सोनू और उसका नन्हा दोस्त जौनी।

छवि और सौरभ के एक बेटा था अपनी नानी के पास से वापस अपने गांव लौट रहा था। सोनू केवल पांच वर्ष का था। गाड़ी से आते हुए अपनी मम्मी से बोला मां मैं लघुशंका जाना चाहता हूं। उसके मम्मी पापा ने कार एक ओर खड़ी कर दी। उसे कहा बेटा यहां उतर कर लो। वह नीचे उतर गया। उसकी मम्मी सामने से उसे देखती जा रही थी। वह काफी देर तक यूं ही फूलों को निहार रहा था। उसकी मम्मी से रहा नहीं गया। दस मिनट से वह खड़ी इंतजार कर रही थी। इतनी देर से वह क्या कर रहा है।तब उसके मम्मी पापा नीचे उतर आए। उन्होंने देखा वहां पर एक शेर का छोटा सा बच्चा था। जिसके साथ वह खेलने लगा था। वह उसको बार-बार प्यार कर रहा था।वह दोनों ऐसे लग रहे थे मानो दोस्त हों। उसकी मां ने सामनें से आते हुए एक गाड़ी में बहुत सारे जानवरों को देखा। शायद वे चिड़ियाघर के जानवर थे। इन्हें चिड़ियाघर में ले जाया जा रहा था। उनके झुंड मे से वह शेर का बच्चा अलग हो गया था।

शेरनी बार उधर ही देख रही थी। वह ट्रक तो आंखों से आज ओझल हो गया। शायद जल्दी में वह शेरनी का बच्चा उनके झूंन्ड से अलग छूट गया था।छवि ने अपने बेटे को कहा कि बेटे घर चलो। वह बोला मां मैं इस छोटे बच्चे को घर ले चलूंगा। इसकी मम्मी शायद ट्रक में आगे चली गई है यहबेसहारा हो गया है मां।
मां आज से यह मेरा दोस्त है। मैं इसके साथ खेला करूंगा। उसकी मम्मी बोली नहीं बेटा हम इसको अपने घर में नहीं रख सकते। सौरभ ने उसे चिड़ियाघर में छोड़ने का फैसला कर लिया था। सौरभ के एक दोस्त थे जो चिड़ियाघर में मैनेजर के तौर पर कार्यरत थे। उन्होंने उन्हें फोन करके सूचित कर दिया कि एक शेरनी का बच्चा उनके झूंन्ड से अलग हो गया है। आप जल्दी से जल्दी आ कर उसे यहां से ले जाएं। सोनू नें जब यह सुना तो वह बेहोश हो गया। उसको बेहोश होते देखकर उसके माता-पिता दुखी हो गए। वे अपने बेटे को खुश देखना चाहते थे। उन्होंने किसी ना किसी तरह मैनेजर से बात करके उसे थोड़े दिन तक अपने घर में रखने की इजाजत ले ली। सोनू उस शेरनी के बच्चे से काफी मिल गया। उसका नाम रख दिया जौनी। जब भी वह अपने घर के पास में खेलने जाता तो उसे भी अपने साथ ले जाता। उसने अपने दोस्त का नाम रखा था जॉनी। जॉनी को पाकर बहुत खुश था कुछ दिनों के लिए वह अपने मम्मी पापा के साथ सात दिनों के लिए किसी रमणीय स्थल पर घूमने गए। वहां पर एक आदिवासी ने उसके जॉनी को उससे मांगा।
सोनू ने जौनी को देने से इंकार कर दिया। उस आदिवासी अंकल ने उसे जानवरों की भाषा भी सिखा दी। वह काफी हद तक जानवरों की भाषा सीख चुका था। वह जब भी अपने बाग में घूमने जाता तो जॉनी उसके साथ होता। वंहा कौवा कोयल चिड़िया शेर के बच्चे को सोनू के साथ खेलते देखते तो उसका मन भी होता वह भी खेलेंगे। वहं चुपचाप उनको खेले देखा करता। सोनू को सभी जानवरों की भाषा आ चुकी थी। चिड़िया तोता कोयल मैना हाथी बंदर सब के सब उसके चारों ओर मंडराने लगते। सोनू घर से दूर बहुत घने जंगल में चला जाता। इन सभी जानवरों को वह वहीं बुला लेता और इन सब के साथ खूब खेलता। सारे के सारे जानवर उसके साथ मस्ती करते।सोनू नें उन सभी जानवरों को कहा मैं तुम्हें गिनती सिखाता हूं। उसनें उन सभी जानवरों को गिनना शुरू किया। सभी के सभी पक्षी जानवर उसे गुरुजी कहने लगे। क्योंकि वह उन्हें खूब अच्छी अच्छी बातें सिखाता था। घर आ कर सभी पक्षी जानवर अपने माता-पिता को बताते थे कि एक इंसान का बच्चा हमारा अध्यापक है आज उसने हमें गिनती सिखाई। एक से पच्चीस तक क्योंकि उनके पास अब पच्चीस जानवर हो चुके थे । गांव के अन्य जानवर सोचने लगे कि अगर हमारे जंगल के राजा को इस बात का पता चलेगा तो वह हमें छोड़ेगा नहीं। वह हम सब से बदला लेगा। कहेगा जब मैं जंगल का राजा हूं तो तुम सबको उस इंसान के बच्चे से शिक्षा लेने की जरूरत क्यों पड़ गई? क्या जंगल में रहने वाले जानवरों के अध्यापक पढ़ाने में इतने कुशल नहीं है तब क्या होगा।?। वह इस बात को लेकर हर वक्त परेशान रहते थे कि जब हमारे राजा को इस बात का पता चलेगा तो राजा हमें भी नहीं बख्शेगा और उस इंसान के बच्चे को तो वह खा ही जाएगा।

एक दिन सभी जानवरों ने अपनी सभा बुलाई। जानवरों के मां-बाप भी सोनू के स्कूल में उपस्थित हुए। उन्होंने सोनू से कहा कि तुम हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा देते हो। हमारे जंगल का राजा शेर उससे हमने आज्ञा नहीं ली जब उसको इस बात का पता चलेगा तो वह तुम्हें नुकसान पहुंचाएगा। सोनू बोला तुम सब क्यों डरते हो? मेरे साथ तो तुम सब मेरी ताकत हो। तुम क्यों डरते हो? डरने वाले तो कायर होते हैं। हमें डरना नहीं चाहिए। डर तो इंसान का सबसे बड़ा शत्रु होता है। डर से हम किसी भी काम को नहीं कर सकते। सोनू बोला अभी तो ऐसी कोई बात नहीं हुई जब कुछ ऐसा होगा तो कोई ना कोई उपाय निकल आएगा। तुमको तो बिल्कुल नहीं डरना चाहिए क्योंकि तुम सब को एकजुट हो। एकता में शक्ति होती है। जब तुम सब एक हो जाओगे तो वह अकेला तो यूं ही नष्ट हो जाएगा। तुम्हें डरना नहीं चाहिए। मैंने तो अपने घर में भी कुछ नहीं बताया है। मैं पांच वर्ष का था जब से यह शेर का बच्चा मेरे पास है। और आज मैं 18 वर्ष बाद उस बच्चे के साथ हूं। यह तो मुझे बहुत ही प्यारा लगता है। तुम डरो मत तुम्हें यह कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। वह शेर तुम्हें नुकसान पहुंचाएगा तो पहले उसे मुझ से निपटना होगा। जंगल के सारे जानवर सोनू की बात सुनकर आश्वस्त हो गए। एक दिन किसी ने जाकर शेर को सूचना दी कि अरे तुम कैसे राजा हो। तुम्हारी राजा की गदी तो सारे के सारे जानवरों ने एक मामूली से इंसान के बच्चे को दे दी है। उन्होंने तुम्हारी पीठ में छुरा घोंपा है। तुमसे तुम्हारा राजपाट छीन लिया गया है। उस बच्चे ने तो आते ही सारे जंगल के जानवरों में ऐसा जादू कर दिया। वह तो सारे के सारे उस इंसान के बच्चे को गुरु जी कहते हैं और उस से शिक्षा ग्रहण करते हैं।
शेर काखून खौल उठा बोला तभी सारे के सारे जानवरों ने यहां आना ही छोड़ दिया है। उस इंसान के बच्चे को इसकी सजा जरूर मिलेगी। शेरनी को ले कर उस उद्यान में पहुंच गया। जहां पर सोनू सभी जानवरों को सफाई का महत्व समझा रहा था। वह चुपके से दूर खड़े होकर उसे पढ़ाते देख रहा था। वह सभी बच्चों को बता रहा था कि हमें अपने आसपास साफ सफाई रखनी चाहिए। पानी गंदा नहीं पीना चाहिए। हर रोज नहाना चाहिए। अगर तुम सब चिड़ियाघर में भी चले जाओ तुम सब जानवरों को वहां गंदा पानी पीने को दे दिया जाए तो तुम सभी जानवर हड़ताल कर सकते हो। तुम भी तो हम इंसानों की तरह ही तो हो अपने हक के लिए लड़ना सीखो उसे पढ़ाते देख कर दो थोड़ी देर के लिए शेर भी खुश हो गया। सचमुच में ही वह एक अच्छा शिक्षक है। परंतु थोड़ी ही देर में वह सोचनें लगा कहीं ना कहीं यह मुझसे तेज है। तभी तो यह सारे के सारे जानवर मुझ राजा की बात को छोड़कर इस इंसान का ही साथ देंगे।

दहाड़ते हुए शेर और शेरनी सोनू के पास आकर बोले अरे एक इंसान के प्राणी बच्चे। तुझे क्या शर्म नहीं आती जो तू इंसान जाति को छोड़कर हम जानवरों के साथ रह रहा है। वह बोला राजा जी प्रणाम मैं तो सोचता था कि एक राजा की सोच तो सकारात्मक होनी चाहिए। आप तो बदले की भावना से यहां आए हैं। बदले की भावना से तो एक इंसान दूसरे इंसान का खून भी करता है। तुम अपने जानवरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाओगे क्योंकि इन से मित्रता करने की पहल मेरी थी। मैंने सोचा कि जानवरों से दोस्ती करके देखी जाए। मैंने अपने उम्र के पड़ाव में इस बात को महसूस किया कि जानवर और पक्षी इंसानों से कहीं ज्यादा समझदार होते हैं। जो अपने किए हुए उपकार का बदला पाने के लिए एक दूसरे के साथ नुकसान नहीं पहुंचाते। बल्कि वक्त पड़ने पर एक दूसरे की मदद करते हैं। मैंने आपके जानवरों का गुरु बन कर उनका मार्गदर्शन किया है। शेर बोला तुम चिकनी चुपड़ी बातें करके मुझे बहला नहीं सकते।

जानवरों ने अपने शरीर ढके हुए थे ताकि शेर उन्हें देखकर नुकसान ना पहुंचाएं शेर बोला अगर तुम्हारे पासछब्बीस जानवर है तो सबसे आखरी वाले जानवरों को आज मैं मार दूंगा क्योंकि आज तो मेरे सिर पर बदला लेने का जुनून सवार है या तो तुम यहां से अभी अपने घर को लौट जाओ या फिर इस आखरी जानवर को मेरे हवाले कर दो। सब के सब जानवर एक पंक्ति में खड़े थे। शेरनी ने आकर गिरना शुरू किया। आखिरी जानवर पर चादर ढकी हुई थी। वह बोली इस को मारकर मैं अपनी पिपासा को शांत कर लूंगी। सोनू बोला इसका इसको तो मैं कभी तुम्हें नहीं दूंगा। इसको क्या किसी भी जानवर को मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगा। क्योंकि तुम इस को मारना चाहते हो तो पहले मुझे खाकर अपनी भूख को शांत करो। जैसे ही शेर ने उस आखिरी जानवर के ऊपर से चादर उठाई तो वह उसे मारकर खाने ही वाली थी तो उसे देखकर कि उसकी आंखों से खुशी के आंसू आ गए क्योंकि वहां शेर का बच्चा उसका खोया हुआ बेटा था। उसको देख शेरचिल्लाया चुन्नू चुन्नू आवाज सुनकर शेर का बच्चा खुशी के मारे अपने मातापिता से लिपट गया। उन दोनों को इस प्रकार प्यार करते देखकर सभी जानवर खुशी से तालियां बजाने लगे। जंगल के राजा ने कहा कि आज तुमने अपनी वफादारी का सबूत दे दिया है। जिस दिन यह बच्चा हमसे छोटा था मैं इस ओर ही देख रही थी परंतु इतने दिनों बाद अपने चुन्नू को देखकर खुशी महसूस कर रही हूं। तुम मेरे चुन्नू को हमें लौटा दो बेटा तो मैं समझूंगा कि तुम सचमुच में ही एक शिक्षक के साथ साथ दयालु भी हो। सोनू ने कहा कि ठीक है मैं कल तुम सब जनों को चिड़ियाघर में खुद छोड़कर आऊंगा। जानवरों ने अपने शिक्षण को खुशी-खुशी विदा किया। सोनू घर आया तो उसने अपने पिता को कहा कि मैंने जॉनी को चिड़ियाघर छोड़ दिया है क्योंकि उसकी असली जिंदगी तो अपने परिवार के साथ ही रहने में है। मेरे पास तो है एक कैद में ही रहता था। कहीं ना कहीं उस जॉनी को उसके परिवार से मिला कर मैं खुशी अनुभव कर रहा हूं। मैंने उसे उसके परिवार वालों से मिलाकर उसे फिर उसकी सही जगह दिखलाई है।

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