दशहरा

दशहरे का त्योहार अपनें साथ ढेर सारी खुशियां लाया। बुराई पर अच्छाई की जय का विश्वास लाया।। सारे जंहा की खुशहाली और तरक्की का पैगाम लाया। दशहरा अपनें मन में पनपे कलुषित रावण को त्यागने का संकल्प लाया।। मिलजुल कर  इस पावन त्यौहार को हंसी खुशी  से मनाओ। सब वैर भाव छोड़ कर सब एक… Continue reading दशहरा

दहेज(कविता)

दहेज है एक   घोर  अभिशाप। कुरीतियों के विकसित होने से बन गया यह श्राप ।।  दहेज  समाज के मस्तक पर कलंक बन गया। बेटियों के जीवन को अंधकारमय बनाकर ही दम लिया।। कितनी अबोध मासूम बालिकाओं को पैरों तले रौंद डाला। उन्हें खिलने से पहले ही कुचल डाला।।   ना जाने कितनी और मसली जाएंगी।… Continue reading दहेज(कविता)