(रिश्ते तो अनमोल होतें हैं) कविता

रिश्ते तो अनमोल होते हैं। ये तो भगवान की दी हुई शानदार नियामत होतें हैं।। । भाई बहन पति पत्नी सास ससुर और अनेको रिश्वते हैं दिए हुए। उन रिश्तों में अपनी अपनत्व की मिठास घोल दिजीए। उन रिश्तों का दामन खूबसूरती से पकड़े रखिए।। उन की खुशी के लिए अपनी तरफ से कभी पिछे… Continue reading (रिश्ते तो अनमोल होतें हैं) कविता

ईश्वर

एक दिन गोलू अपनी मां की गोद में झूमते हुए बोला मां चलो खेलते हैं ।उसकी मां अपने बच्चे को को प्यार देना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि मेरा गोलू अपने पापा के प्यार से वंचित रह जाता है ।वह अपने पापा की गोद में बैठना चाहता है । उस बच्चे के पापा… Continue reading ईश्वर

कौवा लोमड़ी ओर रोटी(कविता)

एक लोमड़ी भूखी प्यासी आई पेड़ के नीचे। लगी देखने उस पेड़ को आंखें मींचे मींचे।। पेड़ पर था एक कौवा बैठा। नटखट चुलबुल  काला कौवा।। अपनी चोंच में रोटी का टुकड़ा भींचे भींचे। लगा देखनें लोमड़ी  को कर के नजरे नीचे।। लोमड़ी सोच रही थी मन में, क्यों न इसे बहलाती हूं। इस बेसूरे… Continue reading कौवा लोमड़ी ओर रोटी(कविता)

पश्चाताप (कविता)

किसी गांव में एक  बुढिया थी रहती। अपनें दुःख दर्द गांव वालों से  बयां किया  करती।। वह अकेले रह कर जीवन यापन किया करती। अपने बेटे बहु की रात दिन राह तका करती।। बुढापे में  सबसे ज्यादा  प्यार की थी जरुरत। अपनो से मिलने की आस के सहारे की थी हसरत।। एक दिन उसके बेटे… Continue reading पश्चाताप (कविता)

मासूम भाग(2)

समृति को डॉक्टर ने बताया कि वह  बेहोशी में भी   बघिरा बघिरा पुकार रहा था। लगता है बघिरा का इन से कोई खास लगाव  है।  स्मृति के मानस पटल पर सारी घटना चलचित्र की भांति खीची चली बघिरा के कारण ही यह सब कुछ हुआ। बघिरा को  दोषी ठहराते हुए  उसको भला बुरा कहने लगी।… Continue reading मासूम भाग(2)

मासूम भाग(1)

शेरभ अपने मम्मी पापा के साथ शिमला की वादियों में घूमने गया था। वह  केवल 10 साल का  मासूम सा, प्यारा सा बच्चा था। बड़ी बड़ी आंखें, गोल मटोल,  भोला-भाला चेहरा, अपने माता-पिता का  हाथ थामे कुफरी की बर्फीली वादियों का लुत्फ उठा रहा था।  वह गर्म इलाके का रहने वाला था। ठंडी ठंडी हवा… Continue reading मासूम भाग(1)

बुरी संगत का परिणाम

यह कहानी एक मध्यम वर्गीय परिवार की है। राज के परिवार में उनका एक बेटा था। उसका नाम था अंकित। अंकित बहुत सी प्यारा बच्चा था। बाबा की आंखों का तारा था। बाबा उसकी हर इच्छा को पूरी किया करते थे। वह भी अपनी मां बाबूजी को कभी क्रोधित होने का अवसर नहीं देता था।… Continue reading बुरी संगत का परिणाम

नन्ही बालिका की फरियाद

हे भगवान मुझे फेल मत करना। मुझे अगली कक्षा में आगे बढ़ने से मत रोकना।। माता पिता भला बुरा कह कर मेरा उपहास उड़ाएंगे। मुझे प्यार करने से सभी परिवार जन कतराएंगे।। मेरे दोस्त संगी साथी मुझसे बात करने से हिचकिचाएंगे। मुझे फिसड्डी कह कर मेरा नाक भौं चिढाएंगे।। हे भगवान! एक साल की जेल… Continue reading नन्ही बालिका की फरियाद

सच्चा सुख

किसी नगर में एक राजा राज करता था ।वह अपने आप को बहुत ही अमीर समझता था ।वह समझता था कि मुझसे अमीर दुनिया में कोई नहीं है ।।मैं इस नगर का सुखी इंसान हूं ।मेरे पास धन दौलत ठाठ-बाठ सभी कुछ मेरे पास है। मैं अपने हाथों से भी बहुत दान करता हूं मैं… Continue reading सच्चा सुख

ऐ राही चला चल(कविता)

ए राही अपने पथ पर आगे बढ़ता चल। मत डर। निर्भीक होकर अपना काम करता चल।। पर्वत की तरह स्थिर। वायु की तरह द्रुतगति। झरने की तरह निर्मल बन कर सबके दिलों में अपनी जगह बनाता चल। हर खुशी सब पर लुटाता चल।। दुर्गम पथ पर आगे बढ़ता चल मत डर। निर्भीक होकर अपना काम… Continue reading ऐ राही चला चल(कविता)