज कहते हैं बेटा मैंने मेरे  पुरु को ढूंढ कर लाओ। इतना प्यार तो वह मुझसे भी नहीं करते। आज मुझे अपने किए पर पछतावा है। मैं उन्हें सच सच बताना  चाहता हूं। मैंने उनके दोस्त को सूई चूभोई है। मुझे अपने किए पर पछतावा है।

 

उस मूक प्राणी ने हमारा क्या बिगाड़ा? हाथी ने जैसे ही सुना वह स्तब्ध रह गया। पूरु सोचने लगा मैं अपने दोस्त से बदला लेने आया था। अच्छा हुआ मुझे सच्चाई पता चल गई। हमें बिना सोचे समझे कोई काम नहीं करना चाहिए। जब तक कोई ठोस प्रमाण ना मिले। तब तक हमें कभी भी अपनी दोस्ती पर शक नहीं करना चाहिए। ना जाने आज मैं अपने दोस्त को क्या-क्या कर डालता।  उसकी आंखों में पश्चाताप के आंसू थे।

 

विभू उसके पास आया और कान पकड़कर बोला। मेरे प्यारे दोस्त मुझे माफ कर दे। मैं तुम्हारी दोनों की दोस्ती को समझ नहीं सका तुम्हारी दोस्ती को बिगाड़ने में लगा था। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें बिना सोचे समझे आवेश में आकर कोई भी जल्दबाजी में कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे हमारी दोस्ती में दरार आ जाए। पूरु को जब उसनें प्यार से सहलाया वह उसे चाटें लगा। विभू अपने पिता के पास जाकर बोला पापा मुझे माफ कर दो। मैंने आपकी दोस्ती को तोड़ने की कोशिश की थी। मैंने ही उस तौलिए में सुई चुभोई थी। जिससे हाथी की सूंड में सुई चुभ गई। पापा मुझे माफ कर दो।  हाथी दर्द के मारे चिंघाड़ता हुआ बाहर आ गया था।

 

राजेश ने पूरु को गले लगा कर माफी मांगी। मेरे दोस्त मुझे माफ कर दो। मेरे बेटे को भी माफ कर दो इस ने जानबूझकर यह काम किया है। मुझे तुम्हारी दोस्ती की कसम है। पुरु प्यार से उसकी ओर देख रहा था मानो उसने उन दोनों को माफ कर दिया।

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