गांव का मेला (कविता)

गांव के मेले का पर्व आया। पर्व आया। हम सब नें अपने गांव में जाकर मेला देखने का भरपूर आनंद उठाया।। इधरउधर पांडाल सजे हैं। लोग सज धज कर मेले मेंआतुर हो कर जमघट लगाएं खड़े हैं।। बच्चे सजधज कर मेला देखनें चलें हैं।  बूढ़े और युवा वर्ग सभी अपने साथियों संग मेला देखने चले… Continue reading गांव का मेला (कविता)

कौवों की सूझबूझ

एक घना जंगल था। उसमें बहुत सारे पशु पक्षी रहते थे। पास में ही पेड़ पर बहुत सारे बंदर रहते थे। उन बंदरों  में से एक बंदर बहुत ही शातिर था। वह उन सब बंदरों का लीडर था। वह उन पर रोब  झाडता रहता था। सारे के सारे बंदर इधर-उधर  उछल कूद कर मंडराते रहते।… Continue reading कौवों की सूझबूझ

जादुई बावड़ी

एक बच्चा था दीनू। वह अपनी मां का लाडला था। उसकी मां खेतीबाड़ी करती पशुओं के देखरेख करती उन्हें चराने को लेकर जाती। दीनू अपनी मां से हर रोज नई नई कहानियां सुनता था। कभी राक्षस की, कभी राजा रानी की, कभी परियों की, जब तक उसकी मां उसे कहानी नहीं सुना लेती थी उसका… Continue reading जादुई बावड़ी

दशहरा

दशहरे का त्योहार अपनें साथ ढेर सारी खुशियां लाया। बुराई पर अच्छाई की जय का विश्वास लाया।। सारे जंहा की खुशहाली और तरक्की का पैगाम लाया। दशहरा अपनें मन में पनपे कलुषित रावण को त्यागने का संकल्प लाया।। मिलजुल कर  इस पावन त्यौहार को हंसी खुशी  से मनाओ। सब वैर भाव छोड़ कर सब एक… Continue reading दशहरा

दहेज(कविता)

दहेज है एक   घोर  अभिशाप। कुरीतियों के विकसित होने से बन गया यह श्राप ।।  दहेज  समाज के मस्तक पर कलंक बन गया। बेटियों के जीवन को अंधकारमय बनाकर ही दम लिया।। कितनी अबोध मासूम बालिकाओं को पैरों तले रौंद डाला। उन्हें खिलने से पहले ही कुचल डाला।।   ना जाने कितनी और मसली जाएंगी।… Continue reading दहेज(कविता)

सुन्दर पक्षी मोर

भारत का राष्ट्रीय पक्षी है मोर। इसको देखकर सभी जन होते विभोर।। नर पक्षियों में सबसे सुंदर पक्षी है कहलाता। संस्कृत में मयूर अथवा नीलकंठ है कहलाता।। नीली गर्दन वाला यह पंखा कार सुंदर पक्षी है कहलाता। भारत में अतुलनीय प्रतिष्ठा और सम्मान है यह पाता।। मोरनियों  संग  बड़ी ही शान से नृत्य है करता।… Continue reading सुन्दर पक्षी मोर

नन्हें सिपाही

हम बच्चे हैं प्यारे, दुशमन से ना हारे। आज नहीं तो कल परसों पाएंगे मंजिल सारे।। हम इस उपवन के हैं नन्हे नन्हे वीर। इस धरा की है आने वाली तकदीर।। अपने हाथों की लकीरें खुद लिख कर लाए हैं। हम इस भारत के भाग्य विधाता बन कर आए हैं।। हम बच्चे हैं प्यारे,  दुशमन… Continue reading नन्हें सिपाही

जिन्दगी

जिंदगी में तो शिकायतें सभी किया करते हैं। जिंदगी में खामियां तो सभी ढूंढा करते हैं।। जिंदगी में अपनी जगह बना कर तो देख। फिर क्या नए सिलसिले हुआ करते हैं।। जिंदगी में ना शिकायतें होंगी ना मलाल होंगे। होंगी बस खुशियां ही खुशियां चारों और तरक्की के रास्ते खुल जाएंगे।। उन खुशियों को जहां… Continue reading जिन्दगी

मां

मां का भोला भाला  चेहरा याद आता है। उनका ममता भरा स्पर्श याद आता है।। दुलार की ठंडी छांव का झोंका याद आता है। उनकी हर बात का हर शब्द याद आता है।। मां की छवि को भुलाया नहीं जा सकता उनकी याद को कभी मिटाया नहीं जा सकता।। चाहे कितनी भी  ऊंचाईया  छू ली… Continue reading मां

बदलाव

सत्या एक गरीब घर की लड़की थी। उसके पिता ने उसे  आठवीं तक बड़ी मुश्किल से पढ़ाया ।उसके पिता नें उसे किसी खास  अधिकारी को कह कर उसे विद्युत विभाग में नौकरी पर लगा दिया।  सत्या बहुत खुश हुई वह रोज अपना काम इमानदारी से करती। एक दो साल तक तो सत्या सब के साथ… Continue reading बदलाव