गुरु तोताराम चिटकू और बरगद का पेड़

सुंदरवन में बहुत सारे जीव जंतु रहते थे। उस घने जंगल में एक नदी के पास बरगद का एक बहुत बड़ा वृक्ष था । वहां पर जंगल के जीव जंतुओं ने अपना सभा स्थल बनायाहुआ था। जंगल में सभा के आयोजन के समय जो भी निर्णय लेते थे वह सभी उस वृक्ष के नीचे ही लेते थे। की वर्षों से वह पेड़ यूं ही लहलाता आ रहा था। जंगल का राजा शेर उसी पेड़ के नीचे सभी जानवरों को अपना फैसला सुनाया करता था। कुछ दूरी के फासले पर ही जीव जंतुओं ने अपना बसेरा बनाया हुआ था। जहां पर सभी जानवर अपनी मांद में रहा करते थे।

सभी जनों को आज्ञा दी थी कि हमारे जंगल का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए जब तक वह शिक्षित नहीं होगा तब तक उसका जीवन सार्थक नहीं है। उस वन के सदस्य पढ़े-लिखे नहीं थे इसीलिए राजा शेर चाहते थे कि उनके जंगल में रहने वाले सभी बच्चे कुछ पढ़े लिखे हो। इसीलिए उन्होंने एक स्कूल की स्थापना करवाई थी। राजा की आज्ञा का कोई भी बहिष्कार नहीं करता था। उन्होंने पढ़ाने के लिए गुरु तोताराम को नियुक्त किया हुआ था जो कि बच्चों को बड़े ही प्यार से पढ़ाया करते थे। भालू लोमड़ी नेवला हिरण बंदर सारे जानवर शिक्षण प्राप्त हेतू गुरु तोता राम के पास पढ़ने आते थे, जो कोई भी जीव जंतु उस विशाल बरगद के पेड़ के पास से गुजरता था तो थोड़ी देर विश्राम करने के लिए उस पेड़ के नीचे उसे इतनी गहरी नींद आती कि कुछ पता ही नहीं चलता था ।सभी आने जाने वाले जीव और प्राणी उस पेड की प्रशंसा करते नहीं थकते थे। वह जब भी अपने आवास स्थल पर जाते तो बीच में वह स्थान आ जाता था। जहां वह बरगद का पेड़ था। ठंडी ठंडी हवा से वातावरण शांत हो जाता था।

लेकिन कुछ महीनों से वह पेड़ सूखता जा रहा था । पक्षी भी उस पेड़ पर अब कम मात्रा में आने लगे थे ।
संक्रमित होने के कारण वह पेड़ सूख गया था। उस पेड़ को बहुत तरह से बचाने का प्रयत्न किया गया परंतु उसको बचाने में कोई भी सफल नहीं हो रहा था। राजा ने सभी जीवो को एकत्रित किया तो वहां पर उन्हें पहले जैसा आनंद नहीं आया । वह अपने सभी जीवो से बोले कि यह पेड़ अब पहले जैसी छाया नहीं देता। यह पेड़ अब बूढ़ा हो चला है। अब उससे अकेला छोड़ने का समय आ गया है। आखिरकार सभी लोगों ने निर्णय किया कि अब इस पेड़ पर रहने से कोई फायदा नहीं है। हमें अपनी सभा स्थल कहीं और बनाना चाहिए ।

जंगल के राजा नें अपने सभी जीवो को अगली मीटिंग किसी अन्यत्र स्थान पर करने का हुक्म दिया। वहां से कुछ ही दूरी पर एक पीपल का पेड़ था। सभी ने उस स्थान को उपयुक्त पाया , सभी ने हामी भर दी। सभी जीव जंतुओं ने उस बरगद के पेड़ को छोड़ दिया।

सभी बच्चे शिक्षा ग्रहण कर जब घर जाते तो उस बरगद के पेड़ के पास से होकर गुजरते। बच्चे बहुत ही उदण्ड थे । बंदर, हाथी ,भालू ,हिरण ,बंदर,सब छोटे-छोटे बच्चे उस बरगद के पेड़ पर पत्थर मारते ।लोमड़ी का बच्चा चिटकु यह सब देखकर बहुत ही दुःखी होता। वह पढ़ने में बहुत ही होशियार था। गुरु तोताराम का यह सबसे प्यारा विद्यार्थी था। पढ़ाई में सबसे आगे होने के बावजूद वह अपना होमवर्क स्कूल में ही खत्म कर लिया करता था। इतने होनहार विद्यार्थी को देखकर गुरु तोताराम बेहद प्रसन्न हुआ करते थे उन्हें अपने इस विद्यार्थी पर बहुत गर्व था। उन्होंने चिटकुल को स्कूल खत्म होने के बाद भी अलग से पढ़ाना शुरू कर दिया था। बहुत ही होनहार विद्यार्थी था इसलिए गुरु तोताराम को लगता था कि शायद वह भविष्य में वह बहुत बड़े काम करेगा।

बच्चों का पेड़ को पत्थर मारना उसे अच्छा नहीं लगता था। वह सभी को समझाता मगर कोई भी उसकी बात नहीं मानता था। वह सोचते कि यह पढ़ाई में बहुत तेज है तो अपने आप को ना जाने क्या समझता है। सोचता है कि जो वह जानता है वही सही है। उसकी कक्षा के विद्यार्थी उससे कुछ जलने लगे थे। चिटकुल जब कभी अकेला हो जाता तो कभी उस पेड़ के नीचे सो जाता। वह पेड़ को मायूस देख कर सोचता । सभी कितनें स्वार्थी हैं। सभी अपनों ने उसे छोड़ दिया है।अब किसी को भी उस बूढ़े पेड़ कि चिन्ता नहीं।हमारे परिवार का कोई सदस्य बिमार हो जाए तब तक उस कि सेवा करतें रहें हैं जब तक वह ठीक न हो जाए। अगर हम सभी अपने अपने परिवार को छोड़ दें तो हमें कैसा लगेगा? शायद मेरे प्रयत्नों से वह पेड़ फिर लहलानें लगे।
उसे याद आया कि मास्टर तोताराम ने हमें सिखाया था कि हमें किसी को भी बेवजह नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। किसी को भी बेवजह परेशान नहीं करना चाहिए। अगर कोई मुसीबत में है या किसी परेशानी में है तो हमें उसकी जितना हो सके मदद करनी चाहिए। परंतु उसके दोस्तों मे से तो सभी उदंड थे। वह तो उस पर आते जाते पत्थर मारते जाते। वहीं सारा कूड़ा करकट फैंकते थे।
उसने देखा कि पेड़ के पत्ते सूखने लगे हैं ।वह एक घंटा भर रोज पेड़ के नीचे बैठकर सफाई करता। वह अपने मन में सोच रहा था कि मैं इस पेड़ को बचाने का प्रयास करूंगा। आते जाते रास्ते में पानी की छोटी सी नदी थी जिसका पानी बह करके उस पेड़ की शाखाओं में आता था। परंतु उस नाली के पास हर रोज लोग अपने गंदे गंदे कपड़े धोते थे और उस पानी में कूड़ा कर्कट फैकतें थे। उस नाली को बहुत ही गंदा रखते थे । गंदा पानी उस पेड़ तक पहुंचता था। वह अपने मन में सोचने लगा की हो ना हो इस गंदे पानी से ही यह पेड़ सूख रहा है।

वह सब को नदी को गंदा करने से रोकने का प्रयास करता करता परंतु कोई भी उसकी बात मानने को तैयार नहीं था।उसके साथी उसे कहते कि वह जंगल के राजा से तुम्हारी शिकायत करेंगें। तुम हमें बहुत परेशान करते हो। चिटकू बोला तुम मेरी शिकायत भले ही कर लो मैं दण्ड भूगतनें को तैयार हूं। मगर मैं तुम्हें इस नदी को गंदा नहीं करने दूंगा। आप लोग जानते नहीं हैं कि इसके कितने दुष्परिणाम हो सकते हैं। हमारे गुरु तोताराम ने हमें बताया है कि नदी को कभी भी धंधा नहीं करना चाहिए उसे स्वच्छ रखना चाहिए क्योंकि उसी से हमें पीने का पानी मिलता है। जिससे हमारा और पेड़-पौधों व सभी जीव जंतुओं का जीवन उसी से चलता है।
पर वहां के जीव जंतु पढ़े-लिखे नहीं थे इसलिए उन्हें चिटकू की बात पर ज़रा भी विश्वास नहीं होता था।


एक दिन जब वह स्कूल से वापस आया तो वह काफी देर तक बरगद के पेड़ के नीचे बैठा रहा। उसने देखा कि थोड़ी दूरी पर जंगल के बीचो बीच एक पानी की छोटी सी झील है । वहां का पानी स्वच्छ है। उसने दूसरी ओर से नाली खोदना शुरू किया और उस नाली को उसने पेड़ के समीप पहुंचा दिया। हर रोज की मेहनत के बाद अपने मकसद में सफल हो गया ।नदी का पानी उस नाली में से उस पेड़ के तने के पास पहुंच लगा ।उसने नाली बनाने के लिए उसके आसपास पत्थर लगा दिए।उस नदी का रास्ता इतना संकरा था कि वहां से कोई भी जाना पसन्द नहीं करता था।उसने अपनें मन में सोचा यहां से पेड़ तक नाली खोद कर अच्छा ही किया।।इस संकरे रास्ते से तो कोई भी आना पसन्द नहीं करेगा।साफ पानी तनों तक पहूंचेगा।

बच्चों ने एक दिन गुरु तोताराम के पास चिटकू की शिकायत कर दी और कहा कि यह चिटकू हमारी बात नहीं मानता है। जंगल के राजा ने कहा है कि उस पेड़ के पास से, दूसरी जगह ही सभा का आयोजन होगा। वह चिटकू तो हमेशा उस पेड़ के पास सारा दिन व्यतीत करता है। गुरु तोताराम जी ने कहा कि चिटकू नें बहुत ही अच्छा काम किया है शायद यह पेड़ ठीक हो जाए। उसने इतनी मेहनत से यह नाली बनाई कि जिससे कि साफ पानी पेड़ की जड़ों में पहुंचता रहे।

उन्होंने चिटकू को पास बुला‌ के पूछा तुमने राजा की आज्ञा का उल्लंघन क्यों किया? चिटकू बोला कि मैं इस पेड़ को बचानें का प्रयत्न करूंगा, चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान ही क्यों ना देनी पड़े ।
वह कहने लगा मास्टर जी क्या हम बिना वजह से हमें अपने परिवार के सदस्यों को यूं अकेला छोड़ कर चले जाना चाहिए मैं तो मरते दम तक उस पेड़ को बचाने का प्रयत्न करूंगा। बच्चों को बहुत ही गुस्सा आया की गुरुजी उसे कुछ भी नहीं कहा । उन्होंने घर जाकर अपने माता-पिता को यह बात कही भालू ने जाकर यह बात शेर को कह दी।
जंगल के राजा शेर ने चिटकू को अपने घर बुलाया और कहा कि तुमने ऐसा क्यों किया? चिटकू बोला राजा जी मेरे गुरु जी ने हमें सिखाया है कि हमें किसी को भी बे वजह नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए ।आपने उस पर उस पेड़ के पास सभी को जाने को मना कर दिया था मुझे से उस पेड़ का दर्द नहीं देखा गया । वह पेड़ अपनें आप को अकेला पा कर उदास हो गया। शेर बोला कि पेड़ भी कभी उदास होता है चिटकू बोला कि हां वह अकेला रह गया है। अगर आपकि माता कभी बिमार हो जाए तो उन को बचानें का प्रयत्न नहीं करोगे क्या? उन्हें अकेला छोड़ दोगे मरनें के लिए।शेर सोनें लगा यह बच्चा तो कह तो ठीक ही रहा है।वह अब अपने इरादे को नहीं बदल सकता। चिटकू बोला वह पेड़ उदास नहीं होगा क्या ? इतने सालों से आप वहां पर सभा का आयोजन करते आए हैं पर आज बिल्कुल निर्बल और विकल हो गया है बच्चे हर कभी उस पर पर पत्थर मारते हैं। इतने सालों उसने हमेशा अपने फल खाने के लिए दिए। और बीमारी में इसकी पतियों से दवाईयों में भी उपयोग किया जाता है।
चिटकू की बातों का शेर पर कोई असर नहीं हुआ वह बोला कि अभी तो मैं तुम्हें कुछ नहीं कहूंगा पर तेरे पिता को कैद कर लेता हूं ।कसम खाओ कि उस पेड़ के पास तुम अब कभी नहीं जाओगे। वह पेड़ बूढ़ा हो चला है उसे परेशान मत करो उसका अंतिम समय निकट आ चुका है उसे चैन से मरने दो। चिटकू बोला कि हमारे विद्यालय को तो वहीं से जाना पड़ता है। शेर बोला कि आगे से तुम्हारी कोई शिकायत आई तो तुम्हें भी मैं अंदर कर दूंगा।
चिटकु लोमड जब स्कूल से घर लौटा तो उसकी मां नें कहा बेटा तूने यह क्या किया? वह बोला कि मां मैं क्या करुं। मैं गुरु जी कि किसी भी बात को अनसुना नहीं करूंगा। उसकी मां बोली कि जंगल के जीव भी हमारी कोई मदद नहीं करेंगे। मां कोई बात नहीं मैं तो कभी किसी को गलत काम करते देख नहीं सकता ।मैं आपको खाने का अवश्य प्रबन्ध करवा दिया करूंगा।
तीन महीने बीत गए। सभी जीवों में चिक्कू और उसकी मां से किनारा कर लिया। चिटकू के पिता को तो जेल में भेज दिया गया। वह एक दिन उदास होकर के उस पेड़ के नीचे भूख से बेहाल होकर धीरे-धीरे कराह रहा था। बच्चे आ कर उसका मजाक उडा कर कहनें लगे जो बड़ों कि बात नहीं मानता उसका यही अंजाम होता है। तुम्हारे पिता को न जानें कितने दिनों तक राजा कि कैद में रहना होगा। मेरे पिता को तो जेल में डाल दिया, बिना किसी अपराध के। पेड़ के नीचे उसे नींद आ गई थी। पेड़ को मालूम हो गया था कि राजा शेन उसे के पिता को कैद कर लिया है। पेड़ उसको मायूस देख कर उससे बोला बेटा उदास ना हो मैं जादुई पेड़ हूं।जब तक तेरे पिता नहीं लौटते तब तक मैं तुम्हारे खाने का प्रबंध कर दिया करूंगा। क्या कहा? उसने पेड़ को प्रणाम किया। पेड़ उसको देख कर मुस्कुरा रहा था ।पेड़ फिर से हरा भरा हो रहा था। हर रोज उसके दोस्त नाली में कूड़ा करकट फैंक जाते वह हर रोज उसको हाथ से उठा उठा कर साफ करता था ।
हर शाम को एक अजनबी उसके घर पर आकर उनके लिए खाने का सामान और मदद की वस्तुएं उसे दे जाता था। लोमड़ी पूछती कि यह वस्तुएं किसने भेजी हैं वह कहता कि बहन तुम्हारे पति का दोस्त हूं। उसने मुश्किल के समय में हमारी बहुत मदद की है अब आप पर मुश्किल आन पड़ी है ऐसे में आपकी सहायता करना मेरा फर्ज है।वह अपनें चेहरे को नकाब से ढक रखता था। लोमड़ी चुप रह जाती एक दिन जंगल के सभी जीवो ने राजा को शिकायत कर दी की लोमड़ी के परिवार को सभी ने सहायता करने से मना कर दिया था लेकिन कौन है जो उसकी मदद कर रहा है? राजा बोले कि अगर तुम में से कोई उसकी मदद नहीं कर रहा तो ऐसा कौन सा शख्स है जो उसकी मदद कर रहा है।
एक दिन शेर भेष बदलकर लोमड़ी के घर के पास आया। आज तो लोमड़ी बहुत ही उदास थी। जैसे ही वह खाना देने आया तो लोमड़ी बोले भाई हमसे जंगल के राजा बहुत ही नाराज है। आपको आज अपना असली परिचय तो देना ही पड़ेगा। कल सभा बुलाई गई तो सभी जीवो ने कहा कि हमें से कोई भी लोमड़ी के परिवार की सहायता नहीं कर रहा है ।कहीं राजा हमें और कोई सजा न दे दे पहले ही मेरे पति को आज घर से गए हुए 5 महीने हो गए हैं। जो गुनाह हमने किया ही नहीं उसकी सजा राजा हमें दे रहे हैं।
वह अजनबी बोला आज मैं तुम्हें बताऊं कि तुम्हारा बेटा बहुत ही बहुत ही संस्कारों वाला बच्चा है। उसमे मुझ पेड़ की इतनी सहायता कि मेरे पास घन्टें घंटे खोद खोल कर नाली बनाई । बच्चों ने पेड़ के पास न जाने कितने कागज कूड़ा कर्कट फैलाया था।आपके बेटे ने रात दिन मेहनत करके नाली बनाई। सामने वाली नदी से पानी कूहल द्वारा मेरे तनें में पहुंचा मैं हरा भरा हो कर मृत्यु के पंजे से निकल कर फिर जी उठा। कोई तो है जो मुझे इतना प्यार करता है ।उस पर मैं कैसे ना द्रवित होता। मैं वहीं जादुई पेड हूं। बहन तुम्हें किसी भी चीज की आवश्यकता हो तो मैं उपलब्ध करवा दूंगा। वह जंगल का राजा हो कर दूसरों के दुःख दर्द को जान न सका।एक दिन जब उसके परिवार को भयानक बिमारी होगी तब कोई उस की मदद नहीं करेगा।राजा के कर्तव्य से विमुख हो गया।एक बच्चे से भी कोई भी सीख ले सकता है।
लोमड़ी बोली मैं आप का शुक्रिया कैसे अदा करूंगी।वह पेड़ बोला‌ आपके बेटे ने कहा कि कुछ दिनों के बाद मुझे को काटने का आदेश होगा। आप का बेटा बोला की आप को काटने लगे तो मैं वहां पर लेट जाऊंगा कहूंगा कि पहले मुझे काटना फिर पेड़ को काटना। बेटे के प्यार से मेरी आंखें सजल हो गई। जो बच्चा सब के कष्टों को झेलनें के लिए तैयार हैं मुझ पर जान देनें के लिए तैयार है उसको मैं क्या जादुई का करिश्मा नहीं कर सकता? बरगद के पेड़ को जब राजा नें हरा भरा देखा तो तो उसकी आंखें नम हो गई। घर आकर उसने सबसे पहले चिक्कू के पिता को रिहा किया और कहा कि आज आपके बेटे ने मेरी आंखें खोल दी ।मैं भी कहीं ना कहीं सच्ची शिक्षा से वंचित हूं। आज उसने अपनें प्यार कि अनुभूति करवा कर मुझे एक बड़ी सीख दे डाली है।

हम बरगद के पेड़ के पास ही मीटिंग किया करेंगे। हम उस पर को काटेगें नहीं ।इतने सालों तक वहां पर हम सभा का आयोजन करते आए थे। वह हमारे पूर्वजों कि धरोहर है। चिटकू के बड़ा होने पर उनको मैं अपना प्रधान सेवक नियुक्त कर दूंगा। ऐसा बच्चा सबको दे।शेर शेन अपनें कृत्यों के लिए लोमड़ी से मौफी मांगी।नंदन वन में एक बार फिर चहल पहल हो गई थी।उस बरगद के पेड़ के पास जब राजा ने अपनी सभा का आयोजन किया सब से पहले उसने बरगद के पेड़ के पास जा कर भव्य गीतों से उस पेड़ का आदर सत्कार किया जैसे अपने बड़ों का आशीर्वाद मिले। पेड़ नें भी अपनी शाखाओं को झुका कर राजा का अभिनन्दन किया। राजा कि आंखों में पश्चाताप के आंसू देख कर पेड़ मुस्कुरा दिया। सभी जानवरों नें चिटकु का फूल माला से स्वागत किया।जंगल में एक बार फिर चहल-पहल लौट आई थी।

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